दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण का फ़ैक्ट चेक

ट्रंप

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इमेज कैप्शन, स्विट्ज़रलैंड के दावोस में बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
    • Author, बीबीसी वेरिफ़ाई

स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दुनियाभर के नेताओं के सामने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बेबाक भाषण दिया. इस भाषण में ट्रंप ने कई विवादित दावे किए.

इस भाषण में ट्रंप ने डेनमार्क से ग्रीनलैंड हासिल करने की अपनी इच्छा के बारे में बात की - जिसे उन्होंने "एक छोटी सी मांग" बताया.

उन्होंने नेटो में अमेरिका के योगदान और चीन में विंड एनर्जी के बारे में भी बात की.

एक घंटे से ज्यादा समय तक चले ट्रंप के भाषण में किए गए दावों की बीबीसी वेरिफ़ाई ने पड़ताल की है. आइए नज़र डालते हैं उन दावों पर -

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क्या दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को 'वापस कर दिया' था?

ग्रीनलैंड

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इमेज कैप्शन, ट्रंप की नज़र लगातार ग्रीनलैंड पर बनी हुई है (सांकेतिक तस्वीर)

ट्रंप कई हफ़्तों से ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी इच्छा के बारे में बात कर रहे हैं, जो मुख्य रूप से डेनमार्क का सेल्फ-गवर्निंग इलाक़ा है. उन्होंने कहा है कि यह अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है.

उन्होंने दावोस में कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद "हमने ग्रीनलैंड डेनमार्क को वापस दे दिया," और कहा "हम कितने बेवकूफ थे, जो ऐसा किया?"

लेकिन हक़ीक़त यह है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का था ही नहीं तो वह इसे वापस कैसे देता?

साल 1933 में एक इंटरनेशनल कोर्ट, ने फैसला सुनाया था कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का है. ये कोर्ट मौजूदा इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) के पहले अस्तित्व में था.

साल 1941 में, जर्मनी के सामने डेनमार्क के सरेंडर के एक साल बाद अमेरिका और डेनिश प्रतिनिधियों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत नाजी जर्मनी इस इलाक़े को अपने क़ब्ज़े में न ले ले, इसलिए अमेरिका को ग्रीनलैंड की रक्षा करने की इजाज़त मिली.

उसके बाद इस द्वीप पर अमेरिकी बेस बनाए गए और साथ ही अमेरिकी सैनिकों की तैनाती भी हुई.

हालांकि, इस समझौते में संप्रभुता का ट्रांसफर शामिल नहीं था, जिसका मतलब है कि ग्रीनलैंड कभी भी अमेरिकी इलाक़ा नहीं बना.

क्या अमेरिका नेटो के डिफेंस का 'क़रीब 100%' ख़र्च उठा रहा है?

अमेरिका में बने टैंक के साथ पोलैंड के सैनिक

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के अलावा नेटो देशों में पोलैंड अपनी जीडीपी का सबसे ज़्यादा हिस्सा रक्षा पर ख़र्च करता है (फ़ाइल फ़ोटो)

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस भाषण में नेटो की आलोचना की और दावा किया कि 'अमेरिका नेटो का क़रीब 100% ख़र्च उठा रहा है.'

उन्होंने इस सैन्य गठबंधन (नेटो) के सदस्य देशों के योगदान के बारे में कहा कि 'उन्होंने इसके ख़र्च का 2% भी नहीं दिया और अब वे 5% दे रहे हैं.'

इनमें से कोई भी दावा सही नहीं है. हाल के सालों में रक्षा पर अमेरिकी ख़र्च नेटो देशों की तरफ से ख़र्च की गई कुल रकम का लगभग 70% था.

साल 2024 में, यह घटकर 65% हो गया और यह अनुमान लगाया गया है कि साल 2025 में यह 62% था, क्योंकि सभी नेटो सदस्यों ने पहली बार अपनी जीडीपी का कम से कम 2% रक्षा पर ख़र्च करने का फैसला किया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इन देशों को रक्षा पर ज़्यादा ख़र्च करने के लिए राज़ी किया है, लेकिन ट्रंप जिस 5% की बात कर रहे हैं, वह एक दूरगामी लक्ष्य है, जिसे साल 2035 तक हासिल किया जाना है.

