इसराइल-हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम मध्य पूर्व के लिए मोहलत है या समाधान?

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images
- Author, जेरेमी बोवेन
- पदनाम, अंतरराष्ट्रीय संपादक, बीबीसी न्यूज़
लेबनान के अधिकांश लोगों के लिए, युद्धविराम की घोषणा इतनी जल्दी नहीं हो सकी. यह बात लेबनान की एक अग्रणी विश्लेषक ने मुझसे कही थी.
तब मैं मध्य पूर्व पर हुए एक सम्मेलन में शामिल होने के लिए रोम गया हुआ था. उन्होंने मुझसे कहा था कि वो ठीक से सो नहीं सकीं, क्योंकि युद्धविराम का समय नज़दीक आ रहा था.
उन्होंने कहा, “यह अहसास बिल्कुल वैसा था, जैसे आपको बचपन में क्रिसमस की एक रात से पहले महसूस होता था. यह पल वैसा होता था, जब आप उसके होने का इंतज़ार नहीं कर पाते थे.”
आप देख सकते हैं कि वहां राहत क्यों हैं. इसराइल के हमले में 3500 लेबनानी नागरिक मारे जा चुके हैं.

विस्थापित हुए लोगों ने अपनी गाड़ियों को सुबह होने से पहले ही पैक कर लिया था, ताकि उनके घर में जो सामान बच गया हो, उसे साथ ले जा सकें.
इसराइली सेना की कार्रवाई के कारण दस लाख से ज़्यादा लोग अपना घर छोड़ कर जाने के लिए मजबूर हो गए थे. जबकि हज़ारों लोग घायल हुए और हज़ारों घर नष्ट हो गए.
मगर, इसराइल में कुछ लोगों को लगता है कि उन्होंने हिज़्बुल्लाह को और ज़्यादा नुक़सान पहुंचाने का मौका गंवा दिया है.
क्यों चिढ़ गए थे अधिकारी?

इमेज स्रोत, Anadolu via Getty Images
प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इसराइल की उत्तरी नगर पालिकाओं के प्रमुखों से मुलाक़ात की.
यह वो इलाक़ा है, जो भूतहा कस्बों में तब्दील हो चुका है. वहां से 60 हज़ार नागरिक दक्षिण की ओर ले जाए जा चुके हैं.
इसराइल की वायनेट न्यूज़ वेबसाइट ने इसे लेकर एक रिपोर्ट दी. इसके मुताबिक, इस सभा में मौजूद लोग गुस्से में थे. वो बहुत चिल्ला रहे थे.
दरअसल, स्थानीय अधिकारी इस बात को लेकर चिढ़ गए थे कि इसराइल अपने दुश्मन लेबनान से दबाव कम कर रहा है और इसराइली नागरिकों को वापस उनके घर लाने के लिए कोई तात्कालिक योजना नहीं बता रहा है.
सरहद के पास स्थित शहर किरयत शमोना के मेयर ने इस बारे में समाचार पत्र के एक कॉलम में लिखा.
उन्होंने लिखा कि उनको इस बात पर संदेह है कि युद्धविराम लागू किया जाएगा. उन्होंने मांग की कि इसराइल दक्षिणी लेबनान में बफ़र ज़ोन बनाए.
इसराइली स्टेशन चैनल 12 न्यूज़ ने एक सर्वे किया था. यह सर्वे युद्धविराम के समर्थकों और विरोधियों के बीच बंट गया था.
सर्वे में शामिल आधे लोग मानते हैं कि हिज़्बुल्लाह की हार नहीं हुई है और 30 फ़ीसदी लोग सोचते हैं कि युद्धविराम टूट जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र में क्या बोले नेतन्याहू?

