बीजेपी ने कंगना से क्यों किया किनारा, क्या होगा इसका असर?

कंगना रनौत

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इमेज कैप्शन, मंडी सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत अपने बयानों की वजह से कई बार विवादों में रही हैं
    • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी की सांसद कंगना रनौत राजनीति में नई हैं लेकिन विवादों से उनका पुराना रिश्ता रहा है.

कंगना मुंबई फ़िल्म इंडस्ट्री पर बोलती हैं, तब भी विवाद होता रहा है और राजनीति पर बोलना शुरू किया तब भी विवाद होने लगा. कई बार उनकी टिप्पणियां, उनके लिए ही मुश्किलें खड़ी कर देती हैं.

इसी साल जून महीने में मोहाली एयरपोर्ट पर सीआईएसफ़ की महिला कॉन्स्टेबल ने कंगना रनौत को थप्पड़ा मारा था.

कुलविंदर कौर नाम की महिला कॉन्स्टेबल का कहना था कि कंगना ने किसान आंदोलन के दौरान जो बयान दिया था उससे वो नाराज़ थीं. इस घटना के बाद सीआईएसएफ़ ने कुलविंदर कौर को निलंबित कर दिया था.

हाल ही में कंगना ने किसान आंदोलन को लेकर टिप्पणी की तो बीजेपी असहज हो गई और ख़ुद को किनारे कर लिया.

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने कंगना के बयान के विरोध में एक निंदा प्रस्ताव पास किया तो आम आदमी पार्टी ने हरियाणा के कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन किया.

कंगना को लगता है कि बॉलीवुड में भाई भतीजावाद है और भारत की राजनीति नरेंद्र मोदी के पीएम बनने से पहले सही राह पर नहीं थी.

साल 2021 में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कंगना रनौत ने कहा था, ''भारत को साल 1947 में भीख में आज़ादी मिली थी और देश को असली आज़ादी साल 2014 में मिली.''

कंगना कहना चाह रही थीं कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब भारत को असली आज़ादी मिली.

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कंगना को थप्पड़ मारे जाने के बाद सोशल मीडिया पर काफ़ी बहस शुरू हो गई थी.

जानी-मानी शूटर हिना सिद्धू ने ट्वीट कर कहा था, ''किसी की भावना आहत हुई थी और उसने थप्पड़ मार दिया, इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य पूरी तरह से आतंकवाद और हिंसा की चपेट में है. 100-100 रुपए वाले ट्वीट की तरह थप्पड़ मारना भी अतिउत्साह या आवेग भरी हरकत है. दुखद है कि वह ट्वीट कइयों को ग़ु्स्सा दिलाने वाला था, जिसमें मैं भी शामिल थी लेकिन उसे डिलीट कर दिया गया. लेकिन उस महिला कॉन्स्टेबल का किया सबके सामने है. अच्छा होता कि वह बिना हाथ उठाए उनका सामना करतीं.''

हिना सिद्धू को खेल का प्रतिष्ठित सम्मान अर्जुन अवॉर्ड भी मिला है.

सांसद बनने से पहले भी कंगना रनौत किसान आंदोलन पर विवादित टिप्पणी कर चुकी हैं.

कंगना ने दो महिला प्रदर्शनकारियों की तस्वीरों के साथ ट्वीट किया था, "हा हा. ये वही दादी हैं, जिन्हें टाइम मैगज़ीन की 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की लिस्ट में शामिल किया गया था....और ये 100 रुपये में उपलब्ध हैं."

हालांकि कंगना ने बाद में यह ट्वीट डिलीट कर दिया था.

सांसद बनने के बाद भी कंगना कभी राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी करती दिखती हैं तो कभी शंकराचार्य पर सवाल उठाती हैं.

लेकिन यह पहली बार है, जब बीजेपी ने कंगना के बयान से ख़ुद को अलग किया और कहा कि वह पार्टी की तरफ़ से राय रखने के लिए अधिकृत नहीं हैं.

कंगना रनौत

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इमेज कैप्शन, कंगना रनौत चुनाव प्रचार के दौरान

क्या पार्टी ने बचते हुए दी चेतावनी?

कंगना रनौत ने एक इंटरव्यू में बांग्लादेश में हाल में हुए आंदोलन और सत्ता परिवर्तन को भारत के किसान आंदोलन से जोड़ा और कहा, "यहाँ पर जो किसान आंदोलन हुए, वहाँ पर लाशें लटकी थीं, वहाँ रेप हो रहे थे... "

"किसानों की बड़ी लंबी प्लानिंग थी, जैसे बांग्लादेश में हुआ. इस तरह के षडयंत्र... आपको क्या लगता है किसानों...? चीन, अमेरिका... इस इस तरह की विदेशी शक्तियाँ यहां काम कर रही हैं."

