लेबनान में हमास के डिप्टी चीफ़ को मारने से क्या इसराइल की जंग ग़ज़ा से बाहर जाएगी

 सालेह अल-अरुरी

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    • Author, लीज़ डुसेट
    • पदनाम, अंतरराष्ट्रीय मामलों की मुख्य बीबीसी संवाददाता

इसराइल और हमास के बीच चल रही जंग की शुरुआत के बाद से पूरे मध्य पूर्व और उससे आगे तक फैली डर की परछाई, अब हमास के वरिष्ठ अधिकारी की हत्या के साथ और लंबी और गहरी हो गई है.

हमास की राजनीतिक शाखा के डिप्टी प्रमुख सालेह अल-अरुरी की मौत लेबनान के बेरूत के दक्षिण में हुए एक ड्रोन हमले में हुई.

अरुरी हमास की सशस्त्र इज़्ज़ेदीन अल-कासम ब्रिगेड से जुड़े एक अहम नेता तो थे ही बल्कि उन्हें हमास प्रमुख इस्माइल हानिया का भी क़रीबी सहयोगी माना जाता है.

हिज़्बुल्लाह और हमास के बीच संबंध बनाए रखने के लिए वो लेबनान में थे.

बीते साल सात अक्तूबर को हमास के हमले के साथ शुरू हुए इसराइल-गज़ा युद्ध से पहले भी लेबनान में मौजूद हिज़्बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह ने कहा था कि लेबनान की ज़मीन पर निशाना बना कर किए गए किसी तरह के हमले का "मज़बूती से जवाब दिया जाएगा."

लेकिन हिज़्बुल्लाह और उसका समर्थन करने वाले ईरान के उसके सहयोगी को ये पता है कि मौजूदा वक़्त में उनकी तरफ़ से आई कोई भी प्रतिक्रिया न केवल युद्ध की दिशा और दशा बदल सकती है बल्कि ये हिज़्बुल्लाह का नसीब भी बदल सकती है.

इसराइल-ग़ज़ा जंग

क्या बदलेगा इसराइल का रुख़?

ये कोई राज़ नहीं था कि ग़ज़ा के बाहर रहने वाले हमास के नेताओं को भी आज नहीं तो कल इसराइल निशाना बनाएगा.

बीते साल नवंबर में ही इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने चेतावनी दी थी, "हमास के नेता जहाँ कहीं भी क्यों न छिपे हों इसराइल उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगा."

कुछ महीने पहले, उन्होंने साफ़ तौर पर अल-अरुरी की तरफ इशारा किया था. सालेह अल-अरुरी को अमेरिका आतंकवादी घोषित कर चुका है. अमेरिका ने 2018 से उन पर 50 लाख डॉलर का इनाम रखा है.

अधिकतर मामलों में इसराइल न तो किसी की हत्या की पुष्टि करता है और न ही उससे इनकार करता है. लेकिन लंबे चले इस संघर्ष के दौरान उसने कई लोगों को निशाना बनाकर हमले किए हैं. बदले की कार्रवाई और हिंसा का ये इतिहास भी है.

लेकिन इसराइल अब बदले के लिए तैयार होगा. उसके कब्जे़ वाले वेस्ट बैंक और उससे आगे भी हमास नेता और उनके सहयोगी लोगों से अपील कर रहे हैं.

सालेह अल-अरुरी

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हिज़्बुल्लाह और हमास को कुछ करना होगा और उन्हें कुछ करते हुए दिखना भी होगा

अल-अरुरी की हत्या के बाद हिज़्बुल्लाह ने अपना जो पहला बयान जारी किया उसमें उसने शांति की अपील की.

इससे पहले तक, हथियारों से लैस ये आर्मी और राजनीतिक ताक़त केवल शब्दों के जंग में उलझे रहने की कोशिश कर रही थी. वो दक्षिणी सीमा के पास से इसराइल पर सीमित हमले कर रही थी, साथ ही ये कोशिश भी कर रही थी की लेबनान को इस महंगे युद्ध में न खींचा जाए.

लेकिन हिज़्बुल्लाह का गढ़ माने जाने वाले बेरूत के इलाक़े में उसके और ईरान के लिए अहम हमास के सालेह अल-अरुरी की हत्या के बाद उसका हिसाब-किताब बिगड़ गया है. लेकिन वो लंबे समय के खेल के मुक़ाबले, कम वक़्त लेकिन ज़ोरदार हमलों के बीच तुलना कर रहा होगा.

कई स्तरों पर संकट से जूझ रहे लेबनान के अस्थिर दक्षिणी सीमा की तरफ़ हिज़्बुल्लाह का मज़बूत गढ़ है. लेकिन बेरुत और उससे आगे के इलाक़े में 2006 के इसराइल-लेबनान युद्ध की यादें लोगों के ज़ेहन में अब भी ज़िंदा हैं.

ये बात भी सार्वजनिक है कि इसराइल के वरिष्ठ नेता लंबे वक़्त से ये कोशिश कर रहे हैं कि वो इस मौक़ै का इस्तेमाल करते हुए हिज़्बुल्लाह को ख़त्म करें और अपनी उत्तरी सीमाओं को नागरिकों के लिए सुरक्षित करें.