फिलहाल कोई भी नेटो सदस्य इतना ख़र्च नहीं करता है. अपनी जीडीपी का सबसे ज़्यादा हिस्सा रक्षा पर ख़र्च करने वाले पोलैंड ने भी साल 2025 में रक्षा पर 4.5% से थोड़ा कम ख़र्च किया है.

क्या अमेरिका को नेटो से कुछ भी वापस नहीं मिला है?

डेनमार्क के सैनिक

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इमेज कैप्शन, डेनमार्क ने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में अपने सैनिकों को खोया (फ़ाइल फ़ोटो)

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका को नेटो से "कभी कुछ नहीं मिला" और "हमने कभी कुछ नहीं मांगा."

नेटो की वेबसाइट पर लिखा है कि 'सामूहिक रक्षा नेटो का सबसे बुनियादी सिद्धांत है' और इसकी स्थापना के समझौते का अनुच्छेद 5 कहता है कि 'किसी एक नेटो सदस्य पर सशस्त्र हमला इसके सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा.'

अमेरिका इस गठबंधन का एकमात्र सदस्य है जिसने अनुच्छेद 5 का इस्तेमाल किया. उसने ऐसा 9/11 के हमलों के बाद किया.

नेटो देशों ने इसके बाद अफ़गानिस्तान में अमेरिका के नेतृत्व वाले युद्ध में सैनिक और सैन्य उपकरण दिए.

इसमें योगदान देने वाले देशों में डेनमार्क भी शामिल था, जिसने अमेरिकी सहयोगियों में प्रति व्यक्ति सबसे ज़्यादा नुक़सान झेला. उन्हें ज़्यादातर हेलमंद प्रांत में ब्रिटिश सेना के साथ भारी विवाद वाले इलाक़ों में तैनात किया गया था.

क्या चीन में कोई विंड फ़ार्म नहीं हैं?

विंड फॉर्म

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इमेज कैप्शन, चीन के गांसु में मौजूद विंड फ़ार्म (फ़ाइल फ़ोटो)

ट्रंप ने अपने भाषण में विंड एनर्जी की भी आलोचना की. उन्होंने इसे "नया ग्रीन स्कैम" बताया.

उन्होंने ख़ास तौर पर चीन का नाम लिया और दावा किया कि हालांकि वह बहुत सारे विंड टर्बाइन बनाता है, लेकिन उन्हें "चीन में कोई विंड फ़ार्म नहीं मिला."

जबकि चीन में गांसु में दुनिया के सबसे बड़े विंड फ़ार्म में से एक मौजूद है, जिसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है.

आवर वर्ल्ड इन डेटा के अनुसार, चीन किसी भी दूसरे देश के मुक़ाबले ज़्यादा पवन ऊर्जा पैदा करता है. इसके आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2024 में चीन ने हवा से 997 टेरावाट-घंटे बिजली पैदा की.

यह अमेरिका के मुक़ाबले दोगुने से भी ज़्यादा था, जो कि इस मामले में दूसरे स्थान पर था.

क्या नॉर्थ सी के तेल राजस्व का 92% हिस्सा ब्रिटेन लेता है?

नॉर्थ सी

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इमेज कैप्शन, नॉर्थ सी में काम करने वाली तेल और गैस कंपनियाँ अपने मुनाफे पर 30% कॉर्पोरेशन टैक्स और उसके ऊपर 10% सप्लीमेंट्री रेट देती हैं (सांकेतिक तस्वीर)

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में ब्रिटेन को भी निशाने पर लिया और उसकी ऊर्जा नीति की आलोचना की.

