मालदीव का मीडिया भारत से बढ़ती तनातनी को कैसे देख रहा है?

मोहम्मद मुइज़्ज़ू

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पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने से शुरू हुआ विवाद अभी थमा नहीं है.

इस विवाद में सोमवार का दिन हलचल भरा रहा. राजनयिक स्तर पर दोनों देशों के अधिकारियों को तलब किया गया.

भारत में मालदीव के उच्चायुक्त इब्राहिम साहिब को तलब किया गया. मालदीव में भारत के उच्चायुक्त मुनु महावर ने माले में एंबेसडर एट लार्ज नसीर मोहम्मद से मुलाक़ात की.

पीएम मोदी पर मोहम्मद मुइज़्ज़ू सरकार की मंत्री मरियम शिऊना ने इसराइल की कठपुतली होने का आरोप लगाया था.

अब इसराइल ने भी लक्षद्वीप की तस्वीरों को शेयर करते हुए वहां की ख़ूबसूरती का ज़िक्र कर अपना रुख़ भी संकेतों में ज़ाहिर किया.

मालदीव में भी पर्यटन से जुड़े कई संगठनों, नेताओं ने पीएम मोदी और भारत पर की गई टिप्पणियों का विरोध किया है और अफ़सोस ज़ाहिर किया है.

ये मामला अब भी मालदीव के मीडिया में छाया हुआ है. इन दिनों मुइज़्ज़ू भी चीन के दौरे पर हैं. ऐसे में ग्लोबल टाइम्स में भी लक्षद्वीप-मालदीव विवाद पर रिपोर्ट की गई है.

इस कहानी में पढ़िए मालदीव, चीन का मीडिया भारत के साथ हुए इस विवाद पर क्या कह रहा है?

मालदीव

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मालदीव का मीडिया क्या कह रहा है

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मालदीव के मीडिया संस्थान सन की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी पर टिप्पणी करने के मामले में विदेश मंत्री मूसा ज़मीर और सस्पेंड किए गए मंत्रियों को संसद में तलब करने की गुज़ारिश की गई है.

इन लोगों से संसद में जवाब देने के लिए कहा गया है. ये जानकारी एमडीपी सांसद मिकैल नसीम के हवाले से दी गई है.

नसीम ने सोशल मीडिया पर इस बारे में ट्वीट किया है.

नसीम ने कहा कि वो मुइज़्ज़ू सरकार से ये जानना चाहते हैं कि आख़िर मालदीव ने भारत से औपचारिक तौर पर माफ़ी क्यों नहीं मांगी और जिन मंत्रियों की ओर से ये टिप्पणी की गई, उनको बर्खास्त क्यों नहीं किया गया?

मालदीव सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित किया है.

सांसद नसीम ने इन मंत्रियों को समन किए जाने की गुज़ारिश करते हुए कहा कि इनकी टिप्पणियों से दोनों देशों के रिश्तों पर असर हुआ है और अतीत में ऐसा कभी नहीं हुआ था.

वो कहते हैं- मालदीव के नेताओं ने जैसी टिप्पणी की, उसके बाद भारत में टूर ऑपरेटर्स और ट्रैवल एजेंट्स ने बीते 48 घंटों में काफ़ी बुकिंग रद्द की है.

सांसद नसीम चिंता जताते हैं कि ऐसे क़दमों से मालदीव की अर्थव्यवस्था पर असर होगा. मालदीव भारत पर दवाओं और कई ज़रूरी चीज़ों के लिए निर्भर है.

द सन सांसद के हवाले से कहता है कि उन्हें नहीं लगता कि मालदीव सरकार ने इस मामले में उचित क़दम उठाए.

2023 में मालदीव पहुंचने वाले सबसे ज़्यादा पर्यटक यानी क़रीब दो लाख लोग भारतीय थे.

मालदीव के उच्चायुक्त

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इमेज कैप्शन, मालदीव के उच्चायुक्त इब्राहिम साहिब

भारत और मालदीव के उच्चायुक्त की मुलाक़ातें

पीएसएम न्यूज़ की रिपोर्ट में भारतीय उच्चायुक्त की माले में की गई मुलाक़ात की ख़बर को प्रमुखता से छापा है.

मालदीव में भारत के उच्चायुक्त मुनु महावर ने माले में विदेश मंत्रालय जाकर एंबेसडर एट लार्ज डॉ अली नसीर मोहम्मद से मुलाक़ात की.

इस मुलाक़ात के बारे में उच्चायोग की ओर से बताया गया कि ये पहले से तय थी. हालांकि इस मुलाक़ात के बारे में मालदीव या भारत की ओर से औपचारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई.