इमेज स्रोत, Getty Images
बीते सितंबर में, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की एक आम सभा हुई थी. इस दौरान ऐसा लगा था कि अब युद्धविराम हो जाएगा.
अमेरिका और ब्रिटेन के राजनयिक इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि अब युद्ध विराम के लिए माहौल बनता दिख रहा है.
युद्ध में शामिल सभी पक्ष यह संकेत देते दिख रहे थे कि वे सिक्योरिटी काउंसिल रिज़ॉल्यूशन 1701 के प्रावधानों के आधार पर युद्धविराम के लिए राज़ी हैं.
यह रिज़ॉल्यूशन 2006 में लेबनान युद्ध को समाप्त करने के लिए पास किया गया था.
इसके तहत हिज़्बुल्लाह सरहद से पीछे हट जाएगा. उसकी जगह संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना और लेबनानी सशस्त्र बल लेंगे. फिर जैसे-जैसे ये दोनों सेनाएं अंदर आएंगी, इसराइली सेना खुद बाहर हो जाएगी.
मगर, जब प्रधानमंत्री नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र में मंच पर पहुंचे तो उन्होंने वहां आक्रामक भाषण दिया. इस दौरान उन्होंने इसराइल के आक्रमण मे किसी भी तरह के विराम को स्वीकार्य करने की बात से इनकार कर दिया.
नेतन्याहू जब न्यूयॉर्क में होटल पहुंचे, तो उनके आधिकारिक फ़ोटोग्राफ़र ने उस पल को कैमरे में क़ैद कर लिया, जब उन्होंने इसराइली सेना के अधिकारियों को हिज़्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह को मारने का आदेश दिया था.
इसके बाद नेतन्याहू के कार्यालय ने अमेरिकी कूटनीति के लिए यह तस्वीर भी जारी की थी.
नसरल्लाह की हत्या इसराइल के हमले की शुरुआत के समान थी.
क्योंकि, इसके बाद इसराइली सेना ने हिज़्बुल्लाह की सेना को बहुत नुक़सान पहुंचाया था.
बावजूद इसके, हिज़्बुल्लाह के लड़ाके अभी भी सरहद पर रॉकेट छोड़ सकते हैं और इसराइली सेना को हमले में उलझाकर रख सकते हैं. लेकिन, अब इसराइल के लिए हिज़्बुल्लाह वैसा ख़तरा नहीं रहा है.
नेतन्याहूः 'स्टॉक फिर से भरने' का समय

इमेज स्रोत, Getty Images
रिकॉर्ड किए गए बयान में नेतन्याहू ने उनका फ़ैसला सुनाया. इसमें उन्होंने सिलसिलेवार ढंग से बताया कि उनको क्यों लगता है कि युद्ध विराम के लिए यही सही समय क्यों था.
उन्होंने कहा, इसराइली सेना ने बेरूत को हिला कर रख दिया है. अब एक मौका है, इसराइली सेना को ‘सांस लेने और अपने स्टॉक को पुख़्ता करने’ का समय दिया जाए.
इसराइल ने ग़ज़ा और लेबनान के बीच संबंध तोड़ दिया था. हमास ने 7 अक्तूबर 2023 को इसराइल पर हमला किया था.
इसके अगले दिन हसन नसरल्लाह ने इसराइल के उत्तर में हमला करने का आदेश दिया था. उन्होंने तब कहा था कि वो तब तक युद्ध जारी रखेंगे, जब तक ग़ज़ा में युद्ध विराम की घोषणा नहीं हो जाती. हालांकि, इसी साल हसन नसरल्लाह की इसराइली हमलों में मौत हो गई.
नेतन्याहू ने कहा, अब ग़ज़ा में हमास और भी ज़्यादा दबाव में होगा. फ़लस्तीनी इस बात से डरे हुए हैं कि ग़ज़ा में इसराइल की एंट्री और ज़्यादा न बढ़ जाए.
इसकी एक और वजह है, जिसे नेतन्याहू ने ईरानी ख़तरा बताया था. हिज़्बुल्लाह को नुक़सान पहुंचाना मतलब ईरान को नुक़सान पहुंचाना है.
ईरान ने इसराइल की सीमा पर ख़तरा बढ़ाने के लिए ही इसे बनाया था. हिज़्बुल्लाह अब ईरान के एक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस का सबसे मजबूत हिस्सा बन चुका है.
ईरान युद्धविराम क्यों चाहता है?

