पेरिस ओलंपिक: श्रीजेश के खेल के दम पर हॉकी में पदक जीतने की होड़ में भारत

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
पेरिस ओलंपिक के क्वार्टरफ़ाइनल मैच में ग्रेट ब्रिटेन के ख़िलाफ़ भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश गोल पोस्ट पर चट्टान की तरह डटे रहे.
उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन की कई कोशिशों को नाकाम कर दिया और विपक्षी टीम पीआर श्रीजेश को पार नहीं कर सकी. श्रीजेश का शानदार प्रदर्शन ग्रेट ब्रिटेन को पेनल्टी शूटआउट में हार तक लेकर गया.
इस मैच में भारत और ग्रेट ब्रिटेन के बीच निर्धारित समय में मुक़ाबला 1-1 से बराबर रहा. भारत ने तीन साल पहले टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टरफ़ाइनल में भी जीत हासिल की थी.
उस समय भारतीय टीम निर्धारित समय में 3-1 से जीत गई थी, लेकिन इस बार भारतीय टीम को जीत के लिए पेनल्टी शूटआउट तक संघर्ष करना पड़ा.
इस मैच के दूसरे क्वार्टर की शुरुआत में ही अमित रोहिदास को रेड कार्ड दिखाए जाने की वजह से भारत को पूरा मैच 10 खिलाड़ियों से खेलना पड़ा.

अमित को रेड कार्ड भारत के लिए बड़ा झटका
रोहिदास के मैदान से बाहर होने की हालत में भारत को ज़्यादातर समय डिफेंसिव गेम खेलना पड़ा. ब्रिटिश टीम को इसका फायदा हमलावर रुख़ अपनाने में मिला.
सही मायने में इस मुक़ाबले में ज़्यादातर समय इंग्लैंड के हमले हुए.
लेकिन वहीं भारत ने अमित रोहिदास के बाहर जाने पर अपने खेल की रणनीति को बदल दिया. भारतीय खिलाड़ी जानते थे कि उन्होंने अपने स्वाभाविक अंदाज़ में खेला तो जवाबी हमलों में गोल खाने की ज़्यादातर संभावना बन सकती है.
इसलिए भारत ने बचाव पर ज़्यादा फ़ोकस करने का फ़ैसला किया. सही मायने में भारत की जीत में इस रणनीति की भूमिका अहम रही.
भारत को अमित रोहिदास के बाहर जाने से बड़ा झटका लगा, लेकिन भारत के पास चौथा ओलंपिक खेल रहे मनप्रीत सिंह के रूप में ऑलराउंड खिलाड़ी है.
इस स्थिति में वह डीप डिफ़ेंस में चले गए और उनके दिमाग़ के इस्तेमाल के साथ सफ़ाई से की गई टैकलिंग का फ़ायदा भारत को मिला.
भारतीय टीम एक समय सिर्फ नौ खिलाड़ियों से खेली, क्योंकि तीसरे क्वार्टर के आख़िरी समय में सुमित को ग्रीन कार्ड देकर दो मिनट के लिए बाहर बैठा दिया गया.
वह असल में रेफ़री की सीटी बज जाने के बाद भी शॉट खेल गए थे, जो नियमों के हिसाब से ग़लत है. आने वाले मैचों में भारतीय खिलाड़ियों को इस तरह की ग़लतियों से बचने की ज़रूरत है.
श्रीजेश से पार पाना हुआ मुश्किल

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भारत के पीछे हटकर खेलने की रणनीति से ब्रिटेन को हमलावर रुख़ अख्तियार करने का मौक़ा तो मिल गया, पर उनकी सबसे बड़ी चुनौती रही गोल पर चट्टान की तरह डटे श्रीजेश से पार पाना.
दूसरे और तीसरे क्वार्टर में ब्रिटेन के लगातार हमले बोलने की वजह से उन्हें लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिलते रहे.
उनके ड्रेग फ्लिकर वार्ड लगातार पेनल्टी कॉर्नर लेने में नए-नए तरीके अपनाते रहे, पर श्रीजेश से पार पाने में वो सफल नहीं हो सके.
वैसे तो इस मुश्किल स्थिति में भारतीय डिफेंस ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा.
हमें याद है कि कुछ साल पहले तक भारत की बड़ी कमज़ोरी डिफेंस का मुश्किल हालात में चरमरा जाना होता था.
रविवार के मैच में भारतीय खिलाड़ी डिफेंस स्ट्रक्चर बनाकर खेले और उन्होंने ब्रिटेन के हमलावरों की दाल गलने ही नहीं दी.

