यूक्रेन युद्ध में रूसी कमांडरों की 'ख़राब' रणनीति से गई कई सैनिकों की जान

इमेज स्रोत, Reuters
- Author, नेड डेविज़ और फर्नान्डो दुआर्ते
- पदनाम, बीबीसी आई इन्वेस्टिगेशंस
'बीबीसी आई' की जांच में रूसी सैनिकों के उन दावों की पुष्टि हुई है कि उनके कमांडरों की रणनीति के कारण यूक्रेन में भारी नुक़सान हुआ.
रूस के सैनिकों का आरोप है कि उन्हें जब युद्ध में भेजा गया, तो उनके वरिष्ठ अधिकारी उन्हें 'मीट (मांस)' कहा करते थे.
'अयोग्य' कमांडरों की उनकी कहानी और 'मीट-ग्राइंडर' की रणनीति, यूक्रेन में रूस की नाकामी का प्रतीक बन गई.
यह युद्ध जब शुरू हुआ था, तब रूस ने अपनी 155वीं नौसेना इन्फैंट्री ब्रिगेड को एक इलीट यूनिट माना था. लेकिन जैसे-जैसे यह युद्ध आगे बढ़ा, रणक्षेत्र में इस यूनिट की कमज़ोरियां उजागर होती गईं.
बीबीसी की जांच में पता चला कि अकेले एक हमले में इस ब्रिगेड ने अपने कम से कम 60 सैनिक खो दिए.
मारे गए इन लोगों में 25 साल के रमाज़ गोर्गाद्ज़े भी थे, जिन्हें कुछ हफ़्ते पहले ही रूस के सुदूर पूर्व में उनके घर से इकट्ठा किया गया था.
उन्हें जब बुलाया गया, तो वे देशभक्त लग रहे थे. उन्होंने ट्रेनिंग ग्राउंड में तस्वीरें खिंचवाईं और रैप करते हुए सोशल मीडिया पर अपनी एक पोस्ट शेयर की.
रमाज़ गोर्गाद्ज़े ने गाते हुए कहा, "रूस आपके लिए खड़ा है. रूसी सैनिक आपके लिए लड़ रहे हैं."
उन्होंने वर्दी में अपनी तस्वीरें साझा कीं. एक तस्वीर में पिज़्ज़ा और बीयर भी दिखा, जो यूक्रेन भेजे जाने से पहले उनका आख़िरी खाना मालूम होता है.
हालांकि निजी तौर पर उन्होंने लड़ाई पर आपत्ति जताई.
रमाज़ गोर्गाद्ज़े की मां ने रूसी अख़बार 'मगदान प्रावदा' को बताया कि यूक्रेन में उनके दोस्त थे और उन्होंने उनसे कहा था, "मरना सबसे बुरी बात नहीं होगी, बल्कि मेरे जैसे लोगों पर गोली चलाना सबसे बुरा होगा."
अक्टूबर 2022 में, वे दक्षिण-पूर्व यूक्रेन के दोनेत्सक क्षेत्र में 155वीं नौसेना इन्फैंट्री ब्रिगेड में शामिल हो गए. उस समय तक यूनिट पर बूचा और इज़ियम में युद्ध अपराध करने का आरोप था, जिससे रूस ने इनकार किया.
नया ख़ून और 'मांस'

इमेज स्रोत, Instagram
गोर्गाद्ज़े जल्द ही रणनीतिक रूप से अहम शहरों पावलिव्का और वुहलेदार पर कब्ज़ा करने की कोशिशों में जुट गए.
वुहलेदार जहां कभी खनन करने वाले समुदाय के 15 हज़ार लोग रहते थे, में इस युद्ध का सबसे ख़ूनी संघर्ष देखने को मिला. यह उच्च भूमि पर स्थित है. यूक्रेन की सेना ने इस जगह का उपयोग रूस की सप्लाई लाइन को निशाना बनाने के लिए किया.
लगभग उसी वक़्त गोर्गाद्ज़े ने इंस्टाग्राम पर एक छोटा वीडियो पोस्ट डाला, जिसमें पास के वोल्नोवाखा में हुई बर्बादी को दिखाया गया था.
और फिर वुहलेदार पर हमले से ठीक पहले अपनी मां को भेजे जाने वाले संदेश बंद हो गए.
सैनिकों के पत्र ने उजागर किया मामला

