संभल के हालात क्यों नहीं संभल पाए, अब जुमे को लेकर क्या है तैयारी?- ग्राउंड रिपोर्ट

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, संभल से लौटकर
उत्तर प्रदेश के संभल में भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच धीरे-धीरे सामान्य हो रहे माहौल में शुक्रवार का दिन अहम है.
रविवार को हुई हिंसा के बाद आज जुमे की पहली नमाज़ होगी और साथ ही सुप्रीम कोर्ट और संभल की अदालत में जामा मस्जिद मामले में सुनवाई भी है, ऐसे में प्रशासन बेहद सतर्क है.
रविवार को संभल की शाही जामा मस्जिद के दूसरे सर्वे के दौरान हुई हिंसा में पांच लोग मारे गए थे, हालांकि पुलिस ने चार लोगों की मौत की ही पुष्टि की है.
प्रशासन ने जुमे और अदालत में मामले की सुनवाई को लेकर ख़ास तैयारियां की हैं.

शाही जामा मस्जिद कमेटी ने सर्वे के आदेश को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिस पर आज यानी शुक्रवार को सुनावाई होनी है.
पूजा स्थल क़ानून 1991 को लागू कराने मांग को लेकर जमीयत इस्लामी हिंद की एक याचिका पहले से लंबित है.
अजमेर दरगाह और संभल मामले का उल्लेख करते हुए जमीयत ने इस याचिका में ही एक ताज़ा अपील है की है जिसकी सुप्रीम कोर्ट में चार दिसंबर को सुनवाई है.
मुरादाबाद के कमिश्नर ने क्या बताया
मुरादाबाद के कमिश्नर आंजनेय कुमार के मुताबिक़, जामा मस्जिद के अलावा अदालत परिसर में भी पुलिस बलों की तैनाती की गई है. बाहरी ज़िलों से आई पुलिस अभी भी शहर में तैनात है.
बीबीसी से बातचीत में आंजनेय कुमार ने कहा, “लोगों का भरोसा बहाल करना हमारी प्राथमिकता है, हमने शहर के, ख़ासकर मुसलमान वर्ग के लोगों से वार्ताएं की हैं. मस्जिद समिति ने शांति व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिया है.”
आंजनेय कुमार कहते हैं, “मुस्लिम समुदाय ने भी शांति बहाल करने के लिए पहल की है और जुमे के दिन ख़ास सावधानी बरतने का भरोसा दिया है.”
आंजनेय कुमार दावा करते हैं कि अब शहर का माहौल सामान्य हो रहा है और शुक्रवार के बाद हालात और बेहतर हो जाएंगे.
उनका कहना है कि जामा मस्जिद में नमाज़ पढ़ने आने वाले लोगों पर नज़र रखी जाएगी और मस्जिद में आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिहाज़ से तलाशी भी ली जाएगी.

वहीं मस्जिद प्रबंधन समिति के सदर एडवोकेट जफ़र अली ने बीबीसी से कहा, “मस्जिद में सामान्य रूप से नमाज़ हो रही है, इस शुक्रवार भी हमेशा की तरह नमाज़ होगी और इंशाअल्लाह जामा मस्जिद में हमेशा नमाज़ होती रहेगी.”
संभल के आसपास के ज़िलों में मुसलमानों की बड़ी तादाद को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है.
अमरोहा के पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने बीबीसी को बताया, “अमरोहा में माहौल शांतिपूर्ण है लेकिन फिर भी पुलिस सतर्क है. मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पुलिस को शांति बनाए रखने का भरोसा दिया है.”
मंगलवार को ही संभल के कुछ इलाक़ों में बाज़ार खुल गए थे. हालांकि जामा मस्जिद के बिलकुल क़रीबी मुस्लिम मोहल्लों में अभी भी घरों पर ताले लगे हैं और पुरुष यहां नज़र नहीं आ रहे हैं.
वहीं, हिंदू आबादी वाले मोहल्लों में माहौल बिलकुल सामान्य है और गुरुवार को अधिकतर दुकानें खुलीं.
आंजनेय कुमार कहते हैं, “रविवार को हुई हिंसा के बाद प्रशासन की प्राथमिकता लोगों का भरोसा बहाल करने की है. पत्थरबाज़ी में नाबालिग भी शामिल थे, उनकी काउंसलिंग भी कराई जाएगी.”
संभल हिंसा मामले में पुलिस ने सांसद ज़ियाउर्रहमान बर्क़, उनके पिता ममलूकुर्रहमान बर्क़, समाजवादी पार्टी विधायक नवाब इक़बाल और उनके बेटे समेत क़रीब 240 लोगों को नामजद किया है और 2400 से अधिक अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ भी मुक़दमा दर्ज किया है.
बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों के नाम मुक़दमे में होने की वजह से शहर की मुस्लिम आबादी में डर का माहौल है. ख़ासकर युवा गिरफ़्तारी के डर से घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं.
क्यों हुआ विवाद?