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हरमनप्रीत बोले, टीम की कोशिशों का नतीजा
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि यह जीत टीम की कोशिशों का नतीजा थी.
उन्होंने कहा, "हमारी पूरी टीम पूरे मैच में एकजुट होकर खेली. एक खिलाड़ी को बाहर कर दिया गया और यह स्थिति हमारे लिए बहुत ही मुश्किल थी."
हरमनप्रीत ने कहा, "इस जीत को हम सालों-साल याद रखेंगे."
भारत की बदली रणनीति रही कारगर

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भारत ने रणनीति को टीम में दस खिलाड़ी होने पर बदल दिया. उसकी रणनीति थी कि किसी तरह मैच को एक-एक पर बनाए रखकर उसे पेनल्टी शूटआउट तक ले जाएं.
टीम अपनी इस रणनीति में भी कामयाब रही. टीम को पता था कि श्रीजेश के रहते इसी तरह से मैच को जीता जा सकता है.
श्रीजेश पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि यह उनका चौथा ओलंपिक और आख़िरी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है. वह इसके बाद संन्यास लेने की घोषणा कर चुके हैं.
उन्होंने पेनल्टी शूटआउट में किए प्रदर्शन से इस ओलंपिक को अपने लिए यादगार बना दिया है.
पहले उन्होंने पहले पेनल्टी कॉर्नर पर एक के बाद एक बचाव करके ब्रिटेन को गोल से दूर बनाए रखा. उसके बाद पेनल्टी शूटआउट में दो मौक़ों पर गोल भेदने से बचाकर उन्होंने भारत की जीत की कहानी लिखी.
श्रीजेश अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 22 बार पेनल्टी शूटआउट में गोल बचाने के लिए खड़े हुए हैं और 12 बार भारत को जीत दिलाई है.
भारत ने की संभलकर शुरुआत

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भारतीय टीम ने मैच की शुरुआत में हमले बोलने के बजाय बचाव पर फ़ोकस किया. इस कारण पहले क्वार्टर में एक-दो मौक़ों को छोड़ दें तो ज़्यादातर समय गेंद ब्रिटेन के खिलाड़ियों के कब्ज़े में रही.
इस दौरान भारतीय डिफेंस में कभी हड़बड़ाहट नहीं रही, यह मैच की अच्छी बात रही. ब्रिटेन को गोल जमाने के मौक़े तो मिले पर वह इन मौक़ों को गोल में बदलने में सफल नहीं रही.
भारत ने इस क्वार्टर में केवल जवाबी हमले बोलने का ही प्रयास किया. ऐसे ही एक मौक़े पर अभिषेक के सर्किल के टॉप से लिए गए शॉट पर ब्रिटेन का गोल भिदने से बचा.
भारत ने जमाया था पहला गोल
भारत ने दूसरे क्वार्टर में थोड़े आक्रामक अंदाज़ में खेल की शुरुआत की और 22वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर गोल जमाकर बढ़त बना ली.
यह गोल जमाने वाले हरमनप्रीत सिंह रहे. वह इस ओलंपिक में भारत के लिए सबसे ज़्यादा सात गोल जमाने वाले खिलाड़ी हैं.
लेकिन भारत अपनी इस बढ़त को बनाए रखने में सफल नहीं रहा. इसमें बड़ी भूमिका भारत की टीम में दस खिलाड़ियों के रह जाने की रही.
ब्रिटेन की तरफ से किए गए पहले शॉट को तो श्रीजेश ने बचा भी लिया था पर पैड से रिबाउंड हुई गेंद पर ली मॉर्टन ने गेंद को गोल में सरका कर एक गोल किया.
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