पीएसएम न्यूज़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बैठक का वक़्त काफ़ी अहम है. ये बैठक ऐसे वक़्त में हुई जब दोनों देशों के बीच विवाद हो गया है.

इस रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसके जवाब में जो लोग सरकार में पदों पर थे, उन्हें भारत के अपमान मामले में निलंबित कर दिया गया.

सोमवार को दिल्ली में भी मालदीव के उच्चायुक्त इब्राहिम साहिब को तलब किया गया था और उनकी विदेश मंत्रालय से गंभीर मुद्रा में बाहर निकलने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए गए थे.

मुइज़्ज़ू

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पहले भी उच्चायुक्त हुए हैं तलब

एडिशन की रिपोर्ट में भी भारतीय उच्चायुक्त के माले में विदेश मंत्रालय में आने की ख़बर को प्रमुखता से छापा गया है.

इस रिपोर्ट में उच्चायोग के हवाले से शीर्षक बनाया गया कि ये मुलाक़ात पहले से तय थी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उच्चायुक्त के संग बैठक ख़त्म होने के बाद भी मालदीव सरकार की ओर से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.

हालांकि मालदीव में भारतीय उच्चायोग की ओर से जानकारी दी गई थी कि द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत के लिए ये बैठक पहले से तय थी.

इस रिपोर्ट में भारत में मालदीव के उच्चायुक्त को तलब किए जाने पर लिखा गया है कि उन्होंने क़रीब एक घंटा मंत्रालय में गुज़ारा पर इस बारे में को जानकारी नहीं दी गई.

रिपोर्ट में कहा गया है कि आमतौर पर देशों के उच्चायुक्त तब तलब किए जाते हैं, जब किसी मुद्दे पर असंतोष व्यक्त करना होता है या देश के रुख़ की गंभीरता को बताना होता है.

एडिशन के मुताबिक़, मालदीव में भारतीय उच्चायुक्तों को पहले भी तलब किया जाता रहा है. 2016 में तब के भारतीय उच्चायुक्त अखिलेश मिश्रा को तलब किया गया था.

सत्तारूढ़ प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव के नेता अहमद निहान हुसैन मनिक को भारत में एंट्री ना दिए जाने के चलते तब ये क़दम उठाया गया था.

2018 में भी अखिलेश मिश्रा को समन भेजा गया था. ये समन सुब्रमण्यम स्वामी के उस ट्वीट पर भेजा गया था, जिसमें उन्होंने मालदीव पर हमला करने की बात की थी.

मोदी और मुइज़्ज़ू

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मालदीव के बहिष्कार की ख़बरें

द प्रेस की रिपोर्ट में इस विवाद के शुरू होने के बाद मालदीव के बहिष्कार करने की ख़बर को जगह दी है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडिया के चैंबर ऑफ कॉमर्स यानी आईसीसी ने टूर ऑपरेटर्स से मालदीव का बॉयकॉट करने के लिए कहा है.

कुछ ट्रैवल कंपनी की ओर से मालदीव की फ्लाइट बुकिंग रद्द करने की ख़बरें आई थीं.

इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के इंडियन एविएशन एंड टूरिज्म कमिटी के चेयरमैन डॉ सुभाष गोयल ने कहा कि उन्होंने टूरिज़्म व्यापार से जुड़े लोगों से कहा है कि मालदीव का प्रचार करना बंद करें.

जिन संस्थाओं से ये अपील की गई है, उनमें इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंटस और ट्रैवल एजेंटस फेडरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं.

सुभाष गोयल ने कहा कि जिस भारत से मालदीव की कमाई हो रही थी, नौकरियां मिल रही थीं वहीं से भारत के ख़िलाफ़ बातें की जा रही हैं.

गोयल ने ट्रैवल एजेंसियों से अपील की है कि मालदीव के बारे में अगर कोई कुछ पूछे तो वो सवाल लक्षद्वीप, अंडमान निकोबार की तरफ़ शिफ्ट किए जाएं.

आईसीसी की ओर से अपील की गई कि मालदीव में ट्रैवल एजेंट अपनी गतिविधियां सस्पेंड कर दें.

चीन दौरे पर मुइज़्ज़ू

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चीन का मीडिया क्या कह रहा है?

भारत से जब विवाद शुरू हुआ, उसी रात राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू चीन रवाना हुए थे.

मुइज़्ज़ू इस वक़्त चीन में हैं और वहाँ की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने भी इस पर रिपोर्ट की है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और मालदीव संबंधों के नई ऊंचाइयों पर पहुँचने की उम्मीद है.

