दो जहाज़ कौन से हैं जो होर्मुज़ स्ट्रेट पार कर भारत आ रहे हैं, एलपीजी-पीएनजी कनेक्शन पर सरकार की अहम घोषणा

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ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत के दो जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने में कामयाब रहे हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार को इसकी जानकारी दी है.
रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत आने वाले कुछ जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने में कामयाब रहे हैं. दो भारतीय जहाज़, शिवालिक और नंदा देवी, होर्मुज़ स्ट्रेट को पार कर चुके हैं और अब भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं."
उन्होंने बताया कि इन जहाज़ों में से हर एक में 46 हज़ार मीट्रिक टन से ज़्यादा एलपीजी लदी है. यानी इनमें कुल क़रीब 93 हज़ार मीट्रिक टन एलपीजी है.
रणधीर जायसवाल ने यह जानकारी पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर इंटरमिनिस्ट्रियल प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान दी, जिसमें विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और शिपिंग मिनिस्ट्री के अधिकारी मौजूद थे.
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विदेश मंत्रालय के एडिशन सेक्रेटरी (गल्फ) असीम महाजन ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से भारत के पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक भारतीय घायल भी हुआ है.
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में इलाक़े में मौजूद भारतीय मिशन चौबीसों घंटे काम कर रहा है और हालात पर नज़र बनाए हुए है.
उन्होंने कहा, "पहले की घटनाओं में पांच भारतीयों की मौत हो गई है जबकि एक शख़्स लापता है. ओमान, इराक़, यूएई और बहरीन में हमारा मिशन एक लापता भारतीय की तलाश और अन्य मृतकों के शव को उनके परिवार वालों तक पहुंचाने को लेकर लगातार संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है."
भारत के कितने जहाज़ खाड़ी क्षेत्र में फंसे हैं?

रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत के कई जहाज़ खाड़ी क्षेत्र में स्टैंडबाय पर हैं और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास में लगा है.
उनके मुताबिक़, इन जहाज़ों के सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के गुज़रने को सुनिश्चित करने के लिए भारत सभी संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क और तालमेल की कोशिश में है.
उन्होंने कहा, "संघर्ष के कारण उड़ानों में बड़े पैमाने पर हुई रुकावटों की वजह से कई ईरानी नागरिक भारत में फँस गए थे. ईरानी अधिकारियों ने इन फँसे हुए नागरिकों को वापस ले जाने के लिए एक चार्टर्ड विमान का इंतज़ाम किया. इनमें वे ईरानी नागरिक शामिल थे जो पर्यटक के तौर पर भारत आए थे या यहाँ राजनयिक के तौर पर तैनात थे."
"यह उड़ान कल रात कोच्चि से रवाना हुई. इन यात्रियों में आईआरआईएस लावन के वे क्रू मेंबर भी शामिल थे जिनका जहाज़ पर मौजूद रहना ज़रूरी नहीं था. यह जहाज़ अभी भी कोच्चि में ही खड़ा है."
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इनके बारे में शिपिंग मिनिस्ट्री के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया है कि इनमें 6 एलपीजी टैंकर, एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक में केमिकल प्रोडक्ट, तीन कंटेनर शिप, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर है.
उन्होंने कहा, "इसके अलावा, एक जहाज़ ख़ाली बैलास्ट पर है और तीन ड्राई डॉक में हैं. खाली बैलास्ट का मतलब है कि वे कोई माल (कार्गो) नहीं ले जा रहे हैं, और ड्राई डॉक का मतलब है कि उनके नियमित मरम्मत का काम चल रहा है."
सरकार ने जारी किये नए आदेश
घरेलू गैस की कमी से नपटने के लिए केंद्र सरकार कई तरह के उपाय करने की कोशिश में लगी है. इसी के तहत शनिवार को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने नया आदेश जारी किया है.
इसके तहत जिन उपभोक्ताओं के पास गैस पाइप लाइन और एलपीजी दोनों ही कनेक्शन होंगे, वो एलपीजी कनेक्शन नहीं रख सकेंगे. ऐसे लोग किसी भी सरकारी कंपनी के डिस्ट्रिब्यूटर के माध्यम से घरेलू एलपीजी सिलेंडर रिफिल नहीं करा सकेंगे.
सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि ऐसे लोग फ़ौरन ही अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दें.
आदेश में कहा गया है कि जिस उपभोक्ता के पास पाइप्ड गैस का कनेक्शन होगा, उन्हें एलपीजी कनेक्शन नहीं दिया जाएगा.
शनिवार को ही इन आदेशों को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है और ये लागू हो गए हैं.
ज़ाहिर तौर पर यह आदेश केवल उन इलाक़ों के उपभोक्ताओं पर लागू होगा जहाँ पाइपलाइन वाला गैस उपलब्ध है.
तेल और गैस के स्टॉक की क्या है स्थिति

