नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की भारत यात्रा के दौरान किस संधि की होगी समीक्षा?

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- Author, विष्णु पोखरेल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ नेपाली
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल प्रचंड 31 मई से भारत की यात्रा पर हैं. नेपाली अधिकारियों के मुताबिक़ तीन जून तक की उनकी इस यात्रा के दौरान, भारत और नेपाल के बीच दो दशक पुरानी संधि की समीक्षा भी होगी.
नेपाल के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री ने भी पुष्टि की है कि 1999 के नेपाल-भारत ट्रांज़िट संधि को कुछ "अतिरिक्त सुविधाओं" के साथ संशोधित किया जा रहा है.
अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान दिल्ली में संशोधित संधि पर हस्ताक्षर होंगे.
बताया जाता है कि संशोधित संधि के लागू होने के बाद नेपाल को पहली बार भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों तक ट्रांज़िट एक्सेस मिलेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह आयात और निर्यात के लिए "लागत और समय कम करेगा."
अधिकारियों ने बताया कि संधि में संशोधन के बाद नेपाल के लिए कुछ और रास्ते खोले जाएंगे.
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क्या कहते हैं वाणिज्य मंत्री?
1999 में नेपाल और भारत के बीच एक ट्रांज़िट संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे. तब से, संधि समय-समय पर नवीनीकृत होती रही.
संधि में, न तो नेपाल और न ही भारत किसी तरह का संशोधन चाहते थे, तो संधि हर सात साल में स्वत: नवीनीकृत हो जाती है. इसी व्यवस्था के अनुसार जनवरी 2020 में आख़िरी बार संधि का स्वत: नवीनीकरण हुआ था.
लेकिन उक्त संधि में, एक प्रावधान है "यदि आवश्यक हो तो पार्टियों के बीच आपसी समझौते से संशोधिन किया जा सकता है".
अधिकारियों के अनुसार, संधि को "आवश्यकता के आधार पर संशोधित किया जाना है, भले ही अवधि वही रहे".
नेपाल और भारत के बीच व्यापार के विस्तार के साथ-साथ नेपाल के तीसरे देशों के साथ बढ़ते व्यापार संबंधों के कारण, इसकी समीक्षा की जानी चाहिए.
नेपाल और भारत के अधिकारियों ने इस बारे में बार-बार बातचीत की थी और 2020 के अंत तक एक समझौते पर पहुंच गए थे.

उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री रमेश रिजाल ने बीबीसी को बताया कि इसी समझौते के तहत अब नेपाल-भारत ट्रांजिट संधि की समीक्षा की जा रही है. उन्होंने कहा, ''दो साल पहले हम जिस पर सहमत हुए थे, उसके मुताबिक़ ही संशोधनों के साथ इसकी समीक्षा की जा रही है. यह संधि हमारी यात्रा के एजेंडे में भी है और इस पर द्विपक्षीय मंत्री स्तर पर हस्ताक्षर होंगे."
मंत्री रिजाल के अनुसार, भले ही संधि में दो और बंदरगाहों तक नेपाल की पहुंच की व्यवस्था की जानी है, "यह अभी भी चर्चा के स्तर पर है". लेकिन कुछ अन्य मामलों में, यह कहा जाता है कि संधि में नेपाल के लिए "लाभदायक" सुविधाओं को जोड़ा गया है.



'नेपाल को मिलेगी नई सुविधाएं'

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नेपाल मुख्य रूप से आयात और निर्यात के लिए भारत के कोलकाता बंदरगाह का उपयोग करता रहा है.
संधि के संशोधन का मसौदा तैयार करने में शामिल कुछ अधिकारियों द्वारा बीबीसी को दी गई जानकारी के मुताबिक़ संशोधित संधि लागू होने पर नेपाल की भारत के तीन अंतर्देशीय जलमार्गों तक पहुंच होगी.
इस व्यवस्था से नेपाल अब भारत के आंतरिक जलमार्गों का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न समुद्री बंदरगाहों से भारत से नेपाल तक सामान लाने में सक्षम होगा. कोलकाता-वाराणसी, कोलकाता-साहिबगंज और कोलकाता-कालूघाट उन मार्गों में से हैं, जिन तक अब नेपाल की पहुंच होगी.
ड्राफ्टिंग में शामिल एक अधिकारी ने कहा, "अब हम उन जलमार्गों और उनके टर्मिनलों का उपयोग करने में सक्षम होंगे. इसके अलावा, इस समीक्षा के साथ, नेपाल को आयात और निर्यात करने के लिए भारत में और मार्ग भी मिलेंगे.”
अधिकारी ने कहा, "अभी तक हमें परिवहन के लिए 15 रूट मिले हैं, अब 19 होंगे."
नेपाल को लाभ

