फ़रीदाबादः आर्यन मिश्रा की हत्या किन परिस्थितियों में हुई?- ग्राउंड रिपोर्ट

उमा मिश्रा अपने बेटे आर्यन की मौत के सदमे से उबर नहीं पा रही हैं
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    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, फ़रीदाबाद से

फ़रीदाबाद के एनआईटी-5 इलाक़े में अंधेरी सीढ़ियां ऊपर तीसरी मंजिल पर बने फ्लैट तक पहुंचती हैं.

उमा मिश्रा सीढ़ियों से लगी निढाल बैठी हैं. उनकी आँखों के आंसू सूख चुके हैं.

एक कमरे के फ्लैट में दीवार पर 19 साल के आर्यन मिश्रा की तस्वीर पर माला लटक रही है.

बाहर खुली छत पर खड़े आर्यन के पिता सियानंद मिश्रा पत्रकारों से फ़ोन पर बात करने में व्यस्त हैं.

बार-बार फ़ोन आ रहे हैं और वो बार-बार एक ही बात कह रहे हैं, “अब हमें मीडिया की ज़रूरत नहीं है, हमारे बच्चे को अब इंसाफ़ नहीं मिल पाएगा.”

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के फ़रीदाबाद में 23-24 अगस्त की दरमियानी रात संदिग्ध परिस्थितियों में 19 साल के युवक आर्यन मिश्रा की हत्या कर दी गई थी.

इस हत्या के आरोप में पुलिस ने पाँच कथित गोरक्षकों को गिरफ़्तार किया है.

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अभियुक्त से पीड़ित के पिता की मुलाक़ात

फ़रीदाबाद में रह रहे अयोध्या के इस परिवार के लिए यक़ीन करना मुश्किल है कि उनके बेटे की हत्या कथित गोरक्षकों ने की है.

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समाप्त

सियानंद मिश्रा आर्यन की अस्थियों को विसर्जित करने के लिए इलाहाबाद गए थे, जब 28 अगस्त को उन्हें अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के बारे में पता चला.

सियानंद मिश्रा ने 30 अगस्त को फ़रीदाबाद पुलिस लाइन स्थित क्राइम ब्रांच के कार्यालय में मुख्य अभियुक्त अनिल कौशिक से मुलाक़ात की.

उस मुलाक़ात को याद करते हुए सियानंद मिश्रा कहते हैं, “अनिल कौशिक को मेरे सामने लाया गया. उसने माफ़ी मांगते हुए कहा कि मैं गो-तस्कर समझकर गोली चला रहा था, छिटककर गोली आपके बेटे को लग गई.”

सियानंद मिश्रा कहते हैं, “अनिल कौशिक ने मेरे पैर छुए और कहा कि मुझसे ग़लती हो गई. मैं मुसलमान समझकर गोली मार रहा था. मुसलमान मारा जाता तो कोई ग़म नहीं होता. मुझसे ब्राह्मण मारा गया. अगर अब फांसी भी हो जाए तो कोई ग़म नहीं है.”

सियानंद मिश्रा घर चलाने के लिए बाइक टैक्सी सर्विस के साथ काम करते हैं.

आर्यन ओपन स्कूल से बारहवीं के पेपर देने की तैयारी कर रहे थे.

सियानंद मिश्रा के मुताबिक़, आर्यन धार्मिक प्रवृत्ति का था और हाल ही में उसने कई हिंदू धर्मस्थलों की तीर्थयात्राएं की थीं. पिछले दो साल से वो डाक कांवड़ भी लेकर आ रहा था.

सियानंद कहते हैं, “आर्यन मोबाइल ठीक करना भी सीख रहा था ताकि कुछ कमाकर घर के ख़र्च में मदद कर सके.”

सियानंद मिश्रा

आर्यन के दोस्त ने किया गुमराह?

आर्यन के पिता सिया नंद
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घटना की रात को याद करते हुए सियानंद कहते हैं, “रात में क़रीब साढ़े तीन-चार बजे मकान मालिक ने मेरे बड़े बेटे से कहा कि तुरंत मेरे साथ पलवल चलो, फिर उन्होंने कहा कि पलवल की जगह एसएसबी अस्पताल चलो. वहां हम कुछ मिनट ही रुके थे कि एक एंबुलेंस आई, मेरा बेटा ख़ून से लथपथ था. कुछ देर बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई.”