रिपोर्ट के मुताबिक़, मुइज़्ज़ू के चीन दौरे पर भारत का काफ़ी ध्यान है. कई भारतीय मीडिया संस्थानों ने मुइज़्ज़ू के चीन दौरे को परंपरा तोड़ने के तौर पर देखा.

अब तक मालदीव में ये होता रहा है कि राष्ट्रपति बनने के बाद पहला विदेश दौरा भारत का होता था. हालांकि मुइज़्ज़ू का पहला विदेशी दौरा तुर्की का था.

मुइज़्ज़ू का दौरा ऐसे वक़्त में हो रहा है, जब दिल्ली और माले के संबंधों में तनाव देखने को मिल रहा है. चीनी ख़बर में मुइज़्ज़ू के 'इंडिया आउट' वाले रुख़ को भी जगह दी गई है.

ग्लोबल टाइम्स में पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद शुरू हुए विवाद को भी जगह दी गई है.

रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से कहा गया है कि चीन पर इल्ज़ाम लगाने की बजाय भारत को ठहरकर पड़ोसियों के प्रति अपनी विदेश नीति को देखना चाहिए.

फुडान यूनिवर्सिटी में डिप्टी डायरेक्टर लिन मिनवांग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा, ''मुइज़्ज़ू की विदेश नीति 'इंडिया फर्स्ट' से 'चीन फर्स्ट' की ओर नहीं, 'मालदीव फर्स्ट' की ओर शिफ्ट हो रही है.

जानकार ग्लोबल टाइम्स से कहते हैं कि मुइज़्ज़ू चीन और भारत में किसी एक का पक्ष नहीं ले रहे हैं और चीन को इसकी ज़रूरत भी नहीं है, मुइज़्ज़ू अपने देश को आगे रख रहे हैं.

जानकार ये भी कहते हैं कि भारतीय मीडिया जिस तरह से मुइज़्ज़ू को चीन समर्थक बताता है, इससे ये पता चलता है कि वो मालदीव और उनके नेता की इज़्ज़त नहीं करते हैं.

ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि मालदीव भारत के लिए भौगोलिक, ऐतिहासिक वजहों से अहम देश है. मुइज़्ज़ू के चीन दौरे पर भारत की दुविधा ये बताती है कि उसमें आत्मविश्वास की कमी है. भारत को थोड़ा उदार रहने की ज़रूरत है.

नरेंद्र मोदी

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मालदीव लक्षद्वीप विवाद पर जानकारों का क्या कहना है?

विदेश मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया पर ट्वीट किया है कि मालदीव को भारत की ओर से काफ़ी मदद मुहैया करवाई जाती है.

मालदीव की अर्थव्यवस्था में पर्यटन के मामले में भी भारत का अच्छा ख़ासा योगदान है.

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वो कहते हैं, ''मदद के बावजूद भारत की तुलना गाय के गोबर से की गई. पीएम मोदी को जोकर और इसराइल की कठपुतली कहा गया. जिन महिला मंत्रियों की ओर से टिप्पणी की गई, वो मुइज़्ज़ू की क़रीबी बताई जाती हैं. ये हमला भारत पर ऐसे वक़्त में बोला गया जब मुइज़्ज़ू चीन रवाना हो रहे थे और पीएम मोदी लक्षद्वीप का प्रचार कर रहे थे. मुइज़्ज़ू इस मसले पर चुप हैं और इस मामले में ज़िम्मेदार तीन मंत्रियों को कैबिनेट से हटाए जाने की मांगों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं.''

पूर्व विदेश सचिन निरुपमा राव सोशल मीडिया पर लिखती हैं, ''सोशल मीडिया के इस दौर में सार्वजनिक मंच पर गैर-ज़िम्मेदाराना ढंग से कही किसी बात के कारण विदेश नीति और राजनयिक कोशिशें बहुत आसानी से प्रभावित हो जाती हैं. मालदीव के मामले में भी यही हुआ.''

वो कहती हैं, ''भारत में इसका विरोध होना ही था. मैं उम्मीद करती हूं कि मालदीव और भारत के संबंध फिर से संतुलन स्थापित करें क्योंकि ये संबंध ज़रूरी भी हैं और रणनीतिक भी. ये संबंध दोनों देशों के लिए ही बहुत मायने रखते हैं. हम बराबर के साझेदार हैं और ये ऐसे ही रहने चाहिए. ये सिर्फ़ रेत और तटों भर की बात नहीं है.''

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