तुर्की में 'चूहों की तरह छिपकर' क्यों रह रहे हैं सीरियाई शरणार्थी

एक सीरियाई शरणार्थी
    • Author, फंडानूर ओजतुर्क
    • पदनाम, बीबीसी तुर्की सेवा

तुर्की के गृह मंत्री ने कहा है कि पिछले छह महीनों में 600,000 प्रवासी स्वेच्छा से अपने देश लौट गए हैं.

वहीं सीरियाई प्रवासियों का कहना है कि कई लोगों को उनकी इच्छा के ख़िलाफ़ निर्वासित किया जा रहा है.

यासेर पांच साल से इस्तांबुल में अपने परिवार के साथ रह रहा था, जब तीन महीने पहले पुलिस उस कारखाने में पहुंची जहां वह काम करता था, पुलिस उनके काग़ज़ात की जांच के लिए आई थी.

यासेर इस्तांबुल की जगह अंकारा में रहने के लिए पंजीकृत थे. इसलिए पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई. उन्हें पहले शहर के बाहरी इलाके तुजला में निष्कासित किए जाने वाले लोगों के लिए बनाए हए एक केंद्र में भेजा गया. वहां से उन्हें सीरियाई सीमा से 150 कि.मी. दूर मेर्सिन भेज दिया गया.

तीन दिनों तक उनकी पत्नी ज़ाना उनसे मिल नहीं पाईं.

वह कहती हैं, ''मुझे बस इतना पता था कि पुलिस उन्हें ले गई है, लेकिन मुझे नहीं पता था कि वो कहां हैं.''

अंत में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन इस शर्त पर कि वो अंकारा चले जाएंगे. वहां अब वो अपनी पत्नी और आठ महीने के बच्चे के साथ एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रह रहे हैं.

यासेर कहते हैं, "पिछले कुछ महीनों से पुलिस हर जगह पहचान पत्रों की जांच कर रही है."

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

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गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पिछले छह महीनों में 173, 000 अनियमित प्रवासियों को पकड़ा गया है. इस आंकड़े में 2022 की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. साल 2022 में 285,000 अनियमित प्रवासी पकड़े गए थे.

इन आंकड़ों से पता चलता है कि उसी छह महीने के दौरान 30 शहरों में दस्तावेज़ों की जांच के बाद करीब 44,572 प्रवासियों को निर्वासित किया गया था. तुर्की के गृह मंत्री अली येरलिकाया ने कहा है कि 604,277 प्रवासी स्वेच्छा से अपने देश लौट गए हैं.

वो बताते हैं कि तुर्की ने 30 लाख से अधिक सीरियाई शरणार्थियों को शरण दी है, यह किसी भी अन्य देश से अधिक है. उनका कहना है कि तुर्की प्रवासियों का लक्ष्य या ट्रांसिट कंट्री अब और नहीं बनेगा.

अनियमित प्रवासियों की संख्या की जानकारी नहीं है.

हाल ही में तुर्की पहुंचे सीरियाई लोगों का कहना है कि 'अस्थायी सुरक्षा' का दर्जा हासिल करना अब करीब-करीब असंभव हो गया है.

23 साल के माहीर छह महीने पहले सीरिया से तुर्की आए थे. वो एक विस्फोट में जल गए थे, वो उसी का इलाज कराने आए थे. वो कहते हैं कि अंकारा में अब पंजीकरण बंद है, ऐसा ही कई दूसरे बड़े शहरों में भी है.

इसका मतलब यह हुआ कि उनके लिए अपना आवास छोड़ना सुरक्षित नहीं है.

वो बताते हैं, "एक समय मैं अपने पड़ोस में टहलना चाहता था, लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने मुझे कोने पर रोक कर मेरी आईडी मांगी. मेरे जले हुए चेहरे को देखने के बाद उसने खेद महसूस किया. उसने कहा कि यहाँ इधर-उधर मत घूमो. यह कहकर उसने मुझे जाने दिया.''

वो कहते हैं, "जब तक कोई ज़रूरी काम न हो, मैं बाज़ार भी नहीं जा सकता. मैं इलाके को घूम-फिरकर देखता हूं और जल्दी से घर वापस लौट आता हूं, क्योंकि यहाँ हर तरफ पुलिस गश्त पर होती है."

दूसरे लोग भी इसी तरह की ही स्थिति में रह रहे हैं.

वो कहते हैं कि सोलह साल के नासेर पहले शहर के अल्टिंडाग इलाके में अपने पड़ोस में आराम से घूमते थे, लेकिन अब वह हमेशा सतर्क रहते हैं.

वो कहते हैं, ''एक साल पहले, जब मैं पुलिस के पास से गुज़रता था तो कोई भी आईडी नहीं मांगता था, लेकिन अब जब भी मैं दूर से किसी पुलिसकर्मी को देखता हूं, तो भाग जाता हूं.''

इससे स्कूल जाने और तुर्की सीखने की उनकी योजना विफल हो गई है.

वो कहते हैं, "मुझे अपने भविष्य के लिए कोई उम्मीद नहीं है, कोई योजना नहीं है. अगर मेरे पास करने के लिए कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं होता है, तो मैं बाहर नहीं जाता. यह बिल्कुल जेल में रहने जैसा है."

लौटकर कहां जाएंगे?

