पाकिस्तान: बलूचिस्तान के ग्वादर में हो रहा आंदोलन जिस पर चीन को देनी पड़ी सफ़ाई

इमेज स्रोत, BEHRAM BALOCH
- Author, मोहम्मद काज़िम
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, क्वेटा
पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर में 15 नवंबर से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन में हिंसा की आशंका के तहत सरकार ने सुरक्षा बढ़ा दी है.
सरकार ने बुधवार को एक आदेश जारी कर राज्य के अलग-अलग ज़िलों से सुरक्षाबलों को ग्वादर भेजने के लिए कहा है. कुल 13 ज़िलों से 5500 सुरक्षाकर्मियों को ग्वादर भेजा गया है. यह सभी ग्वादर के पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में सुरक्षा व्यवस्था की ज़िम्मेदारी संभालेंगे.
वहीं ये प्रदर्शन कथित तौर पर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के ख़िलाफ़ होने को चीन ने ख़ारिज किया है.
चीन ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया इसे चीन के ख़िलाफ़ बताकर प्रसारित कर रहा है जो कि एक'फ़ेक न्यूज़'है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवकता चाओ लीजियान ने कहा,"यह पूरी तरह फ़ेक न्यूज़ है."
ऐसी रिपोर्ट्स थीं कि CPEC की महत्वपूर्ण परियोजना ग्वादर बंदरगाह पर चीनी ट्रॉलर्स (मछली पकड़ने वाले जहाज़) को मछली पकड़ने के अधिकार देने के कारण ये प्रदर्शन हो रहे हैं इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने यह बयान जारी किया है.
चाओ लीजन ने कहा, "कुछ मीडिया में ग्वादर क्षेत्र में चीन विरोधी प्रदर्शनों की रिपोर्ट आधारहीन हैं. इसकी जांच हो चुकी है कि वहां पर चीनी ट्रॉलर्स नहीं हैं और न ही मछलियां पकड़ रहे हैं."

इमेज स्रोत, Getty Images
ग्वादर में क्या हो रहा है?
इससे पहले सोमवार को 'ग्वादर को हक़ दो' आंदोलन के समर्थन में सैकड़ों महिलाओं ने ग्वादर में रैली निकाली, जिसे शहर के इतिहास में महिलाओं की सबसे बड़ी रैली बताई जा रही है.
ग्वादर के एक वरिष्ठ पत्रकार बहराम बलूच ने रैली में हिस्सा लेने वालों की संख्या के लिहाज़ से इस रैली को न केवल ग्वादर बल्कि बलूचिस्तान के इतिहास में सबसे बड़ी महिला रैली बताया है.
रैली को अंग्रेज़ी, उर्दू और बलूची भाषा में संबोधित करते हुए छात्रा नफ़ीसा बलोच ने कहा कि 'हम ग्वादर की मां-बहनें मौलाना हिदायत-उर-रहमान को डराने वालों को ये बताना चाहते हैं कि वह एक व्यक्ति नहीं हैं बल्कि ग्वादर और मकरान के उत्पीड़ित लोगों की आवाज़ हैं.'
हालांकि 'ग्वादर को हक़ दो' आंदोलन की चार मांगों के बारे में सरकार ने नोटिफ़िकेशन जारी कर दिया है, लेकिन धरना देने वाले उनके लागू होने से संतुष्ट नहीं हैं.
इस बीच, मकरान डिवीज़न के मुख्यालय तुरबत में बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर अब्दुल क़ुद्दूस बिजेंजो की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक में सीमा व्यापार के हवाले से अहम फ़ैसले लिए गए हैं, जिनमें टोकन सिस्टम के ख़ात्मे का भी फ़ैसला शामिल है.

इमेज स्रोत, BEHRAM BALOCH
महिलाओं की तरफ़ से आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा
'ग्वादर को हक़ दो' आंदोलन के नेता मौलाना हिदायत-उर-रहमान के अलावा ग्वादर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी रैली को संबोधित किया.
कुछ महिलाओं का कहना है कि वो मजबूर होकर अपने घरों से बाहर निकली हैं, क्योंकि ट्रॉलरों के ज़रिये अवैध रूप से मछली पकड़ने और ईरान सीमा पर व्यापार पर प्रतिबंध के बाद उनके पतियों का रोज़गार ख़त्म हो गया है.
इस मौक़े पर नफ़ीसा बलोच ने कहा कि मौलाना हिदायत-उर-रहमान को डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वो डराने वालों को बताना चाहती हैं कि लगातार ज़ुल्म करने से डर और ख़ौफ़ ख़त्म हो जाता है.
"यहां बेइंतिहा ज़ुल्म है. हम भूखे हैं, बेरोज़गार हैं, हमारे पास स्वास्थ्य और शिक्षा तक की पहुंच नहीं है. यहां न पानी है न बिजली."
नफ़ीसा बलोच ने कहा कि डराने वाले अपनी ताक़त दिखा चुके हैं और अब हम अपनी ताक़त दिखाएंगे.
"हम उन संस्थाओं और भ्रष्ट नेताओं को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए निकले हैं और मौलाना से उनकी बहनों का वादा है कि वो इस आंदोलन में उनके साथ हैं."