घटना की रात आर्यन अपने पड़ोसी और मकान मालिक के बेटे समेत कुल चार लोगों के साथ लाल रंग की डस्टर कार में सवार थे. गाड़ी में उनकी मकान मालकिन और एक अन्य महिला भी थीं. इन दोनों महिलाओं की उम्र क़रीब 50 वर्ष है.

इसी गाड़ी में आर्यन के मकान मालिक के बेटे शैंकी गुलाटी भी थे, जो हत्या के प्रयास के एक मामले में वांछित हैं.

पुलिस और मीडिया को दिए अपने पहले बयान में आर्यन के साथ मौजूद चारों लोगों ने हत्या के लिए उन लोगों को ज़िम्मेदार बताया, जिन पर हमले के आरोप में शैंकी गुलाटी वांछित हैं.

हालांकि, पुलिस जांच में ये आरोप सही नहीं पाए गए और इस घटना की जांच कर रही फ़रीदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आर्यन की हत्या के आरोप में 28 अगस्त को फ़रीदाबाद के कथित गोरक्षक अनिल कौशिक समेत तीन अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया. पांचवें अभियुक्त को 30 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया.

पुलिस के मुताबिक़, घटना की रात फ़रीदाबाद के सेक्टर 21 से लेकर पलवल ज़िले के भगौला गांव तक एक स्विफ्ट कार ने उस डस्टर कार का पीछा किया, जिसमें आर्यन और बाक़ी लोग सवार थे.

एसीपी क्राइम ब्रांच अमन यादव कहते हैं, “हमारे लिए ये एक ब्लाइंड मर्डर था. पुलिस को मिली पहली सूचना में जिन लोगों पर आरोप लगाये गए थे, उनके कहीं और होने के सबूत मिले थे. फिर हमें टोल टैक्स प्लाज़ा की एक सीसीटीवी फुटेज मिली, जिसमें लाल डस्टर कार बैरियर को तोड़ते हुए और सफ़ेद स्विफ़्ट कार उसका पीछा करते दिखी.”

आर्यन मिश्रा की मां

सीसीटीवी से अभियुक्तों तक पहुँची पुलिस

लाल रंग की इसी डस्टर कार में चार लोगों के साथ आर्यन भी सवार थे
इमेज कैप्शन, लाल रंग की इसी डस्टर कार में चार लोगों के साथ आर्यन भी सवार थे

पुलिस ने ये सीसीटीवी फुटेज मिलने के बाद और सबूत जुटाए और आख़िरकार 28 अगस्त को अनिल कौशिक, वरुण, आदेश और कृष्णा को गिरफ़्तार कर लिया. 30 अगस्त को सौरभ शर्मा नाम के एक और अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया गया.

पुलिस के मुताबिक़, अनिल कौशिक ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने ग़लतफ़हमी में डस्टर कार पर गोलियां चलाईं

पुलिस का कहना है कि कुल तीन गोलियां चलाई गईं. एक गोली हवा में चली और दो आर्यन को लगीं. एक पीछे से गले में और दूसरी सामने से सीने पर.

आर्यन की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी दो गोलियां लगने की पुष्टि हुई है.

हालांकि, पुलिस अभी अधिकारिक रूप से ये नहीं मान रही है कि गिरफ़्तार अभियुक्त गोरक्षक हैं.

अमन यादव कहते हैं, “मीडिया रिपोर्टों में उन्हें गोरक्षक कहा जा रहा है लेकिन वो किसी एक संगठन से नहीं जुड़े हैं.”

पुलिस ने बताया है कि हत्या ग़लतफ़हमी में हुई लेकिन हमलावरों का मक़सद क्या था ये अभी स्पष्ट नहीं हुआ है.

अमन यादव कहते हैं, “हत्या का मक़सद क्या है, इसकी जांच की जा रही है. अगर कुछ और तथ्य सामने आते हैं तो उन्हें भी जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा और कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा.”