नॉर्थ सी के तेल का ज़िक्र करते हुए ट्रंप ने जो कहा वो सही नहीं है. उन्होंने कहा, "वे (ब्रिटेन) तेल कंपनियों के लिए जाना मुश्किल बना देते हैं, वे रेवेन्यू का 92% ले लेते हैं."

नॉर्थ सी में काम करने वाली तेल और गैस कंपनियाँ अपने मुनाफे पर 30% कॉर्पोरेशन टैक्स और उसके ऊपर 10% सप्लीमेंट्री रेट देती हैं.

जबकि दूसरी बड़ी कंपनियाँ 25% कॉर्पोरेशन टैक्स देती हैं और यह उससे ज़्यादा है.

नवंबर 2024 में, सरकार ने तेल और गैस कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स 35% से बढ़ाकर 38% कर दिया.

इससे नॉर्थ सी ऑयल पर कुल टैक्स 78% हो जाता है, जो रेवेन्यू पर नहीं, बल्कि मुनाफ़े पर दिया जाता है.

विंडफॉल टैक्स, जिसे ब्रिटेन में कंज़र्वेटिव पार्टी की सरकार ने साल 2022 में बढ़ते एनर्जी बिलों के जवाब में शुरू किया था, 2030 में ख़त्म होने वाला है.

क्या ट्रंप ने अमेरिका के लिए 18 ट्रिलियन डॉलर का निवेश पक्का कर लिया है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने उन इन्वेस्टमेंट के बारे में भी बात की जो उनके प्रशासन ने अमेरिका के लिए हासिल किए हैं.

उन्होंने कहा, "हमने रिकॉर्ड 18 ट्रिलियन डॉलर के कमिटमेंट हासिल किए हैं", और बाद में दोहराया, "18 ट्रिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट किया गया है."

उन्होंने पहले भी इसी तरह के दावे किए हैं. पिछले साल अक्तूबर महीने में उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने 17 ट्रिलियन डॉलर के इन्वेस्टमेंट आकर्षित किए हैं - लेकिन इतने बड़े आंकड़ों के समर्थन में सार्वजनिक तौर पर कोई सबूत मौजूद नहीं है.

व्हाइट हाउस की एक वेबसाइट में कहा गया है कि ट्रंप के कार्यकाल में कुल इन्वेस्टमेंट 9.6 ट्रिलियन डॉलर है.

ट्रंप यूएई में अपने समकक्ष के साथ

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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने पिछले साल यूएई का दौरा किया था (फ़ाइल फ़ोटो)
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इस लिस्ट में 1.4 ट्रिलियन डॉलर के सबसे बड़े निवेश के तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का ज़िक्र है जो मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री को लेकर है.

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में यूएई दूतावास की वेबसाइट के मुताबिक़ "यूएई अगले दशक में अमेरिका में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का ऐतिहासिक इन्वेस्टमेंट करने के लिए ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के साथ काम कर रहा है."

पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के एक स्टैटिस्टिशियन ग्रेग ऑक्लेयर ने बीबीसी वेरिफ़ाई को बताया कि व्हाइट हाउस ट्रैकर में "ऐसे वादे शामिल हैं जो शायद पूरे न हों. मसलन ग्रीनलैंड टेंशन के कारण ईयू ट्रेड डील अब रुकी हुई लग रही है."

बुधवार को यूरोपियन पार्लियामेंट की इंटरनेशनल ट्रेड कमेटी ने कहा कि वह इस डील के रैटिफिकेशन को "तब तक के लिए सस्पेंड कर रहे हैं जब तक अमेरिका टकराव के बजाय सहयोग के रास्ते पर फिर से आने का फैसला नहीं करता."

ऑक्लेयर ने आगे कहा कि पिछले एक साल में अमेरिका में विदेशी इन्वेस्टमेंट में बढ़ोतरी हुई है, "लेकिन ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के इन्वेस्टमेंट पुश के परिणाम स्पष्ट होने में कई साल लगेंगे."

रिपोर्टिंग: टॉम एजिंगटन, लूसी गिल्डर, मैट मर्फी, निकोलस बैरेट और एंथनी रूबेन

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.