तुर्की का गोल्डन पासपोर्ट लेने की क्यों मची होड़, पाकिस्तानी भी हो रहे दीवाने

तुर्की का पासपोर्ट

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    • Author, महमूत हमसीची
    • पदनाम, बीबीसी तुर्की

एक इंटरनेशनल कंसल्टेंसी कंपनी की वेबसाइट पर एक ख़ास सेक्शन में उन देशों की लिस्ट लगी है, जहां पर निवेश करके वहां की नागरिकता हासिल की जा सकती है.

इन देशों की सूची में तुर्की का नाम भी शामिल है. इस सेक्शन में बताया गया है कि आप कैसे और कितना निवेश करके यहां की नागरिकता ले सकते हैं.

तुर्की वाले हिस्से के आख़िर में लिखा है 'रियल एस्टेट में निवेश करना तुर्की की नागरिकता लेने का सबसे आकर्षक तरीका है और आप वहां चार लाख डॉलर की कोई संपत्ति ख़रीदकर ऐसा कर सकते हैं.'

इस तरीके से तुर्की की नागरिकता हासिल करना, ऐसी ही व्यवस्था देने वाले बाक़ी देशों की तुलना में सस्ता है. 2022 से पहले तक तो यह रकम सिर्फ ढाई लाख डॉलर थी, जिसे बाद मे बढ़ा दिया गया था.

तुर्की में इस योजना को लेकर अच्छे और बुरे, दोनों तरह के भाव हैं. इस तरह से नागरिकता देना सही है या नहीं, इस बारे में दुनिया के बाक़ी देशों में भी चर्चा हो रही है.

आइए देखते हैं कि निवेश करके नागरिकता हासिल करने की योजना को लेकर तुर्की में क्या व्यवस्था है और ऐसी योजनाओं के क्या नफ़े-नुक़सान हैं.

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गोल्डन पासपोर्ट

निवेश के ज़रिये नागरिकता हासिल करने को गोल्डन पासपोर्ट हासिल करना कहा जाता है. यह गोल्ड वीज़ा से अलग है, जिसके तहत विदेशियों को किसी देश में निवेश करने या फिर रहने की अनुमति मिलती है.

गोल्डन पासपोर्ट लेने के लिए विदेशी नागरिक उस देश में एक निश्चित रकम का निवेश कर सकते हैं और कुछ अन्य शर्तों का पालन करके नागरिकता हासिल कर सकते हैं.

दुनिया में इस तरह की व्यवस्था 1980 के दशक से ही मौजूद है, लेकिन हाल के सालों में यह एक बड़ा उद्योग बनकर उभरी है.

ब्रिटेन की ला विदा गोल्डन वीज़ा कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर लिज़ी एडवर्ड्स ने बीबीसी तुर्की को बताया कि निवेशक क्यों विदेशी नागरिकता हासिल करना चाहते हैं.

वह कहती हैं, "इन दिनों दुनिया में जिस तरह की निश्चितता बनी हुई है, उसे देखते हुए निवेशक अपने प्लान बी के बारे में सोच रहे होते हैं. आजकल एक अतिरिक्त नागरिकता की पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है."

लिज़ी के मुताबिक़, भले ही निवेशकों के नागरिकता लेने के कारण अलग-अलग हों, लेकिन मुख्य रूप से वे सुरक्षा, बिना वीज़ा के यात्रा की सुविधा हासिल करने और शिक्षा या रोज़गार के बेहतर अवसरों के चलते ऐसा करते हैं.

इस बारे में तुर्की की अलतिन्बस यूनिवर्सिटी के क़ानून विभाग के प्रमुख डॉक्टर इल्यास ने कहा कि 'जो लोग इस प्रक्रिया का समर्थन करते हैं, उनकी नज़र में यह विकासशाली देशों के लिए निवेश बढ़ाने का एक अवसर है.'

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तुर्की की नीति क्या है

तुर्की में साल 2016-2017 में विदेशियों को नागरिता लेने के अतिरिक्त विकल्प देने के लिए एक क़ानून लाया गया था. इसमें निवेश के माध्यम से भी नागरिकता हासिल करने का प्रावधान था.

साल 2017 में इसके लिए दस लाख डॉलर की प्रॉपर्टी ख़रीदना या 20 लाख का पूंजीगत निवेश या कम से कम 100 लोगों को रोज़गार देना ज़रूरी था.

साल 2018 में इसमें संशोधन करके नियम बदल दिए गए. प्रॉपर्टी को पांच लाख डॉलर कर दिया गया, पूंजीगत निवेश की रकम ढाई लाख डॉलर कर दी गई और रोज़गार की संख्या 50 कर दी गई.

हालांकि, इसके बाद जब इस योजना में विदेशियों की दिलचस्पी बढ़ी तो रकम को 2022 मे फिर बढ़ा दिया गया. रियल एस्टेट में निवेश बढ़ाकर 4 लाख कर दिया गया.

लिज़ी का कहना है कि इस बढ़ोतरी ने तुर्की की नागरिकता की मांग को भी प्रभावित किया. उनका कहना है कि जब रकम कम थी तो आवेदन ज़्यादा हुए थे. यह अभी भी अच्छा प्रोग्राम है, लेकिन बहुत से लोगों की पहुंच से दूर हो गया है.

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कितने लोगों को मिली नागरिकता?

मेरी तरह आपकी भी दिलचस्पी होगी कि कितने विदेशियों को निवेश के माध्यम से तुर्की की नागरिकता मिली.

