रूस-यूक्रेन युद्ध इस साल ख़त्म होने की कितनी संभावना, क्या पुतिन और ज़ेलेंस्की के बीच युद्ध विराम पर बन सकती है बात?

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की

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इमेज कैप्शन, रूस और यूक्रेन युद्ध को तीन साल होने आए हैं लेकिन दोनों के बीच युद्ध विराम को लेकर अब तक बात नहीं बन पाई है
    • Author, पॉल एडम्स
    • पदनाम, कूटनीतिक मामलों के बीबीसी संवाददाता

साल 2024 के ख़त्म होने से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक प्रेस वार्ता की जिसमें उन्होंने अन्य सवालों के साथ-साथ यूक्रेन के साथ जारी युद्ध से जुड़े सवालों के भी जवाब दिए.

दिसंबर के आख़िर में हुई इस प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा, "मुझे ये कहना चाहिए कि स्थिति नाटकीय ढंग से बदल रही है. पूरी की पूरी फ्रंटलाइन पर हलचल है, रोज़ कुछ ना कुछ हो रहा है."

यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में रूसी सैनिक एक-एक मील कर आगे बढ़ रहे हैं. वो डोनबास के खुले मैदानों में गावों और कस्बों को धीरे-धीरे पार करते हुए ज़बरदस्त तरीके से बढ़ रहे हैं.

इस इलाक़े में सैनिक गांव या कस्बे के मुहाने तक पहुंचें, उससे पहले ही कई स्थानीय लोग अपने घरों को छोड़ कर भाग चुके हैं. वहीं, कइयों ने इस बात का इंतज़ार किया कि पहले आसपास बमबारी शुरु हो. हालांकि बाद में वो भी अपना बचा-खुचा सामान समेट कर बस और ट्रेन, जो भी मिला उसके ज़रिए पश्चिम के सुरक्षित इलाक़ों की तरफ़ निकल गए.

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फ़रवरी 2022 में यूक्रेन के ख़िलाफ़ 'विशेष सैन्य अभियान' शुरू करने के बाद से अब तक, हाल के वक्त में रूस अधिक तेज़ी से आगे बढ़ा है. वहीं इससे पहले रूस के ख़िलाफ़ घातक हमले कर चुका यूक्रेन, हाल के वक्त में अपने शक्तिशाली पड़ोसी के ख़िलाफ़ केवल थोड़े-बहुत घातक हमले ही कर पाया है.

कुछ और सप्ताह बीते जाने पर इस युद्ध को तीन साल पूरे हो जाएंगे, जिसमें अनुमानित तौर पर लाखों लोग या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं. और तीन साल पूरे होने के क़रीब पहुंचते हुए, अब यूक्रेन पिछड़ता हुआ दिख रहा है.

यूक्रेन के सहयोगी देश अमेरिका में जल्द ही डोनाल्ड ट्रंप सत्ता की कमान संभालने जा रहे हैं. एक तरफ ट्रंप अप्रत्याशित नेता माने जाते हैं, तो दूसरी तरफ यूक्रेन या राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को लेकर उनकी पसंद बीते वक्त में कम ही दिखी है.

ये एक निर्णायक मोड़ लगता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या साल 2025 में यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध, ख़त्म हो सकता है. और अगर ऐसा हुआ तो, इसका आख़िरी चरण क्या होगा?

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क्या युद्ध विराम पर बनेगी बात?

व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, हाल में संपन्न हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप जीते हैं. वो पहले ही कह चुके हैं कि वो होते तो युद्ध ख़त्म हो चुका होता.
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अभी तक युद्धविराम के लिए वार्ता के केवल कयास लगा जा रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप का ये वादा कि, राष्ट्रपति पद संभालने के 24 घंटों के भीतर वो रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष ख़त्म करेंगे, ये केवल कही गई बड़ी बात लगती है. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप युद्ध में अमेरिका की भागीदारी और उसमें खर्च होने वाले अमेरीकी पैसे का विरोध करते रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, "जगह-जगह पड़े मृत युवा जवानों की संख्या हैरान करने वाली है. जो हो रहा है, वह पागलपन है."

लेकिन कार्नेगी एंडॉमेंट फ़ॉर इंटरनेशनल पीस के सीनियर फ़ेलो माइकल कॉफ़मैन के अनुसार, "अमेरिका के नए प्रशासन को दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा."

