रूस पर शुरू हो गया यूक्रेन का जवाबी हमला

पॉल एडम्स

बीबीसी न्यूज़

युद्ध में तैनात यूक्रेन के टैंक

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि उनके देश ने रूस पर जवाबी हमला शुरू कर दिया है.

शनिवार को उन्होंने कहा कि हमने खुद का बचाव करने के साथ ही जवाबी हमला शुरू किया है. रूस में हमारी सेना की ओर से ऐसे हमले हो रहे हैं

लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि वो जवाबी हमलों का ब्योरा नहीं देंगे.

ताज़ा ख़बरों के मुताबिक़ यूक्रेन की सेना देश के पूर्वी हिस्से के नजदीक बख़मुत और दक्षिण में ज़पोरिज़िया में आगे बढ़ रही है.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को दिखे एक वीडियो में कहा था कि रूस अब पक्के तौर पर कह सकता है कि यूक्रेन ने जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं.

एक तरह से, ये कई सप्ताह पहले ही शुरू हो चुका है. यूक्रेन ऐसे अभियान चला रहा है जिन्हें सैन्य भाषा में ‘शेपिंग ऑपरेशन’ कहा जाता है.

लंबी दूरी की मिसाइल और तोपखाना के जरिए हो रहे इस हमले में फ्रंटलाइन के पीछे से यूक्रेन रूस के महत्वपूर्ण हथियारों और सामान को नुक़सान पहुंचा रहा है.

हालांकि इस सोमवार को एक बड़ा बदलाव भी दिखा. दक्षिणी यूक्रेन में, ज़पोरिज़िया के दक्षिण-पूर्व में यूक्रेन की हल्के हथियारों से लैस छोटी टुकड़ियां मैदानों से होते हुए रूस की क़िलेबंदी की तरफ़ बढ़ीं.

यूक्रेनियन सिक्यूरिटी एंड को-ऑपरेशन सेंटर के सह-संस्थापक और चेयरमैन सेरही कुज़ान ने बीबीसी से कहा, “अब समूचे मोर्चे पर लड़ाई से पहले जानकारियां जुटाने का अभियान चल रहा है. इसका मतलब ये है कि रूस की रक्षा पंक्ति का जायज़ा लिया जा रहा है.”

कुछ वीडियो और विवरणों से पता चलता है कि यूक्रेन के ये दस्ते जल्द ही परेशानियों में घिर गए.

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कुज़ान कहते हैं, “कई जगहों पर नुक़सान कम होता है और ये ऑपरेशन कामयाब होते है. जबकि कई जगहों पर रूसी जवाबी हमला करते हैं. वहां ये इतने कामयाब नहीं होते.”

हालांकि कुज़ान ने शहरों के नाम नहीं लिए. बस उन्होंने इतना बताया कि ये सभी ज़पोरिज़िया के दक्षिणी इलाक़े में हैं.

लेकिन मंगलवार को नोवा काख़ोव्का में बांध की बर्बादी ने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ़ खींच लिया. इस बांध के टूटने से नीप्रो नदी के दोनों तरफ़ 230 वर्ग किलोमीटर इलाक़ा बाढ़ में गिर गया.

टूटा हुआ बांध

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यूक्रेन ने रूस पर बांध पर हमला करने के आरोप लगाए लेकिन रूस ने इन्हें ख़ारिज कर दिया. रूस के खंडन के बावजूद इसे सिर्फ़ संयोग नहीं माना जा सकता है.

ये बांध और इसके पास की सड़क यूक्रेन की सेना को रूस के बलों पर हमला करने के लिए मोर्चा बनाने का मौका दे सकती थीं.

यूक्रेन मोर्चे की इस फ्रंटलाइन के बारे में अपने इरादे पहले ही ज़ाहिर कर चुका था.

अप्रैल में यूक्रेन के सैनिकों ने नीप्रो नदी को पार करके ओलेश्की क़स्बे में ब्रिजहेड (पुल के पास का इलाके) पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था. खेरसोन के पास के डेल्टा में भी कई द्वीपों पर नियंत्रण कर लिया था.

यूक्रेन की सैन्य योजना क्या है?

टैंक

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यूक्रेन इस इलाक़े को लेकर कितनी व्यापक सैन्य योजना बना रहा है ये अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन फिलहाल यहां आई बाढ़ के बाद नदी पार करना लगभग असंभव हो जाएगा.

कुज़ान कहते हैं, “लेकिन इस दिशा से भी यूक्रेन आगे बढ़ सकता है, इसे रूस ने देख लिया था.”

एक तरफ़ जहां यूक्रेन के अधिकारी बाढ़ के बाद के हालात को नियंत्रित करने की कोशिशों में लगे थे वहीं दूसरी तरफ़ लड़ाई अपनी रफ़्तार से जारी थी. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पूर्व की तरफ़ ये और तेज़ हो रही है.

गुरुवार सुबह ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट किया, “मोर्चे के कई सेक्टरों में भीषण लड़ाई चल रही है और कई जगहों पर यूक्रेन आक्रामक है.”

इसी दिन जारी एक वीडियो में रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू ने एक बयान में कहा कि रूस के सैन्यबलों ने ज़पोरिज़िया के दक्षिण में यूक्रेन का एक हमला नाकाम कर दिया. इस हमले में 150 बख़्तरबंद गाड़ियां और 1500 सैनिक शामिल थे.

वहीं रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि यूक्रेन की 47वीं मेकेनाइज़्ड ब्रिगेड ने रूसी मोर्चेबंदी को तोड़ने की कोशिश की.

