यूक्रेन युद्ध: अमेरिका के 'टॉप सीक्रेट' दस्तावेज़ किसने किए लीक?

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- Author, पॉल एडम्स
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, कीएव (यूक्रेन) से

- सोशल मैसेजिंग साइट डिस्कॉर्ड पर ख़ुफ़िया अमेरिकी दस्तावेज़ डाले गए
- इनमें यूक्रेन-रूस युद्ध के बारे में कई अहम जानकारियां शामिल
- शेयर किए गए दस्तावेज़ों में मानचित्र, चार्ट्स और फ़ोटोग्राफ़्स शामिल
- गर्मियों में यूक्रेन की रूसी सेना के ख़िलाफ़ संभावित सैन्य कार्रवाई की विस्तृत जानकारी
- कई डॉक्युमेंट्स पर टॉप सीक्रेट का चिन्ह
- पढ़िए क्या पड़ेगा इसका यूक्रेन-रूस युद्ध पर असर

अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के दर्जनों गोपनीय दस्तावेज़ सरेआम इंटरनेट पर शेयर किए जा रहे हैं. इनमें मानचित्र, चार्ट्स और फ़ोटोग्राफ़्स शामिल हैं.
इन दस्तावेज़ों में कई ऐसी गोपनीय जानकारियाँ हैं, जिन पर टॉप सीक्रेट का लाल निशान लगा हुआ है.
ये सारे दस्तावेज़ यूक्रेन में चल रहे युद्ध से जुड़े हुए हैं.
इनके सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना कितना ख़तरनाक है?
इनमें रूस और यूक्रेन मारे गए सैनिकों की जानकारी, दोनों देशों की कमज़ोरियों और मज़बूती की विस्तृत जानकारी है.
यूक्रेन शुरू होने वाली गर्मियों के दौरान रूसी सेना के विरुद्ध एक व्यापक हमले की तैयारी में हैं.
इससे पहले ये तमाम गोपनीय जानकारियों का सार्वजनिक होना काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
प्रश्न साफ़ है - ये कैसे संभव है कि बिना फ़ोल्ड किए हुए प्रिंटेड पेज और तस्वीरें इंटरनेट पर आ गईं?
इससे अहम ये है कि ये दस्तावेज़ ऐसी क्या जानकारी देते हैं, जो हमें क्रेमलिन (रूसी सरकार) के बारे पहले से ही मालूम नहीं हैं.
सबसे बड़ा राज़ हुआ फ़ाश

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अव्वल तो यूक्रेन और रूस के बीच 14 महीने से जारी जंग के दौरान ये सबसे बड़ी सीक्रेट अमेरिकी जानकारी है, जो सार्वजनिक हुई है.
इनमें से कुछ दस्तावेज़ तो महज़ डेढ़ महीने पुराने हैं.
इसके परिणाम दूरगामी होंगे. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से बताया जा रहा है कि ये डॉक्यूमेंट असली हैं.
कम से कम एक दस्तावेज़ में काफ़ी ढिलाई के साथ बदलाव के निशान दिखाई दे रहे हैं, लेकिन सैकड़ों काग़ज़ात में ऐसा महज़ एक ही डॉक्यूमेंट है.
बीबीसी ने इनमें से 20 से अधिक दस्तावेज़ देखे हैं.
इनमें यूक्रेन को दिए गए हथियारों और ट्रेनिंग की तफ़्सील है. ये विस्तृत जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब यूक्रेन दर्जनों नई पलटनें गर्मियों में रूस के ख़िलाफ़ जंग में उतारने की तैयारी में है.
इन काग़ज़ातों में बताया गया है कि यूक्रेनी सेना की नई ब्रिगेडें कब तक तैयार होंगी.
साथ ही इनके लिए कितने टैंक, बख़्तरबंद गाड़ियाँ और तोपखाने मुहैया करवाया जा रहे हैं.
लेकिन ये भी कहा गया है कि हथियारों की उपलब्धता ट्रेनिंग और तैयारी पर निर्भर करेगी.
एक मानचित्र में पूर्वी यूक्रेन में गर्मियों के दौरान यूक्रेनी सेना की कार्रवाई का आकलन किया गया है.
बीती सर्दियों में यूक्रेन की एयर डिफ़ेंस सिस्टम एक कठिन इम्तिहान से गुज़रा है.
इस बात का भी ज़िक्र है कि यूक्रेन की एयर डिफ़ेंस क्षमता काफ़ी कम रह गई है.
इसका कारण ये बताया गया है कि यूक्रेन को आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ, संसाधनों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की हिफ़ाज़त के लिए भी करना पड़ा है.
एयर डिफ़ेंस सिस्टम का मुख्य मक़सद रूसी हवाई हमलों से बचना है.
ज़ाहिर है संसाधन सीमित होने के कारण इस उद्देश्य में बाधा आ रही है.
दस्तावेज़ों में सिर्फ़ यूक्रेन की मिलिट्री की हालत के बारे में ही जानकारी नहीं मिलती, बल्कि अमेरिका के दूसरे सहयोगियों के बारे में भी पता चलता है.
गोपनीय जानकारी के अनुसार इसराइल और दक्षिण कोरिया जैसे सहयोगी भी यूक्रेन के बारे में जमकर डिबेट कर रहे हैं.
उनका अन्य कई संवेदनशील विषयों पर भी रवैया सामने आया है.
कुछ दस्तावेज़ों को टॉप सीक्रेट मार्क किया गया है. बाक़ियों को सिर्फ़ अमेरिकी के बेहद क़रीब ख़ुफ़िया सहयोगियों से ही साझा करने की हिदायत दी गई है.
दस्तावेज़ों में नया क्या है?

