ट्रंप का ग्रीनलैंड पर यू-टर्न, यूरोपीय देशों पर टैरिफ़ का प्लान छोड़ा और कही ये बात

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- Author, बर्न्ड डिबसमैन जूनियर
- पदनाम, व्हाइट हाउस संवाददाता
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि नेटो के साथ हुई बातचीत के बाद अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर एक संभावित समझौते की तलाश कर रहा है. इसके साथ ही उन्होंने ग्रीनलैंड को हासिल करने की अमेरिकी योजना का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर टैरिफ़ लगाने के अपने प्लान को भी फिलहाल छोड़ दिया है.
अपने सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने कहा कि नेटो के प्रमुख साथ हुई 'एक बहुत ही सार्थक मुलाकात' के बाद ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े एक संभावित समझौते का 'फ़्रेमवर्क' तैयार हुआ है. हालांकि, उन्होंने इसके बारे में ज़्यादा ब्योरा नहीं दिया.
नेटो ने भी इस बैठक को 'बेहद सार्थक' बताया और कहा कि ट्रंप ने जिस फ़्रेमवर्क का ज़िक्र किया है, उस पर होने वाली चर्चाएं आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगी.
इससे पहले ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के मंच से कहा था कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के लिए वह 'सैन्य बल का इस्तेमाल' नहीं करेंगे, लेकिन इस क्षेत्र के स्वामित्व को सुनिश्चित करने के लिए बातचीत चाहते हैं.
कैसा होगा फ़्रेमवर्क?

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बुधवार को ट्रुथ सोशल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "हमने ग्रीनलैंड और वास्तव में पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर एक भविष्य के समझौते का फ़्रेमवर्क तैयार कर लिया है. अगर यह समाधान अंतिम रूप ले लेता है, तो यह संयुक्त राज्य अमेरिका और सभी नेटो देशों के लिए बहुत फ़ायदेमंद होगा."
उन्होंने ये भी कहा कि जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ेगी, इस बारे में और जानकारी मुहैया कराई जाएगी.
ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ बातचीत जारी रहने के दौरान उन्हें 'सीधे रिपोर्ट' करेंगे.
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमसेन ने एक बयान में कहा, "दिन की शुरुआत से बेहतर मोड़ पर दिन का अंत हुआ."
उन्होंने कहा, "अब हम ये पता लगाते हैं कि आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को डेनमार्क की सीमाओं का सम्मान करते हुए कैसे दूर किया जा सकता है. "
इसके अगले कुछ घंटों में धीरे-धीरे कई जानकारियां सामने आईं.
ट्रंप ने सीएनबीसी से कहा कि यह संभावित समझौता 'हमेशा के लिए' चल सकता है और इसमें खनिज पर अधिकारों के साथ-साथ प्रस्तावित गोल्डन डोम मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम भी शामिल हो सकता है.
यह सिस्टम ज़मीन, समुद्र और अंतरिक्ष में फैले इंटरसेप्टर्स और डिटेक्टर्स से एक सुरक्षा ढाल के तौर पर काम करेगा. इसका मक़सद अमेरिका को लंबी दूरी की मिसाइलों के हमलों से बचाना है.
ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति के अलावा, ट्रंप प्रशासन उसके विशाल और अब तक इस्तेमाल न हुए रेयर अर्थ मिनरल्स के भंडारों का भी ज़िक्र करता रहा है. इनमें से कई मिनरल मोबाइल फ़ोन और इलेक्ट्रिक वाहनों सहित अलग-अलग तकनीकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.
ट्रंप ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में सीएनएन से भी कहा कि ग्रीनलैंड के लिए प्रस्तावित समझौते का 'फ़्रेमवर्क काफ़ी आगे बढ़ चुका है और यह हमें वह सब दिलाता है जिसकी हमें ज़रूरत थी', ख़ासकर "वास्तविक राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से."
हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस प्रस्ताव में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी अधिकार की बात शामिल है या नहीं.
ग्रीनलैंड में अमेरिका की मौजूदा स्थिति
इससे पहले ट्रंप ग्रीनलैंड को लीज़ पर लेने के विचार को ख़ारिज कर चुके हैं. उनका कहना था, "आप अपने स्वामित्व वाले चीज़ों की सुरक्षा करते हैं, लीज़ पर ली चीज़ों की नहीं."
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़, इस योजना के तहत अमेरिका को इस क्षेत्र की ज़मीन के कुछ छोटे हिस्सों का अधिकार दिया जा सकता है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने बनाए जा सकें.
बुधवार को नेटो की बैठक में शामिल अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि प्रस्ताव में जो व्यवस्था सुझाई गई है, वह साइप्रस में मौजूद ब्रिटेन के सैन्य अड्डों जैसी हो सकती है, जो ब्रिटिश ओवरसीज़ टेरिटरीज़ का हिस्सा हैं.
डेनमार्क के साथ मौजूदा समझौतों के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड में जितने चाहे, उतने सैनिक तैनात कर सकता है. अमेरिका पहले से ही इस क्षेत्र के उत्तर-पश्चिमी सिरे पर स्थित पिटुफ़िक बेस में 100 से ज़्यादा सैन्य कर्मियों को स्थायी रूप से तैनात किए हुए है.
नेटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने एक बयान में कहा कि बैठक के दौरान ट्रंप और रुटे ने "आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा के महत्व पर सभी सहयोगी देशों से चर्चा की, जिनमें अमेरिका भी शामिल है."
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ने जिस फ़्रेमवर्क के बारे में बात की, उस पर नेटो सहयोगी देशों के बीच होने वाली चर्चाएं सामूहिक प्रयासों के ज़रिए, विशेष रूप से सात आर्कटिक सहयोगी देशों के ज़रिए आर्कटिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित होंगी. "
उन्होंने यह भी कहा, "डेनमार्क, ग्रीनलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत इस उद्देश्य से आगे बढ़ेंगी कि रूस और चीन कभी भी, आर्थिक या सैन्य रूप से ग्रीनलैंड में अपनी पकड़ न बना सकें."
टैरिफ़ पर क्या बोले थे ट्रंप?

