रूस के ख़िलाफ़ यूक्रेन को 61 अरब डॉलर की मदद का बिल अमेरिकी संसद में मंजूर

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    • Author, एंथनी जर्चर, जेम्स वाटरहाउस और जैकलिन हावर्ड
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अमेरिकी संसद के निचले सदन, हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने आख़िरकार रूस के हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन को 61 अरब डॉलर की मदद को मंजूरी दे दी है.

हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में इस फैसले को लेने में काफी देरी हुई, क्योंकि अमेरिकी संसद में यूक्रेन को मदद देने को लेकर विरोध हो रहा था.

यूक्रेन को अमेरिका की ओर से मिलने वाली इस मदद पर पहले अनिश्चितता के बादल छाए थे.

लेकिन अब इस बात की चर्चा हो रही है कि यूक्रेन को हथियार और दूसरे सैन्य साजो-सामान की ये मदद कब मिलेगी. ऐसी चर्चा है कि ये मदद कुछ ही दिनों में शुरू हो सकती है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी मदद को काफी अहम करार दिया है.

जेलेंस्की ने इस मदद पर आभार जताते हुए कहा, ''लोकतंत्र और आजादी की दुनिया में हमेशा अहमियत बनी रहेगी और जब तक अमेरिका मदद करेगा तब तक ये बचे रहेंगे.''

उन्होंने कहा कि ये मदद युद्ध को और फैलने और हजारों लोगों की ज़िंदगी को बचाने में मददगार साबित होगी.

दूसरी ओर, रूस के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने अमेरिकी मदद की आलोचना की है. उन्होंने कहा, ''ये मदद अमेरिका को और अमीर और यूक्रेन को और ज्यादा बर्बादी के रास्ते पर ले जाएगी. उसकी ये मदद यूक्रेन के और अधिक लोगों को मौत के मुंह की ओर ले जाएगी.''

इसराइल के लिए भी 26.4 अरब डॉलर की सैन्य सहायता

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रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला कर दिया था. पिछले दो साल से अधिक समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध में हजारों लोग मारे जा चुके हैं.

बड़ी तादाद में लोग घायल भी हुए हैं. इनमें से अधिकतर सैनिक हैं. यूक्रेन के लाखों लोगों को घर छोड़ कर भागना पड़ा है.

शनिवार को अमेरिकी संसद ने जो विदेशी सहायता मंजूर की है उनमें इसराइल के लिए सैन्य सहायता और ग़ज़ा में मानवीय सहायता के लिए भी रकम जारी की गई है.

इसराइल के लिए 26.4 अरब डॉलर की सैन्य सहायता दी गई, जबकि ग़ज़ा में मानवीय सहायता के लिए 9.1 अरब डॉलर मंजूर किए गए हैं.

चीन का सामना करने के लिए ताइवान समेत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए 8.1 अरब डॉलर की मदद दी गई है.

अमेरिकी संसद में एक और बिल मंजूर किया गया है. इसके बाद चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिक-टॉक को अमेरिका में अपनी हिस्सेदारी बेचनी होगी या फिर उसे वहां बैन का सामना करना होगा.

यूक्रेन को दी जाने वाली मदद के बिल को मंजूरी मिलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसके लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के सांसदों के समर्थन की तारीफ की और सीनेट से भी इसे जल्द मंजूर की अपील की ताकि वो दस्तखत कर इसे कानून बना दें.

उन्होंने कहा, ''सीनेट इस पर जल्द से जल्द सहमति की मुहर लगा दे, ताकि युद्ध भूमि में लड़ रहे यूक्रेन को जल्द से जल्दी जरूरी हथियार और सैन्य साजो-सामान की सप्लाई की जा सके.''

यूक्रेन को अमेरिका की इस मदद पर ईयू ने क्या कहा

ईयू

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नेटो के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि अमेरिका की ओर से यूक्रेन को दी जाने वाली मदद में बढ़ोतरी यूरोप के सहयोगी देशों की मदद के साथ मिल कर और अहम भूमिका निभाएगी.

ईयू प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन और चार्ल्स मिशेल ने एक संयुक्त बयान में कहा कि रूस के ख़िलाफ़ यूक्रेन को हर वो मदद मिलनी चाहिए जिसकी उसे जरूरत है.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के न्यूज़ आवर प्रोग्राम में यूक्रेन की विदेश नीति कमेटी के प्रमुख ओलेक्सेंडर मेरेज़को ने इस मदद को 'ऐतिहासिक फैसला' करार दिया.

उन्होंने कहा, ''इस फैसले से निश्चित तौर पर काफी नागरिकों और सैनिकों की जान बचाने में मदद मिलेगी.''

उन्होंने कहा, ''इस मदद से हमें ताकत मिली है. इससे हमें लड़ाई जारी रखने का साहस मिला और हमारी प्रतिबद्धता मजबूत हुई है. हमें उम्मीद है कि मोर्चे पर जल्द ही हालात हमारे पक्ष में होंगे.''

यूक्रेन को रूस के ख़िलाफ़ युद्ध में पश्चिमी देशों के हथियारों की काफी जरूरत है. यूक्रेन के लिए रूस की सेना को आगे बढ़ने से रोकना काफी मुश्किल हो रहा है. हाल के कुछ हफ्तों में रूस के सैनिक यूक्रेन में काफी आगे बढ़ आए हैं.

यूक्रेन की सेना के पास गोला-बारूद की काफी कमी हो गई है. 1200 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा पर उन्हें तोप के गोलों का काफी सोच-समझ कर इस्तेमाल करना पड़ रहा है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और सीआईए के प्रमुख विलियम बर्न्स ने कहा कि अमेरिकी मदद के बगैर यूक्रेन, रूस से लड़ाई हार जाएगा.

पिछले छह महीनों के युद्ध के दौरान ये आशंका बढ़ती जा रही है क्योंकि रूस, यूक्रेन के ज्यादा से ज्यादा हिस्से पर कब्जा करता जा रहा है.

यूक्रेन के लिए ये मदद जादू की छड़ी नहीं

बहरहाल यूक्रेन को दी जाने वाली मदद को मंजूरी से उसकी सेना में मजबूती दिखेगी.

लेकिन ये कोई जादुई छड़ी नहीं है, जो यूक्रेन को रूस के ख़िलाफ़ युद्ध जिता दे. लेकिन यूक्रेन ने युद्ध जारी रखा है. यूक्रेन की मदद को रिपब्लिकन पार्टी ने महीनों लटका कर रखा था.

उनका कहना था कि अमेरिका को मेक्सिको के साथ सीमा के मुद्दे को सुलझाने को प्राथमिकता देनी चाहिए. इसके बजाय वो दूसरे देशों को मदद देने में लगा रहा, जो गलत है.

यही वजह है कि यूक्रेन को दी जाने वाली मदद से संबंधित बिल पर वोटिंग में इतनी देर हो रही थी.

हाउस स्पीकर और रिपब्लिकन सांसद माइक जॉनसन ने कहा कि भले ही उनकी स्थिति इस मामले में कमजोर क्यों न पड़े लेकिन वो मदद के बिल को पारित कराना चाहते हैं.

शनिवार को ये बिल आराम से मंजूर हो गया, लेकिन इसने दोनों दलों के सांसदों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद को और सामने ला दिया.

संसद में 210 डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसके पक्ष में मतदान किया. रिपब्लिकन सांसदों में से 112 ने इसका विरोध किया. 101 डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसका समर्थन भी किया.

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