अनिल कौशिक की गोरक्षक वाली पहचान

अभियुक्त अनिल कौशिक की फेसबुक से ली गई तस्वीर

इमेज स्रोत, Anilkaushik/Facebook

इमेज कैप्शन, अभियुक्त अनिल कौशिक की फेसबुक से ली गई तस्वीर

लेकिन अनिल कौशिक की पहचान फ़रीदाबाद में एक चर्चित गोरक्षक की है. वो 'लिव फॉर नेशन' नाम का एक संगठन भी चलाते हैं.

फ़रीदाबाद की पर्वतीय कॉलोनी में उनका दो मंज़िला मकान है. उनके परिजन मीडिया से बात करने से साफ़ इनकार कर देते हैं.

हालांकि अनिल कौशिक की मां ये ज़रूर कहती हैं कि उनके बेटे ने कुछ ग़लत नहीं किया है.

वो कहती हैं, "उसने गायों की बहुत सेवा की है, कई बार वो पुलिस के बुलाने पर भी गायों को बचाने के लिए गया है."

वो किसी सवाल का जवाब देने से इनकार करते हुए कहती हैं, “मेरे बेटे ने जो किया, भगवान उसका इंसाफ़ करेगा.”

वहीं अनिल कौशिक के पड़ोसी या आसपास के लोग भी इस घटना के बारे में बात करने से बचते हुए कहते हैं कि अनिल कौशिक एक गोरक्षक हैं और उन्होंने गायों की बहुत सेवा की है.

अनिल कौशिक ने कई बार गोतस्करों के ख़िलाफ़ मुक़दमे भी दर्ज कराए हैं. घटना से एक दिन पहले, 22 अगस्त को ही फ़रीदाबाद के सराण थाने में उन्होंने कथित गोतस्करों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी थी.

अभियुक्त के दोस्त ने क्या बताया

भुवनेश्वर हिंदुस्तानी पिछले 6-7 साल से अनिल कौशिक को जानते हैं
इमेज कैप्शन, भुवनेश्वर हिंदुस्तानी पिछले 6-7 साल से अनिल कौशिक को जानते हैं

अनिल कौशिक को पिछले 6-7 साल से जानने वाले भुवनेश्वर हिंदुस्तानी कहते हैं, “वो गोरक्षा के साथ-साथ गोसेवा भी करते हैं. उन्होंने सैकड़ों वीडियो अपलोड की हैं, जिनमें वो गायों की सेवा करते दिख रहे हैं. जिन मामलों में पुलिस भी गोसेवा नहीं कर पाती थी, तो उसे मदद के लिए बुलाया जाता था.”

अनिल कौशिक की गिरफ़्तारी के बाद उनके समर्थन में फ़रीदाबाद का कोई हिंदूवादी संगठन नहीं आया है.

इसकी वजह बताते हुए भुवनेश्वर कहते हैं, “जो हुआ, बहुत ग़लत हुआ है. एक निर्दोष की मौत हुई है, ये अपराध है.”

हालांकि भुवनेश्वर ये ज़रूर कहते हैं कि जब तक गोतस्करी नहीं रुकेगी, गोरक्षक गायों को बचाने के लिए आगे आते रहेंगे.

भुवनेश्वर कहते हैं, “जब गोतस्करी बंद हो जाएगी तो गोरक्षक अपने आप चुप हो जाएंगे. अनिल कौशिक से जो हुआ, बहुत ग़लत हुआ, उसका समर्थन नहीं किया जा सकता लेकिन ये भी समझना होगा कि कोई गोरक्षक क्यों बन रहा है.”

इस हत्याकांड में जिन पांच लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, उनमें से एक कृष्णा फ़रीदाबाद के क़रीब खेड़ी गुजरान गांव के रहने वाले हैं.

इस गांव के लोगों के मुताबिक़, कृष्णा बेरोज़गार थे और दो साल पहले अनिल कौशिक के साथ जुड़े थे जिसके बाद वे गौरक्षक बन गए थे.

कृष्णा के घर पर भीतर से ताला लगा था, उनके परिजनों ने बात करने से इनकार कर दिया.

हालांकि, उनके परिवार से जुड़े एक व्यक्ति ने अपना नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा, “ये बात तो सही है कि वो गोरक्षक हैं, लेकिन हमें लगता है कि इस घटना में उसे फँसाया गया है.”