संभल की यह ऐतिहासिक जामा मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वे के तहत संरक्षित स्मारक है.
बीते रविवार को शाही जामा मस्जिद स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच झड़पों का केंद्र बन गई थी. इस हिंसा में पांच लोग मारे गए, हालांकि पुलिस ने अधिकारिक तौर पर चार लोगों की मौत की ही पुष्टि की है.
संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर ये नया विवाद 19 नवंबर को तब शुरू हुआ जब संभल से क़रीब 25 किलोमीटर दूर स्थित कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज महाराज और उनके साथ मिलकर कुछ लोगों ने एक याचिका संभल की अदालत में दाख़िल की.
उन्होंने मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा किया. अदालत ने कुछ ही घंटे के भीतर मस्जिद परिसर के सर्वे का आदेश पारित कर दिया और उसी दिन अदालत के आदेश पर मस्जिद परिसर का सर्वे भी हुआ.
19 नवंबर को हुए इस सर्वे के दौरान भी भीड़ जुटी थी लेकिन कोई तनाव नहीं हुआ था. हालात तब बिगड़े तब जब रविवार को दूसरे सर्वे के दौरान भीड़ और पुलिस बल आमने-सामने आ गए. कई घंटों तक पत्थरबाज़ी होती रही.
याचिका दायर करने वाले महंत का दावा

कैला देवी के मंदिर के विशाल परिसर में महंत ऋषिराज महाराज का आश्रम का है. महंत ऋषिराज यहां बचपन से ही रह रहे हैं और इस समय इस धर्मस्थल के संचालन को वही संभाल रहे हैं.
उन्हें पुलिस सुरक्षा मिली है और उनके निजी कर्मी भी उनके क़रीब तैनात रहते हैं.
बीबीसी से बातचीत में मस्जिद के प्राचीन मंदिर होने का दावा करते हुए महंत ऋषिराज गिरी कहते हैं, “वो हरिहर मंदिर ही है, जो भी साक्ष्य हैं वो हमने कोर्ट को उपलब्ध करा दिए हैं, माननीय न्यायालय 29 नवंबर को आपको कोई अच्छा निर्णय सुनाएगा.”
जब उनसे पूछा गया कि ये दावा अभी क्यों किया गया जबकि ये मस्जिद यहां सदियों से है तो उन्होंने कहा, “अयोध्या मंदिर पर भी दावा बहुत साल बाद हुआ था. हमें लगा कि अब अपने मंदिर को वापस लेने का सही समय आ गया है तो हमने अदालत का रुख़ किया.”

तो क्या वो मस्जिद में ही पूजा करना चाहते हैं, इस सवाल पर उन्होंने बीबीसी से कहा, “अब माननीय न्यायालय का जो आदेश होगा उसके आधार पर ही आगे जो होना होगा, होगा.”
अदालत में दायर याचिका में ये दावा भी किया गया है कि भविष्य में कल्कि भगवान का अवतार संभल में ही होना है और मस्जिद ही वो स्थान है जहां उनका अवतार होगा.
हालांकि, संभल में भगवान कल्कि को समर्पित कम से कम दो मंदिर पहले से हैं. बीजेपी से जुड़े आचार्य प्रमोद कृष्णम संभल से कुछ दूर विशाल कल्कि स्थान का निर्माण करा रहे हैं जहां पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दौरा किया था.
स्वामी ऋषिराज महाराज कहते हैं, “जो कल्कि स्थान बन रहे हैं, वो अलग मसला है, हमारा विश्वास है कि भगवान कल्कि का अवतार हरिहर मंदिर में ही होगा.”
कई लोग ये आरोप भी लगाते हैं कि संभल में नया बलवा या विवाद पैदा करने के लिए ही याचिका डाली गई है.
इस सवाल के जवाब में ऋषिराज कहते हैं, “लोग तो कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन सत्य यही है कि एक सदियों से छुपे हुए झूठ को उजागर किया है, सच को सामने लेकर आए हैं.”
हिंदू पक्ष का अपना दावा है लेकिन स्थानीय मुसलमान इस मुक़दमे को मस्जिद को छीनने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं.
संभल से सांसद ज़ियाउर्रहमान बर्क़ के पिता ममलूक़ुर्रहमान बर्क़ कहते हैं, “सैकड़ों साल से ये जामा मस्जिद है और यहां पर कोई नामोनिशान मंदिर होने का, सर्वे कराने के बावजूद भी नहीं मिला, लेकिन फिर भी दोबारा सर्वे कराया गया, इससे पब्लिक में बेचैनी पैदा हुई कि हमारी मस्जिद के साथ क्या हो रहा है, जिस तरह से बाबरी मस्जिद के साथ हुआ, काशी-मथुरा में हो रहा है, उसी तरह इसके साथ भी करना चाहते हैं.”
सबसे बड़ा सवाल- रविवार को गोली किसने चलाई?

