हूती विद्रोहियों पर कार्रवाई: अमेरिका का ईरान को 'संदेश', जो बाइडन ने क्या दी जानकारी

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- Author, जेरेमी बोवेन
- पदनाम, इंटरनेशनल एडिटर, बीबीसी
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि यमन के हूती विद्रोहियों को लेकर उनके देश ने ईरान को ‘प्राइवेट मैसेज’ दिया है. बाइडन के मुताबिक ये संदेश हूती विद्रोहियों पर अमेरिका की ओर से किए गए दूसरे हमले के बाद दिया गया.
अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा, “हमने निजी तौर पर ये संदेश पहुंचाया और हम अपनी तैयारी को लेकर आश्वत थे.”
उन्होंने इस बारे में ज़्यादा ब्योरा नहीं दिया.
अमेरिका ने अपने ताज़ा हमले को ‘फॉलोऑन कार्रवाई’ बताया. इस दौरान रडार को निशाना बनाया गया.
ईरान का कहना है कि लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमले में उसकी कोई भूमिका नहीं है.
हालांकि, ये संदेह जाहिर किया जाता है कि ईरान हूती विद्रोहियों को हथियार मुहैया कराता है. अमेरिका का कहना है कि हूती विद्रोहियों को ईरान ख़ुफ़िया जानकारी मुहैया कराता है और ये जानकारी जहाज़ों पर होने वाले हमलों को लेकर अहम है.

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अमेरिका और ब्रिटेन की कार्रवाई
अमेरिका और ब्रिटेन ने शुक्रवार तड़के संयुक्त हवाई हमलों में हूती विद्रोहियों के 30 ठिकानों को निशाना बनाया. इस अभियान में ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी सहयोग दिया.
अमेरिकी सेंट्रल कमान ने शनिवार को बताया कि उसने यमन में हूती विद्रोहियों की रडार साइट को निशाना बनाया है. इसमें टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल का इस्तेमाल किया गया.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि हूती विद्रोही जिस तरह से लाल सागर में जहाज़ों को निशाना बना रहे थे, उसके बाद उनके देश के पास यमन में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के अलावा ‘कोई विकल्प’ नहीं था.
टेलिग्राफ़ अख़बार के एक आलेख में उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ‘सीमित और निशानाबद्ध’ हमले के लिए अमेरिका की ओर से किए गए अनुरोध में सहयोग करने के लिए तैयार हो गए.
हूती विद्रोहियों के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि इन हमलों का जहाज़ों पर हमला करने की उनके समूह की क्षमता पर कोई असर नहीं हुआ है.

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जहाज़ों पर क्यों हमले कर रहे हैं विद्रोही?
हूती विद्रोही यमन का सशस्त्र विद्रोही गुट है. ये यमन के शिया मुसलमानों का समूह है जिन्हें ज़ैदी कहा जाता है. यमन की ज़्यादातर आबादी जिन इलाकों में रहती है, उन पर हूती विद्रोहियों का कब्ज़ा है. हूतियों ने सना और यमन के उत्तरी हिस्से पर भी कब्ज़ा किया हुआ है. लाल सागर की तटीय सीमा पर भी उनका कब्ज़ा है.
पश्चिमी देशों की सरकारों का आधिकारिक रूप से ये कहना है कि हूती विद्रोहियों पर किए गए हालिया हमले ग़ज़ा में चल रहे युद्ध से काफी हद तक अलग हैं.
पश्चिमी देशों का कहना है कि उनकी ओर से की जा रही कार्रवाई लाल सागर में हूती विद्रोहियों की ओर से कमर्शियल जहाज़ों को निशाना बनाए जाने का ‘ज़रूरी और संतुलित जवाब है.’
यमन और अरब जगत के दूसरे देशों में इस कार्रवाई को अलग तरह से देखा जा रहा है.
इन देशों का मानना है कि अमेरिका और ब्रिटेन ग़ज़ा युद्ध में इसराइल की ओर से शरीक हो रहे हैं. इसकी वजह ये है कि हूती विद्रोही अपनी कार्रवाई को हमास और ग़ज़ा के लोगों के साथ एकजुटता बताते रहे हैं.
कुछ लोगों का तो दावा ये भी है कि ‘पश्चिमी देश नेतन्याहू के कहने पर चल रहे हैं.’

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अमेरिकी कार्रवाई का क्या होगा असर
इन हवाई हमलों का हूती विद्रोहियों के मनोबल पर असर हो सकता है. ये तो तय है कि कुछ वक़्त के लिए वो जहाज़ों पर हमले में कमी लाएँगे. लेकिन ये हवाई हमले जितने लंबे समय तक चलेंगे, अमेरिका और ब्रिटेन के यमन में एक और संघर्ष में फंसने का ख़तरा उतना ही बढ़ता जाएगा.
अमेरिका का कहना है कि समुद्र के जरिए दुनिया भर में होने वाले कारोबार का 15 फ़ीसदी लाल सागर से होकर गुजरता है. इनमें वैश्विक अनाज का हिस्सा आठ फ़ीसदी, समुद्र के रास्ते जाने वाले तेल का 12 प्रतिशत और तरल प्राकृतिक गैस का आठ फ़ीसदी हिस्सा शामिल है.
अमेरिका का कहना है कि इस समूह ने अब तक लाल सागर और अदन की खाड़ी में 28 बार जहाज़ों पर हमला करने की कोशिश की है.
उसके बाद से कई प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने इस इलाके में अपने ऑपरेशन पर रोक लगा दी है. दिसंबर की शुरुआत से बीमा की कीमत करीब 10 गुना बढ़ गई है.
हमास ने पिछले साल सात अक्टूबर को इसराइल पर हमला किया था. इस हमले में करीब 12 सौ लोगों की मौत हुई थी और इसके बाद से इसराइल ने ग़ज़ा पर हमले शुरू किए.
अमेरिका और ब्रिटेन ने इसराइल को समर्थन दिया.
हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ग़ज़ा में इसराइल के अभियान में अब तक 23 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ये भी दावा किया जाता है कि कई हज़ार लोगों के शव मलबे में दबे हुए हैं.
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