यूक्रेन संकट: पुतिन ने क्राइमिया को रूस में कैसे मिलाया था? जानिए पूरी कहानी

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क्राइमिया गणराज्य आधिकारिक रूप से यूक्रेन का हिस्सा है. यह यूक्रेन के दक्षिण में फैले काला और अज़ोव सागर के बीच प्रायद्वीप पर स्थित है.
यह रूस से पूर्व में सँकरे कर्च जलडमरूमध्य से अलग होता है. 2014 की शुरुआत में क्राइमिया शीत युद्ध के बाद पश्चिम और पूरब के संकट का केंद्र था.
तब यूक्रेन में रूस समर्थित राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच को राजधानी कीव में हिंसक प्रदर्शन के बाद सत्ता छोड़नी पड़ी थी. इसके बाद रूस की सेना ने क्राइमियाई प्रायद्वीप और इलाक़े को अपने नियंत्रण में ले लिया था.
क्राइमिया में रूसी बोलने वाली आबादी बहुसंख्यक है और इन्होंने जनमत संग्रह में रूस के साथ जाने के लिए वोट किया था. यूक्रेन और पश्चिम के देश क्रीमिया को रूस में शामिल करने को अवैध मानते हैं.

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क्राइमिया का इतिहास
क्राइमिया को रूसी साम्राज्य के कैथरीन द ग्रेट के शासन में 1783 में मिलाया गया था और यह 1954 तक रूस का हिस्सा था. सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने इसे यूक्रेन को दिया था.
क्राइमिया की आबादी में रूसी आबादी बहुसंख्यक रही है, लेकिन यूक्रेनियन और क्राइमियाई तातार (तुर्कों की एक नस्ल) अल्पसंख्यक भी यहाँ रहते हैं. सदियों से ग्रीक और रोमन प्रभाव के कारण 1443 में क्राइमिया तातार खानेत का केंद्र बना. बाद में यह ऑटोमन यानी उस्मानिया साम्राज्य का हिस्सा हो गया.
19वीं सदी के मध्य में प्रतिद्वंद्वी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा ने क्राइमियाई युद्ध को आगे बढ़ाया. 1854 का क्राइमिया युद्ध रूस और ब्रिटेन, फ़्रांस और ऑटोमन साम्राज्य के बीच हुआ था जिसमें रूस की हार हुई थी. बोल्शेविक क्रांति के बाद रूस के भीतर ही क्राइमिया को स्वायत गणराज्य का दर्जा मिला. 1940 के दशक की शुरुआत में क्राइमिया पर नाज़ियों का क़ब्ज़ा था.
स्टालिन ने तातारों (तुर्कों की नस्ल) पर जर्मन हमलावरों के साथ मिले होने का आरोप लगाया था और उन्हें सामूहिक रूप से बड़ी संख्या में 1944 में मध्य एशिया और साइबेरिया में भेज दिया था. इनमें से ज़्यादातर लोगों की मौत हो गई थी.
सोवियत यूनियन के पतन के बाद बचे लोग वापस आ सके. 1990 के दशक की शुरुआत में ढाई लाख लोग लौटे, लेकिन तब यूक्रेन भारी बेरोज़गारी और ग़रीबी से जूझ रहा था. क्राइमियाई तातार को लेकर भूमि पर अधिकार और आवंटन के मामले में लगातार तनाव बना रहा. यह एक विवादित मुद्दा था.

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नाज़ियों का यूक्रेन पर क़ब्ज़ा
जब रूसी साम्राज्य का पतन हुआ तो 1917 में कीव में केंद्रीय रादा परिषद की स्थापना की गई. 1918 में यूक्रेन ने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी. लेकिन कई सारी प्रतिस्पर्धी सरकारों ने पूरे यूक्रेन पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की और नतीजा यह रहा कि गृहयुद्ध छिड़ गया.
उधर दूसरी ओर जब रूस की रेड आर्मी ने दो-तिहाई यूक्रेन को जीत लिया और 1921 में यूक्रेनियन सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक की स्थापना कर दी. यूक्रेन का एक तिहाई बचा हुआ हिस्सा पोलैंड में शामिल हो गया. 1920 के दशक में सोवियत सरकार ने यूक्रेन की भाषा और संस्कृति को बढ़ावा दिया मगर कई राजनीतिक शर्तों और पाबंदियों के साथ. मगर अगले ही दशक में फिर इस स्वतंत्रता को छीन लिया गया.
1939 में सोवियत संघ ने नाज़ी-सोवियत संधि की शर्तों के तहत पश्चिमी यूक्रेन का भी अपने में विलय कर लिया, जो पहले पोलैंड के पास था.
मगर फिर हालात बदले और 1941 में यूक्रेन पर नाज़ियों ने क़ब्ज़ा कर लिया.
साल 1944 तक यहां नाज़ियों का क़ब्ज़ा रहा जिस कारण यूक्रेन को युद्ध से बहुत नुक़सान झेलना पड़ा. यूक्रेन में 50 लाख से ज़्यादा लोग नाज़ी जर्मनी से लड़ते हुए मारे गए. यहां के 15 लाख यहूदियों में से अधिकतर को नाज़ियों ने मार डाला.

