केरल: बस में बनाए गए वीडियो के वायरल होने के बाद एक शख़्स की आत्महत्या का मामला, अब तक क्या-क्या पता है?

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इमेज कैप्शन, दीपक एक टेक्सटाइल होलसेल कंपनी में सेल्स प्रतिनिधि के रूप में काम करते थे
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)

एक व्यक्ति की 'आत्महत्या' को सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट से जोड़ा जा रहा है. यह पूरा मामला उसके जन्मदिन के एक दिन बाद सामने आया है.

इस मामले को लेकर केरल में आक्रोश देखा जा रहा है. राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) ने इस मामले में पुलिस जाँच के आदेश दिए हैं.

पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट डालने वाली कॉन्टेंट क्रिएटर शिमजिथा मुस्तफ़ा के ख़िलाफ़ 'आत्महत्या के लिए उकसाने' का मामला भी दर्ज किया है.

यह मामला मृतक दीपक यू. की माँ के. कन्याका की शिकायत पर दर्ज किया गया है.

मुस्तफ़ा ने आरोप लगाया था कि कन्नूर ज़िले में एक निजी बस में यात्रा के दौरान दीपक ने 'सेक्शुअल बाउंड्री' का उल्लंघन किया और उन्हें ग़लत तरीके से टच किया.

उनकी यह पोस्ट वायरल हो गई, जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई तरह की राय और बहसें देखने को मिलीं.

कई लोगों ने उनका सपोर्ट किया तो कई ने उनके पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए दीपक को सपोर्ट किया.

दीपक के 22 साल पुराने दोस्त और मार्केटिंग एक्ज़ीक्यूटिव असगर अली ने बीबीसी हिंदी से कहा, "अगले दिन मुझे वह सोशल मीडिया पोस्ट मिली और मैंने उसे दीपक के साथ साझा किया. दीपक इतना शरीफ़ इंसान था कि वह किसी को, ख़ासतौर पर किसी महिला को चोट पहुँचाने की सोच भी नहीं सकता."

एसएचआरसी ने कोझिकोड पुलिस को एक हफ़्ते के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

'मानसिक उत्पीड़न'

दीपक एक टेक्सटाइल होलसेल कंपनी में सेल्स प्रतिनिधि के रूप में काम करते थे और कथित घटना के समय कोझिकोड लौट रहे थे.

शनिवार को उनका 42वाँ जन्मदिन था. असगर के मुताबिक़ दीपक ने उनसे कहा था कि वो 'बस में भारी भीड़ के कारण देख तक नहीं पाए कि उनके पीछे कौन खड़ा था.'

उन्होंने रविवार को किसी वकील से मिलकर कॉन्टेंट क्रिएटर के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी.

दीपक के चचेरे भाई जिजिल विजय ने कहा, "वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे. उनके माता-पिता बोलने की स्थिति में नहीं हैं. उनकी माँ की तबीयत भी ठीक नहीं है."

एक अन्य रिश्तेदार ने बताया कि जब पुलिस अधिकारी बयान दर्ज करने उनके घर पहुँचे तो दीपक के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था.

दूसरी ओर, मुस्तफ़ा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद कर दिए और जाँच के सिलसिले में बयान दर्ज करने पहुँची पुलिस टीम को भी उपलब्ध नहीं हो सकीं.

बाद में उनकी एक और सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हुई, जिसमें उन्होंने मूल वीडियो पोस्ट करने के अपने फ़ैसले को सही ठहराया.

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इमेज कैप्शन, वीडियो पोस्ट होने के बाद दीपक अपने दोस्तों से कह रहे थे कि बस की भीड़ में उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि उनके पीछे कौन है

मुस्तफ़ा का पक्ष

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हालाँकि, मुस्तफ़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अलग वीडियो पोस्ट में अपने रुख़ पर कायम रहते हुए कहा कि उन्होंने यह वीडियो "व्यूज़" के लिए नहीं बल्कि एक गंभीर सामाजिक और मानसिक मुद्दे को उजागर करने के लिए बनाया था.

भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की ओर से कोझिकोड ज़िला पंचायत की पूर्व सदस्य रहीं मुस्तफ़ा ने कहा, "मैंने कल बस में एक व्यक्ति का वीडियो पोस्ट किया था, जो जानबूझकर मेरे शरीर को छू रहा था. यह न तो दुर्घटना थी और न ही कोई ग़लतफ़हमी. यह एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और यौन सीमा से जुड़ा मामला है. यानी बिना अनुमति के किसी के शरीर को छूने का अधिकार क्या किसी को है?"

उन्होंने कहा, "क्या आप जानते हैं कि वह क्या संदेश दे रहा था? उसमें अपनी प्रवृत्ति को नियंत्रित करने की क्षमता नहीं है. उसे किसी के प्रति सहानुभूति भी नहीं है. सबसे ऊपर उसका रवैया यह था कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. मैं यह इसलिए कह रही हूँ क्योंकि मैंने अपने सामने एक लड़की को देखा जो उसकी हरकतों से परेशान थी. तभी मैंने कैमरा खोलकर उसकी गतिविधियाँ रिकॉर्ड करनी शुरू कीं. उसने मुझे वीडियो बनाते हुए देखा और कुछ पल के लिए रुक गया."

