उत्तराखंड के गांवों में गै़र-हिंदुओं और रोहिंग्या मुसलमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध वाले बोर्ड का क्या है मामला

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    • Author, आसिफ़ अली
    • पदनाम, देहरादून से, बीबीसी हिन्दी के लिए

“ग़ैर हिन्दू/रोहिंग्या मुसलमानों व फेरी वालों का गाँव में व्यापार करना/घूमना वर्जित है.''

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले में कुछ ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं जिन पर रोहिंग्या मुसलमानों और ग़ैर हिन्दुओं के गांव में प्रतिबंध की बात लिखी है.

सार्वजनिक जगहों पर लगाए गए इन बोर्ड पर इस बात को एक 'चेतावनी' के रूप में लिखा गया है.

इस मामले पर मुस्लिम प्रतिनिधिमंडलों ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अभिनव कुमार से मुलाक़ात की और मामले के बारे में जानकारी दी है.

स्थानीय पुलिस का कहना है कि उसे जहां ऐसे बोर्ड का पता चला है उसे हटा दिया गया है और इसमें शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे.

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में रुद्रप्रयाग के पड़ोसी ज़िले चमोली में नाबालिग़ से कथित छेड़छाड़ के मामले में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था.

वैसे रोहिंग्या मुसलमानों की राज्य में मौजूदगी को लेकर उत्तराखंड में अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं आया है और ना ही किसी को डिपोर्ट किया गया है.

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ग्राम प्रधान और स्थानीय लोगों ने क्या बताया?

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जिन गांवों में इस तरह के बोर्ड लगे हैं उनमें से एक गांव है न्यालसू. प्रमोद सिंह इस गांव के ग्राम प्रधान हैं.

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बीबीसी ने इस मामले को लेकर प्रमोद सिंह से बातचीत की है.

प्रमोद सिंह कहते हैं, ''मेरे गाँव में जो बोर्ड पर लिखा गया था उसमें बदलाव किया गया है. पहले बोर्ड में ग़ैर हिंदू व रोहिंग्या मुसलमान लिखा गया था उसकी जगह पर अब फेरी वालों का प्रवेश वर्जित लिखा गया है.''

वो बताते हैं, ''असल में गाँव में अधिकतर फेरी वाले यहाँ ऐसे आते हैं जिनका कोई वेरिफ़िकेशन नहीं है. आने वाले समय में कोई घटना न हो इसलिए इस तरह का लिखवाया गया.''

प्रमोद का कहना है कि बोर्ड पर ग़ैर-हिन्दू और रोहिंग्या मुसलमान जैसे शब्दों का इस्तेमाल पूर्ण रूप से ग़लत है.

प्रमोद कहते हैं, ''हमने यह बोर्ड लगाने वालों को पहले ही कहा था कि यह लिखा जाना सही नहीं है. हालांकि वो लोग किस संगठन से जुड़े हैं, यह मैं नहीं जनता हूँ.''

बीबीसी ने कुछ दूसरे गांवों के ग्राम प्रधान से बातचीत की लेकिन वो लोग घटना पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हुए.

अशोक सेमवाल रुद्रप्रयाग में रहते हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं. उनका कहना है कि इन बोर्ड्स को जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से लगाया गया है.

अशोक कहते हैं, ''यह बोर्ड गाँव के प्रधानों व कुछ संगठनों के द्वारा जागरूकता फैलाने के लिये लगाए गए हैं. ऐसे बोर्ड कई गाँवों में लगाये गए हैं. अब केदारघाटी से यह मुहिम छिड़ी तो सभी एक दूसरे को देखकर बोर्ड लगा रहे हैं.''

अशोक का कहना है कि जब बाज़ार में व्यापार किया जा सकता है तो गांव में आना क्यों ज़रूरी है? उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें बोर्ड में संशोधन करने के लिए कहा है.

वो बताते हैं, ''पुलिस और कुछ लोगों की तरफ़ से बोर्ड में संशोधन के लिए कहा गया है. पुलिस की तरफ़ से कहा गया है कि बोर्ड पर किसी समुदाय विशेष के बारे में न लिखकर 'बाहरी' लिखा जाए. अब जैसे मेरे गाँव में बोर्ड लगा है तो हम उसमें संशोधन कर देंगे.''

मुस्लिम समुदाय की आपत्ति

देहरादून शहर काज़ी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी के नेतृत्व में मुस्लिम सेवा संगठन के एक अन्य प्रतिनिधिमंडल ने घटना पर डीजीपी अभिनव कुमार से मुलाक़ात कर ज्ञापन सौंपा है.

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इमेज कैप्शन, देहरादून शहर क़ाज़ी मौलाना मोहम्मद अहमद क़ासमी के नेतृत्व में मुस्लिम सेवा संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने घटना पर डीजीपी अभिनव कुमार से मुलाक़ात कर ज्ञापन सौंपा है

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के उत्तराखंड राज्य इकाई के अध्यक्ष डॉ. नैयर क़ाज़मी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी अभिनव कुमार से मुलाक़ात की.

इस दौरान उन्होंने डीजीपी को रुद्रप्रयाग में लगाये गये बोर्डों और चमोली के नंदानगर घाट में हुई घटना के बारे में बताया.

