नेपाल को किस मामले में मिला 'पीएम मोदी का भरोसा'

मोदी और प्रचंड

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    • Author, संजय ढकाल
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ नेपाली

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल 'प्रंचड' के सलाहकारों ने दावा किया है कि भारत सरकार से उन्हें आश्वासन मिला है कि चावल की आपूर्ति बंद नहीं होगी. भारत सरकार ने हाल ही में बासमती को छोड़कर अन्य प्रकार के चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है.

नेपाली प्रधानमंत्री के मुख्य राजनीतिक सलाहकार हरिबोल गजुरेल ने बताया कि बीते शनिवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेपाल के प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर चर्चा हुई और इसमें चावल का मुद्दा भी शामिल था.

गजुरेल ने बीबीसी नेपाली से कहा, "हमें बताया गया है कि उन्होंने हमारे अनुरोध को सकारात्मक तौर पर लिया है और इसलिए हम निश्चिंत हैं."

प्रधानमंत्री प्रचंड के प्रेस सलाहकार गोबिंद आचार्य ने भी इस बात की पुष्टि की कि नेपाल के मामले में भारत ने चावल का निर्यात बंद नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि टेलीफोन पर बातचीत का मुख्य विषय दो महीने पहले प्रधानमंत्री प्रचंड की भारत यात्रा के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बनी सहमति को लेकर था.

हालांकि दोनों देशों के प्रधानमंत्री के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत को लेकर भारत की ओर से जारी बयान में चावल का ज़िक्र नहीं है.

भारत की ओर से कहा गया है कि इस बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों की समीक्षा की गई और बातचीत नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की 31 मई से 3 जून तक की भारत यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही.

नेपाल अभी चावल उत्पादन में पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है और वहां आपूर्ति होने वाले चावल का बड़ा हिस्सा भारत से निर्यात होता रहा है.

दूसरी तरफ़ भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है. वैश्विक स्तर पर चावल के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी पिछले साल 40 प्रतिशत थी.

अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) के मुताबिक 2022-23 के दौरान भारत ने दो करोड़ 25 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया था.

अक्टूबर, 2022 के बाद भारत में चावल की क़ीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई, इसके बाद से भारत ने निर्यात पर पाबंदी लगाने की घोषणा की थी.

यहां ये जानना भी दिलचस्प है कि दुनिया के 42 देश अपनी आवश्यकता का कम से कम 50 प्रतिशत चावल भारत से आयात करते हैं. नेपाल भी उनमें एक है.

चावल

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नेपाल सरकार का अनुरोध

नेपाल सरकार के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने भारत से नेपाल को चावल की आपूर्ति करते रहने का अनुरोध किया है. इस बारे में आधिकारिक तौर पर पत्र भी भेजा गया है.

नेपाल के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री रमेश रिजाल ने बीबीसी को बताया, "हमने विदेश मंत्रालय के माध्यम से भारतीय दूतावास को पत्र लिख कर नेपाल को दस लाख मीट्रिक टन धान, एक लाख मीट्रिक टन चावल और 50,000 मीट्रिक टन चीनी की आपूर्ति करने का अनुरोध किया."

रमेश रिजाल ने यह भी बताया है कि भारतीय राजदूत से अनौपचारिक बातचीत में उन्हें सकारात्मक जवाब मिला. उन्होंने कहा कि नेपाल के व्यवसायियों के अनुरोध पर भारत से धान आपूर्ति में अधिक प्राथमिकता दी गयी है.

उन्होंने बताया, "अगर धान आएगा तो इससे भूसी और अन्य सामग्रियों के उत्पादन में भी मदद मिलेगी, इसलिए हमने धान की मात्रा अधिक रखी है."

खेती

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बढ़ती क़ीमत को लेकर चिंता

भारत सरकार ने घरेलू बाज़ार में मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए 20 जुलाई को गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था.

इसके तुरंत बाद नेपाल के खुदरा बाज़ार में चावल की क़ीमत अचानक बढ़ने लगी.

बीबीसी से बात करते हुए रिटेल ट्रेड एसोसिएशन के सचिव राजू मास्के ने कहा कि जैसे ही भारत ने निर्यात बंद करना शुरू किया, थोक विक्रेताओं ने क़ीमतें बढ़ा दीं. उन्होंने कहा कि 25 किलो के बैग की क़ीमत 300 रुपये से बढ़ गई है.

वहीं धान उत्पादकों ने कहा है कि उन्होंने क़ीमत नहीं बढ़ाई है बल्कि थोक विक्रेताओं ने क़ीमत बढ़ाई होगी. राजू मास्के के मुताबिक देश में अभी तीन महीने का स्टॉक है और उसके बाद नये चावल के बाज़ार में आने का समय होगा.

नेपाल सरकार ने कहा है कि अफ़वाहों के कारण चावल की क़ीमतें बढ़ने की आशंका के चलते ही भारत से बातचीत शुरू की गई है.

चावल

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चावल उत्पादन की स्थिति

नेपाल के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में सालाना लगभग 55 लाख मीट्रिक टन चावल का उत्पादन होता है. इसके अलावा कुछ लाख मीट्रिक टन धान और चावल आयात किया जाता है.

नेपाल के चावल, दाल और तेल उत्पादक संघ के अनुसार, मौजूदा परिस्थिति में भारत से लगभग 1.5 मिलियन मीट्रिक टन धान या 1 मिलियन मीट्रिक टन धान और 2.5 लाख मीट्रिक टन चावल आयात करना है.

कुछ आयातित चावल का उपयोग कनिका, भूसी और चावल की भूसी के उत्पादन में भी किया जाता है.

नेपाल राष्ट्र बैंक की ओर से नियमति तौर पर प्रकाशित आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि जून में समाप्त वित्तीय वर्ष के 11 महीनों में लगभग 33 अरब रुपये का चावल आयात किया गया था.

नेपाल के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान 24 प्रतिशत या लगभग एक चौथाई है. कृषि क्षेत्र के घरेलू उत्पादन में अकेले चावल का योगदान 15 प्रतिशत है. पिछले साल 14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हुई और क़रीब 55 लाख मीट्रिक टन चावल का उत्पादन हुआ था.

ट्रक

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भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक

भारत द्वारा चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की ख़बर के बाद अमेरिका और कनाडा समेत कई देशों में किराना दुकानों में भारतीय चावल की कमी हो गई है और इस वजह से उनकी क़ीमतों में बढ़ोत्तरी देखी गई.

भारत दुनियाभर में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है. दुनियाभर में चावल के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक है. बीते साल भारत ने 140 देशों को 225 लाख टन चावल निर्यात किया था.

इस वर्ष भारत में भी खाद्यान्नों की क़ीमत में वृद्धि हुई है, मूल्य वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार ने बासमती को छोड़कर अन्य प्रकार के चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है. पिछले साल भारत ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध ने वैश्विक खाद्य आपूर्ति को भी बाधित किया है. इससे आयात पर निर्भर रहने वाले नेपाल सहित कई देशों में खाद्यान्न की क़ीमतें अचानक बढ़ गयी हैं.

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