क्या उत्तरी कोरिया के सैनिक यूक्रेन की जंग में रूस के साथ उतरेंगे?

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- Author, जेम्स वाटरहाउस और ओल्गा इवशिना
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रूसी सेना उत्तर कोरिया के लगभग 3000 लोगों की एक यूनिट बना रही है.
यूक्रेनी सेना के इंटेलिजेंस सूत्रों ने बीबीसी को ये जानकारी दी है.
यूक्रेनी सेना की हालिया इंटेलिजेंस रिपोर्टों में कहा गया है कि उत्तर कोरिया रूस के साथ एक नजदीकी सैन्य गठजोड़ तैयार कर रहा है.
हालांकि बीबीसी को अभी इस बात के संकेत नहीं मिले हैं कि रूस के सुदूर पूर्व में इतनी बड़ी यूनिट तैयार हो रही है.
साथ ही क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने भी रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया के शामिल होने की रिपोर्टों को ख़ारिज किया है.

पेस्कोव ने कहा,'' ना सिर्फ ब्रिटिश खु़फिया एजेंसी बल्कि अमेरिकी ख़ुफिया एजेंसी भी इस तरह की रिपोर्ट दे रही है. ये एजेंसियां हर वक़्त यही रिपोर्ट देती रहती है. लेकिन कोई सबूत पेश नहीं करती.’’
हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि हाल के कुछ महीनों में रूस और उत्तर कोरिया के बीच सहयोग का स्तर और गहरा हुआ है.
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने पिछले सप्ताह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उनके जन्मदिन पर बधाई संदेश भेजा और उन्हें अपना सबसे 'करीबी कॉमरेड' कहा.
रूस और उत्तर कोरिया की जुगलबंदी

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेंलेस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया के शामिल होने की चर्चा की है.
साथ ही दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने भी इस महीने कहा था कि इस बात की काफी संभावना है कि यूक्रेन में उत्तर कोरियाई सैनिकों की तैनाती रही होगी.
लेकिन बड़ा सवाल है कि आख़िर इन सैनिकों की संख्या कितनी है. रूस के सुदूर पूर्व में मौजूद एक सैन्य सूत्र ने बीबीसी की रूसी सेवा को बताया, ''कई उत्तर कोरियाई सैनिक व्लादिवोस्तोक के उत्तर में उसुरिस्क के नजदीक के सैन्य अड्डों पर पहुंचे हैं.''
लेकिन इस सूत्र ने ये नहीं बताया कि उन सैनिकों की संख्या में वास्तव में कितनी है. उसका कहना था कि ये ''ये संख्या निश्चित तौर पर 3000 के आसपास तो नहीं ही होगी.''
सैन्य मामलों के एक विश्लेषक ने कहा कि उन्हें इस बात पर संदेह है कि रूसी सेना हजारों उत्तर कोरियाई सैनिकों को सफलतापूर्वक शामिल करने का काम कर सकती है.
रूस में मौजूद एक विश्लेषक ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी से कहा, ''पहले तो रूसी सेना के लिए सैकड़ों रूसी कैदियों को ही सेना में शामिल करने का काम मुश्किल भरा था. जबकि ये सारे कैदी रूसी बोलते थे.''
इसका मतलब ये है कि उत्तर कोरिया के सैनिकों को शामिल करने का काम आसान नहीं है.
फिर भी अगर उन्होंने 3000 उत्तर कोरियाई सैनिकों को शामिल कर लिया है तो इससे लड़ाई के मैदान में कोई ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ेगा. लेकिन इसे लेकर अमेरिका भी उतना ही चिंतित लग रहा है जितना यूक्रेन.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, ''इन उत्तर कोरियाई सैनिकों का शामिल होना ये बताता है कि रूस और उत्तरी कोरिया के रिश्ते काफी बेहतर हुए हैं.''
हालांकि मिलर की नज़र में ये लड़ाई के मैदान में नुकसान के बाद रूस की बेचैनी के नए स्तर को भी बताता है.
रूस और उत्तर कोरिया एक दूसरे को क्या दे रहे हैं?