माइकल कॉफ़मैन ने बीते दिसंबर बीबीसी के साथ इन दोहरी चुनौतियों के बारे में विस्तार से बात की थी.

उनके मुताबिक़, "पहला, ये कि नए अमेरिकी प्रशासन को एक ऐसा युद्ध पिछले प्रशासन से विरासत में मिल रहा है जो कि अब भीषण हो चुका है. उनके पास स्थिति को स्थिर करने के लिए बहुत अधिक वक्त नहीं होगा. दूसरा, ये कि उन्हें इस युद्ध को लेकर समझौता करना ही होगा क्योंकि युद्ध जीतने का उनके पास कोई स्पष्ट सिद्धांत नहीं है."

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कुछ हालिया इंटरव्यू में इस बात के संकेत भी दिए हैं कि वह युद्ध को कैसे ख़त्म करेंगे.

उन्होंने टाइम मैगज़ीन से कहा था कि वह जो बाइडन प्रशासन के नवंबर में लिए गए उस फ़ैसले के "सख़्त खिलाफ़" हैं, जिसमें रूस के भीतर हमलों के लिए यूक्रेन को लंबी दूरी की अमेरिकी मिसाइलों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी.

उन्होंने कहा था, "हम बस इस युद्ध को बढ़ा रहे हैं, इसे और बदतर बना रहे हैं."

बीते आठ दिसंबर को एनबीसी न्यूज़ ने डोनाल्ड ट्रंप से पूछा था कि क्या यूक्रेन को अमेरिकी सहायता में कटौती के लिए तैयार रहना चाहिए? इस पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, "शायद, ज़रूर."

हालांकि जिन लोगों को यह डर था कि डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन का साथ छोड़ सकते हैं, उन्हें भी डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ आश्वासन दिए हैं.

ट्रंप का कहना था कि, "मेरे विचार में अगर आप छोड़ देंगे तो कोई भी समझौता नहीं हो सकेगा."

सच्चाई ये है कि ट्रंप के इरादे अभी तक स्पष्ट नहीं हैं.

हालांकि फिलहाल यूक्रेनी अधिकारियों ने युद्ध विराम के लिए वार्ता से जुड़े दबावों और ट्रंप के आने से युद्ध विराम के लिए वार्ता जल्द शुरू होने के सुझावों को नकार दिया है.

वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के दफ्तर के प्रमुख के सलाहकार मिख़ाइलो पोदोल्याक के अनुसार, "बातचीत के बारे में बहुत सारी बातें हो रही हैं, लेकिन अब तक यह एक भ्रम है."

उन्होंने कहा, "युद्ध विराम के लिए कोई बातचीत नहीं हो सकती क्योंकि रूस को अब तक इस युद्ध की भारी कीमत चुकानी नहीं पड़ी है."

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क्या रही है ज़ेलेंस्की की रणनीति

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की

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इमेज कैप्शन, यूक्रेन के राष्ट्रपति चाहते हैं कि बाइडन प्रशासन के बाद ट्रंप प्रशासन भी यूक्रेन की मदद करे

एक तरफ यूक्रेन युद्ध विराम की संभावना को लेकर शंका जता रहा तो दूसरी तरफ यूक्रेन के पूर्व की तरफ से रूसी सेना लगातार आगे बढ़ रही है.

ये स्पष्ट है कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की खुद को डोनाल्ड ट्रंप के साथ काम करने वाले नेता के तौर पर पेश करना चाहते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के नतीजे आने के बाद ज़ेलेंस्की ने तुरंत ट्रंप को चुनाव जीतने की बधाई दी थी. इसके अलावा उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी डोनाल्ड ट्रंप की टीम से बातचीत के लिए भेजा था.

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मदद से ज़ेलेंस्की ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाक़ात का एक और मौक़ा भी हासिल किया. पेरिस में दोनों नेता नॉट्र डैम चर्च के दोबारा खुलने के समारोह में पहुंचे थे, जहां उनकी मुलाक़ात हुई.

यूक्रेन के पूर्व विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने दिसंबर में यूएस काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशंस को दिए अपने बयान में कहा था, "हम जो अब देख रहे हैं वह राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की एक बहुत ही स्मार्ट रणनीति है."