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विश्वयुद्ध के बाद
इस बीच सोवियत शासन के ख़िलाफ़ यूक्रेन में कुछ संगठन हथियारबंद संघर्ष चला रहे थे.
साल 1954 में अचानक उठाए गए एक क़दम में सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने क्राइमियाई प्रायद्वीप को यूक्रेन में शामिल कर दिया.
इसी दौरान सोवियत शासन के विरोध में चल रहा यूक्रेन की विद्रोही सेना का संघर्ष आख़िरी कमांडर के पकड़े जाने के बाद ख़त्म हो गया.
लेकिन 1960 के दशक में यूक्रेन में सोवियत शासन के प्रति विरोध बढ़ता चला गया. 1972 में सोवियत शासन का विरोध करने वालों का दमन किया गया तो यह आक्रोश और बढ़ गया.
1991 में मॉस्को में तख़्तापलट की कोशिश हुई. इसके बाद यूक्रेन ने अपनी स्वतंत्रता का एलान कर दिया.
90 के दशक में लगभग ढाई लाख क्राइमियाई तातार और उनके वंशज सोवियत संघ के विघटन के बाद क्रीमिया लौट आए. ये वही लोग थे जिन्हें स्टालिन के समय निर्वासित किया गया था.
1994 में राष्ट्रपति चुनाव में लियोनिद क्रावचुक को हराकर लियोनिद कुचमा ने पद हासिल किया. उन्होंने पश्चिम और रूस के साथ संतुलन बनाने की नीति अपनाई.
1996 में यूक्रेन ने नया लोकतांत्रिक संविधान अपनाया और नई मुद्रा रिव्निया जारी की गई. 2002 मार्च में आम चुनाव में किसी को भी बहुमत नहीं मिल पाया. पार्टियों ने राष्ट्रपति कुचमा का विरोध किया और उन पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया.
इसी साल मई में सरकार ने नेटो में शामिल होने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू करने एलान कर दिया. पुतिन किसी भी हाल में यूक्रेन को नेटो में शामिल नहीं होने देना चाहते हैं.

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रूस समर्थित राष्ट्रपति बनने के बाद यूक्रेन का एजेंडा बदला
2010 फ़रवरी में रूस समर्थित विक्टर यानुकोविच यूक्रेनी राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में विजेता घोषित किए गए.
इसी साल जून में संसद ने नेटो में शामिल होने की योजना के ख़िलाफ़ वोट किया. 2013 के नवंबर में यूक्रेन ने यूरोपीय संघ के साथ जुड़ने के फ़ैसले से पीछे हटने का फ़ैसला किया.
इसके विरोध में हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए. उनका कहना था कि रूस के दबाव में यह क़दम उठाया गया है. 2014 फ़रवरी में सुरक्षा बलों ने कीव में 77 प्रदर्शनकारियों को मार डाला. इसके बाद राष्ट्रपति यानुकोविच रूस भाग गए और विपक्ष सत्ता में आ गया.
इसी बीच रूस ने ताक़त का इस्तेमाल करके क्रीमिया पर क़ब्ज़ा कर लिया जिससे शीत युद्ध के बाद से रूस और पश्चिम के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया. अमरीका और यूरोपीय संघ ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए.

