नेपाल नेशनल असेंबली के स्पीकर को चीन ने भारत के बारे में कही कई बातें

फणींद्र दहल

बीबीसी समाचार नेपाली

बीजिंग में नेपाल के नेशनल असेंबली के स्पीकर गणेश प्रसाद तिमिलसिना और चीन के नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन झाओ लेजी.

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इमेज कैप्शन, बीजिंग में नेपाल की नेशनल असेंबली के स्पीकर गणेश प्रसाद तिमिलसिना और चीन के नेशनल पीपल्स कांग्रेस की स्थायी कमिटी के चेयरमैन चाओ लेजी.

नेपाल में भारत और अमेरिका को लेकर चीन चिंतित है. उसने इस बारे में नेपाल को एहतियात बरतने को कहा है.

चीन की यात्रा पर गए नेपाल नेशनल असेंबली के स्पीकर ने बीबीसी को बताया कि उनके चीनी समकक्ष अधिकारी ने उनसे भारत और अमेरिका को लेकर सावधानी बरतने की अपील की और कहा कि नेपाल में ऐसी गतिविधियां हो सकती हैं, जिससे उनके देश को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

स्पीकर गणेश प्रसाद तिमिलसिना और चीन के नेशनल पीपल्स कांग्रेस की स्थायी कमिटी के चेयरमैन चाओ लेजी की बीजिंग में मीटिंग हुई है.

इस यात्रा के दौरान चाइनीज़ पीपल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कान्फ़्रेंस के चेयरमैन वांग हुनिंग के साथ भी उनकी मुलाक़ात हुई.

नेपाल ने वन चाइना नीति को स्वीकार किया है और लगातार कहता रहा है कि अपने देश में वो चीन विरोधी गतिविधियों की इजाज़त नहीं देगा.

शंघाई से बीबीसी से बात करते हुए तिमिलसिना ने कहा कि चीन की ओर से ज़ोर देकर कहा गया कि नेपाल में चीन विरोधी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए.

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तिमिलसिना तिब्बत में होने वाले एक एक्सपो में चीफ़ गेस्ट के रूप में शामिल होने के लिए चीन की यात्रा पर पहुंचे हैं.

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इमेज कैप्शन, तिमिलसिना तिब्बत में होने वाले एक एक्सपो में चीफ़ गेस्ट के रूप में शामिल होने के लिए चीन की यात्रा पर हैं.

भारत और अमेरिका का मुद्दा

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उन्होंने कहा, “नेपाल की सरकार ने बार बार दोहराया है कि वो अपने देश में चीन विरोधी गतिविधियों की इजाज़त नहीं देगी. हालांकि वे चाहते थे कि थोड़ी सावधानी बरती जाए क्योंकि तिब्बती शरणार्थी या ऐसे तत्व हो सकते हैं, जो विभिन्न नामों से घुसपैठ करते हैं और नेपाल में चीन विरोधी गतिविधि को अंजाम दे सकते हैं.”

तिमिलसिना ने कहा कि चाओ लेजी के साथ वार्ता में भारत और अमेरिका का मुद्दा उठा.

स्पीकर ने कहा, "उनकी चिंता थी कि अमेरिका और भारत किसी न किसी रूप में नेपाल में चीन विरोधी गतिविधियां को अंजाम दे सकते हैं और ऐसा होने न दिया जाए."

चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ में जारी बयान के अनुसार, चाओ लेजी ने कहा कि आपसी रिश्ते मज़बूत करना दोनों देशों के हित में है.

बयान में चाओ के हवाले से कहा गया है, “चीनी पक्ष ने नेपाल के वन चाइना नीति पर दृढ़ता से खड़े रहने और चीन के मूल हितों को समर्थन देने और अपनी ज़मीन को चीन विरोधी गतिविधि के लिए इस्तेमाल न करने देने की प्रतिबद्धता के लिए उसकी तारीफ़ की.”

महाशक्ति अमेरिका और इसके प्रतिद्वंद्वी चीन के बीच मौजूदा समय में अच्छे रिश्ते नहीं हैं.

थिंक टैंक काउंसिल ऑफ़ फ़ॉरेन रिलेशंस के अनुसार, चीन और अमेरिका के बीच दुनिया में सबसे अहम और जटिल द्विपक्षीय संबंध हैं.

साल 1949 से, दोनों देश व्यापार, जलवायु परिवर्तन और ताइवान समेत कई मुद्दों पर सहयोग और तनाव के दौर से गुजरे हैं.

सालों से अनसुलझे सीमा विवादों के कारण पिछले कुछ सालों से भारत और चीन के संबंध तनावपूर्ण स्थिति में हैं.

चीन नेपाल पर अपने रक्षा परियोजना में शामिल होने के लिए लगातार दबाव बना रहा है.

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इमेज कैप्शन, चीन अपने रक्षा परियोजना में शामिल होने के लिए नेपाल पर लगातार दबाव बना रहा है.

नेपाल बन सकता है महाशक्तियों का अखाड़ा?

विदेशी मामलों में नेपाल के दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के सलाहकार रह चुके पूर्व राजदूत दिनेश भट्टाराई का मानना है कि चीन का ये ताज़ा नज़रिया, असल में विश्व की महाशक्तियों द्वारा नेपाल में दिखाई जा रही दिलचस्पी को लेकर चीन की लगातार बनी हुई चिंता को दर्शाता है.

उन्होंने कहा, “शुरू से ही अमेरिका को लेकर चीन की चिंता बनी रही है. पिछले साल अमेरिका की मिलेनियम चैलेंज कॉर्पोरेशन (एमसीसी) को नेपाल की संसद ने मंज़ूरी दे दी थी तब काफ़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली.''