दिमित्रो कुलेबा के मुताबिक़, "राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की, डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत करने के लिए तैयार होने के संकेत दे रहे हैं."

हालांकि अभी तक रूस की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता के कोई संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन ज़ाहिर तौर पर यूक्रेन इस मामले में रूस से आगे निकलना चाहता है.

ब्रिटिश थिंक टैंक चैटम हाउस में यूक्रेन फ़ोरम की प्रमुख ओरीसिया लुत्सेविच इसकी वजह बताती हैं.

वो कहती हैं, "ट्रंप ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि युद्ध विराम और यूक्रेन के मुद्दे पर वो कैसे आगे बढ़ेंगे? इसीलिए यूक्रेन के लोग कुछ ऐसे आइडिया दे रहे हैं जिनको ट्रंप बाद में अपना बता सकें. क्योंकि यूक्रेन के लोगों को पता है कि इस तरह के ईगो के साथ कैसे काम किया जाता है."

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युद्ध ख़त्म करने की ज़ेलेंस्की की योजना क्या है?

वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की

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इमेज कैप्शन, वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की युद्ध ख़त्म करने के लिए एक प्लान भी पेश कर चुके हैं

अमेरिकी चुनाव से पहले ही इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की, डोनाल्ड ट्रंप को यूक्रेन का एक अहम साझेदार बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

क्योंकि ट्रंप ज़ाहिर तौर पर व्यापार में यकीन रखते हैं और वह यूरोपीय देशों को दी जाने वाली अमेरिकी सुरक्षा सहायता के विरोधी भी हैं.

यूक्रेन युद्ध को ख़त्म करने को लेकर दिए अपने 'विक्ट्री प्लान' में ज़ेलेंस्की ने यह सुझाव भी दिया था कि रूस के साथ युद्ध ख़त्म होने के बाद अनुभवी यूक्रेनी सैनिक यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की जगह ले सकते हैं.

इसके अलावा ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों जैसे कि यूरेनियम, ग्रेफ़ाइट और लीथियम का फ़ायदा उठाने के लिए साझा निवेश की संभावना का प्रस्ताव भी दिया था.

ज़ेलेंस्की ने इन प्राकृतिक संसाधनों को रणनीतिक रूप से अहम संसाधन कहा था और चेतावनी देते हुए कहा था कि ऐसे संसाधनों से या तो रूस को मज़बूती मिलेगी या तो यूक्रेन और पूरी लोकतांत्रिक दुनिया को.

लेकिन वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के 'विक्ट्री प्लान' की दूसरी शर्तों जैसे कि नेटो की सदस्यता और नॉन न्यूक्लियर पैकेज (कंप्रीहेंसिव नॉन-न्यूक्लियर स्ट्रैटेजिक डिटरेंस पैकेज) को उसके सहयोगियों से कुछ ख़ास प्रतिक्रिया नहीं मिली थी.

ख़ास तौर पर नेटो की उसकी सदस्यता भी अभी तक एक अहम मुद्दा बनी हुई है. हालांकि रूस यूक्रेन के नेटो का सदस्य बनने का विरोध पहले से कर रहा था और उसके बड़े पैमाने पर आक्रमण का एक कारण ये भी था.

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

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इमेज कैप्शन, यूक्रेन रूस से पुख़्ता सुरक्षा के उपायों की तलाश में है

लेकिन यूक्रेन के नज़रिए से देखा जाए तो, नेटो की सदस्यता रूस के रूप में एक आक्रामक पड़ोसी के ख़िलाफ़ सुरक्षा की उसकी एकलौती गारंटी की तरह है.

पिछले साल जुलाई में यूक्रेन ने यह एलान किया था कि यूक्रेन, नेटो की सदस्यता के साथ-साथ यूरो-अटलांटिक एकीकरण की योजना की राह पर है और वो इससे हटेगा नहीं. हालांकि अमेरिका और जर्मनी अभी यूक्रेन को नेटो में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं.

ज़ेलेंस्की ने यह संकेत दिया था कि अगर पूरे यूक्रेन की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के दायरे में सदस्यता का प्रस्ताव दिया जाता है तो वह इसे स्वीकर कर लेंगे. लेकिन शुरू में यह केवल यूक्रेन के नियंत्रण वाले क्षेत्र पर लागू होगा.