इमेज स्रोत, Reuters
हिज़्बुल्लाह के कुछ जीवित नेताओं के समान ही ईरान में उनको संरक्षण देने वाले भी चाहते हैं कि अब युद्ध विराम हो जाए. दरअसल, हिज़्बुल्लाह को अपने नुक़सान की भरपाई करने लिए रुकने की ज़रूरत है.
जबकि ईरान की आवश्यकता अपने आसपास हो रहे ख़ून-ख़राबे को रोकने की है. क्योंकि, हिज़्बुल्लाह अब इसराइल के लिए कोई डरने वाली बात नहीं रह गया है.
और जब नसरल्लाह की हत्या के बाद ईरान ने इसराइल पर मिसाइल हमला किया, तो उससे भी नुक़सान की भरपाई नहीं हो पाई.
दो लोग, जिनकी हत्या कर दी गई है. इन दोनों को इसराइल को लेबनान और ईरान पर हमला करने से रोकने के लिए तैयार किया गया था.
इनमें से एक थे कासिम सुलेमानी, जो ईरान के रिवॉल्यूशनरी गॉर्ड्स की कुद्स सेना के प्रमुख थे. उनकी मौत जनवरी 2020 में बग़दाद एयरपोर्ट पर किए गए अमेरिकी ड्रोन हमले में हुई थी.
यह आदेश डोनाल्ड ट्रंप ने तब जारी किया था, जब व्हाइट हाउस में उनके शासन के आख़िरी के कुछ दिन बाकी थे. इसके बाद बतौर राष्ट्रपति उनके पहले कार्यकाल का समापन होना था.
दूसरा आदेश हसन नसरल्लाह की हत्या का था, जो इसराइल के हवाई हमले में मारे गए थे. यह हमला बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में किया गया था.
हिज़्बुल्लाह और ईरान की प्रतिरोध की रणनीति इसराइल से मिलती-जुलती है. इसराइल ने 2006 में हुए युद्ध के ख़त्म होने के बाद ऐसी ही योजना बनाई थी.
मगर, 7 अक्तूबर 2023 को हुए हमले के बाद इसराइल के रुख़ में बदलाव आया. उसने जोर देकर कहा कि हमले की प्रतिक्रिया देने के मामले में किसी प्रतिबंध को स्वीकार नहीं करेगा.
अमेरिका इसराइल का महत्वपूर्ण सहयोगी है. उसने इसराइल को हथियार मुहैया करवाने और उनके इस्तेमाल को लेकर लगभग कोई प्रतिबंध नहीं लगाया.
नसरल्लाह और ईरान यह देखने में विफल रहे कि हुआ क्या. उन दोनों को यह समझ नहीं आया कि इसराइल ने किस तरह खुदको बदल लिया.
उन्होंने इसराइल पर युद्ध थोपने की कोशिश की, और एक साल तक वो ऐसा करने में सफल भी रहे. इसके बाद 17 सितंबर को इसराइल ने एक बड़ा हमला किया.
इसमें इसराइल ने हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पेजरों को निशाना बनाया.
इसराइल ने हिज़्बुल्लाह के पेजर नेटवर्क में छोटे-छोटे बम लगाकर बड़े स्तर पर धमाके किए, जिससे हिज़्बुल्लाह का कम्युनिकेशन नेटवर्क टूट गया.
हिज़्बुल्लाह का संतुलन डगमगा गया. इससे पहले कि वो ईरान की ओर से मुहैया करवाए गए सबसे ताकतवर हथियार से इसराइल को प्रतिक्रिया देता, इसराइल ने नसरल्लाह को हवाई हमले में मारने का दावा किया.
इसके साथ ही हिज़्बुल्लाह के कुछ अन्य प्रमुख कमांडर भी इसराइली हमलों में मारे गए. इसराइल ने हमले में उनके हथियारों को नष्ट कर दिया. इसराइल ने दक्षिणी लेबनान में हमले तेज़ कर दिए.
इसमें लेबनानी सीमा पर बसे गांव के साथ-साथ हिज़्बुल्लाह के टनल नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया.
ट्रंप, ग़ज़ा और भविष्य