''अभी भारत और अमेरिका क़रीब आ रहे हैं तो ये देखना होगा कि क्या चीन का ताज़ा नज़रिया दोनों को एक साथ देखने का है? हमें चौकन्ना रहना होगा. मुझे लगता है कि ये दिखाता है कि नेपाल विदेशी शक्तियों की गतिविधियों का अखाड़ा हो सकता है.”

दिनेश भट्टाराई का कहना है, “नेपाल पहले ही भारत और चीनके बीच उलझा हुआ है. चूंकि उन दोनों देशों में किसी सुलह की संभावना नहीं दिखती है, इसलिए अस्थिरता जारी रह सकती है और हालात और गंभीर हो सकते हैं.”

अमेरिकी थिंक टैंक के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वॉशिंगटन नेपाल में चीन के प्रभाव को कम करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम कर रहा है.

वॉशिंगटन डीसी में विल्सन सेंटर के दक्षिण एशिया संस्थान के निदेशक माइकल कुगेलमैन ने बीती जनवरी में कहा था कि अमेरिका नेपाल को अपने इंडो पैसिफ़िक (हिंद प्रशांत) नीति का हिस्सा मानता है.

उन्होंने कहा था, “अमेरिका उम्मीद कर रहा है कि नेपाल में चीन के प्रभाव को कम करने में भारत अपने पारंपरिक रिश्ते की वजह से एक बड़ी भूमिका निभा सकता है.”

पिछले साल नेपाल ने एमसीसी के 60 अरब रुपए के अमेरिकी आर्थिक मदद को मंज़ूरी दी थी, जिसके बाद बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था.

साल 2020 के अंत में अमेरिका ने तिब्बत को समर्थन देने वाले एक महत्वपूर्ण क़ानून को पास किया.

यह क़ानून अमेरिका को अधिकार देता है कि तिब्बत के धार्मिक गुरु दलाई लामा के वारिस के चुनाव में बाधा पहुंचाने वाले किसी भी चीनी अधिकारी पर वो आर्थिक और वीज़ा संबंधी प्रतिबंध लगा सकता है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2019 में नेपाल का दौरा किया था.

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जिनपिंग के दौरे में हुए समझौतों को लागू करने पर ज़ोर

अमेरिका भारत और नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकार की रक्षा का समर्थन करता है.

मई 2022 में तिब्बती मामलों की कोऑर्डिनेटर और अमेरिकी उप रक्षामंत्री अज़रा ज़ेया ने काठमांडू में तिब्बती बस्तियों का दौरा किया था.

इस पर एक चीनी एक्सपर्ट ने कहा था कि नेपाल को अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए इस दौरे से नकारात्मक प्रभाव के बारे में अपना पक्ष रखना चाहिए था.

हाल के महीनों में, चीनी अख़बारों ने नेपाली सरकार द्वारा कुछ पनबिजली परियोजनाओं को भारतीय कंपनियों को सौंपने पर असंतोष ज़ाहिर किया था.

स्पीकर तिमिलसिना के दौरे में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि 2019 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेपाल दौरे में हुए समझौतों को लागू किया जाए.

साथ ही चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना को लागू करने के बारे में भी चर्चा हुई.

तिमिलसिना ने कहा, “बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को आए 10 साल हो गए. इस परियोजना की अहमियत पर भी चर्चा हुई.”

नेपाल ने इस पर 2017 में हस्ताक्षर किया था और कई एक्सपर्ट और सरकारी एजेंसियां इस बात पर जोर दे रही हैं कि बड़े प्रोजेक्ट केवल चीनी सरकार की सब्सिडी से बनाए जाने चाहिए क्योंकि चीनी कर्ज़ भविष्य में मुश्किल पैदा कर सकता है.

स्पीकर तिमिलसिना ने कहा कि इस बात पर भी चर्चा हुई कि बीजिंग और काठमांडू के बीच हुए समझौते को लागू करने के लिए क्या संसद से क़ानून पास कराना चाहिए.

चीन के राष्ट्रपति की नेपाल यात्रा के दौरान इस बात पर सहमति बनी थी कि काठमांडू और बीजिंग के बीच एक रेल नेटवर्क की विस्तृत फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जाएगी.

दोनों ही पक्षों ने वादा किया था कि यह क़दम रेल निर्माण की नींव रखेगा और भविष्य में इससे काठमांडू, पोखरा और लुंबिनी रेलवे प्रोजेक्ट को जोड़ा जाएगा.

माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड का चीन दौरा हो सकता है.

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प्रचंड का चीन दौरे कब शुरू होगा?

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर कुछ सप्ताह पहले दिल्ली आए प्रधानमंत्री प्रचंड के निकट भविष्य में चीन के दौरे पर जाने की उम्मीद है.

प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा कि पिछले मार्च में चीन द्वारा उन्हें बोआओ फोरम में भाग लेने के लिए न्योता दिया गया था, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव सहित कई घरेलू घटनाक्रमों के कारण, चीनी राजदूत की सलाह पर बाद में यात्रा करने का फ़ैसला लिया गया.

नेशनल असेंबली के स्पीकर ने कहा कि नेपाली पीएम के जुलाई या अगस्त में चीनी दौरे पर जाने की उम्मीद है और इस दौरान अतीत में हुए समझौतों को लागू करने पर चर्चा हो सकती है.

उनके अनुसार, "मैंने उस दौरे से पहले बातचीत का माहौल बनाने के बारे में बात की. वे इसके लिए राजी हो गए लेकिन तारीख़ की कोई बात नहीं हुई.”

हालांकि दोनों देशों के कूटनीतिक तंत्र में ये परंपरा है कि वार्ता के एजेंडे को अंतिम रूप देने के बाद ही यात्रा की तारीख़ घोषित होती है.

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