क्या है ट्रंप का बोर्ड ऑफ़ पीस, जिसका पीएम मोदी को मिला है न्यौता

डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी

इमेज स्रोत, PRAKASH SINGH/AFP via Getty Images

ग़ज़ा के लिए ट्रंप प्रशासन के नए 'बोर्ड ऑफ़ पीस' में शामिल होने के लिए अमेरिका ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी न्योता दिया है.

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस संबंध में व्हाइट हाउस का लेटर जारी किया है.

उन्होंने लिखा, "ये मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है कि मैं राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ग़ज़ा के बोर्ड ऑफ़ पीस में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित कर रहा हूँ. बोर्ड ग़ज़ा में स्थायी शांति के लिए, स्थायित्व और ख़ुशहाली के लिए वहाँ एक असरदार प्रशासन को सहयोग करेगा."

इससे पहले अक्तूबर 2025 में मिस्र के शर्म अल-शेख़ मे ग़ज़ा में शांति के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था. इसमें क़रीब 20 देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए थे.

इसके लिए भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता दिया गया था, हालाँकि वो इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुए थे. भारत की तरफ़ से विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह इसमें शामिल हुए थे.

'बोर्ड ऑफ़ पीस' के अध्यक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति होंगे.

ये बोर्ड एक तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी के काम की निगरानी करेगा, जिसे ग़ज़ा के अस्थायी शासन और उसके पुनर्निर्माण की ज़िम्मेदारी दी गई है.

अमेरिका दावा कर रहा है कि उसका ये 'बोर्ड ऑफ़ पीस' एक नए अंतरराष्ट्रीय शांति संगठन के तौर पर काम करेगा.

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर कोई देश इस बोर्ड की स्थायी सदस्यता पाना चाहता है, तो उसे मोटी रकम ख़र्च करनी पड़ेगी.

बोर्ड के गठन के शुरुआती तीन सालों के बाद भी अगर कोई देश इसमें बने रहना चाहता है, तो उसे एक अरब डॉलर यानी क़रीब नौ हज़ार करोड़ रुपए ख़र्च करने पड़ेंगे.

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ ये बोर्ड डोनाल्ड ट्रंप की ग़ज़ा शांति योजना का हिस्सा है, लेकिन बोर्ड के चार्टर में ग़ज़ा का कोई उल्लेख नहीं है.

अजय बांगा, जेरेड कुश्नर और स्टीव विटॉफ़

इमेज स्रोत, Reuters / Getty Images / EPA

इमेज कैप्शन, इस कमेटी में अजय बंगा, जेरेड कुश्नर और स्टीव विटॉफ़ भी शामिल हैं

इससे कई विशेषज्ञ ये अनुमान लगा रहे हैं कि ट्रंप का ये 'बोर्ड ऑफ़ पीस' ग़ज़ा के अलावा दुनिया के दूसरे संघर्षों को भी ख़त्म करने में अपनी भूमिका निभाने का इरादा रखता है और इसका मक़सद ख़ुद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विकल्प के तौर पर पेश करना है.

व्हाइट हाउस ने कहा है कि कार्यकारी बोर्ड का हर सदस्य एक ऐसे विभाग का ज़िम्मा संभालेगा, जो "ग़ज़ा को स्थिर करने के लिए बेहद अहम" होगा.

हालाँकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कौन किस प्राथमिकता की ज़िम्मेदारी संभालेगा.

इस शीर्ष स्तर पर अभी तक न तो किसी महिला का नाम घोषित किया गया है और न ही किसी फ़लस्तीनी का.

हालाँकि, व्हाइट हाउस का कहना है कि आने वाले हफ़्तों में और सदस्यों के नाम घोषित किए जाएँगे.

तो फिर, इस संस्थापक कार्यकारी बोर्ड में कौन-कौन शामिल है?

सर टोनी ब्लेयर

टोनी ब्लेयर

इमेज स्रोत, BBC/Monika Ghosh

इमेज कैप्शन, टोनी ब्लेयर साल 1997 से 2007 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे हैं

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री सर टोनी ब्लेयर को लंबे समय से ट्रंप के "बोर्ड ऑफ़ पीस" के संभावित सदस्य के रूप में देखा जा रहा था.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सितंबर में पुष्टि की थी कि ब्लेयर ने इससे जुड़ने में रुचि दिखाई थी.

लेबर पार्टी के पूर्व नेता ब्लेयर साल1997 से 2007 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे.

उन्होंने 2003 में अपने देश को इराक़ युद्ध में शामिल किया था. इस फै़सले की वजह से बोर्ड में उनकी मौजूदगी को कुछ लोग विवादास्पद मान सकते हैं.

पद छोड़ने के बाद उन्होंने 2007 से 2015 के बीच चार अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के संगठन के लिए मध्य पूर्व के दूत के रूप में काम किया. इसमें संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, अमेरिका और रूस शामिल थे.

सर टोनी इस संस्थापक कार्यकारी बोर्ड के एकमात्र सदस्य हैं, जो अमेरिकी नागरिक नहीं हैं.

वो ट्रंप की ग़ज़ा को लेकर योजनाओं को "दो साल से चल रहे युद्ध, पीड़ा और दुख को ख़त्म करने का सबसे बेहतर मौक़ा" बता चुके हैं.

मार्को रुबियो

मार्को रुबियो

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, मार्को रुबियो अमेरिका के विदेश मंत्री हैं

अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में मार्को रुबियो ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की सोच के केंद्र में हैं.

ट्रंप की सत्ता में वापसी से पहले रुबियो ने ग़ज़ा में युद्धविराम का विरोध किया था.

