रूस पर यूक्रेन की रणनीति क्या भारी पड़ रही है?
बीबीसी मुंडो

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“योजानाएं ख़ामोशी में बनाई जाती हैं. इसका कोई ऐलान नहीं होता.”
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने साफ़ तौर पर कहा है कि रूस के ख़िलाफ़ बहुत प्रतीक्षित जवाबी हमला कब और कहां होगा, इसका ऐलान करने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है.
असल में बीते बुधवार को यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सचिव ओलेक्सी डैनिलोव और डिफ़ेंस काउंसिल ने रूसी अधिकारियों के उस बयान का पूरी तरह खंडन किया है कि जवाबी हमला शुरू हो चुका है.
डैनिलोव ने कहा, “ये सब सच नहीं है. इस बारे में हमारी सेना फ़ैसला लेगी. जब हम जवाबी हमला शुरू करेंगे तो हर कोई जान जाएगा और लोग इसे देखेंगे.”
हाल ही में यूक्रेन की सेना ने बखमूत में कुछ बढ़त हासिल की है. रूसी रक्षा मंत्री सेर्गेई शोइगू के दावे के मुताबिक़, मोर्चे पर पांच अलग-अलग जगहों पर यूक्रेनी सेना ने गतिविधि शुरू कर दी है. इससे लगता है कि मोर्चे पर कुछ तो चल रहा है.
हाल के दिनों में यूक्रेन के सैनिकों ने ज़पोरिज़िया और दोनेस्त्क इलाक़ों के बॉर्डर इलाक़ों में वेलिका नोवोसिल्का और वुगलेदार शहरों के करीब जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं,
हालांकि ये कोई बहुत बड़ा जवाबी हमला नहीं है लेकिन इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
रूसी फ़ौजी ब्लॉगर जो टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया नेटवर्कों पर काफ़ी सक्रिय हैं और पूरे युद्ध शुरू होने के समय से ही क़रीबी नज़र बनाए हुए हैं, उनका कहना है कि इस इलाक़े में यूक्रेनी फ़ौजें अपनी स्थिति से आगे बढ़ने में क़ामयाब रही हैं.
इंस्टिट्यूट फ़ोर स्टडी ऑफ़ वॉर ने पुष्टि की है कि यूक्रेनी सेना इस मोर्चे पर एक रात में तीन किलोमीटर आगे बढ़ी है. चूंकि यह इलाक़ा बारूदी सुरंगों से पटा हुआ है, ऐसे में इतनी दुरी अहम क़ामयाबी है.

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नोवा काखोव्का बांध पर हमले का क्या असर पड़ेगा
विश्लेषकों का कहना है कि नोवा काखोव्का बांध के विस्फोट से यूक्रेन की योजना प्रभावित हुई है और इससे नीप्रो नदी के 60 किलोमीटर के दायरे में हज़ारों लोगों को सुरक्षित इलाक़े में पहुंचाना पड़ा है.
बीबीसी रक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर के अनुसार, “हम नहीं जानते कि कीएव ने जवाबी हमले के लिए मौजूदा समय में बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित खेरसॉन इलाक़े को चुना था या नहीं. लेकिन जिसने भी किया हो, बांध को क्षति पहुंचने से अब ये विकल्प काफ़ी मुश्किल हो गया लगता है.”
यूक्रेन रक्षा मंत्रालय के सलाहकार यूरी सैक ने बीबीसी को बताया, “बांध को हुआ नुकसान असल में हमारे जवाबी हमले की योजना को विफल करने के लिए रूस द्वारा हड़बड़ी में किया गया कारनामा है. वे घबरा गए हैं, हताश हैं और अत्याचार पर उतारू हो गए हैं.”

