विवेक रामास्वामी रिपब्लिकन पार्टी की डिबेट में छाए, जानिए उनकी पूरी कहानी

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अमेरिकी चुनाव के पहले रिपब्लिकन पार्टी अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को चुनने की प्रक्रिया से गुज़र रही है.

इसी सिलसिले में गुरुवार को पार्टी के आठों उम्मीदवारों की लाइव टीवी डिबेट हुई. गर्मागर्म बहस और तीख़े प्रहारों के बीच हर उम्मीदवार अपना पक्ष रखता नज़र आया.

लोगों को लगा था कि डोनाल्ड ट्रंप के बिना रिपब्लिकन पार्टी की कोई भी डिबेट दिलचस्प नहीं होगी. पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप साल 2016 में हुईं ऐसे कई डिबेट्स के सुपरस्टार थे.

लेकिन गुरुवार को आठ उम्मीदवारों ने साबित कर दिया कि ट्रंप के बिना भी टीवी डिबेट में धमाके हो सकते हैं.

स्टेज पर बहस में शामिल हुए उम्मीदवार थे - माइक पेंस, निकी हेली, टिम स्कॉट, क्रिस क्रिस्टी, रॉन डिसेंटीस, एसा हचिंगसन, डग बरगुम और विवेक रामास्वामी.

आठ उम्मीदवारों ने बहुत प्रभावित किया लेकिन भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी से अलग दिखे.

बीबीसी संवाददाता एंथनी ज़र्चर बताते हैं कि विवेक रामास्वामी ने अब से पहले सरकार में किसी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ा है. उन्होंने 2004 से 2020 के बीच कभी राष्ट्रपति चुनाव में मतदान तक नहीं किया है.

वहीं रामास्वामी टीवी डिबेट में पूरी तरह से छाते हुए दिखे.

ग़ज़ब की हाज़िर जवाबी और मुस्कान के सहारे, स्टेज पर वे एकमात्र उम्मीदवार लगे जो इन लम्हों का पूरी तरह से लुत्फ़ ले रहे थे.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार, ऐसा शायद इसलिए था क्योंकि सियासत में नए-नए आए रामास्वामी ने अब तक उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है.

डिबेट के दौरान क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "इस स्टेज पर मैं एकमात्र व्यक्ति हूँ, जिसे ख़रीदा नहीं जा सकता. बार-बार वे ये साबित करने का प्रयास करते रहे कि वे स्टेज पर खड़े सियासतदानों से बिल्कुल अलग हैं.

तो कौन हैं विवेक रामास्वामी. इस वर्ष मार्च में जब उन्होंने ये घोषणा की थी कि वे रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवार बनने का प्रयास करेंगे, तब बीबीसी संवाददाता सविता पटेल ने उनकी जीवन यात्रा पर ये लेख लिखा था.

एक बार फिर पढ़िए कैसे भारतीय मूल का एक करोड़पति अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के ख़्वाब बुन रहा है.

वोक किताब के लेखक, करोड़ों के मालिक...

विवेक रामास्वामी

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अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ में अपने नाम की दावेदारी पेश करने वाले आठ रिपब्लिकन उम्मीदवारों से दो भारतीय मूल के हैं.

इन दो उम्मीदवारों में से एक निकी हेली हैं जो काफी जाना पहचाना नाम हैं, लेकिन दूसरे भारतीय मूल के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ने सबको चौंका दिया है.

वोक किताब के लेखक, करोड़ों के मालिक और उद्यमी विवेक रामास्वामी ने 21 फरवरी को फॉक्स न्यूज के एक शो में राष्ट्रपति पद की दौड़ के लिए अपनी दावेदारी की घोषणा की.

उनका कहना है कि वे नए अमेरिकी सपने के लिए एक सांस्कृतिक आंदोलन शुरू करना चाहते हैं और उनका मानना है कि अगर हमारे पास एक दूसरे को बांधने के लिए कुछ बड़ा नहीं है तो विविधता का कोई मतलब नहीं है.

37 साल के रामास्वामी का जन्म ओहायो में हुआ था. उन्होंने हार्वर्ड और येल से पढ़ाई की और बायो टेक्नॉलजी के क्षेत्र में करोड़ों रुपये कमाए. इसके बाद उन्होंने एसेट मैनेजमेंट फर्म बनाई.

उन्होंने उच्च शिक्षा को मजबूत करने और चीन पर अमेरिका की आर्थिक निर्भरता को कम करने की बात भी कही है.

भारतीय मूल की हस्तियों का साथ

विवेक रामास्वामी

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विक्रम रामास्वामी के विचार विक्रम मंशारमणि से मिलते जुलते हैं. मंशारमणि साल 2022 मिड टर्म चुनाव में अमेरिकी सीनेट के लिए हैम्पशायर से रिपब्लिकन उम्मीदवार के रुप में खड़े हुए थे.

विक्रम मंशारमणि ने हाल ही में रामास्वामी से मुलाकात भी की थी. वे अपने भारतीय मूल के अमेरिकी साथी रामास्वामी को बहुत प्रभावशाली, विचारशील और अपनी बातों को बहुत अच्छे तरीके से रखने वाला बताते हैं.

मंशारमणि कहते हैं कि उनका विचार अमेरिका को अलग करने की बजाय अमेरिका को एकजुट करना है.

वे कहते हैं, "पहचान की राजनीति ने अमेरिका में जड़े जमा ली हैं और इस तरह की राजनीति का प्रभाव यह होता है कि वह एकजुट करने की बजाय तोड़ने का काम करती है."