"लेकिन मैंने उसे फिर वही हरकत दोहराते हुए देखा. तो उसके व्यवहार से क्या निष्कर्ष निकाला जाए? उसका संदेश यही था कि मुझे वीडियो बनाए जाने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता और मैं ऐसा करता रहूँगा. इसका मतलब है कि उसके व्यवहार में गंभीर समस्या है. मनोविज्ञान कहता है कि बिना चुनौती दिए गए व्यवहार बार-बार दोहराए जाते हैं. हमें क्या करना चाहिए था?"

"कल जब मैंने वीडियो बनाया, मेरा इरादा इसे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने का था. समाज को उस पर सवाल उठाना चाहिए. उसका परिवार और उसके आसपास के लोगों को यह वीडियो देखना चाहिए. जो व्यक्ति अपनी हरकतों की परवाह नहीं करता, उसे अपने परिवार और समाज के सामने अपनी नैतिकता दिखानी चाहिए. तभी वह बदलेगा, जब उसे अहसास होगा कि उसके व्यवहार के बारे में परिवार और समाज को पता चल गया है. यही मैं बताना चाहती थी."

मुस्तफ़ा ने कहा, "अगर समाज इस मुद्दे को सामान्य मान लेता है तो वह व्यक्ति कभी अपने व्यवहार को नहीं बदलेगा. तब सिर्फ़ पीड़ित को निशाना बनाया जाएगा और वह अपनी हरकतें दोहराता रहेगा. यह न तो मज़ाक है और न ही ध्यान आकर्षित करने की कोशिश. यह एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. ऐसे लोगों के व्यवहार को सुधारना ज़रूरी है. अब इस वीडियो पर जो प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं, उन्हें देखकर लगता है कि उस व्यक्ति से ज़्यादा हमारे समाज को काउंसलिंग की ज़रूरत है."

केरल पुलिस

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इमेज कैप्शन, केरल पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

एक्स पर अपने पोस्ट में डॉ. जेसन फिलिप ने लिखा, "विकृत मानसिकता वाले लोगों की पुरानी और बार-बार दोहराई जाने वाली आदत है. किशोरावस्था में भी मेरे सहपाठी यह दिखाया करते थे. बेहद डरावना है कि सड़क या सार्वजनिक परिवहन में यह कैसे किया जा सकता है."

उन्होंने लिखा है, "पुरुष अधिकार कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर महिला पर हमला कर रहे हैं लेकिन जिस महिला ने इसे यौन उत्पीड़न समझा, उसे रिकॉर्ड करने का पूरा अधिकार था. मुझे उस व्यक्ति की मौत का दुख है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वह दोषी नहीं था. भारत में कोई भी वयस्क महिला चाहे अमीर हो या ग़रीब, ऐसी नहीं है, जिसने किसी न किसी रूप में यौन उत्पीड़न न झेला हो. भारत को दुनिया की 'रेप कैपिटल' यूँ ही नहीं कहा जाता."

डॉ. फिलिप, उसी मंच पर सूरज कुमार बौद्ध की एक पोस्ट का जवाब दे रहे थे, जिसमें कहा गया था कि "सोशल मीडिया ट्रायल ने एक युवक की जान ले ली."

बौद्ध ने कहा,"वीडियो में ऐसा प्रतीत होता है कि महिला ख़ुद उसके क़रीब जाकर क्लिप रिकॉर्ड करती है और बाद में घटना को बढ़ा-चढ़ाकर यौन उत्पीड़न बताती है. वीडियो में दिखता है कि आदमी के दूसरे हाथ में बैग था, जिससे संपर्क दुर्घटनावश लगता है. मैं इस मामले की गहन जाँच की माँग करता हूँ."

उन्होंने कहा, "दीपक अपने बच्चों और परिवार के सामने सार्वजनिक अपमान और चरित्र हनन सहन नहीं कर पाए. सच सामने आने से पहले सोशल मीडिया ट्रायल ज़िंदगियाँ बर्बाद कर सकता है. यह बेहद पीड़ादायक है."

दोस्त दीपक के साथ खड़े

दीपक जिस कपड़ा व्यवसाय कंपनी में काम करते था, उसके मालिक प्रसाद वी. ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "उनका आचरण बिल्कुल बेदाग़ था. हमारे सभी डीलर सदमे में हैं कि उसके साथ ऐसा कैसे हो सकता है."

उन्होंने कहा, "जब उन्होंने मुझसे पूछा कि मुझे इस पोस्ट के बारे में क्या लगता है, तो मैंने उनसे चिंता नहीं करने को कहा. मैंने उन्हें यह भी दिखाया कि कितनी सारी टिप्पणियाँ उसके पक्ष में हैं."

पुलिस ने दीपक की माँ की शिकायत और एसएचआरसी के निर्देश के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जाँच जारी है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.