इमेज स्रोत, Zaki Rahman/BBC
संभल में लोग कैमरे पर बात करने से डरते हैं लेकिन कई लोगों ने बताया कि दूसरे सर्वे के दौरान मस्जिद में खुदाई की अफ़वाह फैली जिसके बाद भीड़ उत्तेजित हो गई.
मुसलमान समुदाय के कुछ लोग ये भी दावा करते हैं कि पहले पुलिस ने बल प्रयोग किया. इस हिंसा में कम से कम पांच लोगों की मौत के अलावा कई लोग घायल भी हुए थे.
रविवार को हुए घटनाक्रम को लेकर पुलिस और स्थानीय लोगों के अलग-अलग दावे हैं, पुलिस का कहना है कि उनकी तरफ़ से गोली नहीं चलाई गई, लेकिन घटनाक्रम के दौरान के कुछ वीडियो हमने देखें हैं, जिसमें घायल लोगों को ले जाया जा रहा है.
हमने एक व्यक्ति के जनाजे को भी देखा वहां कई लोगों ने ये कहा कि गोली लगने से मौत हुई, ये वही व्यक्ति हैं जिनका पोस्टमार्टम नहीं कराया गया और इसलिए मौतों के आंकड़े में भी वो शामिल नहीं हैं.
जनाजे में आए एक स्थानीय व्यक्ति तौकीर अहमद कहते हैं, “इनके जनाजे में से हम आ रहे हैं, परिवार नहीं चाहता ये बताना कि इनकी मौत कैसे हुई है. यूपी पुलिस का भय आपको दिख रहा है कि लोग बताने को भी तैयार नहीं हैं कि मौत कैसे हुई.”
संभल पुलिस ने गोलियां चलाई या नहीं, यही सवाल हमने यहां के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने भी रखा.
हालांकि, संभल पुलिस ने गोलियां चलाने के आरोपों से साफ़ इनकार किया है. संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार ने कहा, “पुलिस ने कोई गोली नहीं चलाई है. जिनका इस्तेमाल किया गया वह नॉन लीथल वेपन हैं.
"उन्हें चलाने का ही आदेश डीएम सर ने दिया था, सिर्फ नॉन लीथल वेपन के ही इस्तेमाल का आदेश था.”
हालांकि, रविवार के घटनाक्रम के कुछ वीडियो में पुलिसकर्मी पिस्टल से गोली चलाते दिख रहे हैं. पिस्टल के इस्तेमाल के दावों को ख़ारिज करते हुए पुलिस अधीक्षक कहते हैं, “वो पिस्टल नहीं हैं, कम से कम पांच छह बार हम स्पष्ट कर चुके हैं कि वो पिस्टल नहीं हैं, रबर पेलेट गन है, एक बार फिर स्पष्ट कर रहे हैं वो पिस्टल नहीं है.”
सवालों के घेरे में सीओ अनुज चौधरी

हिंसा को लेकर संभल के पुलिस क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी सवालों के घेरे में है. संभल के कई लोगों ने बीबीसी से बात करते हुए आरोप लगाया कि अनुज चौधरी ने बिना उच्च अधिकारियों को भरोसे में लिए बल प्रयोग किया जिसके बाद हालात बिगड़े.
हालांकि इन आरोपों पर अनुज चौधरी ने बीबीसी को जवाब नहीं दिया.
बीबीसी से बात करते हुए अनुज चौधरी ने कहा, “पुलिस क्या वहां अपनी मर्ज़ी से गई थी, कोर्ट के आदेश से गई थी, हम किसी को क़ब्ज़ा कराने थोड़े ही गए थे, कोर्ट के आदेश का पालन हो, इसलिए गए थे, जो वहां आए, क्यों आए, जब पता है कि कोर्ट का आदेश है. कोर्ट के आदेश का पालन कराना था बस इतनी सी बात थी.”
जब उनसे पूछा गया कि भीड़ कब इकट्ठा हुई और हालात कब बिगड़े तो उन्होंने कहा, “भीड़ वहां सुबह से ही थी, सर्वे शुरू होने से पहले ही वहां भीड़ थी. इससे ज़्यादा मैं कुछ नहीं बताना चाह रहा आपको, अभी मेरा मूड नहीं है.”
इसी दौरान पत्रकारों से बात करते हुए अनुज चौधरी ने कहा, “हम पढ़े-लिखे लोग पुलिस में इसलिए भर्ती नहीं हुए हैं कि कोई जाहिल हमें मारे दें.”
जामा मस्जिद प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एडवोकेट जफ़र अली ने दावा किया था कि पुलिस ने आम लोगों पर फ़ायरिंग की.
इस दावे के बाद पुलिस ने सोमवार को उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया भी था. जफ़र अली अब भी इस दावे पर क़ायम हैं.
बीबीसी से बात करते हुए ज़फ़र अली ने कहा, “ये कहना बिलकुल गलत है कि पुलिस ने गोली नहीं चलाई है, मैं प्रेस कांफ्रेंस में कह चुका हूं कि पुलिस की गोली से ही मौत हुई है. इस बात पर कौन यक़ीन करेगा कि लोगों ने अपने साथ ही आए लोगों को गोली से मार दिया.”
जफ़र अली ये भी कहते हैं कि जिन पांच लोगों की मौत हुई है उनके मामलों में वो मुक़दमा दर्ज कराएंगे.
जफ़र अली कहते हैं, “सभी मौतों के मामले में एफ़आईआर दर्ज कराई जाएंगी और इंसाफ़ की लड़ाई के लिए वकील भी उपलब्ध करवाएं जाएंगे.”
घायलों का दावा- पुलिस ने गोली मारी