इमेज स्रोत, Getty Images
लेबनान में युद्ध विराम का मतलब यह नहीं है कि ग़ज़ा में भी ऐसा ही होगा. ग़ज़ा का मामला अलग है. वहां युद्ध बॉर्डर की सुरक्षा और इसराइल के बंधकों से आगे की बात है.
यह एक बदले के बारे में भी है. यह बिन्यामिन नेतन्याहू के राजनीतिक बचाव के लिए भी है. यह उनकी सरकार के बचाव के लिए भी है.
यह उस बात के लिए भी है, जिसमें नेतन्याहू सरकार फ़लस्तीनियों की ओर से की जाने वाली आज़ादी की मांग को ठुकराती है.
लेबनान का युद्धविराम नाज़ुक है. और यह समय लेने के इरादे से किया गया फ़ैसला है. जब 60 दिन बीत जाएंगे, तो इसका असर ख़त्म हो जाएगा. डोनाल्ड ट्रंप ओवल ऑफ़िस लौट आएंगे.
राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए ट्रंप ने पहले ही इशारा कर दिया है कि वो लेबनान में युद्ध विराम चाहते हैं. लेकिन, उनकी योजना क्या है, यह अभी तक सामने नहीं आई है.
मिडिल ईस्ट वही राह देख रहा है कि वह इस मामले को किस हद तक प्रभावित कर सकते हैं.
कुछ आशावादी लोग यह सोच रहे हैं कि जैसे साल 1972 में राष्ट्रपति निक्सन ने चीन की यात्रा की थी, वैसे ही ट्रंप ईरान जाकर इसे सनसनीखेज़ बना सकते हैं.
कुछ लोगों को यह डर है कि अमेरिका शायद अभी भी टू स्टेट सॉल्यूशन की वकालत कर सकता है, जिसमें फ़लस्तीन को इसराइल के पास एक आज़ाद इलाक़ा बनाए जाने की बात कही गई है.
वो कोई ऐसा रास्ता निकाल सकते हैं कि इसराइल जिन इलाक़ों को चाहता है, उस पर कोई फ़ैसला कर लिया जाए. इन इलाक़ों में फ़लस्तीन के कुछ कब्ज़े वाले इलाक़ों के साथ-साथ वेस्ट बैंक और उत्तरी ग़ज़ा का इलाक़ा भी शामिल है और यहां इसराइल का कब्ज़ा है.
यह बात तय है कि मिडिल ईस्ट के पास ऐसा कोई मौका नहीं है, जिससे वो युद्ध से बच सके. जब तक इस क्षेत्र के राजनीतिक विभाजन को ठीक नहीं किया जाता, यह मुश्किल है. यहां सबसे बड़ा संघर्ष इसराइल और फ़लस्तीन के बीच है.
बिन्यामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार के साथ ही अधिकांश इसराइली नागरिक भी यह मानते हैं कि सैन्य सफलता के ज़रिए अपने दुश्मन पर प्रभुत्व कायम किया जा सकता है.
नेतन्याहू सक्रिय तौर पर सेना का इस्तेमाल कर रहे हैं. अमेरिका की ओर से उन पर कोई नियंत्रण नहीं है.
वो मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन को इसराइल के पक्ष में करने के लिए अमेरिका से मिली ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं.
एक सदी से भी ज़्यादा समय से अरब और यहूदी लोगों के बीच संघर्ष चल रहा है.
दोनों सैन्य सफलता के ज़रिए शांति स्थापित करने की कोशिश करते रहे हैं. हर पीढ़ी ने ऐसी कोशिश की है. और उनके हाथ असफलता ही लगी है.
7 अक्तूबर 2023 को हमास ने इसराइल पर हमला किया था.
इसके बाद जितना विध्वंस हुआ है, उसने सारी संभावनाओं को ख़त्म कर दिया है कि इस संघर्ष को रोका जा सकता है.
दूसरी तरफ़, इसराइल ने भी फ़लस्तीन को मूलभूत अधिकारों से वंचित रखने के क्रम को जारी रखा है. ऐसे में लेबनान में युद्धविराम एक मोहलत है. यह कोई हल नहीं है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