इमेज स्रोत, BEHRAM BALOCH
रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी का कारण
ग्वादर में महिलाओं की रैली की शुरुआत अल जौहर पब्लिक स्कूल से हुई और अलग-अलग सड़कों से होते हुए जेबड़ी पार्क पर इसने एक जनसभा का रूप ले लिया है.
15 नवंबर को धरना शुरू होने के बाद से ग्वादर में महिला रैली अपनी तरह की तीसरी बड़ी रैली थी.
इससे पहले आम लोगों और बच्चों की बड़ी रैलियां निकाली गईं लेकिन महिला रैली सबसे अनोखी थी, क्योंकि बलूचिस्तान के क़बायली समाज में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के घर से निकलने की कोई मिसाल नहीं है.
ग्वादर के वरिष्ठ पत्रकार बहराम बलोच ने यह कहते हुए इससे सहमति जताई कि महिलाएं न कभी ग्वादर में इतनी बड़ी संख्या में किसी रैली में शामिल हुईं और न ही बलूचिस्तान के किसी दूसरे इलाक़े में इसकी कोई मिसाल मिलती है.
प्रदर्शन क्यों हुए?
इसके पीछे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं के लिए ग्वादर में ये धरना दिया जा रहा है उनसे ग्वादर की पूरी आबादी प्रभावित है.
उन्होंने कहा कि ग्वादर के लोगों के पास रोज़गार के दो प्रमुख स्रोत हैं- मछली पकड़ना और ईरान के साथ सीमा व्यापार.
"फिलहाल, ये दोनों सेक्टर तबाह हो गए हैं. मछली पकड़ने के काम को अवैध तरीक़े से ट्रॉलरों के ज़रिये मछली पकड़ने वालों ने तबाह कर दिया है, जबकि ईरान के साथ सीमा व्यापार को टोकन सिस्टम के नाम पर सरकार की तरफ़ से लगाई जाने वाली पाबंदियों ने तबाह कर दिया है. इसी तरह लोग बड़ी संख्या में चेकपोस्टों से प्रभावित हैं."
बहराम बलोच के मुताबिक, चूंकि ग्वादर की आबादी का हर व्यक्ति इससे प्रभावित है, इसलिए बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतर गई हैं.

सरकारी प्रतिनिधियों और लोगों के बीच क्या बात हुई?
'ग्वादर को हक़ दो' आंदोलन की तरफ़ से पिछले हफ़्ते घोषणा की गई थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो कोस्टल हाइवे और एक्सप्रेसवे बंद कर दिए जाएंगे.
लेकिन बलूचिस्तान की कैबिनेट के तीन सदस्यों सैयद एहसान शाह, मीर ज़हूर बलीदी और लाला रशीद बलोच ने ग्वादर में धरना देने वालों के साथ बातचीत की और चार मांगों से संबंधित एक नोटिफ़िकेशन जारी किया और उन्हें मौलाना हिदायत-उर-रहमान को सौंप दिया.
जिन चार मांगों को लागू करने की नोटिफ़िकेशन जारी की गई है. ये मांगें बलूचिस्तान की समुद्री सीमा में ट्रॉलरों के ज़रिए मछली पकड़ने पर प्रतिबंध और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई, सीमा पर परिवहन की निगरानी फ्रंटियर कोर के बजाय ज़िला प्रशासन के हवाले करने, कोस्ट गार्ड की हिरासत में लोगों की गाड़ियां छुड़वाने के लिए ज़िला प्रशासन की तरफ़ से सहायता प्रदान करने और ग्वादर में मौजूदा क़ानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए, शराब की दुकानों को अगले आदेश तक बंद करने से संबंधित थीं.
इन नोटिफ़िकेशन के जारी होने के बाद धरने में शामिल लोगों ने राजमार्गों को बंद करने के एलान पर अमल करने के फ़ैसले को स्थगित करने की घोषणा तो की लेकिन धरना समाप्त नहीं किया.
इन नोटिफ़िकेशन के जारी होने के बाद मंत्रियों ने धरने को तत्काल समाप्त करने के लिए कहा, लेकिन धरने में शामिल लोगों ने कहा कि वे तीन दिन तक इनके लागू होने की समीक्षा करेंगे और उसके बाद धरने को समाप्त करने या जारी रखने का फ़ैसला करेंगे.
अब तीन दिन बीत चुके हैं और न सिर्फ़ धरना चल रहा है बल्कि ग्वादर की महिलाएं भी धरने के समर्थन में घरों से बाहर निकल आई हैं.