उनका कहना है, "हमें उन सब चीज़ों पर काम करना चाहिए जो हम लोगों के पास साझा है."

उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने रिपब्लिकन उम्मीदवार निकी हेली का हाल ही में हैम्पशायर में स्वागत किया था.

विक्रम की राजनीति से असहमत

विवेक रामास्वामी का परिवार

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लेकिन जो भारतीय, रामास्वामी की राजनीति से सहमत नहीं है वो कहते हैं कि उनकी कैंपेन में कोई ख़ास गहराई नहीं है.

डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक शेखर नरसिम्हन एशिया अमेरिकन्स ऐंड पैसिफ़िक आइलैंडर्स यानी आपी के संस्थापक और चेयरमैन हैं.

नरसिम्हन कहते हैं कि उन्हें भारतीय के अमेरिकी राजनीति में नाम कमाने की ख़ुशी है लेकिन रामास्वामी के विचारों पर उन्हें ख़ास भरोसा नहीं है.

वे कहते हैं, "वो बिज़नेस करने वाले व्यक्ति हैं और उनका रिकॉर्ड साफ़ है, लेकिन वो क्या वादे कर रहे हैं? क्या वे बुज़ुर्गों की मेडिकल केयर के बारे में फ़िक्रमंद हैं? बुनियादी ढांचे पर ख़र्च करने को लेकर उनके पास क्या योजनाएं है? कई विषयों पर उनकी राय तो अभी सामने भी नहीं आई है."

नरसिम्हन कहते हैं कि रामास्वामी अमेरिका से कुछ कहना चाहते हैं और इसी के लिए वो राष्ट्रपति पद की दौड़ में आ रहे हैं. लेकिन वो क्या कहना चाहते हैं, ये अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है.

नरसिम्हन ये भी कहते हैं कि अन्य भारतीय मूल के अमेरिकियों ने भी रामास्वामी की पृष्ठभूमि को ठीक से स्वीकार नहीं किया है.

'रामास्वामी को रणनीति की जरूरत'

विवेक रामास्वामी

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भारतीय मूल के कई लोगों ने दशकों से रिपब्लिकन पार्टी का साथ दिया है लेकिन उनमें से किसी ने कभी भी रामास्वामी का नाम नहीं सुना था.

रिपब्लिकन पार्टी की जानी-मानी समर्थक डॉक्टर संपत शिवांगी कहती हैं, "मैं उनसे कभी नहीं मिली हूँ. मुझे बताया गया है कि उनके पास ख़ूब सारे पैसे हैं और वे अच्छा बोलते हैं. लेकिन वो कई उम्मीदवारों में से एक होंगे और उनकी जीत का चांस बहुत कम है."

और भी कई लोग डॉक्टर शिवांगी के आकलन से सहमत हैं.

डैनी गायकवाड़ ने जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कैंपेन के लिए फंड जुटाया था. वे कहते हैं, "अगर उन्होंने इतनी जल्दी रेस में शामिल होने का ऐलान नहीं किया होता तो शायद ही कोई उनके बारे में सवाल पूछता."

लेकिन गायकवाड़ रामास्वामी के रेस में हिस्सा लेने की हिम्मत की दाद देते हैं. वे कहते हैं कि रामास्वामी को एक रणनीति की जरूरत होगी और इस रणनीति में भारतीय मूल के लोगों के लिए कुछ ख़ास होना चाहिए.

वे कहते हैं कि अभी तो शुरुआत भर हुई है. उनके मुताबिक फ़्लोरिडा से ही कम से कम दो ताक़तवर उम्मीदवार मैदान में उतरने वाले हैं.

किससे कितनी उम्मीद

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डैनी गायकवाड़ का इशारा फ़्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसैंटिस और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर है. भारतीय मूल के लोग कह रहे हैं कि आख़िर में ये रेस ट्रंप, निकी हेली और डेसेंटिस के बीच ही होगी.

और उनमें अधिकतर स्थिति साफ़ होने का इंतज़ार कर रहे हैं क्योंकि ट्रंप की उम्मीदवारी पर अब भी क़ानूनी अड़ंगे लग सकते हैं.

डॉक्टर शिवांगी कहती हैं, "ट्रंप की रेटिंग्स 40 प्रतिशत है. उनके मुकाबले निकी हेली को दस से भी कम प्रतिशत पार्टी सदस्य पसंद कर रहे हैं. लेकिन वही हमारी उम्मीदवार हैं. उनका भारतीय मूल का होना इसकी मुख्य वजह है."

राजनीतिक मतभेदों के बावजूद भारतीय समुदाय को इस बात की ख़ुशी है कि उनकी अमेरिकी राजनीति में हिस्सेदारी बढ़ रही है, ख़ासकर बीते तीन चुनावों में.

गायकवाड़ कहते हैं, "एक बहुत ही ख़ूबसूरत चीज़ हो रही है. भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अगली क़तार में आ रहे हैं."

उन्हें लगता है कि रामास्वामी की उम्मीदवारी भविष्य और भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों को सियासत में आने के लिए उत्साहित करेगी.

राजनीतिक विरोधी भी इस बात से सहमत दिखते हैं.

डेमोक्रेटिक पार्टी के नरसिम्हन कहते हैं, "अगर हमारे बच्चे किसी रामास्वामी या खन्ना या कृष्णमूर्ति को चुनाव लड़ते और जीतते देखेंगे तो इससे अच्छा भला क्या हो सकता है?"

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