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यूक्रेन की आज़ादी के बाद स्थानीय रूसी समुदाय क्राइमिया की संप्रभुता और रूस के साथ मज़बूत संबंधों के पक्ष में खुलकर बोलने लगे. रूसी नेताओं के इन क़दमों के यूक्रेन की सरकार ने असंवैधानिक घोषित कर दिया.
1996 में यूक्रेन के संविधान में ये तय हुआ कि क्राइमिया को स्वायत्तता का दर्जा मिलेगा, लेकिन क्रीमिया में क़ानून-व्यवस्था यूक्रेन से ही निर्धारित होगी. क्राइमिया के पास अपनी संसद है और इसे कृषि, सार्वजनिक इन्फ़्रास्ट्रक्चर के साथ पर्यटन पर क़ानून बनाने का अधिकार है.
दूसरी ओर क्राइमियाई तातारों की भी अनाधिकारिक रूप से अपनी संसद मजलिस है. इसका लक्ष्य अपने अधिकारों और हितों को लेकर आवाज़ उठाना है.
क्राइमियाई शहर सेवास्तोपोल का बंदरगाह प्रमुख नौसैनिक अड्डा है और 1783 से काला सागर बड़े पोतों का ठिकाना रहा है. सोवियत संघ के पतन के बाद ये पोत यूक्रेन और रूस के बीच बँट गए.
सेवास्तोपोल में रूसी पोतों की मौजूदगी रूस और यूक्रेन में तनाव का केंद्र है. 2008 में पश्चिमी देशों के समर्थित यूक्रेनियन राष्ट्रपति ने जॉर्जिया से टकराव के दौरान रूस से काला सागर में पोतों के इस्तेमाल नहीं करने की मांग की थी. दोनों देशों में 2017 तक रूसी पोतों को काला सागर में रहने देने की सहमति बनी थी. लेकिन बाद में इसे सस्ती रूसी गैस के बदले 2017 से 25 और साल के लिए बढ़ा दिया गया था.

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2014 का हमला
2014 अप्रैल में रूस समर्थक हथियारबंद समूहों ने रूसी सीमा के पास कुछ इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर लिया. इस बीच मई में पश्चिम समर्थक कारोबारी पेत्रो पोरोशेंको ने चुनाव जीता और राष्ट्रपति बन गए.
उधर पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष चल रहा था. जुलाई महीने में रूस समर्थक बलों ने संघर्ष वाले इलाक़े के ऊपर से उड़ रहे मलेशियन एयरलाइनर के एक यात्री 'विमान को गिरा दिया' जिससे विमान पर सवार सभी 298 लोगों की मौत हो गई. 2014 अक्टूबर में यूक्रेन में हुए चुनावों में पश्चिम समर्थक पार्टियों को स्पष्ट बहुमत मिला.
2016 तक यूक्रेन की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने लगी. 2017 जुलाई में यूरोपीय संघ एसोसिएशन समझौते पर हस्ताक्षर हुए और एक सितंबर से यूक्रेन ने यूरोपीय संघ के साथ रिश्ते स्थापित कर लिए.
इसके बाद 2018 मई में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दक्षिणी रूस को क्रीमिया से जोड़ने वाले एक पुल का उद्घाटन किया. यूक्रेन इस क़दम को ग़ैरक़ानूनी बताता रहा. दोनों देश कई मौक़ों एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं. अब एक बार फिर से रूस और यूक्रेन आमने-सामने हैं. अमेरिका का कहना है कि रूस किसी भी वक़्त यूक्रेन पर हमला कर सकता है.

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9 मार्च, 2015 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार स्वीकार किया था कि क्राइमिया में आत्मनिर्णय को लेकर हुए जनमत संग्रह से हफ़्तों पहले ही उसे रूस में मिलाने का आदेश दे दिया गया था. रूस ने क्राइमिया को 18 मार्च, 2014 को औपचारिक रूप से अपने में मिला लिया था.
पुतिन ने टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि 22 फ़रवरी की रात में ही क्राइमिया की वापसी की शुरुआत हो गई थी. पुतिन ने इससे पहले कहा था कि 80 फ़ीसदी क्राइमियाई नागरिकों ने रूस में शामिल होने के पक्ष में वोट किया था, इसके बाद उन्होंने मिलाने का फ़ैसला लिया था.
(नोट - ये लेख मूल रूप से इसी साल जनवरी में प्रकाशित हुआ था)
कॉपी - रजनीश कुमार
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