इराक़ः 'लगा नर्क का दरवाज़ा खुल गया हो...', आग से बचे लोगों ने बीबीसी को क्या-क्या बताया

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- Author, ईथर शैलबी
- पदनाम, बीबीसी अरबी
इराक़ में एक शादी समारोह के दौरान लगी भीषण आगजनी में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं जबकि काफ़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.
आगजनी की ये घटना उत्तरी इराक़ के क़राकोश में हुई है.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बीबीसी को बताया कि आग लगने के बाद वहां डर और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया था.
मंगलवार की शाम को जब ये आग लगी तो 19 साल के घाली नसीम, अल-हैतम बैंक्वेट हॉल से महज कुछ मीटर दूर पर ही मौजूद थे.
अंदर फंसे अपने पांच दोस्तों की मदद के लिए वो दौड़े. उन्होंने बताया, "एक दरवाज़ा बंद था, इसलिए हमने धक्का देकर उसे खोला. हॉल से आग की विशाल लपटें निकल रही थीं. ऐसा लगा कि नर्क का दरवाज़ा खुल गया हो. वहां असहनीय गर्मी थी. गर्मी इतनी अधिक थी, कि मैं बता नहीं सकता."
इस आग में क़रीब 115 लोग मारे गए और 150 से अधिक घायल हुए हैं.
'रीयल ट्रैजेडी'

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ये आग दूल्हा और दुल्हन के पहले दौर के नृत्य के बाद लगी. अभी तक स्पष्ट नहीं है कि दूल्हा दुल्हन की स्थिति क्या है.
नसीम ने इस घटना को 'रीयल ट्रैजेडी' बताया. उन्होंने कहा, "मैं कुछ नहीं कर सका और आग से दूर भाग गया."
फ़ोन पर उनकी आवाज़ थकी हुई लग रही थी. उन्होंने बताया, "दमकल कर्मियों के आने के बाद मैं अपने दोस्तों को तलाशने अंदर दौड़ा. बाथरूम में मैंने 26 लाशें देखीं. कोने में एक 12 साल की लड़की पूरी तरह जल कर पड़ी हुई थी."
इराक़ के सिविल डिफ़ेंस मीडिया प्रवक्ता गादत अब्दुल रहमान ने बीबीसी को बताया कि ये आग पटाखों की वजह से लगी जिसे हॉल के अंदर जलाया जा रहा था. ये कस्बा ईसाई बहुल है.
उन्होंने कहा कि हॉल के अंदर ज्वलनशील चीजों का इस्तेमाल किया गया था जिसने आग को भड़काने में योगदान किया.
नसीम का मानना है कि पर्याप्त इमरजेंसी निकास द्वारों के न होने के कारण हालात और ख़राब हो गए थे, क्योंकि अधिकांश मेहमानों ने हॉल से बाहर निकलने के लिए मुख्य द्वार का इस्तेमाल किया, जिससे भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई.
'मिनटों में सब कुछ तबाह हो गया...'

उन्होंने बताया कि उनके दोस्त सुरक्षित हैं. इनमें से एक 17 साल के टोमी उदय, आग लगने के समय निकास द्वार पर ही खड़े थे. इसकी वजह से वो आसानी से बच निकले.
उन्होंने बताया, "मैंने देखा कि छत से काले धुएं का एक बड़ा गुबार निकल रहा है, मैं तेजी से वहां से भाग खड़ा हुआ. पूरी जगह महज पांच मिनटों के अंदर ही तबाह हो गई."
बुधवार को 50 शवों को दफ़नाया गया. बाकियों को दूसरे दिन दफ़नाया जाना है. लेकिन अभी भी बहुत से लोग अपने परिवार के लोगों को खोज रहे हैं.
जब आग भड़की, गाज़वान अपनी 33 साल की पत्नी और चार साल के बेटे और 13 साल की बेटी से बिछड़ गए थे.
गज़वान की बहन इसान ने बीबीसी को बताया, "उनकी 10 साल की एक अन्य बेटी हॉल से बाहर आई तो उसका शरीर लगभग पूरा ही जला हुआ था."
उन्होंने बताया कि उनके भाई अपने परिवार को अस्पतालों में जा जाकर तलाश रहे हैं.
सबसे अधिक बच्चे प्रभावित

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मोसुल में जलने के लिए बने विशेष मेडिकल सेंटर में डॉक्टर वाड सलेम ने बीबीसी को बताया कि जले हुए 60 फ़ीसदी लोगों की हालत गंभीर है.
उन्होंने बताया, "अधिकांश लोगों के चेहरे, सीने और हाथ जले हैं. इनमें महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं."
मुख्य नर्स इसरा मोहम्मद ने पूरी रात घायलों का इलाज किया. उन्होंने बीबीसी को बताया कि उन्होंने करीब 200 मरीजों को अटेंड किया.
उन्होंने बताया, "जो मैंने देखा वो बहुत दर्दनाक था. मैंने ऐसे लोगों को देखा जो 90 फीसदी तक जल गए थे. अस्पताल पहुंचने के बाद 50 बच्चों को मृत घोषित किया गया था."
मोहम्मद ने बताया कि अस्पताल में दवाओं और अन्य सुविधाओं की किल्लत खड़ी हो गई है और पीड़ितों की अधिक संख्या के चलते उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है.
नसीम और उनके दोस्तों की तरह बहुत से लोगों के लिए यह भयावह घटना जल्द नहीं भुलाई जा सकेगी.
उन्होंने कहा, "मैं बता नहीं सकता कि मैं क्या महसूस करता हूं. मैं ऐसे परिवार को जानता हूं जिसमें कोई नहीं बचा. कम से कम तीन परिवार ऐसे हैं जिनमें कोई नहीं बचा. पूरा समाज दुख में डूबा है, सिर्फ नाइनेवेह प्रांत ही नहीं बल्कि पूरा इराक़ शोक में डूबा है."
(डालिया हैदर की अतिरिक्त रिपोर्टिंग)
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