भारत-चीन तनावः नेपाल के हवाई अड्डों का अंतरराष्ट्रीय विमानों के लिए कब ख़त्म होगा इंतज़ार

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- Author, अनबरासन एथिराजन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
आंख जहां तक देख सके, चमकदार नारंगी रंग का ये होटल अलग ही दिखाई देता है लेकिन इसके मालिक विष्णु शर्मा का दुर्भाग्य है कि इस होटल को देखने के लिए यहां कोई नहीं है.
नेपाल में बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी में उनके इस होटल से पर्वतों का शानदार नज़ारा दिखाई देता है.
लेकिन पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद हक़ीक़त नहीं बन सकी. इसकी एक वजह नेपाल के दो ताक़तवर पड़ोसी देशों भारत और चीन के बीच बढ़ रहा तनाव भी है.
लुंबिनी विकास ट्रस्ट के मुताबिक़ लुंबिनी में साल 2022 में क़रीब दस लाख यात्री पहुंचे. यही वो संख्या थी जिसे ध्यान में रखकर सरकार ने गौतम बुद्ध इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण पर पिछले साल मई में क़रीब 7.6 करोड़ डॉलर ख़र्च कर दिए.
यहां आने वाले अधिकतर यात्रियों में घरेलू पर्यटक होते हैं, कुल पर्यटकों में से एक तिहाई पड़ोसी भारत से आते हैं.
ये एयरपोर्ट टर्मिनल, जिसे भैरहवा एयरपोर्ट भी कहा जाता है, यात्रियों को काठमांडू से 250 किलोमीटर की सड़क यात्रा की जगह सीधे उड़ान की सुविधा देता है.
बावजूद इसके, पर्यटकों की संख्या में जिस इज़ाफ़े का अंदाज़ा लगाया गया था, वो कभी पूरा नहीं हुआ. ट्रैवल उद्योग से जुड़े कुछ लोग इसका एक कारण शुरुआत में प्रोमोशन ना किए जाने और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को इंसेटिव ना दिया जाना भी बताते हैं.
ख़ुद पर भारी क़र्ज़ होने का दावा करते हुए शर्मा कहते हैं, “सरकार ने हमसे अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें आने का वादा करते हुए इंफ़्रास्ट्रक्चर पर ख़र्च करने के लिए कहा. लेकिन मेरा होटल दो तिहाई खाली रहता है. अब मुझे क़र्ज़ लौटाने में भी दिक़्क़त हो रही है.”
ट्रैवल उद्योग से जुड़े लोग तर्क देते हैं कि अगर इस एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें नियमित हो जाएं तो पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है.
लेकिन नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि भारत ने बड़े यात्री विमानों को अपने पश्चिमी हवाई क्षेत्र से उड़ने की अनुमति नहीं दी है. इसका मतलब ये है कि गौतम बुद्ध एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए विमान भारत के ऊपर से उड़ान नहीं भर सकते हैं. भारतीय हवाई क्षेत्र तक पहुंच होने से यात्रा की दूरी कम होगी और इससे यात्रा ख़र्च भी कम होगा.
नेपाल में कुछ लोग ये भी मानते हैं कि भारत इस बात को लेकर भी चिंतित है कि गौतम बुद्ध एयरपोर्ट का निर्माण चीन के नॉर्थवेस्ट सिविल एविएशन एयरपोर्ट ने किया है.

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भारत और चीन के बीच तनाव
ये एयरपोर्ट नेपाल की भारत सीमा के पास स्थित है. यहीं से पश्चिम में एशिया के इन दोनों बड़े देशों भारत और चीन के सैनिकों के बीच में पिछले साल दिसंबर में अरुणाचल प्रदेश में झड़प हुई थी. ये झड़प एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए खुलने के सात महीने बाद ही हुई थी.
साल 2020 में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान में हुई झड़प में कम से कम बीस भारतीय सैनिक मारे गए थे. इस विवाद की जड़ में भारत और चीन के बीच की 3440 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसे लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) कहा जाता है, और जो अभी तक स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है.
नदियों, झीलों और बर्फ़ीली पहाड़ियों होने का मतलब ये है कि ये लाइन बदल सकती है. दुनिया की दो सबसे बड़ी सेनाओं वाले देशों के सैनिक कई जगहों पर आमने सामने आ चुके हैं.
सीमा की स्थिति पर दोनों देशों के बीच बढ़ रहे राजनीतिक तनाव का भी असर पड़ता है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संबंध बहुत मधुर नहीं है.
विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता वार्ता है क्योंकि संघर्ष की स्थिति में दोनों ही देशों को बहुत कुछ गंवाना पड़ सकता है. दोनों देशों के बीच सिर्फ़ एक बार 1962 में युद्ध हुआ है, जब भारत को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था.
गौतम बुद्ध एयरपोर्ट हवाई यात्रियों की संख्या बढ़ाने और काठमांडू एयरपोर्ट से भार हल्का करने की योजना का अहम हिस्सा होना था. कई सालों से काठमांडू नेपाल का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है. इस एयरपोर्ट पर भारी भीड़ रहती है और 2015 के भूकंप के बाद ये कुछ समय के लिए बंद भी रहा था.

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पोखरा का इंतज़ार...
नेपाल के पोखरा में एक तीसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी है. बेहद खूबसूरत घाटी में बसा ये शहर अपने दिलकश दृश्यों और अन्नपूर्णा पर्वत के नज़ारों के लिए प्रसिद्ध है. लेकिन ये भी भैरहवा एयरपोर्ट की तरह ही दिक्कतों का सामना कर रहा है.
ये एयरपोर्ट पिछले साल जनवरी में शुरू हुआ था. चीन से मिली 2.15 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद से बने इस एयरपोर्ट पर अभी तक एक भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान नहीं उतरी है. यहां सिर्फ चीन के चेंगडू से अधिकारियों और पर्यटकों को लेकर एक चार्टर फ्लाइट ज़रूर पहुंची थी.
अभी गौतम बुद्ध एयरपोर्ट और पोखरा एयरपोर्ट पर रोज़ाना क़रीब 80-85 उड़ानें आती-जाती हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन एयरपोर्ट को चलाये रखने के लिए उड़ानों की संख्या बढ़ाना ज़रूरी है.
नेपाल की सिविल एविएशन अथॉरिटी के पूर्व निदेशक त्री रत्न मनाधर कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि सिर्फ़ घरेलू उड़ाने से इन एयरपोर्टों को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाया जा सकता है. नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बिना क़र्ज़ लौटाना मुश्किल हो जाएगा.”
पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रमुख बिक्रम राज गौतम कहते हैं कि नेपाल को ‘सक्रिय कूटनीति’ की ज़रूरत है ताकि भारत जैसे देशों को नेपाल आने वाली उड़ानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र खोलने के लिए मनाया जा सके.
विशेषज्ञ कहते हैं कि जब तक भारत पश्चिम की तरफ़ से ट्रैफ़िक को नहीं आने दे रहा है, नेपाल पूर्व के थाईलैंड, जापान और कंबोडिया जैसे देशों से पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास कर सकता है.
नेपाल एयरलाइन ने हाल ही में भैरहवा से क्वालालंपुर के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू की है. गौतम बुद्ध इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निदेशक दीपक बज्राचार्य कहते हैं कि इससे अन्य एयरलाइनों को भी सकारात्मक संदेश जाएगा.
हालांकि नेपाल के नागिरक उड्डयन मंत्री सुदान किरांती को उम्मीद है कि भारत के साथ विवाद को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा.
बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, “हम भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं और हमारी सकारात्मक वार्ता हो रही है.”
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