चीन के लिए श्रीलंका ने क्या नहीं कहा, नेहरू का श्रेय भी उसे दिया

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श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने चीन की तारीफ़ में क्या कुछ नहीं कहा. उन्होंने वो बातें भी कहीं जो चीन की छवि के बिल्कुल उलट हैं.
श्रीलंकाई पीएम महिंदा राजपक्षे ने चीन की प्रशंसा करते हुए कहा है कि चीन ने कभी भी अपने राजनीतिक विचारों को दुनिया पर थोपने की कोशिश नहीं की है.
उन्होंने कहा कि चीन ने कभी दूसरे देशों के मामलों में दख़ल देने की ज़रूरत नहीं समझी.
महिंदा राजपक्षे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 100वीं सालगिरह के मौक़े पर एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे.
श्रीलंका और चीन के कूटनीतिक संबंधों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "श्रीलंका ने चीन की सरकार के साथ साल 1957 में राजनयिक रिश्ते बनाए थे. हालांकि हमारे देश की वामपंथी पार्टियों के चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से काफ़ी पहले से रिश्ते थे. ख़ासकर श्रीलंका की कम्युनिस्ट पार्टी के सीपीसी से 1940 से संबंध हैं."
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आसियान में चीन के राजदूत डेंग शिजुन ने बताया कि इस वर्चुअल समिट में 160 से भी ज़्यादा देशों के 500 से भी ज्यादा राजनीतिक दल और संगठन शामिल हुए.
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महिंदा राजपक्षे ने क्या कहा
उन्होंने कहा, "चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इस समय दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है. पिछले 70 साल में इसने विदेश नीति के मोर्चे पर दुनिया को महत्वपू्र्ण संदेश दिया है."
विदेश नीति में चीन के योगदान पर महिंदा राजपक्षे ने कहा, "चीन ने कभी भी अपने राजनीतिक विचारों को दुनिया पर थोपने की कोशिश नहीं की है. चीन ने कभी दूसरे देशों के मामलों में दख़ल देने की ज़रूरत नहीं समझी."
"किसी देश की आज़ादी और संप्रभुता के लिए ये बहुत महत्वपूर्ण बात होती है. इसलिए अन्य देशों को चीन के साथ संबंध बनाने में कभी भी हिचकिचाहट नहीं होती है क्योंकि उन्हें अपनी आज़ादी को बरकरार रखने की इजाज़त मिली होती है."
"श्रीलंका के साथ भी ऐसा ही है. यही वजह है कि दुनिया के ज़्यादातर दरवाज़े चीन के लिए खुले थे. ये स्पष्ट है कि आने वाली सदी में चीन एशिया की अगुवाई करेगा."

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गुटनिरपेक्षता पर राजपक्षे का बयान
महिंदा राजपक्षे ने कहा, "दुनिया के दो खेमों में बँट जाने की अहमियत ख़त्म हो गई है. इस खेमेबाज़ी के कारण एशिया और अफ्रीका के देशों को जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, चीन ने उन्हें इससे उबारकर ऐतिहासिक काम किया है."
"दो ध्रुवीय विश्व के कारण दुनिया को जिस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, वो चीन ही था जिसने दुनिया को इस मुश्किल से उबारा. उस वक़्त चाउ इन लाई ने दुनिया के सामने गुटनिरपेक्ष देशों का विचार सामने रखा था. गुटनिरपेक्षता की नीति आज की दुनिया के लिए बड़ी राहत की बात लगती है."
महिंदा राजपक्ष ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के लिए चीन को श्रेय दिया है. लेकिन तथ्य इसके उलट हैं. चीन गुटनिरपेक्ष देशों के संगठन का पूर्ण सदस्य तक नहीं है. वो इस संगठन से पर्यवेक्षक देश के तौर पर जुड़ा हुआ है.
भारत गुट निरपेक्ष आंदोलन (नाम) के संस्थापक देशों में से हैं. संयुक्त राष्ट्र के बाहर ये देशों का सबसे बड़ा गुट है. इसका गठन 1955 में शीत युद्ध के दौरान किया गया था जब विश्व अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच बँटा हुआ था.
इसकी स्थापना का श्रेय मिस्र के अब्दुल नासिर, घाना के क्वामे न्क्रुमह, भारत के जवाहरलाल नेहरू, इंडोनेशिया के अहमद सुकर्णो और युगोस्लाविया के जोसिप ब्रोज़ टीटो को दिया जाता है.