कंगना ने न केवल किसान आंदोलन पर सवाल खड़े किए बल्कि दूसरे देशों पर भी टिप्पणी कर दी.

फिर क्या था... कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने कंगना और बीजेपी पर हमला शुरू कर दिया. कंगना का बयान ऐसे समय में आया, जब हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. हरियाणा के किसान आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे.

चुनावी राजनीति पर पारखी निगाह रखने वाले सीएसडीएस के प्रोफ़ेसर संजय कुमार कहते हैं, “कंगना ने जो बयान दिया है, उसे कोई भी पार्टी स्वीकार नहीं कर सकती है. हरियाणा में बीजेपी ऐसे ही कमज़ोर हालत में है और वो कोई अतिरिक्त जोख़िम नहीं उठा सकती है.”

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बीजेपी ने कंगना के बयान पर कहा है, "बीजेपी कंगना रनौत के बयान से असहमति व्यक्त करती है. पार्टी की ओर से, पार्टी के नीतिगत विषयों पर बोलने के लिए कंगना रनौत को न तो अनुमति है और न ही वे बयान देने के लिए अधिकृत हैं."

बीजेपी ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी की ओर से कंगना रनौत को निर्देशित किया गया है कि वे इस प्रकार के कोई बयान भविष्य में न दें.''

बीजेपी के मीडिया विभाग ने इस मुद्दे पर एक प्रेस रिलीज़ भी जारी की. हालाँकि बीजेपी केंद्रीय कार्यालय की तरफ़ से जारी इस रिलीज़ में पार्टी से किसी पदाधिकारी का हस्ताक्षर या नाम नहीं है.

राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे कहते हैं, "बीजेपी तमाम मामलों में दुविधा में रहती है. कंगना रनौत बीजेपी आलाकमान की चहेती हैं, वरना उनको टिकट क्यों दिया जाता. कंगना ने बीजेपी का नुक़सान तो कर दिया लेकिन पार्टी उसको न्यूनतम करना चाहती है, इसलिए चेतावनी भी दे दी है. "

नरेंद्र मोदी और कंगना रनौत

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इमेज कैप्शन, मंडी सीट पर कंगना के लिए चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी और कंगना रनौत

कंगना का क़द कितना बड़ा

कंगना के बयान पर बीजेपी की जो प्रतिक्रिया आई वो समाचार एजेंसियों और पत्रकारों के ज़रिए आई.

इसे बीजेपी ने अपने आधिकारिक अकाउंट से शेयर नहीं किया था. प्रोफ़ेसर संजय कुमार कहते हैं, “यह बीजेपी के सेफ़ गेम खेलने का तरीक़ा नज़र आता है. उसने चेतावनी भी दे दी और अगर इससे बचना हो तो बच भी सकते हैं. यानी चित भी मेरी पट भी मेरी.”

इस मामले पर हमने हिमाचल प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष राजीव बिंदल से बात करने की कोशिश की.

उन्होंने केवल इतना कहा कि कंगना के मामले पर जो कहना था वो केंद्रीय यूनिट कह चुकी है.

हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शशिकांत कहते हैं, "कंगना ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि बीजेपी के समय में भी राज्य में भ्रष्टाचार था, लेकिन इतना नहीं था. इससे वहाँ खड़े पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी असहज हो गए थे."

शशिकांत का मानना है कि कंगना रनौत बोलने से पहले सोचती नहीं हैं.

शशिकांत के मुताबिक़, "माना जाता है कि कई दावेदारों को छोड़कर कंगना रनौत को ख़ुद केंद्रीय नेतृत्व ने लोकसभा चुनाव का टिकट दिलवाया था, इसलिए उनके ख़िलाफ़ कोई खुलकर नहीं बोल पाता है. सबको लगता है कि कंगना का क़द बहुत बड़ा है."

जयराम ठाकुर और कंगना रनौैत

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इमेज कैप्शन, मंडी सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी नेताओं के साथ कंगना रनौत

फ़िल्मी सितारे और बीजेपी

शशिकांत बताते हैं कि कंगना रनौत मंडी से ही ताल्लुक रखती हैं और उन्हें राज्य में पार्टी के भविष्य के तौर पर देखा जा रहा था. हालाँकि राजनीति में उनकी शुरुआत बताती है कि जैसा सोचा जा रहा था, वैसा नहीं है.

