पाकिस्तान: चीन के इंजीनियरों के काफ़िले पर ग्वादर में हमला, मीडिया रिपोर्ट में दावा-सभी सुरक्षित

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के तटीय शहर ग्वादर में चीन के इंजीनियरों को ले जा रहे एक काफिले पर हमला हुआ है.
बीबीसी उर्दू ने रविवार को चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के हवाले से बताया है कि इस हमले में चीन के किसी नागरिक के घायल होने की ख़बर नहीं है.
पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों ने ग्वादर में हुए हमले को चरमपंथी हमला बताया है और जवाबी कार्रवाई में दो चरमपंथियों के मारे जाने की जानकारी दी है. हालांकि, इस बयान में चीनी इंजीनियरों के काफिले पर हुए हमले का कोई ज़िक्र नहीं किया गया है.
उधर, बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक बयान जारी कर हमले की ज़िम्मदारी ली है.
चीन ने पाकिस्तान के इस इलाके में बड़ा निवेश किया है. चीन अपने पश्चिमी प्रांत शिनजियांग को सड़क मार्ग के ज़रिए ग्वादर से जोड़ रहा है.
लेकिन पाकिस्तान के बलूचिस्तान में रहने वाले कई लोगों की राय है कि चीन के निवेश से उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ है.
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काफिले में थे 23 चीनी नागरिक
ग्लोबल टाइम्स ने बताया है, "पाकिस्तान के ग्वादर पुलिस स्टेशन के पास चीन के इंजीनियरों के काफिले पर हमला किया गया है. इस काफिले में तीन एसयूवी, एक वैन थीं जिनमें चीन के 23 लोग सवार थे. ये सभी बुलेटप्रूफ़ गाड़ियां थीं. "
ग्लोबल टाइम्स ने बताया है कि काफिले में शामिल एक वैन की खिड़की के बुलेटफ्रूफ़ कांच में हमले की वजह से दरार आ गई.
ग्लोबल टाइम्स ने बताया है, "हमले के दौरान एक आईईडी धमाका किया गया और वैन पर गोलियां चलाई गईं. इससे वैन के शीशे में दरारें आ गईं."
ग्लोबल टाइम्स ने ये भी जानकारी है, "चीनी काफिले पर हुए हमले में किसी के घायल होने की ख़बर नहीं है. फिलहाल पाकिस्तान के सुरक्षाबल उनकी हिफाजत कर रहे हैं और वो सुरक्षित हैं."
चीन की चेतावनी
ग्लोबल टाइम्स ने ये जानकारी भी दी है कि पाकिस्तान के कराची स्थित चीन के काउंसलेट जनरल ने हमले के बाद रविवार को सुरक्षा से जुड़ी एक चेतावनी जारी की है.
ये बताया गया है, "काउंसलेट ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वो उच्चस्तर पर सतर्कता बरतें और गंभीर सुरक्षा स्थितियों के चलते बड़े पैमाने पर होने वाले जमावड़े से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेने से बचें."
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बीएलए का दावा
बीबीसी उर्दू के मुताबिक चरमपंथी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक बयान जारी कर हमले की ज़िम्मदारी ली है.
बयान में दावा किया गया है कि हमले में चीन के चार नागरिकों और नौ सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है.
इसके पहले घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि ग्वादर में एयरपोर्ट रोड पर फकीर कॉलोनी रोड पर फायरिंग हो रही है.
बीबीसी उर्दू संवाददाता मोहम्मद काज़िम के मुताबिक़ एक चश्मदीद ने बताया कि तेज़ धमाकों के बाद उन्होंने काफी देर तक गोलियां चलने की आवाज़ सुनी.
उन्होंने बताया कि क़रीब एक घंटे तक गोलियां चलती रहीं और राजमार्ग को ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया गया.
बीते साल नवंबर में टीटीपी का सरकार के साथ सीज़फ़ायर ख़त्म करने के बाद से ख़ैबर पख़्तूनख़्वा और बलूचिस्तान में चरमपंथी घटनाओं में तेज़ी आई है.
जहां हमला हुआ, उस इलाके में न्यायिक परिसर के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण सरकारी भवन भी हैं.

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पाकिस्तान की सेना ने क्या बताया
पाकिस्तानी सेना के पब्लिक रिलेशन्स विभाग (आईएसपीआर) ने बताया है कि ग्वादर में हुआ हमला 'एक आतंकी' हमला था.
आईएसपीआर ने अपने बयान में कहा, "ग्वादर ज़िले में आतंकवादियों ने सेना के एक काफिले पर हमला किया. आतंकवादियों ने छोटे हथियार और हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. सेना की तुरंत कार्रवाई के कारण दो आतकंवादियों को घटनास्थल पर ही मार दिया गया."
बयान में आगे कहा गया है, "इस कार्रवाई में सेना के किसी जवान या किसी आम नागरिक की जानमाल का कोई नुक़सान नहीं हुआ है."
बयान में कहा गया है, "पाकिस्तान के सुरक्षाबल देश की शांति और समृद्धि में खलल डालने वाली दुश्मनों की सभी कोशिशों को नाकाम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
आईएसपीआर ने अपने बयान में चीन के इंजीनियरों के काफिले पर हुए हमले का कोई ज़िक्र नहीं किया है.

सीनेटर सरफ़राज़ अहमद बुगती ने चीनी नागरिकों पर हुए हमले की निंदा की है.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मैं चीनी कर्मचारियों के काफिले पर ग्वादर में हुए जघन्य आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूं. शुक्र है कि इसमें किसी की जान नहीं गई लेकिन ऐसी रिपोर्टें हैं कि हमले को नाकाम कर दिया गया है और हमलावर मार दिए गए हैं. ”
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चीनी नागरिकों पर पहले भी हुए हैं हमले
पाकिस्तान में चीनी नागरिकों को पहले भी निशाना बनाया गया है.
बीते साल कराची यूनिवर्सिटी के कनफ़्यूशियस सेंटर में आत्मघाती धमाका हुआ था, जिसमें तीन चीनी शिक्षकों की मौत हुई थी.
उस वक्त चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए.

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