रूस यूक्रेन युद्ध पर 2024 में असर डालने वाले पांच फैक्टर्स

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- Author, हल्याना कोरबा और कतेरीना खिनकुलोवा
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
करीब दो साल तक अंतरराष्ट्रीय खबरों में छाए रहने के बाद यूक्रेन में युद्ध 2024 में भी जारी रहेगा. लेकिन इसके अलग ढंग से सामने आने की संभावना जताई जा रही है.
आइए जानते हैं उन पांच कारकों के बारे में जो 2024 में इस युद्ध को प्रभावित करेंगे.
आर्थिक सहायता में कमी
फरवरी 2022 में पूरी तरह से युद्ध की शुरुआत में रूस का सामना करने की यूक्रेन की क्षमता ने कई लोगों को आश्चर्य में डाल दिया. इसका प्रमुख कारण यह था कि यूक्रेन के अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने उसे हथियारों की आपूर्ति शुरू कर दी थी.
लेकिन 2024 में इसमें बदलाव आने की संभावना है, क्योंकि दो सहायता पैकेज रुके हुए हैं.
अमेरिका में, यूक्रेन को सहायता देने के लिए कांग्रेस में वोट कराने की ज़रूरत होती है. यह अन्य खर्चों पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच चर्चा से जुड़ा होता है. 61 बिलियन डॉलर के सैन्य पैकेज पर जनवरी की शुरुआत तक दोबारा विचार नहीं हो पाएगा.
वहीं यूरोपीय संघ में, 50 अरब यूरो (55 अरब डॉलर या 43 अरब पाउंड) का एक सौदा उसके सदस्यों में से एक हंगरी और दूसरे सदस्यों की तनावपूर्ण बातचीत से जुड़ा है.
यूरोपीय संघ के दूसरे सदस्यों से अलग हंगरी प्रभावी रूप से रूस के समर्थन में है. वह चाहता है कि यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता पूरी तरह से बंद हो.
हथियारों की सप्लाई

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विदेशी सहायता मिलने में देरी की वजह से यूक्रेन की सेना को हथियारों की आपूर्ति करने की क्षमता कम होती जा रही है. इससे उसकी चिंता बढ़ रही है और यह रूस का आत्मविश्वास बढ़ा रहा है.
इस साल के अंत में अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि उनके देश की सैन्य ताकत लगातार मज़बूत होती जा रही है.
वहीं साल के अंत में मीडिया से बातचीत में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने स्वीकार किया कि हालात कठिन हैं, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि सैन्य सहायता का मुद्दा जल्द ही हल हो जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई थी कि यूक्रेन अपने ड्रोन का उत्पादन बढ़ाने में सक्षम होगा, जो इस युद्ध में महत्वपूर्ण साबित हुआ है.
यूरोपीय संघ ने नवंबर में बताया था कि वह मार्च 2024 तक यूक्रेन को 155 मिमी के दस लाख गोलों की आपूर्ति के अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएगा. राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन का जवाबी हमला पहले नहीं शुरू होने का एक कारण हथियारों की कमी थी. बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में यूक्रेनी सेना ने कहा था कि उन्हें गोलों की बचत करनी पड़ रही है.
कम हथियार रखने का मतलब यह होगा कि यूक्रेन को अपनी स्थिति और अधिक ज़मीन छोड़नी पड़ सकती है. इस समय यूक्रेन के करीब 17 फीसदी इलाके पर रूस का नियंत्रण है.
यूक्रेन का अनुमान है कि युद्ध के कारण उसकी अर्थव्यवस्था को 150 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. उसकी 2024 में अपनी सेना पर 43.2 अरब डॉलर खर्च करने की योजना है. रूस का सैन्य बजट रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर का होने का अनुमान लगाया गया है.
लोगों की कमी से जूझते रूस और यूक्रेन