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अधिकतर जानकारी, जानी-पहचानी है. लेकिन ये एक साथ उपलब्ध होने वाली बहुत सारी ख़ुफ़िया जानकारी है.
युद्ध में मरने वालों या घायल होने वाले सैनिकों की संख्या को ही लें. ये बात हैरान करने वाली है कि अमेरिका के अनुमान के मुताबिक युद्ध में अब तक 189,500 से 223,000 रूसी सैनिक या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को जानकारी में कमी, ऑपरेशनल सिक्यूरिटी और जानबूझकर ग़लत सूचना देने की कोशिश के कारण ख़ुद इन आँकड़ों पर पूरा विश्वास नहीं है.
उन्हें लगता है कि रूस और यूक्रेन दोनों ही भ्रामक जानकारी दे सकते हैं.
जिन डॉक्यूमेंट्स में छेड़छाड़ की गई है, उनमें ये दिखाने की कोशिश की गई है कि यूक्रेन में हताहतों की संख्या कहीं अधिक है.
इन डॉक्यूमेंट्स का एक वर्ज़न रूसी समर्थक टेलिग्राम साइट पर दिखा है.
इस काग़ज़ में जहाँ युद्ध में मरने वाले सैनिकों की संख्या (16,000 से 17,500 के बीच) लिखी थी, उससे छेड़छाड़ की गई है.
आँकड़ों में फेरबदल करके इसे 61,000 से 71,500 कर दिया गया है.
अब सवाल ये उठता है कि ये सब सार्वजनिक किया किसने?
'ये लो टॉप सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स'

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ओपन सोर्स इंटेलिजेंस ग्रुप बेलिंगकैट के एरिक टेलर बता चुके हैं कि कैसे ये गुप्त जानकारी मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म डिस्कॉर्ड से लेकर टेलिग्राम तक पहुँची.
टोलर बताते हैं कि अब तक इन दस्तावेज़ों के ऑरिजिनल सोर्स के बारे में पता नहीं चल पाया है, लेकिन इंटरनेट पर गेमिंग के शौकिनों के बीच ये दस्तावेज़ मार्च से घूम रहे हैं.
डिस्कॉर्ड माइनक्राफ्ट गेम खेलने वालों का सबसे चहेता मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म है.
इस डिस्कॉर्ड पर चार मार्च को यूक्रेन युद्ध पर छिड़ी बहस के दौरान एक यूज़र ने लिखा- ये लो, कुछ गोपनीय दस्तावेज़ देखो. उसके बाद उसने 10 सीक्रेट दस्तावेज़ पोस्ट कर दिए.
ये एक अजीब घटना थी. लेकिन दस्तावेज़ लीक करने के मामले में नई नहीं थी.
ब्रिटेन में वर्ष 2019 के आम चुनाव से पहले अमेरिका-ब्रिटेन के बीच ट्रेड संबंधों के कुछ दस्तावेज़ कई मैसेजिंग साइट्स पर शेयर किए गए थे.
उस समय मैसेजिंग साइट रेडिट ने कहा था कि दस्तावेज़ रूस से शेयर किए गए हैं.
एक अन्य केस में ऑनलाइन गेम 'वॉर थंडर' के कुछ यूर्ज़र्स ने गर्मागर्म बहस के दौरान कई संवेदनशील दस्तावेज़ सार्वजनिक कर दिए थे.
बस ये गेमर्स बहस में जीतना चाहते थे.
लेकिन ताज़ा मामला काफ़ी संवेदनशील और संभवत यूक्रेन के लिए हानिकारक साबित हो सकता है.
यूक्रेन ने अब तक अपनी ऑपरेशनल सिक्यूरिटी की जी-जान लगाकर हिफ़ाज़त की है.
ज़ाहिर है कि वो ऐसी संवेदनशील जानकारी के एक महत्वूर्ण समय पर लीक होने पर बेहद नाराज़ होगा.
इन गर्मियों में यूक्रेन की सैन्य कार्रवाई, देश के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की सरकार को बना या बिगाड़ सकती है.
इसके कारण शांति वार्ताओं के लिए वे अपनी शर्तें भी रख सकते हैं.
यूक्रेन के कुछ अधिकारियों ने कहा है कि ये रूस की ग़लत सूचना फ़ैलाने की साज़िश है.
लेकिन कुछ मिलिट्री ब्लॉगर्स ने कुछ और ही कहा है. उनका कहना है कि ये पश्चिमी देशों की रूसी कमांडरों को गुमराह करने की चाल है.
अहम बात ये है कि इन काग़ज़ात में यूक्रेन के पलटवार की किसी रणनीति का ज़िक्र नहीं है.
रूस को तो पहले यूक्रेन की तैयारियों की जानकारी होगी. हालाँकि इस जंग में रूसी ख़ुफ़िया तंत्र ढीला ही साबित हुआ है.
यूक्रेन के लिए तो चुनौती यही है कि वो अपने दुश्मन यानी रूस को अपने अगले क़दम के बारे में भनक न लगने दे, ताकि उसकी जीत की उम्मीद बढ़ सके.
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