फ़िल्मी सितारों के लिए फिलहाल बीजेपी सबसे पसंदीदा पार्टी नज़र आती है. कई फ़िल्मी सितारों ने राजनीति में आने के लिए बीजेपी का दामन थामा है. हालाँकि इनमें से कई चेहरे बीजेपी के साथ राजनीति में लंबी पारी नहीं खेल पाए.

कंगना से पहले शत्रुघ्न सिंहा, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, सन्नी देओल, परेश रावल, रवि किशन, किरण खेर और बाबुल सुप्रियो जैसे कई लोग बीजेपी के साथ जुड़ चुके हैं.

शत्रुघ्न सिंहा और बाबुल सुप्रियो पार्टी छोड़ चुके हैं. सन्नी देओल साल 2019 में पंजाब के गुरुदासपुर से बीजेपी के टिकट पर सांसद बने थे. लेकिन बाद में उन पर इलाक़े से गायब रहने का आरोप लगा. उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ दी.

यही हाल साल 2004 में राजस्थान की बीकानेर सीट से चुनाव जीतने वाले धर्मेंद्र का हुआ और परेश रावल भी सक्रिय राजनीति से अलग दिखते हैं.

हालाँकि अभी भी पार्टी में हेमा मालिनी और अरूण गोविल, किरण खेर जैसे चेहरे हैं जो मुंबई फ़िल्म इंडस्ट्री से आए हैं. इसके अलावा क्षेत्रीय फ़िल्मों के भी कई जाने पहचाने नाम बीजेपी से जुड़े हुए हैं.

शत्रुघ्न सिंहा अपनी बेटी सोनाक्षी के साथ

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इमेज कैप्शन, अपनी पुस्तक 'एनीथिंग बट खामोश' के लॉन्च के मौक़े पर शत्रुघ्न सिंहा, बेटी सोनाक्षी के साथ

कंगना, किसान और बीजेपी का संकट

अभय कुमार दुबे कहते हैं, "पहले सारे फ़िल्म स्टार कांग्रेस से शुरुआत करते थे लेकिन राजनीति उनके बस की नहीं होती. इसलिए इस बात को छोड़ दीजिए. कंगना का भी भविष्य क्या होगा, अभी से नहीं कह सकते. फ़िल्मों में आने के लिए भी उनको अपनी फ़िल्म ख़ुद बनानी होगी, हालाँकि वो अच्छी अभिनेत्री हैं."

भारत में तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ साल 2020 के अंत से किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे थे.

इनमें पंजाब हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों के किसान शामिल थे. यह आंदोलन क़रीब एक साल तक चलता रहा.

आख़िरकार केंद्र सरकार को किसानों की मांग के सामने झुकना पड़ा था और उसे साल 2021 के अंत में ये तीनों क़ानून वापस लेने पड़े.

किसान आंदोलन के दौरान भी इसपर बीजेपी के नेताओं ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

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आंदोलन के बाद इस साल हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी को ऐसे इलाक़ों में बड़ा झटका लगा है, जहाँ किसानों की तादाद काफ़ी है.

इस साल बीजेपी हरियाणा की 10 में से केवल पाँच लोकसभा सीटें जीत पाई है, उसे राज्य में पाँच सीटों का नुक़सान हुआ है.

साल 2019 में उत्तर प्रदेश की 80 में से 62 सीटों पर कब्ज़ा करने वाली बीजेपी महज़ 33 सीट जीत पाई.

इसके अलावा बीजेपी को पंजाब की अपनी दो और चंडीगढ़ की एक लोकसभा सीट इस साल के चुनावों में गंवानी पड़ी है.

बीजेपी इस साल के चुनावों में 240 लोकसभा सीटें ही जीत पाई है और माना जाता है कि बहुमत से दूर रहने और गठबंधन का दबाव केंद्र सरकार के कई फ़ैसलों में नज़र आया है.

किसान आंदोलन

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इमेज कैप्शन, किसान आंदोलन पर कई बार विवादित टिप्पणी की गई है

विपक्षी दलों की आपत्ति के बीच आठ अगस्त को नरेंद्र मोदी सरकार ने वक़्फ संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया.

कड़ी आलोचना के बाद 13 अगस्त को केंद्र सरकार ने प्रसारण विधेयक का नया मसौदा वापस ले लिया.

उसके बाद 20 अगस्त को केंद्र सरकार ने यूपीएससी को वह विज्ञापन को रद्द करने को कहा, जिसमें लेटरल एंट्री के ज़रिए 24 मंत्रालयों में 45 अधिकारियों की भर्ती की घोषणा की गई थी.

अब कंगना के बयान पर बीजेपी के फ़ौरन एक्शन में आने के पीछे हरियाणा के अलावा महाराष्ट्र और झारखंड में जल्द ही होने विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जाता है.

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