इसराइल पर हमास के हमले के 100 दिन, क्या युद्ध कभी खत्म होगा?

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    • Author, वायर डेविस
    • पदनाम, बीबीसी मध्यपूर्व संवाददाता

अब से 100 दिन पहले वो हुआ, जिसके बारे में सोचा तक नहीं गया था. सिर्फ 75 साल पहले दुश्मनी और युद्ध से पैदा हुआ एक देश उस दिन अचानक अप्रत्याशित चुनौती के बरक्स खड़ा था. ये वो देश है जिसे कुछ लोगों ने अपने ही अस्तित्व के लिए ख़तरा बताया था.

इसराइल की राजधानी तेल अवीव में 7 अक्टूबर की घटना को हज़ारों लोगों ने याद किया. वहां हर शख्स के दिमाग में हमास की ओर से बंधक बना कर रखे गए लगभग 130 लोगों से जुड़े सवाल तैर रहे थे. उन्हें ग़ज़ा में बंधक कर बना रखा गया है, शायद उनमें में से कुछ अब जिंदा भी न बचे हों.

देखते देखते 100 दिन हो गए हैं, जब हमास के हज़ारों हथियारबंद लड़ाके ग़ज़ा बॉर्डर को पार कर शहर में घुस आए थे.

ग़ज़ा में घुसते ही उन्होंने किबुत्ज़िम, सैन्य अड्डे और सीमा से लगे शहरों पर हमला शुरू कर दिया. यूं तो ये शहर हमास के रॉकेट हमलों का आदी है लेकिन उस दिन का हमला अभूतपूर्व था.

इसराइली सेना इसके लिए बिल्कुल ही तैयार नहीं थी और देखते ही देखते हमास के हमलावरों ने 1200 लोगों की हत्या कर दी.

हमला होते ही नोवा म्यूजिक फेस्टिवल से दौड़ते-भागते जान बचा कर भाग रहे लोगों की तस्वीरों ने इसराइल को अंदर से हिला कर रख दिया.

फेस्टिवल जहां चल रहा था वहां हमास के हमले में 360 लोगों से ज्यादा मारे गए और कइयों को बंधक बना कर ग़ज़ा ले जाया गया.

हमास के हमले के 100 दिन पूरे होने पर तेल अवीव में जुटे लोगों में उन लोगों के परिवार थे, जो अभी तक लापता हैं.

वे लोग पोस्टर लिए हुए थे और अपनी टी-शर्ट में लापता हुए परिवार के सदस्यों की तस्वीरें छपवा रखी थीं.

तेल अवीव

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इसराइली बंधकों का क्या हाल है?

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मैंने शीरी बिबास के कजिन योसी शिनिदर से बात की. बिबास के कजिन को उनके दो छोटे बच्चों और पति के साथ बंधक बना लिया गया था.

योसी ने इस हमले के बारे में हमसे बात करते हुए कहा,''लगभग 130 लोग, जिनमें अधिकतर नागरिक हैं, बगैर दवा के बंधक बना कर रखे गए हैं. यहां तक कि उन्हें रेड क्रॉस के लोगों से भी नहीं मिलवाया जा रहा है. ''

योसी इस बात को लेकर बेहद गुस्से में हैं कि बंधकों के परिवार वालों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है. उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नही है कि बंधकों की शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या है.

थकी और हताश लग रही योसी कहते हैं,''मेरे परिवार की तीन पीढ़ियां लापता हैं. तीन पीढि़यां! और दुनिया चुप हैं और हमसे शांत बने रहने के लिए कह रही है.लेकिन अब मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है. ''

ज्यादातर लोग यहां कहेंगे कि 7 अक्टूबर जैसा दिन इसराइल ने पहले नहीं देखा था.

इसराइल ने इसके पहले खुद को इतना कमजोर कभी महसूस नहीं किया था. हालांकि बंधकों की सुरक्षित रिहाई उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है लेकिन वो इसराइल सरकार के युद्ध के लक्ष्य को लेकर सहमत हैं. कुछ ही लोग सहिष्णुता और सह-अस्तित्व की बात कर रहे हैं.

ग़ज़ा पर हमले के बाद इसराइल ने भी अभूतपूर्व जवाबी हमले शुरू किए. इसराइली सेना ने ग़ज़ा में जबरदस्त गोलीबारी की.

उसका घोषित मकसद था हमास और इसे समर्थन देने वाले स्ट्रक्चर को पूरी तरह तहस-नहस करना.