ड्रोन

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इंटरनेट पर शेयर किए गए एक वीडियो में कुछ नया भी दिखा है. इसमें पश्चिमी देशों से मिला लैपर्ड टैंक बर्बाद होता दिख रहा है. हालांकि इस वीडियो को स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीे हो सकी है.

यूक्रेन के अधिकारियों ने मौजूदा अभियान को लेकर चुप्पी साध रखी है और बहुत नपे-तुले शब्दों में ही जानकारी दे रहे हैं.

यूक्रेन के डिप्टी रक्षा मंत्री हैना माल्यार ने बताया कि ज़पोरिज़िया से 65 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में रूस के सैनिक रक्षात्मक स्थिति में हैं.

टेलीग्राम पर जारी एक बयान में उन्होंने ये भी कहा है कि आगे और पूर्व ममें वेल्यका नोवोसिक्ला इलाक़े में भी लड़ाई चल रही है.

ये दोनों ही शहर एक मोर्चे के इस भारी हथियारों की मौजूदगी वाले हिस्से को दोनों सिरों पर हैं जिसके बारे में विश्लेषक मानते हैं कि रूस अपना बड़ा जवाबी हमला यहां शुरू कर सकता है.

कुज़ान कहते हैं, “ये कोई राज़ की बात नहीं है कि य़ूक्रेन का मुख्य मक़सद दक्षिण में दुश्मन की सेना के जमावड़े से ज़मीनी संपर्क को काटना है.”

डोनबास इलाक़े से चलने वाले रूस समर्थक टेलीग्राम चैनलों पर यूक्रेन के ताज़ा क़दमों पर ख़ूब चर्चा हो रही है. बहुत से लोग इसे लेकर नकारात्मक बातें ही कर रहे थे.

एक समूह में एक व्यक्ति ने पोस्ट किया, “ये वहां जा रहे हैं जहां रूसी सैनिक उनका इंतज़ार कर रहे हैं. क्या पागलपन है.”

बहुत से लोगों ने यूक्रेन की बढ़त को तो स्वीकार किया लेकिन ये सवाल भी उठाया कि ये बढ़त किस क़ीमत पर हासिल हो रही है.

इसी समूह के एक अन्य सदस्य ने पोस्ट किया, “मैं इस कामयाबी की क़ीमत पर सवाल उठा रहा हूं. क्या उनके पास ओरिख़ीव से 44 किलोमीटर दक्षिण मं टोकमाक तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सैन्यबल हैं, बर्दयांस्क और मेलितोपोल की तो बात ही छोड़ दीजिए.”

और कहां चल रही है लड़ाई?

यूक्रेन का सैनिक

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लेकिन लड़ाई सिर्फ़ इसी इलाक़े में नहीं चल रही है.

बाख़मूत शहर के उत्तरी और दक्षिणी इलाक़े की वीडियो फुटेज में यूक्रेन के सैन्य बल आगे बढ़ते दिख रहे हैं. यूक्रेन युद्ध की सबसे लंबी और ख़ूनी लड़ाई यहीं चल रही है.

माल्यार का कहना है कि यूक्रेन के बल कुछ इलाक़ों में 200 से 1100 मीटर तक आगे बढ़े हैं. ये बाखमूत शहर को चारों तरफ़ से घेरने और उसमें मौजूद रूसी सैनिकों को फंसाने का प्रयास हो सकता है.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़ ये बहुत ही जटिल सैन्य परिस्थिति है.

लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि यूक्रेन का जवाबी हमला नाटकीय चरण में पहुंच गया है?

यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और डिफेंस परिषद के सचिव ओलेक्सी डानिलोफ़ ने बुधवार को इस विचार को हंसते हुए ख़ारिज कर दिया.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से उन्होंने कहा, “ये सच नहीं है. जब हम जवाबी हमला शुरू करेंगे तो सभी को पता चल जाएगा. सब ये देखेंगे.”

लेकिन कुछ तो निश्चित रूप से बदल गया है.

सेरही कुज़ान कहते हैं, “बात ये है कि मोर्चा अंततः आगे बढ़ रहा है.” उन्होंने ये भी कहा कि यूक्रेन के कमांडरों के पास अभी भी कई खुले विकल्प हैं.

लेकिन यूक्रेन के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं. सबसे अहम चुनौती है लड़ाकू विमानों की कमी जो हवा से यूक्रेन के सैन्य बलों की मदद कर सकें.

कुज़ान कहते हैं, “यही वजह है कि हम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं और उसके बाद हम एयर डिफेंस सिस्टम को क़रीब लाएंगे.”

कामयाबी कैसी होगी?

यूक्रेन के सैनिक

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एक अन्य कारक समय भी है. ये आक्रमण पांच महीने से अधिक नहीं चल सकता है. इसके बाद बरसात होगी और ज़मीन दलदली हो जाएगी. ऐसी स्थिति मेें सैन्य वाहनों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा.

अगर यूक्रेन के सैन्यबल रूस की रेखा को पार करके अज़ोव सागर तक पहुंचने मेें कामयाब हो गए तो फिर इसके पश्चिम की तरफ़ रूस के सैनिक कमज़ोर स्थिति में आ जाएंगे. वो फिर सिर्फ़ क्राइमिया से पहुंचने वाली रसद पर ही निर्भर हो जाएंगे.

कुज़ान कहते हैं कि इसके बाद बस यूक्रेन को रूस से क्राइमिया को जोड़ने वाले कर्च ब्रिज को बर्बाद करना होगा और क्राइमिया तक सामान लाने वाले जहाज़ों और विमानों को निशाना बनाना होगा.

वो कहते हैं, “ये अंत होगा. लेकिन इसके बहुत जल्द हो जाने की उम्मीद मत लगाइये. इसमें कई महीनों का समय लग सकता है.”

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