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पर्याप्त सैनिकों को रखना भी दोनों देशों के लिए एक चुनौती होगी. फरवरी 2022 से पहले यूक्रेन की आबादी करीब 4.4 करोड़ थी.
एक अनुमान के मुताबिक करीब 60 लाख यूक्रेनियन देश छोड़ चुके हैं, हालांकि माना यह भी जा रहा है कि इनमें से कई लोग वापस आ गए हैं. रूसी कब्जे और लगातार हमलों के कारण सैकड़ों हजार लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं. वहीं हजारों नागरिकों की मौत हुई है.
ऐसे में सैनिकों की संख्या बढ़ाना और उनको प्रशिक्षित करना एक चुनौती होगी. मार्शल लॉ के तहत, यूक्रेन ने 18 से 60 साल की आयु के पुरुषों के देश छोड़ने पर पाबंदी लगा दी है. हाल ही में, यूक्रेन के रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव ने कहा था कि उनके देश को विदेश में रहने वाले यूक्रेनी पुरुषों को सैन्य ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने के लिए कहने की जरूरत पड़ सकती है.
ऐसा माना जाता है कि लड़ने की उम्र के हजारों यूक्रेनी पुरुष विदेश में रहते हैं. एस्टोनिया ने पहले ही कहा है कि वह सेना के लिए उपयुक्त यूक्रेनी नागरिकों को तैयार करने में यूक्रेन की मदद करेगा, जो इस समय उसके यहां रह रहे हैं.
वहीं रूस के पास बहुत बड़ी सेना और बड़ी आबादी है. यह आबादी 14 करोड़ से अधिक की है. दो साल के युद्ध में उसे भारी नुकसान भी हुआ है. सैन्य विशेषज्ञों और सैनिकों ने 'मीट ग्राइंडर' शैली के युद्ध की चर्चा की.
इसके कई सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षित सैनिक खत्म हो गए हैं, जैसे विशिष्ट पैराट्रूपर्स और वायु सेना के दल. इनका प्रशिक्षण महंगा होता है और इसमें सालों का समय लगता है.
ऐसा अनुमान है कि यूक्रेन पर हमले के बाद दस लाख से अधिक रूसियों ने देश छोड़ दिया है. रूसी अधिकारियों ने सेना में फिर से भर्ती करने के लिए कैदियों और बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की भर्ती का सहारा लिया है.
किसी भी पक्ष ने इस युद्ध में अब तक हुए सैन्य नुकसान को पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं किया है. लेकिन यूक्रेन में हजारों की संख्या में नुकसान होने का अनुमान है.
बीबीसी की रूसी सेवा ने युद्ध में मारे गए रूसी सैनिकों की एक सूची तैयार की. यह दिसंबर 2023 के अंत में 40,000 से अधिक लोगों की थी.
अमेरिकी खुफिया विभाग ने हाल ही में उन रिपोर्टों को सार्वजनिक कर दिया है, जिनमें बताया गया है कि मारे गए या घायल हुए रूसियों की संख्या 315,000 लोगों तक हो सकती है.
यूक्रेन की थकान

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कीव की सबसे बड़ी चिंता तथाकथित 'यूक्रेनी थकान' की है- जिन देशों को वह साझेदार मानता है, वहां से उसे मिलने वाली सहानुभूति और समर्थन में कमी आ रही है.
नीदरलैंड्स और स्लोवाकिया में हाल में हुए चुनावों की वजह से पहले से ही समर्थन में कमी आई है. स्लोवाकिया ने यूक्रेन को मिलने वाला एक बड़ा सहायता पैकेज रोक दिया है, जबकि नीदरलैंड्स एफ-16 जेट नहीं भेज सकता है, जिसका वादा उसने काफी पहले किया था.
वहीं अमेरिका में, नवंबर 2024 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के साथ, व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी का मतलब यूक्रेन और रूस के प्रति नीति में गंभीर बदलाव हो सकता है.
अमेरिका में हुए जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि जो लोग मानते हैं कि वाशिंगटन यूक्रेन की बहुत अधिक मदद कर रहा है, उनकी संख्या 21 फीसदी से बढ़कर 41 फीसदी हो गई है. यूरोपीय संघ के 27 में से आठ देशों में यूक्रेन को सहायता देने से ज्यादा लोग इसके खिलाफ हैं.
यूक्रेन और रूस दोनों नए साल में 'ग्लोबल साउथ' में समर्थन हासिल करना जारी रखेंगे. परंपरागत रूप से, मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के कई देशों का अमेरिका के विरोध में रूस के साथ मित्रवत रहे हैं. वहीं युद्ध की शुरुआत के बाद से, एक तरफ रूस ने जहां अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की, वहीं यूक्रेन ने प्रभाव बढ़ाने का काम किया.
पिछले एक साल में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने चार बार अफ्रीका की यात्रा की. इस दौरान उन्होंने 14 देशों का दौरा किया. वहीं यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने इस दौरान अफ्रीका की दो यात्राओं में नौ देशों का दौरा किया.
यूक्रेन अफ्रीका में रूसी प्रभाव का मुकाबला करने के लिए संघर्ष करेगा, जहां रूसी प्रचार और कुछ देशों में वैगनर भाड़े के समूह, रूस के प्रभाव को मज़बूत करने के प्रभावी उपकरण रहे हैं.
और अंत में

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'यह युद्ध कैसे ख़त्म होगा?', यह एक ऐसा सवाल है, जिसका उत्तर खोजने की कोशिश कई राजनेता और विशेषज्ञ कर रहे हैं.
यूक्रेन का कहना है कि केवल रूसी कब्जे से पूर्ण मुक्ति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं पर वापसी से ही यह युद्ध खत्म होगा.
यूक्रेन ने चेतावनी दी है कि रूस के साथ समझौता न केवल मास्को की ओर से बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में अन्य लोगों द्वारा क्षेत्र पर कब्ज़ा करने को प्रोत्साहित करेगा.
वहीं रूस का कहना है कि वह पश्चिम के साथ व्यापक संघर्ष में फंसा हुआ है. उसका कहना है कि जब तक जरूरी होगा तब तक वह लड़ता रहेगा.
ऐसे में इस युद्ध के 2024 में खत्म होने की संभावना नहीं है. यह युद्ध कठोर अग्रिम पंक्ति, आगे होने वाले नुकसान और यूक्रेन में मौतों और विनाश के रोजाना पैदा होने वाले खतरे और रूस के लिए और अधिक अलगाव और आर्थिक कठिनाई के साथ जारी चलता रहेगा.
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