यूक्रेन और किन विकल्पों पर विचार कर रहा है?
कुछ समय के लिए खेरसॉन इलाक़े का विकल्प ख़त्म होने के बाद, यूक्रेन की रणनीति चार दिशाओं में आगे बढ़ने की होगी.
सैन्य विश्लेषण में एक्सपर्ट बीबीसी यूक्रेनी सेवा में संवाददाता ओलेह चेर्निश के अनुसार ये चार पॉइंट हो सकते हैःं-
1.ज़ापोरिज़िया फ़्रंट; इस इलाक़े में रूसी कब्ज़े वाले सबसे बड़े कस्बों टोकमाक और मेलिटोपोल की ओर आगे बढ़ना
चेर्निश कहते हैं, “ये कस्बे रूसी सेना द्वारा बहुत अच्छी तरह से सुरक्षित हैं, लेकिन अगर यूक्रेनी सेना इन्हें मुक्त करा सकी और एज़ोव सी की ओर बढ़ी तो रूसी रक्षा पंक्ति को बीचे से अलग कर सकते हैं.”
2. वुग्लेडार और वोल्नोवाजा शहरों की ओर से मारियुपोल पहुँचने की कोशिश
मारियुपोल अज़ोव सी के क़रीब सबसे बड़ा शहर है, जिसे एक साल पहले रूस ने कब्ज़ा कर लिया था और यही इलाक़ा है, जहां ओजोवस्ताल स्टील फ़ैक्ट्री पर कब्ज़े के लिए भीषण लड़ाई लड़ी गई. मारियुपोल पर कब्ज़े के साथ रूस ने अपने कब्ज़े वाले खेरसॉन के साथ डोनबास और क्राइमिया के बीच एक कॉरिडोर बना लिया. मारियुपोल पर कब्ज़े का रणनीतिक महत्व होगा और रूसी फ्रंट को दो फाड़ करने के साथ क्राइमिया को अलग थलग किया जा सकेगा.
3. बखमूत का मोर्चा
रूसी की सेनाएं और उसकी प्राइवेट आर्मी वाग्नर ग्रुप ने कुछ हफ़्ते दावा किया कि दोनेत्स्क इलाक़े के इस अहम शहर पर कब्ज़े का दावा किया था. इस पूरे युद्ध में अबतक की सबसे भीषण लड़ाई बखमूत में हुई जहां इंच इंच के लिए खूनी लड़ाई लड़ी गई. हालांकि सांकेतिक महत्व के अलावा रूस और यूक्रेन के लिए इसका कोई रणनीतिक महत्व नहीं है.
हाल ही में यूक्रेन के उप रक्षा मंत्री हन्ना मेलियार ने दावा किया कि दुश्मन की तमाम कोशिशों के बावजूद यूक्रेन की सेना कई दिशाओं की ओर आगे बढ़ी है.
मेलियार के अनुसार, बखमूत के क़रीब उत्तरी और दक्षिणी हिस्से में स्थित कुछ कस्बों को यूक्रेन की सेना ने कब्ज़ा कर लिया है ताकि रूसी सैनिकों को घेरा जा सके.
राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने खुद यूक्रेनी फ़ौज को इसके लिए बधाई दी थी और कहा था, “इस ख़बर का हम कब से इंतज़ार कर रह थे.”
ओलेह चोर्निश का कहना है, “अगर यूक्रेन की सेना बखमूत में रूसियों को घेरने में क़ामयाब रही तो ये मॉस्को के लिए बहुत बड़ा झटका होगा.”