उन्होंने कहा था कि वह चाहते हैं कि इसराइल "हमास के हर उस हिस्से को नष्ट कर दे, जिस तक वह पहुँँच सकता है."

हालाँकि, इसके बाद उन्होंने अक्तूबर में हुए इसराइल-हमास युद्ध विराम समझौते के पहले चरण की तारीफ़ करते हुए इसे 'सबसे बेहतर' और 'इकलौता' प्लान बताया.

अक्तूबर में ही रुबियो ने इसराइली संसद की उस पहल की भी आलोचना की थी, जिसमें क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक को अपने में मिलाने की दिशा में क़दम बढ़ाया गया था.

स्टीव विटकॉफ़

स्टीव विटकॉफ़

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, विटकॉफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत के तौर पर कई अहम मसलों में शामिल रहे हैं

अमेरिका के मध्य पूर्व के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ भी इस बोर्ड में शामिल होंगे. वह एक रियल एस्टेट कारोबारी हैं और ट्रंप के गोल्फ़ पार्टनर भी रहे हैं.

इस महीने की शुरुआत में विटकॉफ़ ने ग़ज़ा में युद्ध ख़त्म करने की ट्रंप की योजना के दूसरे चरण की शुरुआत का एलान किया था. उन्होंने कहा था कि इस चरण में ग़ज़ा का पुनर्निर्माण और उसका पूरा विसैन्यीकरण किया जाएगा, जिसमें हमास का हथियार डालना भी शामिल है.

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि समझौते के तहत हमास अपनी सभी ज़िम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करेगा, वरना उसे "गंभीर नतीजों" का सामना करना पड़ेगा.

विटकॉफ़ रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता कराने की अमेरिका के नेतृत्व वाली कोशिशों में भी एक अहम भूमिका निभा चुके हैं.

इनमें दिसंबर में मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई पाँच घंटे की बैठक भी शामिल है.

जेरेड कुश्नर

जेरेड कुश्नर

इमेज स्रोत, EPA

इमेज कैप्शन, जेरेड कुश्नर अमेरिकी राष्ट्रपति के दामाद हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुश्नर ने भी ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति से जुड़ी वार्ताओं में अहम भूमिका निभाई है.

विटकॉफ़ के साथ मिलकर कुश्नर अक्सर रूस-यूक्रेन और इसराइल-ग़ज़ा युद्ध को लेकर अमेरिका की ओर से मध्यस्थ की भूमिका में रहे हैं.

नवंबर में उन्होंने शांति समझौते से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मुलाक़ात की थी.

साल 2024 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एक बातचीत के दौरान कुश्नर ने कहा था, "ग़ज़ा की समुद्र किनारे की ज़मीन काफ़ी क़ीमती हो सकती है, अगर लोग आजीविका विकसित करने पर ध्यान दें."

मार्क रोवन

मार्क रोवन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एक समय रोवन अमेरिकी वित्त मंत्री की रेस में शामिल थे

अरबपति मार्क रोवन न्यूयॉर्क में स्थित बड़ी प्राइवेट इक्विटी कंपनी अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ हैं.

रोवन को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका का वित्त मंत्री बनाए जाने का संभावित दावेदार भी माना जा रहा था.

अजय बंगा

अजय बंगा

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, भारत में जन्मे बंगा साल 2007 में अमेरिकी नागरिक बने थे

विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने अपने लंबे करियर के दौरान अमेरिका के कई वरिष्ठ नेताओं को सलाह दी है, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी शामिल हैं.

साल 1959 में भारत में जन्मे बंगा 2007 में अमेरिकी नागरिक बने.

इसके बाद उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक मास्टरकार्ड के सीईओ के रूप में काम किया.

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने साल 2023 में उन्हें विश्व बैंक का प्रमुख बनाए जाने के लिए नामित किया था.

रॉबर्ट गैब्रियल

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल इस "संस्थापक कार्यकारी बोर्ड" के अंतिम सदस्य होंगे.

गैब्रियल 2016 के राष्ट्रपति अभियान के समय से ही ट्रंप के साथ काम कर रहे हैं.

अमेरिकी पब्लिक ब्रॉडकास्टर 'पीबीएस' के मुताबिक़, इसके कुछ ही समय बाद वह ट्रंप के एक अन्य प्रमुख मौजूदा सलाहकार स्टीफ़न मिलर के विशेष सहायक बन गए थे.

निकोले म्लादेनोव

निकोले म्लादेनोव

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, निकोले म्लादेनोव एक अलग फ़लस्तीनी तकनीकी समिति की निगरानी करेंगे

व्हाइट हाउस के बयान में यह भी कहा गया है कि बुल्गारिया के राजनेता और संयुक्त राष्ट्र के मध्य पूर्व के दूत निकोले म्लादेनोव ग़ज़ा में ज़मीनी स्तर पर बोर्ड के प्रतिनिधि होंगे.

वह 15 सदस्यों वाली एक अलग फ़लस्तीनी तकनीकी समिति की निगरानी करेंगे. इस समिति का नाम नेशनल कमेटी फ़ॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ ग़ज़ा, यानी एनसीएजी है.

इसे युद्ध के बाद ग़ज़ा के रोज़मर्रा के प्रशासन की ज़िम्मेदारी दी गई है.

इस नई समिति का नेतृत्व अली शात करेंगे. वह फ़लस्तीनी प्राधिकरण में उप मंत्री रह चुके हैं. फ़लस्तीनी प्राधिकरण क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के उन हिस्सों का शासन संभालता है, जो इसराइल के नियंत्रण में नहीं हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)