इसके बाद ग़ज़ा का एक बड़ा हिस्सा यानी ग़ज़ा सिटी से लेकर दक्षिण में ख़ान यूनिस तक नेस्तनाबूद किया जा चुका है.

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इमेज कैप्शन, इसराइली बंधकों के परिजन प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए

हमास कितना कमजोर हुआ है?

इसराइल का कहना है कि उसके हमलों ने हमास को बेहद कमजोर कर दिया है. इतना कमजोर कि उसके उत्तरी ग़ज़ा में एक संगठित ताक़त के तौर पर गतिविधियों को अंजाम देना लगभग नामुमकिन हो गया है.

लेकिन इसराइली बमबारी में मरने वालों की तादाद बहुत बड़ी है. हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ इस हमले में अब तक 23 हजार लोगों की मौत हो गई है.

इनमें बड़ी तादाद महिलाओं और बच्चों की है. हजारों लोगों के मलबे में दब कर मारे जाने की आशंका है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ग़ज़ा की 85 फीसदी आबादी विस्थापित हो गई है.

ग़ज़ा में अब ज्यादा मानवीय सहायता पहुंच रही है लेकिन संयुक्त राष्ट्र के मानवीय राहत अभियान के प्रमुख ने कहा है कि ग़ज़ा के हालात अब बर्दाश्त नहीं हो रहे हैं.

फतेन अबु शहादा को नियमित किडनी डाइलिसिस की जरूरत है और इस वजह से उनके परिवार को दक्षिण की ओर जाना पड़ा.

अब फतेन और उनके बच्चों को ख़ान यूनिस के एक प्लास्टिक टेंट में रहना पड़ रहा है. उनके टेंट के ऊपर मंडराते ड्रोन का शोर उनके ऊपर लगातार बना रहता है.

वो कहती हैं,''ग़ज़ा ध्वस्त हो चुका है. अब तो ये बचा ही नहीं है. कोई अस्पताल नहीं, कोई पढ़ाई नहीं है. हमारे बच्चों के स्कूल के साल खत्म हो गए. ग़ज़ा मर चुका है.''

प्लास्टिक के टेंट में रहने को मजबूर फ़लस्तीनी महिला

इसराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव क्या युद्ध खत्म करा सकेगा?

इसराइल पर युद्ध रोकने और ग़ज़ा हमले पर लगाम लगाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव है. वहां नागरिकों की जिस तरह से मौत हो रही है उससे ये दबाव और ज्यादा बढ़ गया है.

इसका नजदीकी सहयोगी अमेरिका इसराइल के आत्मरक्षा के अधिकार और 7 अक्टूबर जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई का समर्थक है.

अमेरिका इसराइल के राष्ट्रपति से लगातार कहता रहा है कि मरने वालों की तादाद बहुत अधिक है.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइल से उसकी 'अंधाधुंध बमबारी' के बारे में बात की है. उन्होंने कहा कि इससे इसराइल दुनिया भर में समर्थन खोता जा रहा है.

जिदियोन लेवी इसराइली अख़बार हारित्ज़ के स्तंभकार हैं. वो नेतन्याहू की आलोचना करते रहे हैं.

मैंने उनसे पूछा कि 1948 के बाद इसराइल का ये सबसे लंबा युद्ध क्या किसी नतीजे पर पहुंचेगा.

लेवी का दो टूक जवाब था,''मौजूदा शक्ल में ये युद्ध तब तक चलेगा जब तक अमेरिकी इसराइल को इसकी इजाजत देंगे.''

वो कहते हैं,''मुझे नहीं लगता कि यह कुछ और हफ्तों तक चलेगा. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि युद्ध खत्म हो गया है क्योंकि किसी ने कल के बाद क्या होगा, ये नहीं सोचा है.''

उनका कहना है,''अगर इसराइल ग़ज़ा से पीछे नहीं हटता है तो प्रतिरोध होगा. और अगर प्रतिरोध हुआ तो जवाबी कार्रवाई भी होगी.''

ग़ज़ा का ज्यादातर हिस्सा इसराइली हमले में ध्वस्त हो चुका है

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मध्य और दक्षिणी ग़ज़ा में इसराइल का हमला जारी है. इससे ऐसा लगता है कि ग़ज़ा में युद्ध अभी खत्म नहीं होने वाला है.

इसराइल का कहना है कि जब तक हमास पराजित नहीं हो जाता उसका हमला जारी रहेगा.

लेकिन ग़ज़ा में हजारों लोग नारकीय हालात में रह रहे हैं. लिहाजा इस इलाके का भविष्य फिलहाल अंधकारमय ही लग रहा है.

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