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चीन की सिल्क रोड परियोजना
वन बेल्ट वन रोड पॉलिसी पर महिंदा राजपक्षे ने कहा, "चीन की ओबीओआर नीति से हम अनजान नहीं हैं. पुराने समय में चीन को जोड़ने वाली सिल्क रोड के एक किनारे पर श्रीलंका भी मौजूद था."
"चीन इसी सिल्क रोड से एक बार फिर दुनिया तक पहुँच रहा है. मुक्त अर्थव्यवस्थाएं अब पूरी दुनिया में फैल गई हैं. इससे कई देशों में बदलाव हुए हैं. चीन ने मुक्त अर्थव्यवस्था के वैश्विक यथार्थ को कुछ इस तरह से स्वीकार किया है कि ये चीन के लिए भी अनुकूल हों."
"चीन ने मुक्त अर्थव्यवस्था को इस तरह से नहीं अपनाया है कि वो देश में वर्ग भेद पैदा करे और देश को कमज़ोर करे बल्कि उसने सफलतापूर्वक 90 करोड़ लोगों की ग़रीबी दूर की हैऔर दुनिया को ये दिखाया है कि खुली अर्थव्यवस्था के मॉडल को किस तरह से लागू किया जा सकता है. मुझे पूरा भरोसा है कि पाँच सौ साल पहले एशिया की जो आर्थिक ताक़त थी, चीन उसे इस सिल्क रोड के रास्ते वापस लाएगा."

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श्रीलंका पर चीन का क़र्ज़
श्रीलंका की छवि एक ऐसे देश के तौर पर बन गई है जो चीन की ओर से उसकी ज़मीन पर चल रही परियोजनाओं के क़र्ज़ तले डूब रहा है.
ऐसी ही एक परियोजना हंबनटोटा बंदरगाह है, जिसे श्रीलंका ने चीन की मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनी को लीज पर 99 साल के लिए दे दिया गया था. साल 2017 में इस बंदरगाह को 1.12 अरब डॉलर में इस कंपनी को सौंपा गया.
चीन श्रीलंका के सबसे बड़े क़र्ज़दाताओं में से एक है. साल 2021 के पहले चार महीनों में श्रीलंका ने चीन से 51.49 करोड़ डॉलर का क़र्ज़ लिया है. साल 2020 में भी चीन ने श्रीलंका को 56.84 करोड़ डॉलर का क़र्ज़ दिया था.
दरअसल, चीन ने श्रीलंका को जिस डेढ़ अरब डॉलर के क़र्ज़ की मंजूरी दी थी, पिछले साल उसकी पहली किस्त दी गई थी.
श्रीलंका के केंद्रीय बैंक का कहना है कि पश्चिम के अंतरराष्ट्रीय क़र्ज़दाताओं की तुलना में चीनी लोन ज़्यादा सुलभ हैं.

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चीन कम्युनिस्ट पार्टी पर श्रीलंका में स्वर्ण मुद्रा जारी
ऐसा पहली बार हुआ है कि श्रीलंका की केंद्रीय बैंक ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना की 100वीं और कोलंबो-बीजिंग संबंधों की 65वीं सालगिरह के मौक़े पर दो सोने और एक चांदी का सिक्का जारी किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ श्रीलंका ने आख़िरी बार साल 1998 में देश की आज़ादी की 50वीं सालगरिह पर सोने का सिक्का जारी किया था.
ये भी पहली बार हो रहा है कि श्रीलंका ने किसी अन्य देश की राजनीतिक पार्टी के सम्मान में सिक्के जारी किए हैं.
श्रीलंका के केंद्रीय बैंक ने एक बयान जारी कर कहा, "दोनों देशों के आपसी विश्वास और दीर्घकालीन संबंधों की यादगार में सरकार के आग्रह पर ये सिक्के जारी किए जा रहे हैं."
ये सिक्के 1000 रुपए मूल्य के हैं. साल 2012 में श्रीलंका के सेंट्रल बैंक ने जापान-श्रीलंका संबंधों की 60वीं सालगिरह के मौके पर निकेल प्लेटेड चांदी का सिक्का जारी किया था.
कॉपी- विभुराज चौधरी
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