क्या पाकिस्तान पर चीन का भरोसा डगमगाने लगा है?

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    • Author, आज़म ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने देश में चरमपंथ के ख़िलाफ़ ऑपरेशन ‘अज़्म-ए-इस्तेहकाम’ यानी 'स्थिरता के संकल्प' की मंज़ूरी देते हुए कहा कि सुरक्षा की ज़िम्मेदारी फ़ौज पर डालकर राज्य सरकारें अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकतीं.

शरीफ़ की अध्यक्षता में नेशनल ऐक्शन प्लान पर केंद्रीय एपेक्स कमेटी की बैठक की घोषणा के अनुसार,'' पाकिस्तान के अस्तित्व की रक्षा के लिए चरमपंथ के ख़िलाफ़ जंग ज़रूरी है. किसी को भी देश की सर्वोच्चता को चुनौती देने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.''

इससे पहले इस्लामाबाद में चीन के मंत्री लियो जियान चाओ ने पाकिस्तान में चीन के पूंजी निवेश को आंतरिक स्थिरता और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की शर्त के साथ जुड़ा बताया.

इस मांग के तुरंत बाद पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल पैदा हो गई.

इसके बाद शरीफ़ ने अपने भाषण में देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी केवल सेना पर डालने की बजाय राज्यों से भी अपनी भूमिका अदा करने की बात की.

बैठक के बाद घोषणा में न केवल देश में चीनी नागरिकों की सुरक्षा के बारे में 'एसओपी’ बनाने की बात की गई बल्कि चरमपंथ के ख़ात्मे के लिए एक नए फ़ौजी ऑपरेशन 'अज़्म-ए-इस्तेहकाम' का भी एलान किया गया.

सवाल यह पैदा होता है कि दोस्ती के बावजूद चीन ने पाकिस्तान में पूंजी निवेश के लिए यहां आंतरिक स्थिरता की मांग क्यों की और क्या वो अब भी पाकिस्तान में पूंजी निवेश में रुचि रखता है?

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सुरक्षा और पूंजी निवेश के मामले पर पाकिस्तान और चीन क्या चाहते हैं?

इस्लामाबाद में 'पाक-चीन एडवाइज़री मेकैनिज़्म’ बैठक को संबोधित करते हुए चीन के मंत्री लियो जियान चाओ ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच समझौतों से विकास के नए अवसर पैदा होंगे लेकिन विकास के लिए ''आंतरिक स्थिरता ज़रूरी है.''

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चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के महत्वपूर्ण सदस्य और मंत्री ने पाकिस्तान के सभी राजनीतिक नेतृत्व के सामने यह स्पष्ट किया कि पूंजी निवेश के लिए सुरक्षा की स्थिति को बेहतर बनाना होगा.

उन्होंने कहा कि बेहतर सुरक्षा से व्यापारी पाकिस्तान में पूंजी निवेश करेंगे.

पाकिस्तान के राजनीतिक हालात पर टिप्पणी किए बिना चीनी मंत्री ने कहा कि संस्थानों और राजनीतिक दलों को मिलकर चलना होगा.

चीन के मंत्री ने कहा कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपेक) के बारे में सुरक्षा के ख़तरे बड़ी रुकावटें हैं. लोग अक्सर यह कहते हैं कि विश्वास सोने से भी ज्यादा कीमती चीज़ है.

लियो जियान ने कहा कि पाकिस्तान के मामले में मूल रूप से सुरक्षा की स्थिति ऐसी बात है जो चीनी पूंजी निवेशकों के भरोसे को ठेस पहुंचा रही है.

''हमें इस स्थिति को बहुत गंभीरता से लेना होगा और सीपेक फ़्रेंडली मीडिया एनवायरंमेंट सुनिश्चित करना होगा.''

इस बैठक के दौरान अपने संबोधन में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने सीपेक पर सभी दलों की सहमति पर ज़ोर देते हुए कहा कि सीपेक के दूसरे चरण से पाक-चीन दोस्ती और मज़बूत होगी.

इस बैठक में विपक्ष से संबंध रखने वाले जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ़) के नेता मौलाना फ़ज़लुर्रहमान और पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़) की ओर से बैरिस्टर अली ज़फ़र और रऊफ़ हसन भी मौजूद थे.

