रूस के लिए लड़ने वाले नेपाली भाड़े के सैनिकों के शव वापस लाना क्यों मुश्किल?

इमेज स्रोत, FAMILYHANDOUT
- Author, अशोक दाहाल
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी नेपाली सेवा
रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस की ओर से जान गंवाने वाले नेपाली नागरिकों के शवों को देश वापस लाना चुनौतीपूर्ण बन गया है.
बीबीसी नेपाली की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में रूस में नेपाल के राजदूत मिलनराज तुलाधर ने कहा है कि "इस बारे में अभी कोई प्रगति नहीं हुई है."
नेपाल के विदेश मंत्रालय के मातहत आने वाले काउंसलर डिपार्टमेंट में डायरेक्टर जनरल प्रकाशमणि पौडेल ने भी कहा है कि उन्हें "रूस के जवाब का इंतज़ार है".
उन्होंने कहा, "नेपाल की ओर से बातचीत जारी है, लेकिन रूस की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला है."
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यूक्रेन युद्ध में अब तक रूस की ओर से लड़ने वाले छह नेपाली नागरिकों की जान गई है. मंत्रालय ने रूस से इन लोगों के शवों को जल्द से जल्द नेपाल भेजने की अपील की है.
बताया जाता है कि इस युद्ध में रूस की ओर से लड़ते हुए मारे गए इन छह नेपाली नागरिकों में से कुछ की मौत पिछले साल जून में ही हो चुकी थी.
नेपाली विदेश मंत्रालय ने कहा है कि रूस की ओर से ऐसे संकेत दिए गए हैं कि जंग के मैदान में मारे गए नेपाली नागरिकों के शवों को वापस भेजना मुश्किल होगा.

शवों को दफ़ना दिया गया?
मारे गए नागरिकों में से एक के परिजन ने कहा है कि दूतावास इस ख़बर को ज़ाहिर नहीं करना चाहता कि "रूस ने मारे गए नेपाली लोगों के शव को दफ़ना दिया गया है."
परिवार के एक सदस्य ने बीबीसी को बताया कि रूस की ओर से उन्हें जानकारी दी गई है कि इन शवों को साल भर से पहले नहीं निकाला जा सकता. वहीं दूतावास ने परिवार को भरोसा दिया है कि अगले साल शवों के अवशेषों को निकालने की पहल की जा सकती है.
यूक्रेन में मारे गए नेपाली नागरिकों में पोखरा के रहने वाले देवान राय का भी नाम शामिल है.
उनके पिता धरनराज ने बीबीसी नेपाली को बताया कि उनके बेटे के शव को वापस लाने में सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "अगर मेरा बेटा वापस नहीं आता है, तब भी उसका चेहरा देखने की इच्छा है. हम सरकार से और क्या उम्मीद कर सकते हैं?"
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि कुछ शव क्षत-विक्षत हो सकते हैं, इसलिए इस बात पर भी विचार हो रहा है कि उन्हें वापस लाने से परिवार को और परेशानी हो सकती है.
रूसी सेना में कितने नेपालियों को भर्ती किया गया है, इसका कोई विश्वनीय आंकड़ा मौजूद नहीं है. बीबीसी नेपाली सेवा ने काठमांडू में मौजूद रूसी दूतावास से ईमेल के ज़रिए शवों को वापस भेजने और भर्ती हुए नेपाली नागरिकों की संख्या के बारे में जानकारी मांगी है. फिलहाल उनके जवाब का इंतज़ार है.

मुआवज़े की पहल
मॉस्को में नेपाल के राजदूत तुलाधर ने मारे गए नेपाली नागरिकों के परिजनों को सूचना दी है कि उन्हें मुआवज़ा मिल सकता है.
उन्होंने कहा, "मारे गए नागरिकों के परिजनों को मुआवज़ा मिलेगा. लेकिन अन्य सवालों का मेरे पास जवाब नहीं है."
काठमांडू में दूतावास और विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि मुआवज़े को लेकर कोशिशें की जा रही हैं. सोमवार को विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर कहा कि रूस से मुआवज़े की अपील की गई है.
मृतकों के परिजनों ने कहा है कि उन्हें मुआवज़े का भरोसा दिया गया है लेकिन अभी राशि और समयसीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
मृतकों के परिजनों की शिकायत है कि रूस की ओर से अभी तक युद्ध में जान गंवाने वाले नेपाली नागरिकों की मौत का कोई सबूत नहीं दिया गया है, इसके अलावा जीवन बीमा समेत अन्य प्रशासनिक दिक्कतें भी हैं.

रूसी राजदूत तलब
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने काठमांडू में रूसी राजदूत एलेक्सी नोविकोफ़ को तलब किया और नेपाली नागरिकों के शवों को वापस भेजने के बारे में पहल करने को कहा.
मंत्रालय के अनुसार, मॉस्को में नेपाली राजदूत तुलाधर रूस के रक्षा मंत्रालय से संपर्क में हैं.
सोमवार को जारी बयान के अनुसार, मंत्रालय ने रूस से और नेपाली नागरिकों को सेना में भर्ती न करने को कहा है. साथ ही भर्ती किए गए लोगों को वापस नेपाल भेजने की अपील की है.

एक घायल नेपाली नागरिक वापस लौटा
हालांकि मीडिया में ऐसी ख़बरें हैं कि रूसी सेना में भर्ती कई नेपाली नागरिक घायल हुए हैं लेकिन मंत्रालय और दूतावास की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है.
नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अभी तक एक घायल व्यक्ति नेपाल वापस लौटा है और उके साथ संपर्क में है. उनके अनुसार, मंत्रालय उस व्यक्ति के माध्यम से वहां के हालात और नेपाली नागरिकों का हाल समझने की कोशिश कर रहा है.
नेपाली अधिकारियों का कहना है कि रूसी वीज़ा को और कड़ा बनाने के बाद दिल्ली के रास्ते रूस जाने वाले नेपाली नागरिकों की संख्या में इजाफ़ा हुआ है.
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने सोमवार को मीडिया के साथ एक बैठक के दौरान कहा कि 26 और 27 नवंबर को 25 नेपाली नागरिक इस तरह के वीज़ा पर रूस गए.
उधर, नेपाली पुलिस ने कहा कि उन्होंने रूसी सेना में भर्ती होने के लिए नेपाली नागरिकों को भेजने वाले गिरोह के 12 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
इन लोगों को काठमांडू में अलग-अलग जगहों से गिरफ़्तार किया गया.
पुलिस का दावा है कि यह गिरोह नेपाली नौजवानों को दिल्ली के रास्ते रूस भेजने में शामिल है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