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नेपाल-भारत के बीच ट्रांज़िट संधि की समीक्षा के लिए आयोजित महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों में वाणिज्य मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव रविशंकर सैंजू ने पहली दो बैठकों में नेपाल का नेतृत्व किया था.
उनका कहना है कि नेपाल और भारत के बीच ट्रांज़िट संधि के कुछ प्रावधान मौजूदा हालात के लिहाज से पुराने हैं और इसलिए इसकी समीक्षा किए जाने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, ''प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे के विकास के मामले में कुछ चीज़ों को बदलना पड़ा. इसके लिए दोनों देशों के बीच कई बार पत्राचार हुआ है.''
सैंजू के मुताबिक़, भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों तक नेपाल की पहुंच से उसे भविष्य में काफ़ी फ़ायदा होगा. “सड़क या रेल के ज़रिए माल लाने में ख़र्च कम होगा क्योंकि दूरी कम हो जाएगी.”
उन्होंने कहा कि भविष्य में नेपाल जलमार्गों के ज़रिए माल का आयात और निर्यात कर सकेगा. उन्होंने यह भी बताया, "जैसे 600 टन भारी जहाज़ों से सामान कोलकाता से साहिबगंज लाए जा सकते हैं, वहां से दो से तीन हज़ार टन के जहाजों से सामान हमारे कोशी बैराज तक लाए जा सकते हैं." उनका कहना है कि जिस स्थिति में नेपाल भविष्य में जल परिवहन विकसित करेगा, उस स्थिति को देखते हुए भी भारत के आंतरिक जलमार्गों तक पहुंच स्थापित करना उचित है.
उन्होंने कहा कि इसी तरह जब नए रास्ते खुलेंगे तो विभिन्न बंदरगाहों से नेपाली सीमा पर सामान लाना और भेजना आसान होगा.


अतिरिक्त बंदरगाह जिन तक नेपाल पहुंच चाहता है

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नेपाली अधिकारियों के अनुसार, संधि में संशोधन के बावजूद भारत ने कहा है कि नेपाल की इच्छा के अनुसार इस वर्ष और अधिक बंदरगाहों तक पहुंच प्रदान करने के लिए "और चर्चा" की आवश्यकता है.
नेपाल लंबे समय से भारत से गुजरात में मुंद्रा और ओडिशा में धामरा बंदरगाहों तक पहुंच की मांग कर रहा है.
सैंजू का कहना है कि भारत ने उस पर "सकारात्मक प्रतिक्रिया" दी है लेकिन "अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है".
“हम 2004 में मुंबई में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट-जेएनपीटी तक पहुंच चाहते थे. उन्होंने कहा, "भारत ने कहा कि बंदरगाह बहुत भीड़भाड़ वाला है, इसलिए अन्य विकल्पों को देखना चाहिए."
नेपाल ट्रांसपोर्ट एंड वेयरहाउसिंग कंपनी लिमिटेड के अनुसार, नेपाल वर्तमान में कोलकाता-हल्दिया और विशाखापत्तनम बंदरगाहों का उपयोग कर रहा है. 2015 में नेपाल में नए संविधान की घोषणा के बाद, भारत ने अघोषित नाकेबंदी कर दी.
उस समय नेपाल ने ट्रांजिट के लिए चीन के साथ एक समझौता भी किया था और एक साल बाद 2016 में भारत ने विशाखापत्तनम बंदरगाह तक पहुंच प्रदान की थी.
समुद्र से जुड़े नहीं होने के चलते नेपाल के लिए भारत जलमार्ग के हिसाब से बेहद अहम पड़ोसी है. भारत ने 1990 के व्यापार और ट्रांज़िट संधि को नवीनीकृत नहीं किया, तो नेपाल में नाकेबंदी की गई और इसने पंचायत शासन को समाप्त करने में भी भूमिका निभाई थी.
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