4. लुहांस्क इलाक़े में उत्तर की ओर स्वातोव-क्रेमिना में फ़्रंट खोलना
ये बहुत बिखरी आबादी वाला इलाक़ा है और रूसी सेना की पकड़ यहां बहुत कम है. अगर यूक्रेन इन जुड़वा शहर को मुक्त कराने में कामयाब रहा तो, विश्लेषकों का कहना है कि इस इलाक़े में रूसी रक्षा पंक्ति को ये बिल्कुल समाप्त कर देगा.
हालांकि नोवा काखोव्का बांध के क्षतिग्रस्त होने से यूक्रेन के लिए दक्षिण की ओर से हमला बोलने का विकल्प सीमित हो गया है.
बीबीसी रूसी सेवा संवाददाता इल्या एबिसेव के मुताबिक़, इसने कीएव के लिए नई संभावनाएं भी पैदा की हैं.
शुरुआत के लिए यूक्रेन केप किनबर्न पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर सकता है जो कि ब्लैक सी और नीप्रो की खाड़ी के बीच एक पतली पट्टी है. साथ ही इस अहम नदी के आस पास के इलाक़ों और द्वीपों पर भी कब्ज़ा किया जा सकता है.
एबिसेव का कहना है कि इस समय बाढ़ की वजह से रूस की सप्लाई लाइन प्रभावित है और वो इस हमले का ठीक से मुकाबला कर भी नहीं पाएगा.
इसके अलावा बांध को उड़ाने का मतलब है कि काजोव्का जलाशय जल्द सूख जाएगा.
पानी का स्तर सामान्य हो जाएगा. इसलिए जलाशय के कारण पानी और दलदल वाले इलाक़े की बजाय नदी को पार करना कहीं आसान होगा.
इसलिए रूसी फौज को बांध से लेकर जापोरिझिया इलाक़े में स्थित वासिलिव्का शहर तक 200 किलोमीटर क्षेत्र की रक्षा करना पड़ेगा.

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जवाबी हमला
यूक्रेन कौन सी रणनीति आजमाएगा, ये अभी साफ़ नहीं है लेकिन ब्रिटेन के एक डिफ़ेंस थिंक टैंक ‘रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट’ के पूर्व डायरेक्टर मिलिटरी एनॉलिस्ट माइकल क्लार्क का कहना है कि ध्यान भटकाने वाली सैन्य गतिविधियां भी होंगी.
उन्होंने बीबीसी रेडियो 4 से कहा कि जवाबी हमला तीन तरह से हो सकता हैः-
1-संभावना है कि ध्यान भटकाने की कई गतिविधियों के बाद, यूक्रेन फ़ौज अपनी पूरी ताक़त के साथ एक दिशा में बढ़ेगी. अगर ऐसा होता है तो ये देखना होगा कि दक्षिणी ज़ापोरिझ़िया में क्या होता है, जहां से वे मेलिटोपोल की ओर बढ़ना चाहेंगे.
2. एक दूसरा विकल्प है कि कई जगहों पर दबाव बनाया जाए. क्लार्क ने बीबीसी टुडे के एक कार्यक्रम में कहा, “ये ऐसा ही कि आप आधे दर्जन दरवाजों पर दस्तक देते हैं और जो भी आसानी से खुल जाए वहां आप अपना पोर ज़ोर लगा देते हैं.”
3.तीसरी संभावना है कि वे एक साथ कई छोटे हमले शुरू करें और बाद में एक बड़े हमले के लिए इकट्ठे हो जाएं.
क्लार्क के मुताबिक, इस तरह की गतिविधि हफ़्तों परहले ही शुरू हो गई है. दोनों पक्षों ने ड्रोन हमलों से मोर्चे के पीछे के हालात का अंदाज़ा लिया है लेकिन अभी तक कोई बड़ा हमला देखने को नहीं मिला है.
क्लार्क का अनुमान है कि जब भी ऐसा होगा, यूक्रेन की क्षमता के मद्देनज़र कीएव क़रीब 50 किलोमीटर चौड़े फ्रंट पर ही आगे बढ़ेगा.
वो कहते हैं, “लेकिन युद्ध का मोर्चा 1,000 किलोमीटर लंबा है, तो सवाल ये है कि 50 किलोमीटर का वो कौन सा हिस्सा होगा, जो वे चुनेंगे. अगले हफ़्ते या उसके बाद शायद कुछ स्थिति साफ़ हो.”
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