इमेज स्रोत, Getty Images
उनकी यूनिट से सैनिकों के लापता होने की ख़बरें तेज़ हो गईं.
उसके कुछ दिन बाद, नवंबर के शुरू में, 155वीं ब्रिगेड के सैनिकों ने रूसी प्रांत 'प्रिमोर्स्की क्राय' के गवर्नर ओलेग कोझेमायाको को टेलीग्राम के ज़रिए एक पत्र भेजा, जो तुरंत वायरल हो गया.
रूसी सैनिकों ने रणक्षेत्र के अराजक हालात के बारे में बताया और सैन्य कमांडरों की कड़ी आलोचना की.
सैनिकों ने 'समझ से परे हमले' करने के दौरान चार दिनों में 'लगभग 300 लोगों के हताहत होने या लापता होने' की बात कही. उन्होंने कहा कि उनके वरिष्ठ उन्हें 'मीट' कहा करते थे.
उस पत्र ने रूसी रक्षा मंत्रालय को नौसैनिकों के दावों को ख़ारिज करते हुए एक दुर्लभ सार्वजनिक खंडन जारी करने को मजबूर किया.
अपने टेलीग्राम चैनल पर एक इंटरव्यू में गवर्नर कोझेमायाको ने कहा, "हां, नुकसान हुआ है, भारी लड़ाई चल रही है, लेकिन अपील में उन्होंने जो कहा, हताहत उससे कम हैं."
गवर्नर ने सैनिकों को ज़रूरी साधन उपलब्ध कराने का वादा किया.
बीबीसी आई की जांच में यूनिट के युद्धरत इलाके के वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया गया. यूक्रेन के टोही ड्रोन से लिए गए इस फुटेज में दिखा कि एक ही गलती बार-बार दोहराई जा रही है.
यूक्रेन की सेना ने अलग-अलग दिन पावलिव्का के पास खुली सड़क के एक ही स्ट्रेच पर रूस की कई बख़्तरबंद गाड़ियां उड़ा दी गईं.
2004 में रूसी नौसैनिकों के साथ काम करने वाले रक्षा विश्लेषक तायफुन ओज़बर्क का कहना है कि इससे पुष्टि होती है कि रूसी 'लैंड वारफेयर के बुनियादी सिद्धांतों का पालन नहीं कर रहे थे'.
वे कहते हैं, ''जहां इस्तेमाल के लिए केवल एक खुली सड़क हो, वहां 'यूक्रेन के तोपखाने को पता है कि गोली कहाँ मारनी है. रूसी लोग आसान लक्ष्य हैं.''
उन्होंने बताया, "बिना बारूदी सुरंग हटाए, बिना टोही हवाई मुहिम के और बिना पर्याप्त ख़ुफ़िया सूचना के ऐसे उल्लंघन करने वाले अभियान आत्मघाती हैं."
लंदन के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ के युद्ध विशेषज्ञ विलियम अल्बर्टक कहते हैं, "155वें इन्फैन्ट्री ब्रिगेड को कीएव पर कब्ज़ा करने के प्रयास में पहले ही भारी नुकसान उठाना पड़ा था. लेकिन चीजें तब और ख़राब हो गईं, जब उन्हें हताहत हुए सैनिकों की जगह नए रंगरूट लाने पड़े.''
वे कहते हैं, "ऐसा लगता है कि उन सैनिकों को पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं दी गई या पर्याप्त उपकरण नहीं मिले."
दूसरे सैन्य विश्लेषकों ने वुहलेदार में सैनिकों को बिना तैयारी के भेजने के फ़ैसले को समझाने के लिए 'मीट-ग्राइंडर टैक्टिस' का उपयोग किया है.
मां की फ्रंटलाइन तक की यात्रा