सीपेक के मामलों पर गहरी नज़र रखने वाले पत्रकार और विश्लेषक ख़ुर्रम हुसैन की राय है कि पूंजी निवेश के बारे में पाकिस्तान और चीन का स्टैंड अलग-अलग है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि पाकिस्तान कहता है कि इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में पूंजी निवेश होगा.जबकि चीन कहता है कि अपना घर दुरुस्त करो. अब वह पूंजी निवेश में दिलचस्पी नहीं ले रहा.

उनके अनुसार- चीन चाहता है कि उसे अब क़र्ज़े वापस मिलें जबकि पाकिस्तान इस तरह अपना स्टैंड पेश कर रहा है कि जैसे चीनी लाइन में लगकर बस पूंजी निवेश का ही इंतज़ार कर रहे हैं.

चीन के मंत्री के संबोधन के बाद गृह मंत्री की ओर से भी एक घोषणा जारी हुई थी जिसके अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री मोहसिन नक़वी की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा मामलों की बैठक में चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले उपायों का जायज़ा लिया गया.

गृह मंत्रालय की ओर से जारी घोषणा के अनुसार बैठक में संबंधित संस्थाओं की ओर से सुरक्षा योजना और समग्र स्थिति पर ब्रीफ़िंग दी गई जबकि बैठक में देश में सुरक्षा की स्थिति पर भी विचार किया गया.

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ऑपरेशन ‘अज़्म-ए-इस्तेहकाम’ शुरू करने की मंज़ूरी

चीन के मंत्री लियो जियान चाओ ने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से भी मुलाक़ात की.

उन मुलाक़ातों के तुरंत बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नेशनल ऐक्शन प्लान की एपेक्स कमेटी की बैठक बुलाई गई जिसमें चरमपंथ के ख़ात्मे के लिए शनिवार को सेना की ओर से ऑपरेशन ‘अज़्म-ए-इस्तेहकाम’ शुरू करने की मंज़ूरी भी दी गई.

नेशनल ऐक्शन प्लान की एपेक्स कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का कहना था कि देश को केवल एक संस्था पर छोड़ना बहुत बड़ी ग़लती होगी.

उन्होंने कहा, '' हम सबको ज़िम्मेदारी लेनी होगी.''

शहबाज़ शरीफ़ का कहना था कि देश के टिकाऊ विकास के लिए स्थिरता और क़ानून का राज होना ज़रूरी है. देश के क़ानून को लागू करना मेरी और हम सब की ज़िम्मेदारी है.''

उन्होंने कहा- ''उम्मीद है सभी (राज्य) आतंकवाद के ख़िलाफ़ भरपूर कोशिश करेंगे… आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग के लिए हमारे राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व को पूरी तरह स्पष्ट होना ज़रूरी है.''

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि सेना आतंकवाद के ख़िलाफ़ जो जंग कर रही है उसका ख़र्च केंद्र सरकार उठाती है.

''सरकार की आवाज़ को मज़बूत बनाने के लिए क़ानून बनाएंगे. आतंकवाद के ख़िलाफ़ सेना की ज़रूरतें पूरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.''

चीन के दौरे के बारे में नकारात्मक बातों पर शहबाज़ शरीफ़ का कहना था कि राष्ट्रीय नैरेटिव को दाग़दार बनाने की मुहिम को नाकाम बनाना होगा.

''पाकिस्तान के दुश्मनों ने सोशल स्पेस को ज़हरीला कर रखा है. चीन के दौरे के वक़्त भी नकारात्मक अभियान चलाए गए.''

उन्होंने कहा, '' हमें ऐसे क़ानून बनाने होंगे जो नफ़रत की ज़बान को ख़त्म कर सकें. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ग़लत इस्तेमाल और संविधान की धज्जियां उड़ाने से बड़ा कोई जुर्म नहीं हो सकता. ऐसे क़ानून बनाने होंगे जो नफ़रत और विभाजन के नैरेटिव ख़त्म कर सकें.''

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'जब तक पाकिस्तान में सुरक्षा बेहतर नहीं होती चीन और निवेश नहीं करेगा'

डॉक्टर वसीम इसहाक़ इस्लामाबाद की नमल यूनिवर्सिटी में चाइना स्टडीज़ सेंटर के डायरेक्टर हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि चीन ने पाकिस्तान में 26 अरब डॉलर के पूंजी निवेश से सीपेक के पहले फ़ेज़ पर लगभग काम पूरा कर लिया है. उनके अनुसार इसमें लगभग 60 प्रोजेक्ट थे जिनमें अधिकतर इंफ़्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा के क्षेत्र से संबंधित थे.

उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में दुर्भाग्य से चीन के नागरिकों पर हमले हुए, जिनमें चीन का जानी नुक़सान हुआ.

वो बोले, ''अब चीन ने यह तय कर लिया है कि वह वही पूंजी निवेश करेगा जहां सुरक्षा की स्थिति बेहतर होगी क्योंकि चीनी नागरिकों की सुरक्षा पर वह कोई समझौता नहीं करेगा.''

वह कहते हैं, ''चीन ने यह तय कर लिया है कि फ़ेज़ 2 की तरफ़ उस वक़्त तक नहीं जाना है जब तक यह दोनों चीज़ें बेहतर नहीं होंगी. वह स्थिरता और चीनी नागरिकों की बात कर रहे हैं.''

उनके अनुसार चीन फ़ेज़ 2 में उस वक़्त तक नहीं जाएगा जब तक पाकिस्तान स्पष्ट उपाय नहीं करता और ज़मीनी हालात बेहतर नहीं होते.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने फ़ेज़ 2 की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के चीन के दौर में प्रोजेक्ट्स को अपग्रेड करने पर सहमति जताई गई.

''सीपेक के अगले चरण में इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे. सीपेक के अगले चरण में विशेष आर्थिक ज़ोन भी बनने हैं जबकि व्यापार और स्थाई विकास को आगे बढ़ाने के कई अवसरों को तलाशा गया है.''

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'चीन और पाकिस्तान के हित एक दूसरे से जुड़े हुए हैं'

चीन में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत नग़माना हाशमी ने बीबीसी को बताया कि चीन की ओर से यह कहना सामान्य बात है क्योंकि चीन यह बात एक दोस्त की हैसियत से कह रहा है.

उनकी राय में दोनों देश एक ही सोच रखते हैं.

नग़माना हाशमी के अनुसार- चीन जब पाकिस्तान में अपने नागरिकों की सुरक्षा के बारे में बात करता है तो वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी एक संदेश दे रहा होता है जो इस क्षेत्र में उसके साथ ‘जियो इकोनॉमिक’ और ‘जियो स्ट्रैटेजिक’ दौड़ में शामिल है.

उनकी राय में चीन उन देशों को भी संदेश दे रहा होता है कि हमें मालूम है कि ऐसा क्यों हो रहा है.

चीन के मामलों पर गहरी नज़र रखने वाले डॉक्टर फ़ज़लुर्रहमान ने बीबीसी को बताया कि यह वैसी चीनी आशंकाएं हैं जो वह लंबे समय से पाकिस्तान से साझा करते आए हैं.

उनके अनुसार पाकिस्तान भी यह विश्वास दिलाता आया है कि वह इन आशंकाओं को दूर करेगा.

डॉक्टर फ़ज़लुर्रहमान के अनुसार चीन का तरीक़ा यह रहा है कि वह पहले समस्या बताता है, फिर साथ मिलकर उसे हल भी करता है.

उन्होंने कहा कि जिस तरह पाकिस्तान ने आर्थिक परेशानियों का ज़िक्र किया तो चीन इस बात को समझ गया मगर जो भी करना है, चीन को सही-सही बताना होता है.

डॉक्टर फ़ज़लुर्रहमान के अनुसार चीन और पाकिस्तान के हित एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और यह समझना सही नहीं है कि चीन अब पाकिस्तान से संबंध को महत्व नहीं देता है.

उनकी राय में चीन केवल यह कहता है कि हर रोज़ नए प्रयोग ना करें बल्कि व्यवस्था को निरंतरता से चलने दें.

नग़माना हाशमी भी इस बात से सहमत हैं.

उनके अनुसार अगर चीन इन संबंधों को महत्व नहीं देता तो आज पाकिस्तान में वहां से आधुनिक टेक्नोलॉजी नहीं आती.

उनका कहना है कि पाकिस्तान और चीन के संबंध पर ‘नकारात्मक रिपोर्टिंग’ इस वजह से होती है कि दोनों देश अंग्रेज़ी मीडिया में भारत, ब्रिटेन और अमेरिका से बहुत पीछे हैं.