धरना समाप्त क्यों नहीं किया गया?
चार मांगों से संबंधित नोटिफ़िकेशन के फ़ौरन जारी होने के बावजूद धरने को ख़त्म न करने के बारे में सवाल पूछे जाने पर 'ग्वादर को हक़ दो आंदोलन' के नेता मौलाना हिदायत-उर-रहमान ने बताया कि नोटिफ़िकेशन तो जारी की गई लेकिन उन्हें लागू नहीं किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि हमारी जो मांगे हैं उनमें सबसे अहम मांग लोगों की रोज़ी-रोटी और रोज़गार से जुड़ी हुई है.
उन्होंने कहा कि सोमवार को बलूचिस्तान के ओरमाड़ा की समुद्री सीमा में 30 से 40 ट्रॉलर मछली पकड़ते रहे और हमारे स्थानीय मछुआरों के जाल काट कर ले गए.
उन्होंने कहा कि सीमा व्यापार में कोई बदलाव नहीं आया है और नोटिफ़िकेशन के अनुसार परिवहन की निगरानी ज़िला प्रशासन को सौंपने के बजाय यह अभी भी एफ़सी के हाथ में है और टोकन सिस्टम पहले की तरह जारी है.
उन्होंने कहा कि उनकी मांग यही है कि टोकन सिस्टम को पूरी तरह से समाप्त किया जाए और सीमा व्यापार को पहले की तरह बहाल किया जाए.

आंदोलन की आगे की रणनीति क्या है?
मौलाना हिदायत-उर-रहमान ने कहा कि जब ग्वादर के लोगों को तबाह करने वाले कारकों को ख़त्म करने के लिए कोई व्यावहारिक क़दम नहीं दिख रहा है, तो लोगों के पास विरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
उन्होंने कहा कि अगर उनकी प्रमुख मांगों को तत्काल लागू नहीं किया गया तो धरने में शामिल लोगों ने गुरुवार से कोस्टल हाईवे को विभिन्न स्थानों पर बंद करने का फ़ैसला किया है और ग्वादर में एक्सप्रेस-वे पर भी धरना दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ पोर्ट रोड पर भी धरना जारी रहेगा.

उच्च स्तरीय सरकारी बैठक और फ़ैसले
ग्वादर से सटे केच ज़िले के मुख्यालय तुरबत में बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर अब्दुल क़ुद्दूस बिजेंजो की अध्यक्षता में मकरान के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार के मुद्दों पर एक बैठक हुई है.
बैठक में प्रांतीय मंत्रियों के अलावा, पाकिस्तानी सेना के 12 कोर के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल सरफ़राज़ अली, मुख्य सचिव बलूचिस्तान मुतहर नियाज़ राणा, आईजी पुलिस, जीओसी 44 डिवीज़न, आईजीएफ़सी, कमांडर नेवी और अन्य संबंधित संघीय और प्रांतीय अधिकारियों ने भाग लिया.
एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार, बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के रोज़गार और सुविधा को देखते हुए ईरान के साथ तेल और खाद्य पदार्थों के व्यापार के तौर-तरीक़ों को अंतिम रूप दे दिया गया है.
बैठक में सीमा व्यापार के पारंपरिक तरीक़ों और प्रस्तावित मॉडल से संबंधित ब्रीफ़िंग दी गई और क्षेत्रीय लोगों की सीमा पर आवाजाही और तेल लाने के लिए टोकन प्राप्त करने की शर्त को ख़त्म करने का फ़ैसला लिया गया.
बैठक में फ़ैसला लिया गया कि स्थानीय प्रशासन ड्राइवर और उसके साथी का पहचानपत्र के आधार पर पंजीकरण किया जाएगा और पंजीकरण के तरीक़े को और आसान और सरल बनाया जाएगा. और इन सभी प्रक्रियाओं में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए केवल स्थानीय लोगों को व्यापार की सुविधा मिलेगी.
बैठक में निर्णय लिया गया कि माफ़िया को इस व्यापार सुविधा का किसी भी सूरत में फ़ायदा नहीं उठाने दिया जाएगा, जिसके लिए संबंधित एजेंसियां प्रभावी क़दम उठाएंगी, जबकि मकरान के अलावा वाशिक, आवारान और ख़ारान के लोग भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे.
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में मकरान में 10 क्रॉसिंग प्वाइंट हैं, जिनमें से नौ ज़मीन पर हैं और एक समुद्र के रास्ते में है. बैठक में क्रॉसिंग पॉइंट की संख्या बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया.
बताया गया कि व्यापारिक मामलों की मॉनिटरिंग और जनता को सुविधाएं मुहैया करने के लिए प्रांतीय स्तर पर एक शीर्ष समिति का गठन किया जाएगा और डीसी की देखरेख में एक ज़िला समिति का भी गठन किया जाएगा.
बैठक में इस बात पर सहमति हुई कि सीमा व्यापार ही स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार का एकमात्र स्रोत है जिसे बंद नहीं किया जा सकता है और सीमा बाज़ारों की स्थापना और अधिक व्यापार सुविधाओं के उपलब्ध होने तक व्यापार का पारंपरिक तरीक़ा जारी रहेगा.
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अपने लोगों को सुविधाएं देनी हैं और उनके रोज़गार और हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बात की आशंका है कि बेरोज़गारी से पैदा हुए हालात का देश के दुश्मन फ़ायदा उठा सकते हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