ज़ेलेंस्की ने नवंबर में स्काई न्यूज़ से कहा था कि नेटो की सदस्यता से युद्ध का दौर ख़त्म हो सकता है और यूक्रेन की सीमाओं से जुड़े सवालों को सुलझाने के लिए भी कूटनीतिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि उनके पास नेटो की सदस्यता के बारे में अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है.

यूक्रेन की स्थिति

लेकिन एक सवाल यह भी है कि अगर यूक्रेन नेटो में शामिल नहीं हो पाता है तो उसके पास क्या विकल्प बचता है?

एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में युद्ध विराम के लिए समझौते को लेकर दबाव की संभावना अधिक है, तो दूसरी तरफ युद्ध में यूक्रेन अपनी ज़मीन खोता जा रहा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय चर्चा ये हो रही है कि यूक्रेन की कमज़ोर स्थिति को दोबारा से मज़बूत किए जाने पर ध्यान देना चाहिए.

12 दिसंबर को यूक्रेन के सरकारी मीडिया चैनल से बातचीत में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के ऑफ़िस के प्रमुख एंद्रीए यर्माक ने यूक्रेन की सुरक्षा के मुद्दे पर कहा था, "मज़बूत, व्यवहारिक और क़ानूनी गारंटी का होना ज़रूरी है."

उन्होंने कहा, "पिछले कुछ साल यूक्रेन के लिए अच्छे नहीं रहे हैं. बदकिस्मती से हमें जो भी गारंटियां मिलीं उनसे हमारी सुरक्षा नहीं हो पाई."

विशेषज्ञ भी इस बात का डर जता रहे हैं कि नेटो के मूल समझौते के आर्टिकल 5 में दिए रक्षा की साझा कोशिश के सिद्धांत की गारंटी जैसा कुछ होना ज़रूरी है, इसके बिना रूस के एक और हमले को रोका नहीं जा सकेगा.

ब्रिटिश थिंक टैंक चैटम हाउस में यूक्रेन फ़ोरम की प्रमुख ओरीसिया लुत्सेविच का मानना है कि "ज़ेलेंस्की भी जानते हैं कि वो अभी युद्ध विराम नहीं कर सकते."

"उनको युद्ध विराम के अलावा भी कुछ और कदम उठाने होंगे. क्योंकि ज़ेलेंस्की के लिए बिना यूक्रेन के सुरक्षा की गारंटी पर बात किए युद्ध विराम पर सहमत हो जाना, ख़ुदकुशी करने जैसा होगा.

यूरोपीय देशों की क्या है भूमिका?

साल 2019 की एक तस्वीर में वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन

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इमेज कैप्शन, क्या यूरोपीय देश इस जंग को ख़त्म कराने में कोई भूमिका निभा सकते हैं? साल 2019 की एक तस्वीर में वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन

यूरोपीय पॉलिसी फ़ोरम में भी विशेषज्ञ इस बारे में बात कर रहे हैं कि यूरोप इस बड़ी ज़िम्मेदारी को निभाने में कैसे मदद कर सकता है.

यूरोपीय पॉलिसी फ़ोरम ने यूक्रेन में शांति सैनिकों की तैनाती (इसका प्रस्ताव पहली बार फ़रवरी में इमैनुएल मैक्रों ने दिया था), या युद्ध में यूक्रेन के लिए बिट्रेन के नेतृत्व वाले जॉइंट एक्सपीडिशनरी फोर्स की भागीदारी की पेशकश की थी, जिसमें आठ नॉर्डिक और बाल्टिक देशों के साथ-साथ नीदरलैंड्स भी शामिल हैं.

लेकिन राष्ट्रपति ऑफ़िस के प्रमुख के सलाहकार कॉफ़मैन इन उपायों पर आशंका ज़ाहिर करते हैं. उनके अनुसार, "ऐसी सुरक्षा गारंटी जिसमें अमेरिका शामिल नहीं है वह किसी काम की नहीं है. वह ऐसी है जैसे कि रोटी का एक बड़ा हिस्सा ही गायब हो."

यूक्रेन में भी लोगों की ऐसी ही राय है.

वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के सलाहकार मिख़ाइलो पोदोल्याक कहते हैं, "इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं हो सकता. दरअसल और कोई विकल्प है भी नहीं."