बेरुत में इमारत पर हमला

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बदला और युद्ध के अन्य मोर्चे

इसराइली सुरक्षा बल पूरे ग़ज़ा में और वेस्ट बैंक की तरफ़ अपने क़दम तेज़ी से बढ़ा रहे हैं, लेकिन जहाँ तक इसराइल की उत्तरी सीमा की बात है, उस हिस्से में अब तक हताहतों की संख्या अधिक नहीं हुई है और हालात फिर भी नियंत्रण में हैं.

इसराइल के बड़े समर्थक, अमेरिका ने बार-बार चेतावनी दी है कि वो किसी सूरत में हिज़ुबुल्लाह तक युद्ध का विस्तार न करे क्योंकि इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.

लेकिन बेरूत में सालेह अल-अरुरी और छह अन्य लोगों की मौत (जिनमें से दो हमास के सैन्य कमांडर थे) की घटना ऐसे वक़्त हुई है, जब इसराइल के लिए दूसरे मोर्चों पर भी तनाव बढ़ रहा है.

इनमें लाल सागर में शिपिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले समुद्री रास्ते शामिल हैं, जहाँ ईरान समर्थित हूती विद्रोही गुट जहाज़ों पर हमले कर रहे हैं. हूती विद्रोहियों का दावा है कि इसराइल की कार्रवाई के बदले वो इसराइल से जुड़े जहाजों को निशाना बना रहे हैं.

इसराइली रक्षा मंत्री योआव गैलांट ने हाल में सात मोर्चों की बात की है, जहां से इसराइल पर हमले हो रहे हैं, इनमें यमन, लेबनान, सीरिया और इराक़ शामिल हैं.

इस युद्ध के अब इसराइल-गज़ा से निकल कर और फैलने की आशंकाओं के बीच पश्चिमी मुल्क लेबनान में राजनेताओं और संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों से शांति और संयम की अपील कर रहे हैं.

लेकिन इस मामले में इसराइल शुरू से ही स्पष्ट रहा है.

उसने कहा है कि युद्ध का उसका उद्देश्य "हमास को पूरी तरह से नष्ट करना" है. उसका कहना है कि वो हमास के बुनियादी ढांचे, उसकी सैन्य और राजनीतिक ताक़त के साथ-साथ उसके वित्तीय क्षमता को भी ख़त्म करेगा.

इसराइल-ग़ज़ा युद्ध को अब लगभग तीन महीने हो चुके हैं. इसराइल भी मान रहा है कि अब भी उसे एक लंबा रास्ता तय करना है.

इसराइल

इसराइल के कई दोस्त और दुश्मन अब ये सवाल कर रहे हैं कि क्या सैन्य ताक़त और सैन्य अभियान के ज़रिए हमास को जड़ से ख़त्म किया जा सकता है?

एक ऐसा सैन्य अभियान जो हज़ारों आम नागरिकों की मौत का कारण बन जाए, जिससे गंभीर मानवीय त्रासदी पैदा हो और जिसके आने वाले वक़्त में गहरे दर्द और ग़ुस्से को जन्म देने की संभावना हो.

इसराइल के भीषण सैन्य अभियान के बाद भी सात अक्तूबर को हुए इसराइल के दक्षिणी हिस्से में हमास के हमले का मास्टरमाइंड माने जाने वाले याह्या सिनवार समेत हसाम से और नेता ग़ज़ा में कहीं छिपे हैं.

लेबनान में सालेह अल-अरुरी की हत्या के बाद अब तुर्की और क़तर का ध्यान इस तरफ़ होगा जबकि वहाँ भी हमास के नेता मौजूद हैं और माना जाता है कि वो वहाँ सुरक्षित हैं.

उनके अलावा ये हत्या उन इसराइली नागरिकों के दिमाग़ों पर भी हावी रहेगी जिनके रिश्तेदार अब भी हमास के पास बंधक हैं और शायद कहीं ग़ज़ा में हैं.

हालांकि इस हत्या का सबसे पहला और बड़ा खामियाज़ा भुगतना पड़ा इसराइल और हमास के बीच चल रही बातचीत को.

हमास के कब्ज़े में मौजूद इसराइली बंधकों और इसराइल की जेलों में बंद फ़लस्तीनियों को छुड़ाने के लिए काहिरा में दोनों पक्षों के बीच हो रही बातचीत अब बंद हो गई है.

इधर इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का इस पर ज़ोर देना जारी है कि "हमास के ख़िलाफ़ केवल दबाव की राजनीति काम करेगी."

लेकिन लेबनान में हमास के नेता पर हुए हमले के बाद अब इसराइल ने शिकंजा और कस दिया है.

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वीडियो कैप्शन, बेरूत में हुए इस हमले में हमास उप-प्रमुख और कम से कम पांच अन्य की मौत हो गई.
वीडियो कैप्शन, 'महीनों तक जारी रहेगी ग़ज़ा में जंग'