ताइवान का चीन पर आरोप, 'धौंस देने वाला' पड़ोसी चुनाव को प्रभावित करना चाहता है

ताइवान के उप-राष्ट्रपति विलियम लाई

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ताइवान के उप-राष्ट्रपति विलियम लाई के विदेशी दौरे से लौटते वक्त दो बार अमेरिका में रुकने को लेकर चीन ने ताइवान के आसपास के इलाक़े में शनिवार को बड़ा सैन्य युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है.

ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ़ वू का आरोप है कि उसका 'पड़ोसी चीन' उस पर अपनी 'धौंस जमाने की' कोशिश कर रहा है.

उनका आरोप है कि चीन ताइवान में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करना चाहता है.

वहीं चीन का कहना है कि इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य स्वशासित ताइवान की आज़ादी का समर्थन करने वालों को हतोत्साहित करना है.

ताइवान एक द्वीप है जो चीन के दक्षिण-पूर्वी तट से लगभग 100 मील दूर है.

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है जिसे वो आज नहीं तो कल अपने में मिला लेगा. वो दुनिया के दूसरे देशों के नेताओं के साथ ताइवान के रिश्तों का भी विरोध करता है.

लेकिन ताइवान ख़ुद को एक आज़ाद मुल्क मानता है. उसका अपना संविधान है और वहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार का शासन है.

चीन और ताइवान के बीच रिश्ते

क्या है पूरा मामला?

शनिवार को चीन ने ताइवान के आसपास के समंदर में सैन्य युद्धाभ्यास किया जिसमें युद्धपोत से लेकर लड़ाकू विमान शामिल हुए.

कहा जा रहा है कि ताइवान के उप-राष्ट्रपति विलियम लाई के अमेरिका में रुकने से नाराज़ चीन इस तरह से ताइवान को "कड़ी चेतावनी" दे रहा है.

ताइवान में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीदवार के रूप में शिरकत कर रहे विलियम लाई चीन के कट्टर विरोधी माने जाते हैं.

वो शुक्रवार को ही पराग्वे के दौरे से लौट रहे थे. लौटते वक्त वो अमेरिका के न्यू यॉर्क और सेन फ्रांसिस्को में रुके थे.

ताइवान के कूटनीतिक संबंध बेहद कम मुल्कों के साथ है. पराग्वे उन मुल्कों में से एक है जिसके ताइवान के साथ कूटनीतिक संबंध हैं.

किन देशों के साथ हैं ताइवान के संबंध

क्या बोले ताइवान के विदेश मंत्री?

ताइवान के विदेश मंत्री विदेश मंत्री जोसेफ़ वू ने शनिवार को कहा है कि अगले साल की शुरुआत में ताइवान में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और चीन चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.

उन्होंने कहा, "ताइवान के लोग इस बात का फ़ैसला करेंगे कि वहां कौन नेता चुनकर आता है. ये बात धौंस देने वाला पड़ोसी तय नहीं कर सकता."

सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, "मुझे लगता है कि चीन को अपने यहां चुनाव करवाने चाहिए. चीन की जनता को इस बात से बेहद खुशी होगी."

उनका कहना है कि अगले चुनावों में उप-राष्ट्रपति लाई के जीतने की अधिक उम्मीद जताई जा रही है.

ताइवान का कहना है कि चीन के युद्धाभ्यास में 50 युद्धपोत और लड़ाकू विमान हिस्सा ले रहे हैं और ये ताइवान को डराने के उद्देश्य से किया जा रहा है.

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ताइवान ने चीन के इस सैन्याभ्यास की कड़ी आलोचना की है और कहा है, "ये बेतुकी और भड़काने वाली कार्रवाई है" और "असल में अगर कुछ हुआ" तो वो अपनी "सेना भेजने के लिए तैयार है".

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "कोई बहाना लेकर ऐसे समय में सैन्य युद्धाभ्यास करना ताइवान की खाड़ी की शांति और स्थिरता बनाए रखने में तो मदद नहीं कर रहा है बल्कि ये चीन की सैन्य मानसिकता को सामने ला रहा है."

ताइपे में रहने वाले ह्वांग चुंग-एन कहते हैं, "मुझे इससे परेशानी नहीं, बीते वक्त में कई बार सैन्य युद्धाभ्यास किया गया है. ताइवान सागर में पहले भी चीन ने ऐसी मिलिटरी ड्रिल किया है. ये केवल दिखावा है, मुझे लगता नहीं कि चीन कभी ताइवान पर हमला करेगा."

यहां की एक और नागरिक चो यू-सुआन कहती हैं, "मुझे नहीं लगता युद्ध होगा क्योंकि चीन पहले भी ऐसा करने की बात कर चुका है. मुझे लगता है कि ऐसा करना आसान नहीं है, आख़िर अमेरिका भी तो है."

ताइवान की खाड़ी में चीन का युद्धाभ्यास

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चीन ने क्या कहा?

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शनिवार को चीन ने विलियम लाई को "परेशानी खड़ी करने वाला" नेता बताया और कहा कि चीन अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए उचित उठाएगा.

चीन की सरकारी मीडिया शिन्हुआ के अनुसार शनिवार को ही सेना के प्रवक्ता शी यी ने घोषणा की कि एयर फोर्स और नेवी ने ताइवान के द्वीप के आसपास के इलाक़े में साझा युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है.

ताइवान का कहना है कि शनिवार को सवेरे 9 बजे के बाद से चीन के 42 लड़ाकू विमानों ने उसकी उसकी हवाई सीमा का उल्लंघन किया है, इसके अलावा 8 युद्धपोतों ने भी इसमें हिस्सा लिया है.

शिन्हुआ में छपी ख़बर के अनुसार "वास्तव में युद्ध की स्थिति में हवाई और समुद्री इलाक़े में नियंत्रण की अपनी क्षमता की जांच के लिए ताइवान के उत्तर और दक्षिण-पश्चिमी समंदर में चीन की सेना युद्धाभ्यास कर रही है."

सेना के प्रवक्ता के अनुसार "ताइवान की आज़ादी का समर्थन कर रहे अलगाववादियों के लिए चेतावनी है जो विदेशी तत्वों के साथ हाथ मिला रहे हैं और उनके बहकावे में आ रहे हैं."

शनिवार को चीन की सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी से सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया.

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वन चाइना पॉलिसी

बीते साल भी किया था युद्धाभ्यास

बीते साल अमेरिकी कांग्रेस की हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने ताइवान का दौरा किया था जिसके बाद ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने अमेरिका का दौरा किया.

नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा की आलोचना करते हुए चीन ने कहा था कि "यह वन चाइना पॉलिसी और चीन-अमेरिका के समझौतों के साथ-साथ ये चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है. इसका चीन-अमेरिका के राजनीतिक संबंधों पर गहरा असर पड़ा है."

वहीं साई इंग-वेन के अमेरिका दौरे से वक़्त उसने पहले ताइवान के राष्ट्रपति रहे मा यिंग-जो को चीन के पांच शहरों के दौरे का निमंत्रण दिया.

मा यिंग-जो ने चीन पहुंच कर अपने पूर्वजों की कब्रों पर फूल चढ़ाने गए. ये पहला मौक़ा था जब 1949 में ताइवान बनने के बाद कोई पूर्व राष्ट्रपति पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के दौरे पर गए.

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