मध्य पूर्व में अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच जारी जंग की वजह से दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है और इसकी क़ीमतों में बढ़ोतरी हुई है.
भारत में इसका ज़्यादा असर घरेलू गैस की सप्लाई पर दिख रहा है. कई शहरों में एलपीजी के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं और इससे व्यवसायिक उपभोक्ता ज़्यादा परेशान नज़र आ रहे हैं.
शनिवार की ब्रीफ़िंग में पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया, "क्रूड की सप्लाई हमारे पास पर्याप्त है और हमारी रिफ़ाइनरियाँ भी पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं. खुदरा बिक्री केंद्रों पर कोई ड्राय आउट (स्टॉक ख़त्म होना) रिपोर्ट नहीं हैं."
"हमारे पास पर्याप्त मात्रा में डीज़ल और पेट्रोल उपलब्ध हैं. हम अपनी ज़रूरत के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में डीज़ल और पेट्रोल उत्पादन करते हैं, इसलिए हमें आयात की कोई ज़रूरत नहीं है."
"जहां तक नेचुरल गैस का सवाल है तो सरकार चाह रही है कि जहां-जहां व्यवसायिक उपभोक्ता एलपीजी की सप्लाई से बाधित हुए हैं, वहां पर उनको पीएनजी कनेक्शन की तरफ मोड़ा जाए. इसी दिशा में गैस अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने कई ऑपरेटर्स के साथ मीटिंग की है और उन्हें सलाह दी है कि वो जिन व्यवसायिक उपभोक्ता को पीएनजी कनेक्शन दे सकते हैं, उन्हें फौरन कनेक्शन दें."
"एलपीजी सप्लाई के बारे में मेरा कहना है कि जियो पॉलिटिकल हालात को देखते हुए यह अब भी हमारे लिए चिंता का विषय है. लोग घबराहट में गैस बुक कर रहे हैं. कल 75 लाख बुकिंग हुई थी जो आज 88 लाख हो गई, यह कुछ और नहीं बल्कि पैनिक बुकिंग है."
"मेरी देश के लोगों से अपील है कि पैनिक बुकिंग से बचें, जब ज़रूरत हो तभी बुकिंग करें. यह सभी के लिए अच्छा है."
क्या उर्वरकों पर भी पड़ सकता है असर?

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मध्य-पूर्व संघर्ष की वजह से भारत में एक और चिंता उर्वरकों की सप्लाई को लेकर भी जताई जा रही है, हालांकि सरकार का कहना है कि इस मामले में भारत के पास मौजूदा स्टॉक ज़रूरत से कहीं ज़्यादा है.
रणधीर जायसवाल ने कहा है कि ख़ासकर इस साल की खरीफ की फसल के लिहाज़ से इस समय भारत के पास उर्वरकों का ज़रूरत से भी ज़्यादा स्टॉक मौजूद है.
उन्होंने कहा, "हमारे यूरिया का स्टॉक पिछले साल इसी समय के स्टॉक से कहीं ज़्यादा है. हमारा डीएपी स्टॉक पिछले साल के मुकाबले दोगुना है. इसी तरह, हमारा एनपीके स्टॉक भी पिछले साल की तुलना में काफी ज़्यादा है."
"जहाँ तक यूरिया के हमारे घरेलू उत्पादन की बात है, तो हमारा मौजूदा उत्पादन हमारी सामान्य खपत से ज़्यादा होगा, खासकर इसलिए क्योंकि रबी का मौसम अब ख़त्म होने वाला है. इसके अलावा, हमने अपने कुछ प्लांटों के तय सालाना मेंटेनेंस को पहले ही पूरा कर लिया है, जिसका मतलब है कि हम उपलब्ध गैस का इस्तेमाल करके उत्पादन को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ा सकते हैं."
उन्होंने बताया, "उर्वरक विभाग ने मौजूदा हालात का अंदाज़ा लगाते हुए काफी पहले ही ग्लोबल टेंडर भी जारी कर दिए थे. उर्वरक विभाग ने प्रतिस्पर्धी आधार पर 'स्पॉट गैस' ख़रीदने का भी फै़सला किया है और पहले चरण की ख़रीद मंगलवार तक पूरी हो जाएगी."
"हमारे सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदार बिना किसी रुकावट के आपूर्ति कर रहे हैं, और हमें उम्मीद है कि 15 मई तक, जब खरीफ मौसम में उर्वरकों की मांग अपने चरम पर होगी, तब तक हमारे पास उर्वरकों का पर्याप्त और सुरक्षित स्टॉक मौजूद रहेगा."
रणधीर जायसवाल ने अपील की है कि इस मामले में टिप्पणी करने वालों को तथ्यों के आधार पर कुछ बोलना चाहिए और बिना पूरी जानकारी के अटकलें लगाकर लोगों में घबराहट फैलाने से बचना चाहिए.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