डॉ. नैयर क़ाजमी ने बताया, “हम मामले पर उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार से मिले. हमने उन्हें रुद्रप्रयाग में लगे इस तरह के बोर्ड के बारे में जानकारी दी और बोर्ड की तस्वीरें दिखाईं. डीजीपी ने हमें भरोसा दिलाया है कि हम इसकी पड़ताल करेंगे और जो माहौल ख़राब करने का काम कर रहे हैं उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. ”

देहरादून शहर क़ाज़ी मौलाना मोहम्मद अहमद क़ासमी के नेतृत्व में मुस्लिम सेवा संगठन के एक अन्य प्रतिनिधिमंडल ने घटना पर डीजीपी अभिनव कुमार से मुलाक़ात कर ज्ञापन सौंपा है.

उनका कहना है कि ये ज्ञापन गढ़वाल और कुमाऊं के पहाड़ी इलाकों में अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी को निशाना बनाते हुए मामलों की बढ़ती संख्या के बारे में था.

मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम क़ुरैशी ने बताया कि, “धर्मनिरपेक्ष देश में संविधान ने हर भारतीय को अधिकार दिया है कि पूरे भारत में कोई भी कहीं भी आ जा सकता है और रह सकता है.”

''जो इस तरह के बोर्ड लगाये गये हैं वह निंदनीय है. ऐसी घटनाएँ यह भी दर्शाती हैं कि प्रशासन अपना काम पूरी तरह से नहीं कर पा रहा है."

नईम क़ुरैशी के मुताबिक़, डीजीपी अभिनव कुमार ने इस घटना के साथ-साथ चमोली की घटना पर भी अफ़सोस ज़ाहिर किया है.

पुलिस का क्या है कहना

स्थानीय पुलिस का कहना है कि इस तरह के सभी बोर्ड हटाए जाएंगे.

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इमेज कैप्शन, स्थानीय पुलिस का कहना है कि जिन बोर्ड का उन्हें पता चला है उसे हटा दिया गया है

रुद्रप्रयाग पुलिस का कहना है कि फ़िलहाल सारे बोर्ड हटा दिए गए हैं और मामले में विधिक कार्रवाई की जाएगी.

रुद्रप्रयाग पुलिस उपाधीक्षक प्रबोध कुमार घिल्डियाल ने बताया, ''हमें इस बारे में सूचना प्राप्त हुई थी. हमने इस बारे में सभी ग्राम प्रधानों के साथ मीटिंग भी की है. हमारे संज्ञान में यह बात दो दिन पहले आई थी तभी हमने ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर बात कर ली थी. हम कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटना न हो.''

प्रबोध कुमार कहते हैं कि अभी उन्हें सिर्फ़ मैखंडा गांव में इस तरह के बोर्ड लगने की जानकारी है.

वो कहते हैं, ''अभी हमारे पास ज़्यादा जानकारी नहीं है और फ़िलहाल जिन बोर्ड के बारे में हमें पता चला है उन्हें हमने हटा दिया है. अभी हम पता कर रहे हैं कि ये बोर्ड किसने लगाए हैं. जो भी इसमें शामिल होंगे उनके ख़िलाफ़ विधिक कार्रवाई की जाएगी.''

घटना के लिए राज्य सरकार ज़िम्मेदार: कांग्रेस

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी.

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प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने बीबीसी से बातचीत में घटना के लिए राज्य की बीजेपी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है.

गरिमा दसौनी कहती हैं, ''जब से प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है तब से इस तरह के धार्मिक उन्माद को फैलाने के लिए यह हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. हमारे ग्रामीण क्षेत्र जो नफ़रत से बचे हुए थे लेकिन अब एक सोची समझी रणनीति के तहत इसे गाँव-गाँव तक पहुँचाया जा रहा है.''

वो कहती हैं कि पुरोधा में भी इस तरह का धार्मिक उन्माद फैलाया गया था लेकिन बाद में मामले में कुछ भी ऐसा नहीं निकला था.

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले को उठाया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के ज़रिए घटना से संबंधित दो पोस्ट किए हैं.

पड़ोसी ज़िले में जब फैला सांप्रदायिक तनाव

चमोली के नंदानगर घाट क्षेत्र में तोड़फोड़ के बाद की तस्वीर.

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रुद्रप्रयाग के पड़ोसी ज़िले चमोली के नंदानगर घाट क्षेत्र में बीते दिनों उग्र भीड़ ने एक मुस्लिम युवक की दुकान पर हमला किया और तोड़फोड़ की थी.

मुस्लिम युवक पर कथित तौर पर एक नाबालिग़ लड़की से छेड़छाड़ का आरोप लगा था. इसके बाद हिन्दुत्ववादी संगठनों ने स्थानीय बाज़ार में जुलूस निकाला, युवक के सैलून पर तोड़फोड़ कर नारेबाज़ी की थी. इस दौरान दूसरे कई मुसलमानों की दुकानों को भी निशाना बनाया गया था.

हालाँकि दो दिन बाद ही अभियुक्त आरिफ़ को उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले के सोफ़तपुर गाँव से गिरफ़्तार किया गया था.

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पुलिस ने तोड़फोड़ करने वाली भीड़ के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया था और इलाक़े में शांति के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-163 लगा दी गई थी.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना की निंदा करते हुए अभियुक्तों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की बात कही थी.

घटना के बाद इलाक़े में तनाव का माहौल है और पुलिस बल की सक्रियता भी बढ़ गई है.

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