उनकी राय में बिना शोर के काम करने वाला कल्चर अब नहीं रहा, अब साथ-साथ नैरेटिव भी बनाना ज़रूरी हो गया है.

डॉक्ट वसीम कहते हैं कि सीपेक सिक्योरिटी डिवीज़न को अधिक सक्रिय बनाने की ज़रूरत है.

''इंटेलिजेंस शेयरिंग की ज़रूरत है और चीनी नागरिकों को ‘ऑन साइट’ सुरक्षा की ज़रूरत है. उन्हें आने-जाने के दौरान पुख़्ता सुरक्षा देनी होगी.''

उनके अनुसार,'' पाकिस्तान को पड़ोसी देशों जैसे अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और भारत में थोड़ा सक्रिय होना होगा और पाकिस्तान से बाहर जो गतिविधियां हो रही हैं उनको इंटेलिजेंस शेयरिंग के ज़रिए रोकना होगा. इससे चीनी पूंजी निवेशकों का भरोसा बहाल होगा.''

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सीपेक पर काम की रफ़्तार धीमी क्यों?

डॉक्टर वसीम का कहना है कि सीपेक का फ़ेज़ वन तो बेहतर ढंग से चलता रहा. इस दौरान सड़कों का निर्माण हुआ, नए मोटोरवेज़ बने और ऊर्जा के प्रोजेक्ट पर भी काम हुआ.

उनके अनुसार- ''आतंकवादी हमलों से पूंजी निवेश का काम प्रभावित हुआ.''

डॉक्टर वसीम के अनुसार, “हमारी तरफ़ राजनीतिक गतिरोध था, निर्णय लेने में कुछ समस्याएं थीं और सुविधाएं देने में कुछ रुकावटें थीं जिसकी वजह से अब सीपेक प्रोजेक्ट लगभग रुक गए हैं.”

उनके अनुसार अब चीन का यह कहना है कि जब तक 100 फ़ीसद चीनी नागरिकों को सुरक्षा नहीं मिलती, सीपेक का काम तेज़ी से आगे नहीं बढ़ सकता.

डॉक्टर नग़माना के अनुसार- सीपेक के दूसरे फ़ेज़ में निजी पूंजी निवेश के लिए ज़रूरी है कि इसके लिए माहौल अच्छा हो.

वह कहती हैं, '' सीपेक की कल्पना तो काराकोरम हाइवे के निर्माण से ही सामने आ गई थी क्योंकि मक़सद केवल चीन को एबटाबाद से मिलाना नहीं था.''

उनकी राय में पिछले 10 वर्षों में सीपेक पर बहुत प्रगति हुई है और नए प्रोजेक्ट लगे हैं मगर अब अगर इकोनॉमिक ज़ोन बनाने हैं तो देर पाकिस्तान की ओर से है और उसमें चीन का कोई क़सूर नहीं है.

''हमें अपनी धीमी रफ़्तार ख़ुद ख़त्म करनी होगी और उसके बाद पूंजी निवेश का रास्ता खुलेगा.''

इधर डॉक्टर वसीम के अनुसार, '' प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के चीन के हाल के दौर में आर्मी चीफ़ भी साथ थे, और यह बहुत स्पष्ट संदेश था कि सभी संस्थाएं एक जैसी सोच रखती हैं. इसका यह भी संदेश था कि चीन के पूंजी निवेश को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी.''

उनके अनुसार,'' सरकार समेत सभी संस्थाओं और दलों को इसका अहसास है. जब हम एक समग्र रणनीति बनाएंगे तो फिर बेहतरी आएगी.''

डॉक्ट वसीम के अनुसार सीपेक के प्रोजेक्ट पर काम इस सरकार के दौर में पूरा होना है. उन्हें उम्मीद है कि इस सरकार के रहते 80 से 90 फ़ीसद काम पूरा हो जाएगा.

उनके अनुसार, '' सीपेक बीआरआई ( बेल्ट ऐंड रोड इनीशिएटिव) का एक फ़्लैगशिप प्रोगाम है. अब सभी दल एक मेज़ पर बैठे हैं जो कि अच्छी प्रगति है. देश के अंदर भी हमें एक ग्रैंड डायलॉग और ग्रैंड रिकॉन्सिलिएशन की ज़रूरत है.''

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