पोदोल्याक तर्क देते हैं कि साल 1994 का बुडापेस्ट मेमोरेंडम जिसके अनुसार सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन की सीमाओं को परिभाषित किया गया था, या फिर साल 2014-15 में डोनबास युद्ध को ख़त्म करने वाला मिंस्क समझौता, ये सभी बिना सैन्य सहायता के केवल कागज़ के टुकड़े की तरह हैं.

वो कहते हैं, "रूस को यह समझना होगा कि जैसे ही वह आक्रामकता शुरू करेगा, उसे भी बड़ी संख्या में जवाबी हमले झेलने होंगे."

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ब्रिटेन, बाइडन और पश्चिमी देशों की भूमिका

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

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इमेज कैप्शन, इस जंग में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की भूमिका भी अहम रही है

यूक्रेन के भविष्य पर जारी अनिश्चितता की वजह से उसके सहयोगी बस उसकी सुरक्षा को मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं.

दिसंबर में नेटो के महासचिव मार्क रट ने कहा था कि हम "सभी उपायों पर" विचार कर रहे हैं. इसमें यूक्रेन के लिए और ज़्यादा एयर डिफ़ेंस सिस्टम की सप्लाई करना भी शामिल है, ताकि रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों से यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों की रक्षा की जा सके.

रूस, यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर चुका है. इसके अलावा यूक्रेन में लोगों की भारी कमी के बीच ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हीली ने भी ट्रेनिंग में मदद करने के लिए ब्रिटिश सैनिकों को यूक्रेन भेजने का प्रस्ताव दिया है.

वहीं अमेरिका का बाइडन प्रशासन भी यूक्रेन को अधिक से अधिक सैन्य सहायता देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जता चुका है. हालांकि अब बाइडन प्रशासन के पास महज़ चंद दिन ही बचे हैं और वह पूरी कोशिश कर रहे हैं कांग्रेस की मंज़ूरी लेकर यूक्रेन को जितना हो सके मदद मुहैया कराएं. लेकिन अब उनके पास भी अभी वक्त नहीं बचा है.

21 दिसंबर को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता को जारी रखेंगे. हालांकि वह नेटो के सदस्य देशों से कहेंगे कि वो अपनी डिफ़ेंस फंडिंग को बढ़ाएं.

इधर यूक्रेन के सहयोगी देश भी रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि युद्ध के दौरान भी मज़बूत रही रूस की अर्थव्यवस्था आख़िरकार कमज़ोर होगी.

अमेरिकी संसद के एक सदस्य ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा, "यहां गहरी निराशा इस बात की है कि कड़े प्रतिबंधों के बाद भी रूसी अर्थव्यवस्था टूटी नहीं."

रूस पर कई दौर के प्रतिबंध लगाने के बाद (अकेले यूरोपीय संघ ने 15 बार प्रतिबंध लगाए) अब अधिकारी भी प्रतिबंधों के सफ़ल प्रभाव का अनुमान लगाने से बच रहे हैं.

हालांकि हाल के समय में रूस के लिए भी चिंता बढ़ी हैं. यहां ब्याज़ दरें 23 फ़ीसदी और महंगाई दर 9 फ़ीसदी पर पहुंच गई है. देश की मुद्रा रूबल कमज़ोर हो रही है और साल 2025 में अर्थव्यवस्था की गति बेहद धीमी होने का अनुमान है. रूस की अर्थव्यवस्था पर पहले के मुक़ाबले अब दबाव बढ़ रहा है.

साल के आख़िर में हुई अपना प्रेस वार्ता में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इस बात को स्वीकार भी किया और कहा कि "प्रतिबंधों का असर हो रहा है". हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि "ये अधिक मायने नहीं रखते."

युद्ध में रूस को हो रहे नुक़सान के दौरान पश्चिमी देशों के अधिकारियों का यह अनुमान है कि हर दिन औसतन रूस के 1500 सैनिक या तो मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं. यह स्थिति पुतिन को युद्ध विराम के लिए बातचीत की मेज़ पर ला सकती है.

लेकिन सवाल यह है कि जब तक रूस बातचीत की मेज़ तक पहुंचेगा तब तक यूक्रेन अपनी कितनी ज़मीन खो चुका होगा और उसके कितने लोग इस युद्ध की भेंट चढ़ चुके होंगे?

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