इमेज स्रोत, OK.ru
गोर्गाद्ज़े की माँ स्वेतलाना दिसंबर तक अपने बेटे के बारे में जानकारी न मिलने से हताश थीं. इसलिए उन्होंने उसकी तलाश के लिए खुद फ्रंटलाइन तक जाने का फ़ैसला किया.
वे कहती हैं कि उन्होंने यूक्रेन तक लगभग 7,000 कि.मी. की यात्रा की. जब वे वहां पहुंची तो पता चला कि उनका बेटा मर चुका है.
हमें एक कहानी सुनने को मिली कि कैसे गवर्नर को भेजे गए पत्र के एक दिन पहले गोर्गाद्ज़े पावलिव्का की एक इमारत में घुस गया.
उसी समय एक ड्रोन के गिराए ग्रेनेड के फटने से उनके पैर उड़ गए. बाद में चोटों के कारण उनकी मौत हो गई.
155वीं ब्रिगेड में कितनी मौतें?

हताहतों पर रूस के आधिकारिक आंकड़ों के अभाव में, बीबीसी रूसी सेवा की ओल्गा इवशिना ने मृतकों की गिनती के लिए स्वतंत्र रूसी समाचार वेबसाइट मीडियाज़ोना और वॉलिंटियर के एक नेटवर्क के साथ काम किया है.
आधिकारिक बयान, सोशल मीडिया पोस्ट, मीडिया की रिपोर्ट और रूस में कब्रिस्तानों की तस्वीरों आदि पर नज़र रखकर, उन्होंने पता लगाया कि 6 मार्च, 2022 और 22 फरवरी, 2023 के बीच 155वीं नौसेना इन्फैंट्री यूनिट में कम से कम 157 वेरिफाइड मौतें हो चुकी हैं.
आंकड़ों से यह भी पता चला कि अक्टूबर और नवंबर 2022 में पावलिव्का और वुहेलदार पर हमले के दौरान मौत के आंकड़ों ने अपना सर्वोच्च शिखर छू लिया.
बीबीसी आई की टीम ने कम से कम 60 नौसैनिकों की पहचान की, जो उस लड़ाई में मारे गए या लापता हो गए.
ओल्गा इवशिना कहती हैं, "हमें लगता है कि 155वें ब्रिगेड में हुए नुकसान की वास्तविक संख्या निश्चित तौर पर हमारे मौजूदा आंकड़ों से ज्यादा है. हमारा मानना है कि रूस को हुए कुल नुकसान के वास्तविक आंकड़े उपलब्ध आंकड़ों के कम से कम दोगुने हैं."
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस युद्ध में हताहतों की संख्या 3.5 लाख तक पहुंच सकती है. इसमें लगभग 70 हज़ार मौतों का आंकड़ा शामिल है.
अंत में...

इमेज स्रोत, Getty Images
गोर्गाद्ज़े को जनवरी के अंत में उनके गृह शहर यागोडनॉय में दफ़नाया गया था, लगभग उसी समय रूस ने वुहलेदार पर एक और हमला किया.
कुछ ही दिन बाद, 155वीं ब्रिगेड के सदस्यों के नाम से एक और पत्र, जिसमें ज़मीनी स्थिति का और अधिक विनाशकारी आकलन किया गया था.
राष्ट्रपति पुतिन से जब रूस के नौसैनिकों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "समुद्री पैदल सेना अभी ठीक से काम कर रही है और वीरतापूर्वक लड़ रही है."
गोर्गाद्ज़े की मृत्यु के साल भर बाद भी रूस की सेना, वुहेलदार को अपने क़ब्ज़े में नहीं ले सकी है. हमलों के दौरान यहं उड़ा उड़ाई गए बख्तरबंद गाड़ियों के ताज़ा वीडियो अब भी सोशल मीडिया पर आ रहे हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