हरियाणा

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इमेज कैप्शन, पिछले कुछ वर्षों में स्वयंभू गोरक्षकों की मनमानी बढ़ी है

पुलिस को नहीं किया कॉल

फ़रीदाबाद और आस-पास के इलाक़ों में गोरक्षक काफ़ी सक्रिय रहे हैं.

सोशल मीडिया पर कथित गो-तस्करों को पकड़ने और उनके ख़िलाफ़ हिंसक कार्रवाइयों के वीडियो भी आते रहे हैं. कई कथित गो-तस्करों की ऐसी घटनाओं में मौतें भी हुई हैं.

लेकिन ये पहली बार है, जब किसी हिंदू युवक की मौत में कथित गोरक्षकों के शामिल होने की बात सामने आ रही है.

फ़रीदाबाद के क्राइम रिपोर्टर कैलाश गठवाल कहते हैं, “फ़रीदाबाद के आसपास कई मुस्लिम बहुल इलाक़े हैं. गो-तस्करों और गोरक्षकों के बीच यहां झड़पें होती रही हैं. लेकिन ये पहली बार है जब किसी हिंदू युवक की मौत कथित गोरक्षकों के हाथों होने का मामला सामने आया हो.”

कैलाश कहते हैं, “पहले भी गोलियां चलने के मामले सामने आए हैं लेकिन अक्सर हवाई फ़ायरिंग की जाती थी. आमतौर पर गोरक्षक जब गो-तस्करों को पकड़ने का प्रयास करते हैं तो पुलिस को भी सूचना देते हैं. लेकिन इस मामले में ना ही भाग रहे लोगों ने और ना ही उनका पीछा कर रहे गोरक्षकों ने पुलिस को कोई सूचना दी.”

उस रात क्या हुआ था?

क्राइम ब्रांच के एसीपी अमन यादव
इमेज कैप्शन, फ़रीदाबाद में क्राइम ब्रांच के एसीपी अमन यादव

ये घटनाक्रम 23 अगस्त की रात क़रीब दो बजे फ़रीदाबाद के सेक्टर 21 में शुरू हुआ. पुलिस के मुताबिक़, यहां पहले से मौजूद अनिल कौशिक और उनकी टीम को एक लाल डस्टर कार पर शक हुआ.

अभियुक्त अनिल कौशिक और उनकी टीम को सूचना मिली थी कि इस इलाके में डस्टर कार में कथित गोतस्कर जा रहे हैं.

पुलिस के मुताबिक़, जब उन्होंने डस्टर कार का पीछा किया तो कार सवार लोगों ने गाड़ी को रोकने की बजाय उसे भगाना शुरू कर दिया.

इसके बाद डस्टर कार क़रीब 30 किलोमीटर तक आगे-आगे दौड़ती रही और स्विफ़्ट कार उसका पीछा करती रही.

ये सब फ़रीदाबाद से पलवल की तरफ़ जाने वाले हाइवे पर हुआ. पुलिस का ये भी कहना है कि हाइवे होने की वजह से यहां पुलिस की चेकिंग नहीं थी.

क्राइम ब्रांच के एसीपी अमन यादव के मुताबिक़, “ये घटनाक्रम आधे घंटे से अधिक तक चला, लेकिन अभियुक्तों और डस्टर कार सवार लोगों में से किसी ने भी पुलिस को फ़ोन नहीं किया.”

गोरक्षकों से जुड़े एक एक व्यक्ति के मुताबिक़, गिरफ़्तार किए गए अभियुक्तों को संदिग्ध डस्टर कार के बारे में जानकारी दी गई थी. जब 23 अगस्त की रात उन्हें डस्टर कार दिखी तो उन्होंने पीछा करना शुरू कर दिया.

कार के भागने की एक वजह बताते हुए एसीपी क्राइम अमन यादव कहते हैं, “डस्टर में शैंकी गुलाटी नाम का युवक भी सवार था जो हत्या के प्रयास के एक मामले में वांछित था. ऐसे में कार सवार लोगों को शक हुआ कि उनका पीछा पुलिस कर रही है. बरामद की गई स्विफ्ट कार में एक बत्ती भी लगी थी, इसे देखकर भी ये शक़ और पक्का हुआ होगा.”