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इस साल जून के महीने में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने किम जोंग उन के साथ रूस और उत्तर कोरिया के बीच रक्षा और दूसरे क्षेत्रों में आपसी सहयोग के समझौते का जश्न मनाया था.
और इसके बाद इस बात के सुबूत में काफी तेजी से सामने आए थे कि उत्तर कोरिया रूस को हथियारों की सप्लाई कर रहा है.
हाल में यूक्रेन को पोल्तावा क्षेत्र में एक मिसाइल की बरामदगी से इस बात के संकेत मिलते हैं.
सच तो ये है कि रूस को उत्तर कोरिया की ओर से बारूदी सुरंग के लिए विस्फोटकों और गोलों की सप्लाई के सुबूत दिसंबर 2023 में ही मिलने शुरू हो गए थे.
रूस की सैन्य बिरादरी के बीच टेलीग्राम चैट्स से इसकी जानकारी मिली थी.
यूक्रेन में तैनात रूसी सैनिकों ने अक्सर इन हथियारों की गुणवत्ता की शिकायत करते देखे गए थे. उनका कहना था कि इन हथियारों से उसके कई सैनिक घायल हो गए थे.
यूक्रेन को संदेह है कि उत्तर कोरियाई सैनिकों को रूसी सैनिक कुर्स्क प्रांत में तैनात होने से पहले मंगोलिया की सीमा के नज़दीक उलान-उदे इलाके में तैयारी कर रहे हैं.
यूक्रेनी सेना ने रूस के कुर्स्क प्रांत में हाल में अपने हमले किए थे.
यूक्रेनी प्रकाशन डिफेंस एक्सप्रेस के संपादक वेलेरी रेबेक ने कहा,'' इन उत्तर कोरियाई सैनिकों को रूस-यूक्रेन सीमा के कुछ हिस्से की सुरक्षा में लगाया जा सकता है. मुझे नहीं लगता कि उत्तर कोरियाई सैनिकों की यूनिटों को इतनी जल्दी युद्ध के अग्रिम मोर्चों पर लगाया जाएगा.''
उत्तर कोरिया के सैनिक कितने कारगर साबित होंगे

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सिर्फ रेबेक ही ऐसा नहीं सोचते.
उत्तर कोरिया के पास 12.80 लाख सक्रिय सैनिक हैं कि रूस के उलट इस सेना के पास हाल के किसी युद्ध ऑपरेशन का अनुभव नहीं है.
उत्तर कोरिया अपनी सेना में पुराने सोवियत मॉडल को अपनाता रहा है लेकिन ये साफ नहीं है कि इसकी प्रमुख ताकत मानी जाने वाली मोटोराइज्ड इन्फैंट्री यूनिटें यूक्रेन में लड़ाई के मुफ़ीद साबित होगी.
दोनों सेनाओं के बीच भाषा की अड़चन भी होगी. उत्तर कोरियाई सैनिकों को रूसी सिस्टम की भी जानकारी नहीं होगी. इससे मौजूदा युद्ध में रूस के लिए जटिलता ही पैदा होगी.
लेकिन ये चीजें उत्तर कोरियाई सैनिकों को रूस-यूक्रेन युद्ध में हिस्सा लेने से रोक देगी,ऐसा नहीं है.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये सैनिक अपनी इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन क्षमताओं के लिए जाने जाते हैं. ये लड़ने की अपनी क्षमता के लिए नहीं जाने जाते.
अगर ये दोनों काम में दक्ष होंगे तो इससे दोनों को फायदा होगा.
उत्तर कोरिया को पैसे और टेक्नोलॉजी की जरूरत है. जबकि रूस को सैनिक और हथियार चाहिए.
कोरिया रिस्क ग्रुप के डायरेक्टर एंद्रेई लानकोव का कहना है,'' उत्तर कोरिया को रूस से अच्छे पैसे मिल सकते हैं और शायद उन्हें रूसी सैन्य टेक्नॉलोजी भी मिल सकती है. उत्तर कोरिया की सैन्य मदद के बिना शायद रूस उसे ये टेक्नोलॉजी देने में हिचकिचाहट दिखाता.''
उन्होंने कहा, ''इससे होगा ये कि उत्तर कोरिया को युद्ध का वास्तविक अनुभव मिलेगा. लेकिन इससे उनके सैनकों को पश्चिमी देशों में रहने का फायदा मिलेगा जो उत्तरी कोरिया की तुलना में ज्यादा समृद्ध हैं.''
जबकि पुतिन चाहते हैं पिछले ढाई साल के युद्ध में रूस ने जो खोया है उसकी जल्द से जल्द भरपाई हो.

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ब्रिटेन के कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज रिसर्च सेंटर के वेलेरी अकिमेन्को का मानना है कि उत्तर कोरियाई सैनिकों की तैनाती से पुतिन के सामने अनिवार्य सैनिक सेवा को बेहतर तरीके से लागू करने में आ रही अड़चन को दूर करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा,'' पुतिन सोच रहे हैं रूसी सैनिक यूक्रेनी सैनिकों की तुलना में कम हो रहे है. इसलिए उत्तर कोरियाई सैनिकों को लड़ाई में शामिल करना बेहतरीन तरीका हो सकता है.''
जबकि ज़ेंलेस्की इस बात को लेकर चिंतित दिखते हैं. उन्हें दोनों के गठजोड़ को लेकर चिंता सता रही है.
अभी तक रूस और यूक्रेन के युद्ध मैदान में पश्चिमी देशों के सैनिक नहीं उतरे हैं.
अगर सैकड़ों उत्तर कोरियाई सैनिकों की तैनाती के सुबूत सामने आते भी हैं और इससे विदेशी सैनिकों (पश्चिमी देशों) के युद्ध भूमि में उतरने के विचार से पुतिन शायद ही ज्यादा चिंतित होंगे.
(पॉल किर्बी, केली एनजी और निक मार्श की अतिरिक्त रिपोर्टिंग)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित















