चीन ने मालदीव और श्रीलंका में भारत की बढ़ाई चिंता- प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, Getty Images
चीन के विदेश मंत्री वांग यी नए साल के पहले हफ़्ते में हिन्द महासागर के पाँच तटीय देशों का दौरा करेंगे. इनमें मालदीव और श्रीलंका भी शामिल हैं.
चीन के इस दौरे को इन देशों में उसकी बढ़ती सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी के तौर पर देखा जा रहा है. चीनी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि वांग यी चार जनवरी से पाँच देशों का दौरा शुरू करेंगे. वांग पहले पूर्वी अफ़्रीका में इरीट्रिया और कीनिया जाएंगे और फिर कोमोरोस पहुँचेंगे. चीनी विदेश मंत्री अपने दौरे का अंत मालदीव और श्रीलंका से करेंगे.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. वांग यी के इस दौरे को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजिअन ने गुरुवार को कहा, ''विदेश मंत्री का अफ़्रीका के तीन देशों का दौरा उस 32 साल पुरानी पंरपरा का हिस्सा है जिसके तहत नए साल में अफ़्रीका से विदेशी दौरे की शुरुआत होती है. मालदीव का दौरा चीन के साथ राजनयिक संबंध की 50वीं वर्षगांठ के मौक़े पर हो रहा है और श्रीलंका के साथ हमारे राजनयिक संबंध की 65वीं वर्षगांठ है. इसके अलावा श्रींलका से रबर-राइस समझौते की भी 70वीं सालगिरह है.''
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''मालदीव और श्रीलंका दोनों पारंपरिक रूप से पड़ोसी दोस्त देश हैं. दोनों देशों से चीन की अहम साझेदारी है और हमारे हित भी एक हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हमारी सोच भी एक जैसी है.''
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''श्रीलंका और मालदीव के साथ दशकों से हमारी साझेदारी है. हमारा पारस्परिक भरोसा है. हम कोविड-19 को लेकर सहयोग और बढ़ाना चाहते हैं. इसके साथ ही बेल्ट एंड रोड को लेकर भी काम में तेज़ी लाना चाहते हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी हमारे सहयोग का विस्तार होगा.''
द हिन्दू से कोलंबो के आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि चीनी विदेश मंत्री के दौरे में चीन की परियोजनाएं और निवेश मुख्य विषय हैं. इन्हें लेकर दोनों देशों में कुछ मतभेद हैं जिन्हें ख़त्म करने की कोशिश की जाएगी.
सूत्रों के मुताबिक़ दोनों देशों के बीच मैरीटाइम सेक्टर से जुड़े कुछ एमओयू पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. वहीं अख़बार से चीन स्थित श्रीलंका दूतावास के एक अधिकारी ने इसे शिष्टाचार दौरा बताया है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
महामारी के दौरान चीन ने श्रीलंका को आपातकालीन क़र्ज़ मुहैया कराया था. यह कुल क़र्ज़ एक अरब डॉलर का था और 1.5 अरब डॉलर की करेंसी अदला-बदली की थी. इसके साथ ही सीनोफ़ार्म की वैक्सीन भी भेजी गई थी. महामारी की शुरुात से ही चीन ने श्रीलंका से उच्चस्तरीय संपर्क कायम रखा था.
अक्टूबर 2020 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो और शीर्ष के चीनी विदेश नीति के अधिकारी यांग जिएची के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल कोलंबो गया था. इसके अलावा इसी साल अप्रैल महीने में चीनी रक्षा मंत्री जनरल वेई फ़ेंगचे ने श्रीलंका का दौरा किया था.
श्रीलंका और चीन के बीच बढ़ता सहयोग भारत के लिए चिंता का विषय है. इसी साल फ़रवरी में श्रीलंका ने जाफ़ना के तीन द्वीप में चीनी ऊर्जा परियोजना को हरी झंडी दी थी. ये तीनों द्वीप तमिलनाडु के समुद्री तट से बहुत दूर नहीं हैं.
हालांकि श्रीलंका ने भारत की चिंताओं के बाद इसे निलंबित कर दिया था और भारत ने इसके लिए एक विकल्प पेश किया था. इसके बाद कोलंबो स्थित चीनी दूतावास के राजदूत ने हाल ही में जाफ़ना का दौरा किया था. इस दौरे की तमिलनाडु में आलोचना हुई थी. मई महीने में कोलंबो पोर्ट सिटी इकोनॉमिक कमीशन बिल पास हुआ. इसमें 1.4 अरब डॉलर का चीन समर्थित कोलंबो पोर्ट सिटी प्रोजेक्ट भी है. श्रीलंका में सरकार के आलोचकों ने कहा कि चीनी प्रोजेक्ट श्रीलंका की संप्रभुता के लिए ख़तरा है.

इमेज स्रोत, Getty Images
सबसे हाल का विवाद उर्वरक से जुड़ा है जिसमें श्रीलंका ने चीन से आयातित ऑर्गेनिक उर्वरक को लौटा दिया था. श्रीलंका ने कहा था कि इसमें मिलावट है. इसके जवाब में चीन ने श्रीलंका के सरकारी बैंक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और चीनी कंपनी ने नुक़सान की भरपाई के लिए 80 लाख डॉलर की मांग की थी. साथ ही चीनी कंपनी ने सिंगापुर कोर्ट में इसे लेकर मुक़दमा भी किया था. श्रीलंका ने कहा था कि यह कारोबार से जुड़ा विवाद है और इससे राजनयिक संबंध प्रभावित नहीं होंगे.
वहीं वांग यी का मालदीव दौरा तब हो रहा है जब वहाँ पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के नेतृत्व में 'इंडिया आउट' कैंपेन ज़ोर-शोर से चल रहा है. यामीन को चीन समर्थक नेता माना जाता है. मालदीव की वर्तमान सरकार पर आरोप है कि वो भारतीय सैनिकों को मालदीव के भीतर रहने दे रही है. हालांकि मोहम्मद सोलिह की सरकार इन आरोपों को ख़ारिज करती रही है.

इमेज स्रोत, Getty Images
चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के नाम बदले
चीन ने भारत के उत्तर पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के लिए चीनी, तिब्बती और रोमन में नए नामों की लिस्ट जारी की है. इस ख़बर को अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने प्रमुखता से छापा है. इससे पहले चीन ने 2017 में अरुणाचल की छह जगहों के नाम बदले थे. भारत ने चीन के इस क़दम को ख़ारिज करते हुए कहा है कि यह अस्वीकार्य है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा.
गुरुवार को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र माने जाने वाले अंग्रेज़ी दैनिक ग्लोबल टाइम्स ने इससे जुड़ी ख़बर प्रकाशित की थी. ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की है कि उसने जांगनान (अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम) के 15 स्थानों के नामों को चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी किया है.
चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताता है. दोनों देशों के बीच 3,500 किलोमीटर (2,174 मील) लंबी सीमा है. 1912 तक तिब्बत और भारत के बीच कोई स्पष्ट सीमा रेखा नहीं खींची गई थी.

इमेज स्रोत, Getty Images
इन इलाक़ों पर न तो मुग़लों का और न ही अंग्रेज़ों का नियंत्रण था. भारत और तिब्बत के लोग भी किसी स्पष्ट सीमा रेखा को लेकर निश्चित नहीं थे.
ब्रितानी शासकों ने भी इसकी कोई जहमत नहीं उठाई. तवांग में जब बौद्ध मंदिर मिला तो सीमा रेखा का आकलन शुरू हुआ. 1914 में शिमला में तिब्बत, चीन और ब्रिटिश भारत के प्रतिनिधियों की बैठक हुई और सीमा रेखा का निर्धारण हुआ.
चीन ने तिब्बत को कभी स्वतंत्र देश नहीं माना. उसने 1914 के शिमला समझौते में भी ऐसा नहीं माना था. 1950 में चीन ने तिब्बत को पूरी तरह से अपने क़ब्ज़े में ले लिया. चीन चाहता था कि तवांग उसका हिस्सा रहे जो कि तिब्बती बौद्धों के लिए काफ़ी अहम है.

इमेज स्रोत, franckreporter
भारत में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका गहराई
हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने पहले पन्ने की लीड ख़बर बनाई है- देश में कोरोना की तीसरी लहर की आहट. इस ख़बर में अख़बार ने लिखा है कि कुछ ही दिनों में कोरोना के मामलों में दोगुनी बढ़ोतरी से देश में तीसरी लहर की आशंका गहरा गई है.
नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने जीनोम सीक्वेंसिंग की सीमाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में बढ़ते मामलों के पीछे ओमिक्रॉन वेरिएंट प्रमुख वजह हो सकता है.
वहीं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव ने टीकाकरण अभियान और दूसरी लहर के दौरान बड़े पैमाने पर फैले संक्रमण का हवाला देते हुए भारत में तीसरी लहर को कम घातक होने की उम्मीद जताई. अब तक दुनिया भर में जो आँकड़े आ रहे हैं, उसके अनुसार ओमिक्रॉन के ज़्यादा संक्रामक होने के बावजूद मौत की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं