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ट्रंप ने ये कहा था कि जब तक डेनमार्क से ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए कोई समझौता नहीं हो जाता है, तब तक वह एक फ़रवरी से ब्रिटेन से अमेरिका भेजे जाने वाले 'हर तरह के सामान' पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने की योजना बना रहे हैं, जिसे एक जून से बढ़ाकर 25 फ़ीसदी किया जाता.
यही टैरिफ़ डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ़्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और फ़िनलैंड से आने वाले सामानों पर भी लागू होता. ये सभी देश साल 1949 में बने डिफ़ेंस अलायंस नेटो के सदस्य हैं.
बुधवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए "तत्काल बातचीत" की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका बल प्रयोग से इस क्षेत्र को हासिल नहीं करेगा.
ट्रंप ने कहा, "शायद जब तक मैं अत्यधिक बल प्रयोग करने का फ़ैसला न ले लूं, तब तक हमें कुछ नहीं मिलेगा. तब हमें कोई रोक नहीं सकेगा. मुझे बल प्रयोग करने की ज़रूरत नहीं है. मैं बल प्रयोग नहीं करना चाहता. मैं बल प्रयोग नहीं करूंगा."
उन्होंने दुनियाभर के नेताओं से ये अपील भी की कि ग्रीनलैंड का नियंत्रण डेनमार्क से अमेरिका को सौंपा जाए. ट्रंप ने कहा, "आप हां कह सकते हैं और हम इसके लिए आभारी होंगे. या आप न कह सकते हैं और हम इसे याद रखेंगे."
हालांकि, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह ग्रीनलैंड से जुड़े ऐसे किसी भी समझौते पर राज़ी नहीं होंगे, जो इसके पूर्ण स्वामित्व देने से कम की बात करता हो.
दावोस में एक दिन पहले अपने भाषण में फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप की पहले दी गई टैरिफ़ की धमकी को लेकर आलोचना की थी. उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से "अंतहीन टैरिफ़" मूल रूप से अस्वीकार्य हैं.
मैक्रों उन नेताओं में शामिल थे, जो अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले नए टैरिफ़ के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ के जवाबी विकल्पों पर विचार करने की मांग कर रहे थे.
ट्रंप ने मैक्रों पर निशाना साधते हुए अपने भाषण में कहा कि फ़्रांस दशकों से अमेरिका का फ़ायदा उठा रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर भी तंज़ कसा. कार्नी ने एक दिन पहले दावोस में अपने भाषण में ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और अपने देश जैसे 'मिडिल पावर' देशों से एकजुट होने की अपील की थी.
इसके जवाब में ट्रंप ने कार्नी पर अमेरिका के प्रति एहसानफ़रामोश होने का आरोप लगाया.
ट्रंप ने कहा, "कनाडा अमेरिका की वजह से ही जी रहा है." ट्रंप ने कहा, "मार्क, अगली बार जब आप बयान दें तो यह बात याद रखें. "
बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















