यूक्रेन ने यूरोप को रूसी गैस की आपूर्ति बंद की, क्या होगा इसका असर

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इमेज कैप्शन, यूरोप के देशों को पता था कि ऐसा होने वाला है, इसलिए इसकी तैयारी पहले से ही कर ली थी
    • Author, निक थोर्पे और लौरा गोज़ी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

यूक्रेन ने यूरोपीय संघ के देशों को अपने देश से होते हुए रूसी गैस की आपूर्ति बंद कर दी है.

यह इस इलाक़े में गैस आपूर्ति की वर्षों पुरानी व्यवस्था थी, जो अब समाप्त हो गई है.

यूक्रेन के गैस ट्रांजिट ऑपरेटर नैफ्टोगैज़ और रूस के गैज़प्रोम के बीच पांच साल का समझौता समाप्त होने के बाद यह आपूर्ति बंद हुई है. यूक्रेन ने यूरोपीय संघ को तैयारी के लिए एक साल का समय भी दिया था.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने पहले ही कहा था कि उनका देश रूस को "हमारे ख़ून से अब अरबों की कमाई करने" की अनुमति नहीं देगा. इस बीच पोलैंड की सरकार ने कहा है कि यह रूस के ख़िलाफ़ एक और जीत है.

यूरोपीय आयोग ने कहा कि यूरोपीयन यूनियन ने इस बदलाव की तैयारी कर रखी थी और ज़्यादातर देश इससे निपटने में सक्षम हैं.

लाल लकीर

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लाल लकीर

33 साल पुराना रास्ता बंद

रूस अब भी ब्लैक सी के पार टर्कस्ट्रीम पाइपलाइन के ज़रिए हंगरी, तुर्की और सर्बिया को गैस भेज सकता है.

रूस की कंपनी गैज़प्रोम ने इस बात की पुष्टि की है कि यूक्रेन होते हुए गैस का निर्यात स्थानीय समय के मुताबिक़ बुधवार सुबह आठ बजे से बंद हो गई है.

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रूस साल 1991 से यूक्रेन होते हुए यूरोप को गैस पहुंचाता रहा है.

यूक्रेन से होकर गैस की सप्लाई रुकना यूरोपीय संघ में सस्ते रूसी गैस के युग के अंत का संकेत है.

यूक्रेन के इस फ़ैसले की वजह से स्लोवाकिया सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है लेकिन यूरोपीय आयोग का कहना है कि नए हालात का असर काफ़ी सीमित रहेगा.

आयोग ने इसका श्रेय सावधानीपूर्वक बनाई गई योजना और वैकल्पिक आपूर्ति की व्यवस्था को दिया है.

हालाँकि पूरे यूरोप के लिए इसका रणनीतिक और सांकेतिक असर बहुत बड़ा है.

रूस ने अब अपना एक अहम बाज़ार खो दिया है लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि इसका यूरोपीय संघ के देशों को सबसे ज़्यादा नुक़सान होगा.

यूरोपीय संघ ने साल 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से रूस से गैस के आयात को काफ़ी कम कर दिया था.

लेकिन पूर्वी यूरोप के कई सदस्य देश अब भी रूसी आपूर्ति पर काफ़ी हद तक निर्भर हैं, जिससे रूस को हर साल क़रीब 5.2 अरब डॉलर की कमाई होती है.

आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2023 में यूरोपियन यूनियन ने जितनी गैस का आयात किया था, उसमें रूसी गैस की हिस्सेदारी 10% से भी कम थी जबकि साल 2021 में यह हिस्सेदारी 40% थी.

लेकिन स्लोवाकिया और ऑस्ट्रिया सहित यूरोपीय संघ के कई देश रूस से बड़ी मात्रा में गैस का आयात अब भी कर रहे थे.

स्लोवाकिया ने दी यूक्रेन को चेतावनी

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इमेज कैप्शन, यूक्रेन के फ़ैसले से रूस को एक बड़े बाज़ार को खोना पड़ा है

ऑस्ट्रिया के ऊर्जा नियामक ने कहा है कि उसे किसी परेशानी की आशंका नहीं है, क्योंकि उसके पास कई तरह के स्रोत हैं और उसका भंडार है.

लेकिन यूक्रेन के फ़ैसले से स्लोवाकिया के साथ पहले ही गंभीर तनाव पैदा हो गया है. यह देश अब यूरोपीय संघ में रूसी गैस भेजने का प्रमुख ज़रिया है.

यह ऑस्ट्रिया, हंगरी और इटली तक गैस पहुंचाने पर ट्रांज़िट शुल्क वसूलता है.

स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने पुतिन के साथ बातचीत के लिए अचानक मॉस्को की यात्रा की.

उन्होंने शुक्रवार को यूक्रेन को बिजली की आपूर्ति बंद करने की धमकी भी दी.

उसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने फिको पर पुतिन को "युद्ध के लिए धन मुहैया कराने और यूक्रेन को कमज़ोर करने" में मदद करने का आरोप लगाया.

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा, "फिको यूक्रेनवासियों को और अधिक तकलीफ़ देने के रूस के प्रयासों में स्लोवाकिया को शामिल कर रहे हैं."

हालांकि पोलैंड ने यूक्रेन को स्लोवाकिया से बिजली की आपूर्ति बंद होने की स्थिति में यूक्रेन को मदद की पेशकश की है. बिजली की यह आपूर्ति यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिसके बिजली संयंत्रों पर रूस नियमित रूप से हमला कर रहा है.

'लोगों से बिजली बचाने की अपील'

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इमेज कैप्शन, रूस ने लगातार यूक्रेन के ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया है

इस बीच एक अन्य देश मोल्दोवा, जो कि यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं है, वह यूक्रेन के साथ ट्रांज़िट समझौते ख़त्म होने से गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है.

यह अपनी ज़्यादातर बिजली रूसी गैस से चलने वाले पावर स्टेशन से पैदा करता है. यह रूस समर्थित अलग हुए क्षेत्र ट्रांसनिस्ट्रिया को भी बिजली की आपूर्ति करता था, जो मोल्दोवा और यूक्रेन के बीच स्थित ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा है.

मोल्दोवा के ऊर्जा मंत्री कॉन्स्टेंटिन बोरोसन ने कहा है कि उनकी सरकार ने स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क़दम उठाए हैं. हालांकि उन्होंने लोगों से बिजली बचाने की अपील की है.

दिसंबर के मध्य से ऊर्जा क्षेत्र में 60 दिन की आपातकालीन स्थिति लागू है.

मोल्दोवा की राष्ट्रपति मेया सैंडू ने रूस पर "ब्लैकमेल" करने का आरोप लगाया है. उनके मुताबिक़ इसका मक़सद शायद साल 2025 में आम चुनाव से पहले उनके देश को अस्थिर करना है.

मोल्दोवा की सरकार ने यह भी कहा कि उसने ट्रांसनिस्ट्रिया को मदद की पेशकश की है.

रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से यूरोपीय संघ ने क़तर और अमेरिका से लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) और नॉर्वे से पाइप लाइन गैस के रूप में वैकल्पिक स्रोत ढूंढ लिए हैं.

दिसंबर महीने में यूरोपीयन यूनियन ने यूक्रेन से होकर गुज़रने वाली गैस को पूरी तरह से बदलने की योजना भी पेश की थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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