लाल सागर में जहाज़ों पर अगर होते रहे हमले तो क्या होगा इसका असर?

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- Author, माइकल रेस
- पदनाम, बीबीसी बिज़नेस संवाददाता
बीते दिनों लाल सागर में समुद्री रास्तों से आवाजाही कर रही दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियों पर विद्रोहियों के हमले हुए हैं, जिसके बाद कुछ कंपनियों ने अपने जहाज़ों के रास्ते बदलने का फ़ैसला किया है.
कंपनियों के इन फ़ैसलों का वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर हो सकता है.
हाल के दिनों में यमन में हूती विद्रोहियों ने कमर्शियल मालवाहक जहाज़ों पर हमले किए हैं.
दुनिया के सबसे व्यस्ततम शिंपिंग रास्तों में से एक लाल सागर से आवाजाही करने वाले जहाज़ों पर हमलों ने कंपनियों को बाध्य कर दिया है कि वो इस रास्ते से अपने जहाज़ न भेजें.
इन हमलों को अंजाम दे रहे हूती विद्रोही ख़ुद को हमास का समर्थक बताते हैं. उनका कहना है कि वो उन जहाज़ों को निशाना बना रहे हैं जो इसराइल की तरफ़ जा रहे हैं.
हालांकि अब तक ये साफ़ नहीं है कि इन विद्रोहियों ने जिन जहाज़ों पर हमले किए वो सभी असल में इसराइल की तरफ़ ही जा रहे थे.

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अब तक क्या हुआ?
बीते साल अक्तूबर में इसराइल और हमास के बीच जंग शुरू होने के बाद हूती विद्रोहियों ने अपने हमले बढ़ा दिए हैं.
ये ईरान समर्थित विद्रोही समूह है जो बाब अल-मन्दाब की खाड़ी से गुज़रने वाले विदेशी मुल्कों के जहाज़ों पर ड्रोन और रॉकेट हमले कर रहा है.
बाब अल-मन्दाब की खाड़ी 20 मील चौड़ी वो जगह है जो अफ्रीकी प्रायद्वीप में इरीट्रिया और जिबूती को अरब प्रायद्वीप के यमन से अलग करती है. ये लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ती है.
दक्षिण की तरफ से मालवाहक जहाज़ अक्सर मिस्र तक पहुंचने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं. इसके बाद स्वेज़ कनाल से होते हुए वो आगे उत्तर की तरफ बढ़ते हैं.
लेकिन जहाज़ों पर हो रहे हमलों और भविष्य में इसे लेकर बढ़ रही आशंका के बीच मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी और मेयर्स्क जैसी दुनिया की कई बड़ी कंपनियों ने अपने जहाज़ों का रास्ता बदल दिया है. अब ये जहाज़ लाल सागर न होकर अफ़्रीका के केप ऑफ़ गुड होप से होते हुए फिर उत्तर की तरफ़ आगे बढ़ेंगे.
तेल कंपनी बीपी ने भी "बिगड़ती सुरक्षा स्थिति" का हवाला देते हुए कहा है कि वो लाल सागर के रास्ते कच्चा तेल ले जा रहे अपने जहाज़ों को फिलहाल रोक रहा है.
परेशानी की बात ये है कि अगर जहाज़ लाल सागर का अपना रास्ता छोड़कर दूसरा रास्ता अपना लेते हैं तो इसे माल पहुंचाने में 10 दिन की देरी हो सकती है, इसका आर्थिक असर भी कंपनी पर पड़ेगा जिसे अब इसके लिए अधिक डॉलर खर्च करने पड़ेंगे.

बाब अल-मन्दाब की खाड़ी की अहमियत
- विश्व मानचित्र को देखें तो मिस्र से होकर गुज़रने वाली स्वेज़ कनाल भूमध्यसागर को लाल सागर से जोड़ती है, जो आगे बाब अल-मन्दाबकी खाड़ी के रास्ते अदन की खाड़ी से जुड़ जाता है.
- अदन की खाड़ी अरब सागर पर खुलती है.
- दूसरी तरफ भूमध्यसागर से रास्ता जिब्राल्टर से होते हुए उत्तरी अटलांटिक में खुलता है.
- इस तरह अफ्रीका के चारों ओर चक्कर लगाए बिना उत्तरी अटलांटिक से मालवाहक जहाज़ भूमध्यसागर और फिर लाल सागर होते हुए सीधे अरब सागर आ सकते हैं.

स्वेज़ कनाल से होकर गुज़रने वाला कोई भी जहाज़ अगर हिंद महासागर तक पहुंचना चाहता है, उसे लाल सागर और बाब अल-मन्दाब से होकर गुज़रना ही पड़ेगा.
स्वेज़ कनाल एशिया को यूरोप से जोड़ने वाला सबसे तेज़ समुद्री रास्ता है. कच्चे तेल और लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस लाने-ले जाने के लिहाज़ से ये बेहद अहम है.
फ्रेट एनालिटिक्स कंपनी वॉरटेक्सा के अनुसार साल 2023 के पहली छमाही में इस रास्ते हर रोज़ क़रीब 90 लाख बैरल तेल दूसरे मुल्कों तक पहुंचाया गया.
एस एंड पी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के विश्लेषक कहते हैं कि एशिया और खाड़ी से यूरोप, मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका तक पहुंचने वाला कम से कम 15 फीसदी सामान इसी रास्ते से होकर गुज़रता है. इसमें 21.5 फीसदी रिफाइन्ड तेल और 13 फीसदी कच्चा तेल शामिल है.
लेकिन ये मामला केवल तेल का आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है. इस रास्ते से होकर जाने वाले जहाज़ों पर जो कंटेनर लदे होते हैं उनमें टेलीविज़न, कपड़े, खेलों के सामान जैसी दूसरी चीज़ें भी होती हैं.

उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
ये तय है कि अगर जहाज़ों का रास्ता लाल सागर की तरफ से न होकर केप ऑफ़ गुड होप की तरफ से हो तो इसका सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ेगा.
एस एंड पी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के सप्लाई चेन रीसर्च के प्रमुख क्रिस रॉजर्स कहते हैं कि "इसका सबसे बड़ा असर उपभोक्ता सामान पर पड़ेगा."
हालांकि वो कहते हैं कि फिलहाल जो बाधा हुई है वो ऐसे वक्त हुई है जब शिपिंग सीज़न का पीक टाइम नहीं था.
इससे सामानों के दुकानों तक पहुंचने में कम से कम 10 दिन की देरी हो सकती है, क्योंकि लाल सागर का वैकल्पिक रास्ता, यानी केप ऑफ़ गुड होप का रास्ता उसके मुक़ाबले 3,500 नॉटिकल माइल्स लंबा है.
फर्नीचर कंपनी आइकिया और ब्रितानी खुदरा व्यापारी नेक्स्ट ने चेतावनी दी है कि अगर शिपिंग के रास्तों में रुकावट आना जारी रही तो सामान की सप्लाई में देरी हो सकती है.
न केवल सामान ले जाने का रास्ता अधिक होगा बल्कि इसे ले जाने के खर्च में भी इज़ाफा हो जाएगा. बीते एक सप्ताह में शिपिंग की कीमतों में क़रीब 14 फ़ीसदी तक की बढ़ातरी देखी गई है. कंपनी के ऊपर बढ़ा हुआ खर्च भी सीधे उपभोक्ता तक आएगा.
हालांकि इसमें राहत की एक बात ये है कि शिपिंग की कीमतें बीते साल की कीमतों की तुलना में अभी काफी कम हैं और 2021 में देखी गई कीमतों की तुलना में बेहद कम हैं. 2021 में कोविड महामारी के कारण जब पाबंदियां हटनी शुरू हुईं तब मांग बढ़ी और इसी के साथ शिपिंग की कीमतें भी बढ़ गई थीं.

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ये डर जताया जा रहा है कि सप्लाई चेन में रुकावट आना जारी रही तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं.
तेल की कीमतों का असर सीधे उपभोक्ता की जेब पर पड़ सकता है और इस कारण महंगाई बढ़ सकती है. यूके में हाल के वक्त में महंगाई धीरे-धीरे कम हो रही थी और इसकी दर 4.6 फीसदी हो गई थी.
अगर लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस की बात की जाए तो इसकी सप्लाई में रुकावट का असर ऊर्जा की कीमतों पर पड़ेगा. इससे व्यक्ति का ऊर्जा खर्च बढ़ने का खतरा है. हालांकि जानकार बताते हैं कि अप्रैल 2024 से पहले ऐसा होने की संभावना कम है.
ऐसा इसलिए क्योंकि सप्लायर ऊर्जा की जो कीमतें लेंगे उस पर प्राइस कैप लगाया गया है. ये कैप इस साल जनवरी में ही लगाया गया है ऐसे में ऊर्जा की कीमतें तुरंत नहीं बढ़ेंगी.
लेकिन क्या समुद्री रास्ता ही सामान लाने-ले जाने की एकमात्र उपाय है?
क्रिस रॉजर्स कहते हैं कि "अगर रेल मार्ग से सामान ले जाना पड़ा तो आपको रूस से होकर जाना पड़ेगा, लेकिन यूक्रेन पर हमला करने का बाद से उस पर प्रतिबंध लगे हुए हैं. ये उपाय अमल में नहीं लाया जा सकता."
"अगर हम सड़क मार्ग से खाड़ी देशों से होते हुए इसराइल तक सामान पहुंचाने की कोशिश करें तो भी इससे शिपिंग के खर्च में केवल 3 फीसदी की ही कटौती होगी."
समस्या सुलझाने के लिए क्या किया जा रहा है?
जहाज़ों पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद अमेरिका ने एक अंतरराष्ट्रीय नौसेना अभियान छेड़ दिया है.
उसके युद्धपोत लाल सागर में आवाजाही कर रहे कमर्शियल जहाज़ों की मदद कर रहे हैं. उसके इस अभियान में अब यूके, कनाडा, फ्रांस, बहरीन, नॉर्वे और स्पेन भी शामिल हो गए हैं.
अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा है कि इस क्षेत्र में जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही की इस कोशिश में और मुल्क भी सहयोग करें.
लेकिन सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद भी कुछ शिपिंग कंपनियों में इस रास्ते के इस्तेमाल को लेकर अभी आशंका है, वो अभी लाल सागर का इस्तेमाल नहीं करना चाहते.
सुरक्षा अभियान शुरू होने के बाद मेयर्स्क ने फिर से लाल सागर के रास्ते अपने जहाज़ भेजने की कोशिश की, लेकिन उसे अपनी कोशिशों को रोकना पड़ा.
लाल सागर में अपने एक मालवाहक जहाज़ पर फिर हमला होने के बाद उसने एक बार फिर इस रास्ते जहाज़ भेजने पर रोक लगा दी है.
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