एक सीरियाई शरणार्थी

नासेर बताते हैं कि उनके घर पर सीरियाई सरकारी सुरक्षा बलों ने बमबारी की थी. वो सात साल तक एक शरणार्थी शिविर में रहे हैं. वो अब वापस नहीं लौटना चाहते हैं, क्योंकि उनके माता-पिता की मौत हो चुकी है. सीरिया में अब उनका कोई रिश्तेदार नहीं बचा है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सीरिया के अग्रिम मोर्चों पर गतिरोध के बावजूद देश में हिंसा की आशंका है और बड़े पैमाने पर लोगों को वापस किए जाने पर उन्हें हिरासत में लिए जाने का ख़तरा है.

राशा सिंगल मदर हैं. वो अंकारा के केसीओरेन ज़िले में अपने पांच और सात साल के दो बच्चों के साथ रह रही हैं.

राशा का कहना है कि वो लोग तीन महीने कुछ खरीदारी करने सिटी सेंटर गए थे, उसके बाद उनमें से किसी ने भी घर नहीं छोड़ा है.

वो कहती हैं, "हमने देखा कि एक पुलिसकर्मी हमारी ओर आ रहा है. यह देखकर हम भीड़ के बीच से भागने लगे, जैसे हम कोई अपराधी हों.''

वो कहती हैं, "फिर उन्होंने हमारे पड़ोस से दो युवाओं को पकड़ लिया और उन्हें सीरिया भेज दिया. उस दिन के बाद से, मैं बाज़ार भी नहीं जा सकती हूं, मुझे लगता है कि मेरा जीवन खाली है, न मैं सीरिया लौट सकती हूं और न यहां रह सकती हूं."

वो कहती हैं कि अंदर ही अंदर बंद वे तीनों लोग लगातार उदास होते जा रहे हैं.

तमीम पिछले 10 साल से तुर्की में रह रहे हैं. प्रवासियों के प्रति आधिकारिक रवैये में आए बदलाव की वजह से वो दो साल पहले अल्टिंडाग में तुर्की और सीरियाई युवाओं के बीच हुई लड़ाई को बताते हैं. इस झगड़े में एक युवा तुर्क की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी.

इसके बाद तनाव दूसरे शहरों में भी फैल गया.

सीरियाई शरणार्थी और तुर्की की अर्थव्यवस्था

तुर्की के चुनाव

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इस घटना के बाद से संरक्षित स्थिति के लिए रजिस्ट्रेशन कराना कठिन हो गया. तमीम रजिस्टर्ड हैं, लेकिन अब वो नए पते पर जाने में असमर्थ हैं.

उनके चचेरे भाई को संरक्षित दर्जा नहीं मिल पाया था. उनका चचेरा भाई उन लोगों में से एक है जिन्हें निर्वासित किया गया है.

तमीम बताते हैं, ''उन्होंने उसे दो हफ्ते पहले सीरिया वापस भेज दिया. उसकी पत्नी और और दो बच्चे यहां रह गए थे. इस वजह से वह तस्करों के ज़रिए दो हफ्ते के अंदर ही तुर्की लौटने में कामयाब रहा."

आर्थिक संकट समेत तुर्की की कई समस्याओं ने प्रवासियों के प्रति नज़रिए में बदलाव लाने में मदद की है. सर्वेक्षणों से पता चलता है कि तुर्की के कुछ लोग अपनी बिगड़ती अर्थव्यवस्था के लिए सीरियाई शरणार्थियों को दोषी मानते हैं. वो लोग सीरियाई शरणार्थियों पर तुर्की की नौकरियां लेने का आरोप लगाते हैं. कुछ महीने पहले हुए आम चुनाव में आप्रवासी विरोधी भावनाओं ने एक राजनीतिक बहस को आकार दिया.

कुछ सीरियाई शरणार्थियों ने तुर्की भाषा सीखी और अपनी पढ़ाई जारी रखी और नौकरियां हासिल कीं. लेकिन अधिकांश हिस्सों में उनमें एकता नहीं है, वे हाशिए पर हैं और उनकी कोई आवाज़ नहीं है.

स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच

सीरिया में अपने घर बनाए जाने के बाद तुर्की से वापस लौटता एक परिवार

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यासेर जिन्हें इस्तांबुल से अंकारा जाने के लिए मजबूर किया गया था, उनकी पत्नी वसंत ऋतु में अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली हैं.

अपने पति से अलग उनके पास कोई काग़ज़ नहीं है, इस वजह से उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाता है. इसलिए उन्हें प्रसव के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ता है.

उनके पहले सिजेरियन ऑपरेशन पर 5000 लीरा (171 डॉलर) का खर्च आया था, लेकिन उन्हें कह दिया गया है कि अगले पर इसका तीन गुने से भी अधिक का खर्च आएगा. उन्हें नहीं पता है कि इस खर्च को वो लोग कैसे उठाएंगे.

वो कहती हैं, ''कभी-कभी मुझे प्रसव पीड़ा का अनुभव होता है, लेकिन मुझे कोई डॉक्टर नज़र नहीं आता है.''

यासेर कहते हैं कि सीरिया की तुलना में तुर्की में रहना स्वर्ग जैसा था, लेकिन अब यह असहनीय होता जा रहा है.

वो कहते हैं, "हमारे पास तीन विकल्प हैं- या तो यूरोप जाएं, सीरिया लौटें या तुर्की में चूहों की तरह छिपकर रहें.''

वो कहते हैं, "मैं यूरोप नहीं जा सकता क्योंकि मेरे पास पर्याप्त पैसा नहीं है और युद्ध के कारण मैं सीरिया नहीं लौट सकता, लेकिन अगर सीरिया में स्थिति में हालात सुधरते हैं तो मैं यहां नहीं रहूंगा."

(पहचान छिपाने के लिए इस कहानी में सभी लोगों के नाम बदल दिए गए हैं.)

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