तुर्की के संबंधित मंत्रालय की ओर से सितंबर 2019 में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, एक साल के अंदर 2611 लोगों ने नागरिकता ली.

इसमें यह भी बताया गया कि देश में इस तरीक़े से नागरिकता लेने वाले निवेशकों और उनके परिजनों की संख्या 9962 हो गई है.

तुर्की के आंतरिक मामलों के पूर्व मंत्री सुलेमान सोयलू ने साल 2022 में एक रिपोर्ट साझा की थी और बताया था कि 25,969 लोगों ने निवेश के ज़रिये नागरिकता लेने के पैमाने को पूरा किया है.

उनके मताबिक़, इस तरीक़े से तुर्की में 7 अरब डॉलर का निवेश आया है. इसमें से 530 मिलियन डॉलर का निवेश रियल एस्टेट में हुआ है.

कार्ड

तुर्की सरकार की ओर से जारी बयान को देखें तो मध्य पूर्व के देशों में साल 2019 में यह नीति बहुत लोकप्रिय थी.

इस तरीक़े से नागरिकता लेने वाले नागिरकों के टॉप 10 देशों में पाकिस्तान भी शामिल है.

बीबीसी तुर्की ने इस सम्बंध में तुर्की के आंतरिक मंत्रालय के जनसंख्या एवं नागरिकता मामलों के निदेशालय और जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों से सम्बंधित संस्थान टीयूआईके से ताज़ा आंकड़े मांगे थे, मगर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है.

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तुर्की में साल 2022 में घरों की बिक्री के आंकड़े बताते हैं कि 67,490 मकान विदेशियों को बेचे गए. सबसे ज़्यादा घर खरीदने वाले रूसी थे. इनकी संख्या थी 16 हज़ार 312. रूसियों के बाद ईरानी (8223) और इराकी (6241) थे.

तुर्की में यूक्रेनियों द्वारा प्रॉपर्टी लेने की संख्या भी बढ़ी है, जिन्होंने इस दौरान 2574 मकान खरीदे.

ध्यान देने की बात यह है ये सभी मकान निवेश के ज़रिये नागरिकता लेने के लिए नहीं खरीदे गए.

डॉक्टर इल्यास कहते हैं कि विदेशी निवेश लाने के लिए कई तरीके अपनाए जा रहे हैं लेकिन रियल एस्टेट में निवेश करवाना सबसे ज़्यादा इस्तेमाल हो रहा है. उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन जंग के कारण रूसियों का तुर्की में ज़्यादा निवेश करना हैरान नहीं करता.

ईरान, रूस, इराक और अफ़ग़ानिस्तान के निवेशकों के लिए भी तुर्की पसंदीदा जगह बन गया है. ये वो देश हैं, जहां के नागरिकों को यूरोपीय संघ के देशों में नागरिकता लेने में मुश्किल होती है.

वहीं, लिज़ी कहती हैं कि तुर्की में नागरिकता लेने का चलन इसलिए बढ़ा है, क्योंकि यह मध्य पूर्व के नज़दीक है और लोगों को धार्मिक और सांस्कृतिक तौर पर भी ज़्यादा दिक्कत नहीं होती.

साइप्रस में विरोध प्रदर्शन

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इमेज कैप्शन, साइप्रस में निवेश से नागरिकता देने के विरोध में प्रदर्शन

क्यों होती है गोल्डन पासपोर्ट की आलोचना

इस योजना का विरोध करने वालों का कहना है कि नागरिकता खरीद-फरोख्त की वस्तु बन गई है.

प्रोफ़ेसर इल्यास कहते हैं, "नागरिकता 'राष्ट्रीयता' का विषय है, जिसमें एक क़ानूनी और राजनीतिक रिश्ता होता है. देश के प्रति वफ़ादारी का रिश्ता होता है. लेकिन इस तरीक़े से नागरिकता हासिल करने वालों के साथ ये बातें नहीं जुड़ी होतीं."

तुर्की की बार एसोसिएशनों के संघ ने जून 2022 में इस योजना को रोकने के लिए याचिका दायर की थी. उन्होंने इसे असंवैधानिक और अवैध बताया था. उनका कहना था कि इससे तो नागरिकता की अवधारणा ही ख़त्म की जा रही है. हालांकि, इस याचिका को खारिज कर दिया गया था.

दुनिया भर में इस योजना का इसलिए भी विरोध होता है, क्योंकि इसके ज़रिये अपराधी पनप सकते हैं, मनी लॉन्डरिंग हो सकती है और प्रॉपर्टी के दाम भी बढ़ सकते हैं. तुर्की में भी मकानों के दाम इसी कारण बढ़े थे.

हाल के सालों में कुछ देशों ने अपनी ऐसी योजनाओं की समीक्षा की है. यूरोपीय आयोग ने भी चेताया है कि निवेश के ज़रिये नागरिकता देने से सुरक्षा, टैक्स चोरी और मनी लॉन्डरिंग जैसे मसले उभर सकते हैं.

ऐसे ही कारणों के चलते साइप्रस ने साल 2020 और बुल्गारिया ने 2022 में अपनी गोल्डन पासपोर्ट योजना को बंद कर दिया था.

साइप्रस में रूस, चीन और यूक्रेन से बड़ी संख्या से आवेदन हो रहे थे और कहा जाने लगा था कि अपराधियों को भी पासपोर्ट दिए जा रहे हैं. पुर्तगाल ने इसी साल अपनी इस योजना को ख़त्म किया है.

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