संभल के ज़िला अस्पताल में दो घायल युवक भर्ती हैं जो पुलिस की गिरफ्त में भी हैं. इनमें से एक की बहन ने हमें बताया कि उसके भाई को पुलिस ने गोली मारी और पीटा भी.
अस्पताल में भर्ती घायल और हिंसा के मामले में गिरफ़्तार युवक हसन की बहन ने बीबीसी से बात करते हुए दावा किया, “मेरा भाई छोटे भाई को खोजने घर से निकला था. वो लोगों के बीच फंस गया और भगदड़ में गिर गया. उसे पुलिस ने पकड़ लिया और गोली मार दी, गोली तो मारी ही मारी उसे लाठी डंडों से पीटा भी.”
बीबीसी से बातचीत में हसन ने कहा कि उसकी हालत ख़राब है और उसे बेहतर इलाज की ज़रूरत है.
हसन की बहन ने दावा किया, “पुलिस मेरे भाई पर दबाव बना रही है कि वह यह बयान दे की गोली पब्लिक ने चलाई. उन्होंने कहा है कि अगर ऐसा लिखित बयान दोगे तो तुम्हें किसी बेहतर अस्पताल में रेफर कर देंगे.”
हसन के बग़ल में ही अज़ीम नाम का युवक लेटा है. उसकी मां भी उसे गोली लगे होने का दावा करती हैं.
अज़ीम की मां का दावा है कि वो मज़दूरी करने निकला था और इसी दौरान वो पुलिस के हत्थे चढ़ गया.
वहीं संभल के ज़िला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजेंद्र सिंह के मुताबिक़ दोनों में से एक युवक के शरीर से गोली के छर्रे मिले हैं जबकि दूसरे युवक का एक्स-रे किया गया है और पूरी जांच होने के बाद ही गोली लगने की पुष्टि हो सकेगी.
राजेंद्र सिंह कहते हैं कि दोनों युवकों के शरीर पर लाठी डंडों से पीटने जैसी चोटें भी हैं.
राजेंद्र कुमार के मुताबिक़ रविवार को बीस पुलिसकर्मियों को भी इलाज के लिए ज़िला अस्पताल लाया गया था, जिनमें से एक को हालत गंभीर होने की वजह से रेफ़र कर दिया गया जबकि बाक़ी को उसी दिन छुट्टी दे दी गई थी.
हिंसा में मारे गए लोगों को ख़ामोशी से दफ़नाया गया

संभल हिंसा में मारे गए लोगों को ख़ामोशी से दफ़ना दिया गिया.
अयान सिर्फ़ 17 साल का था और जामा मस्जिद से कुछ ही दूरी पर एक बेहद छोटे मकान में अपनी मां के साथ रहता था.
सोमवार देर रात अयान का शव घर पहुंचा और कुछ ही देर में पुलिस बल की मौजूदगी में उन्हें दफ़ना दिया गया.
अब उनकी विधवा मां अकेली है. हिंसा में मारे गए बाक़ी लोगों को भी इसी तरह ख़ामोशी से दफ़ना दिया गया था.
अयान के जनाज़े में आए एक व्यक्ति ने बीबीसी से कहा, “हिंसा में मारे गए लोगों को ख़ामोशी से दफ़न किया जा रहा है. ये इस बात का सबूत है कि संभल की अवाम शांति चाहती है. पुलिस कह रही है कि साज़िश के तहत ये हिंसा हुई है, हम भी चाहते हैं कि इस साज़िश का पर्दाफ़ाश हो और जो लोग असल में इसके पीछे हैं वो सामने आएं.”
कुछ देर चुप रहने के बाद ये व्यक्ति फिर कहते हैं, “लेकिन इसकी जांच कौन करेगा और क्या पूरा सच सामने आ सकेगा?”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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