घटना के बाद अभियुक्तों ने हथियार और कार पर लगी बत्ती को फेंक दिया था. पुलिस ने अभियुक्तों से एक अवैध पिस्टल और गाड़ी पर लगी बत्ती को बरामद करने का दावा किया है.

पुलिस के मुताबिक़, जिस स्विफ्ट कार का इस्तेमाल हमलावरों ने किया था, उस पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी.

फ्रंट सीट पर बैठे थे आर्यन, दो गोलियां लगीं

आर्यन के परिवार का कहना है कि उन्हें पुलिस ने कैंडिल मार्च नहीं निकालने दिया
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आर्यन डस्टर कार में ड्राइवर की बगल की सीट पर बैठे थे. पुलिस के मुताबिक़, अभियुक्तों से घटना में शामिल पिस्टल के अलावा एक टॉय गन भी बरामद की गई है, जिसका इस्तेमाल फ़ायर की आवाज़ करने के लिए किया गया था.

कार में सवार अन्य लोग पहले दिन मीडिया को बयान देने के बाद से सामने नहीं आए हैं. हालांकि पुलिस ने उनसे घटना को लेकर पूछताछ की थी और छोड़ दिया था.

लेकिन सियानंद मिश्रा सवाल करते हैं, “पुलिस ने गोरक्षकों को गिरफ़्तार कर लिया. लेकिन पुलिस को इस बात की जांच भी करनी चाहिए कि घटना के चश्मदीदों ने और आर्यन के साथ कार में मौजूद रहे इन लोगों ने पुलिस और मीडिया को ग़लत बयान क्यों दिए. उन्होंने जांच को भ्रमित करने की कोशिश क्यों की.”

सियानंद कहते हैं, “मेरे बेटे को शायद कभी इंसाफ़ ना मिल पाए. जो घटना के चश्मदीद हैं, यदि वो अदालत में बयान पलट देंगे, तो मेरे बेटे को इंसाफ़ कैसे मिलेगा.”

सियानंद के परिवार को इस बात का भी अफ़सोस है कि उनके बेटे की मौत के बाद किसी भी राजनीतिक या सामाजिक संगठन से जुड़ा कोई व्यक्ति उनसे मिलने नहीं आया.

हालांकि, माकपा नेता वृंदा करात गुरुवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचीं और आर्यन की मौत को लेकर स्थानीय प्रशासन और सरकार पर सवाल उठाये.

सियानंद के परिवार को इस घटना के बाद किसी तरह की सरकारी या कोई और मदद नहीं मिली है.

सियानंद कहते हैं, “मेरा जवान बेटा चला गया. पत्नी को ऐसा सदमा लगा है कि उठ नहीं पा रही है. हमारा पूरा परिवार बर्बाद हो गया. मेरे दो बेटे और हैं, अब उनकी सुरक्षा की चिंता है.”

आर्यन की मां उमा मिश्रा घटना के बाद से ही बीमार हो गई हैं. अब वो सीढ़ियां अपने बेटे के सहारे उतरती हैं.

उमा कहती हैं, “ख़ुद को गोरक्षक कहने वाले ये लोग कैसे किसी की जान ले सकते हैं. इनको गोली चलाने का अधिकार किसने दिया? अगर कोई गाय लेकर भी जा रहा है तो ये गोली कैसे मार सकते हैं? ये सब होने क्यों दिया जा रहा है.”

ये कहते-कहते उमा का गला सूख जाता है और वो मकान के भीतर चली जाती हैं.

सियानंद कहते हैं, “क्या हिंदू-मुसलमान भाई नहीं हैं, क्या मुसलमान का ख़ून काला है? उनका भी लाल है. फिर इस दुनिया में ये भेदभाव क्यों है? आप गोरक्षक हो, आपकी किसी से दुश्मनी हो, गोली मार दो और कह दो कि गाय लेकर जा रहे थे, मेरा बेटा कौन सी गाय लेकर जा रहा था जो उसे गोली मार दी गई.”

सियानंद के कई और सवाल भी हैं, जिनके जवाब मिलना शायद मुश्किल है. इन सवालों ने उन्हें बेहाल कर दिया है और उनकी सेहत भी गिरने लगी है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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