हिज़्बुल्लाह: ‘इसराइल का सबसे मुश्किल प्रतिद्वंद्वी’ अब कितना ताक़तवर हो गया है?

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    • Author, कैरीन टोरबे
    • पदनाम, बीबीसी अरबी, बेरूत

इसराइल, और ईरान समर्थित सैन्य संगठन हिज़्बुल्लाह के बीच ज़बर्दस्त तनाव है जिसकी वजह दोनों पक्षों के एक दूसरे पर हमले और क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह और ईरान से जुड़ी बड़ी शख़्सियतों की मौत है.

इसराइल और हिज़्बुल्लाह के संबंधों में और तनाव क्या रूप लेगा इसका आकलन करने के लिए सबसे पहले लेबनान में मौजूद इस सशस्त्र समूह की सैन्य क्षमताओं और इसराइल के साथ उसके विवादों के इतिहास पर नज़र डालनी होगी.

जुलाई 2006 में भी इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच एक बड़ा युद्ध हुआ था और अब एक बार फिर ऐसा लगता है कि जैसे दोनों पक्ष एक और विवाद के नज़दीक पहुंच चुके हैं.

इस संभावित युद्ध में एक ओर इसराइल की वायुसेना और इंटेलिजेंस की बढ़त है तो दूसरी ओर हिज़्बुल्लाह के पास मिसाइलों का अंबार और ड्रोन्स हैं.

दोनों के बीच संभावित युद्ध का दृश्य कैसा होगा? यह जानने के लिए हमें दो कारकों पर निगाह डालनी होगी. पहला यह कि जुलाई 2006 में होने वाले युद्ध से क्या सबक़ सीखा गया है और दूसरा यह कि इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच दस महीनों से जारी झड़पों में क्या होता रहा है.

इसमें कोई शक नहीं कि इसराइल की वायुसेना की शक्ति हिज़्बुल्लाह की तुलना में कहीं अधिक है और इसके कारण लेबनान में बड़ी तबाही आ सकती है. लेकिन यह भी सच है कि ग़ज़ा में इसराइल अपने इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध लड़ रहा है और इसी कारण उसके सैनिक दस्ते शायद थकान का शिकार हैं.

लेकिन शिया बहुल राजनीतिक और सैन्य दल हिज़्बुल्लाह के पास सीरिया में जंग लड़ने का अनुभव है जिसके कारण उसके फ़ील्ड कमांडर को भी काफ़ी अनुभव मिलता रहा है.

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हिज़्बुल्लाह को ईरान का समर्थन मिला हुआ है और वहीं से उसे आर्थिक और सैन्य मदद मिलती है.

हिज़्बुल्लाह को अमेरिका, ब्रिटेन और कुछ अरब देशों समेत कई पश्चिमी देशों ने एक आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है.

लेकिन लेबनानी सरकार उसे इसराइल के विरुद्ध प्रतिरोध करने वाले एक संगठन की हैसियत से देखती है. देश में हिज़्बुल्लाह को एक राजनीतिक दल की हैसियत भी मिली हुई है और संसद में भी उसके प्रतिनिधि मौजूद हैं.

सन 2006 में इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच उस समय पूर्ण युद्ध छिड़ गया था जब हिज़्बुल्लाह ने आठ इसराइली सैनिक मार दिए थे और दो का अपहरण कर लिया था.

हिज़्बुल्लाह की ओर से इसराइली सैनिकों की रिहाई के बदले में अपने लड़ाकों की रिहाई की मांग की गई थी.

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विश्लेषकों का कहना है कि अगर इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच एक और युद्ध छिड़ जाता है तो इसराइल को 2006 जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.

इस युद्ध के दौरान इसराइल ने न केवल लेबनान में हवाई हमले किए थे बल्कि वहां थल सेना भी उतारी थी.

लेकिन इन सब के बावजूद इसराइल अपने मक़सद हासिल करने में नाकाम रहा था. वह न तो अपने अग़वा सैनिक रहा करवा सका था और ना ही हिज़्बुल्लाह की सैनिक ताक़त को कुचल सका था.

सन 2006 में दोनों के बीच 34 दिन तक जारी रहने वाला युद्ध 11 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में पास एक प्रस्ताव के बाद ख़त्म हुआ था.

जैसे ही इसराइल ने अपने ऑपरेशन बंद किया वैसे ही 14 अगस्त की सुबह हिज़्बुल्लाह ने भी इसराइल पर मिसाइल हमले बंद कर दिए थे.

हिज़्बुल्लाह और इसराइल पर अब भी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं. हिज़्बुल्लाह की इस बात के लिए आलोचना की जा रही है कि उसने अपने हथियार का भंडार नष्ट नहीं किया जबकि इसराइल की आलोचना की वजह यह है कि उसने अब भी लेबनान के इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर रखा है और अक्सर देश की वायु सीमा का उल्लंघन करता रहता है.

हिज़्बुल्लाह के इसराइल पर हमले

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लेबनान और इसराइल के बीच हाल का विवाद पिछले साल 8 अक्टूबर को उस समय शुरू हुआ था जब हिज़्बुल्लाह ने इसराइली मोर्चों को निशाना बनाया था.

हिज़्बुल्लाह की ओर से कहा गया था कि यह हमले उसने ग़ज़ा में इसराइली बमबारी के बदले में और ‘ग़ज़ा के समर्थन’ में किए हैं. ध्यान रहे कि पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने दक्षिणी इसराइल पर हमला किया था और इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन तूफ़ान अल अक़्सा’ का नाम दिया था.

इसराइल की ओर से हमास के हमलों के जवाब में ग़ज़ा में ऑपरेशन शुरू किया गया था जो अब तक जारी है.

हिज़्बुल्लाह ने ऐलान किया था कि वह इसराइल के विरुद्ध मोर्चा उस समय तक खोले रखेगा जब तक ग़ज़ा में युद्ध ख़त्म नहीं हो जाता.

इसके अलावा इस क्षेत्र में एक सैन्य गठजोड़ भी काम कर रहा है जिसमें है हिज़्बुल्लाह, हमास, हूती लड़ाके, इस्लामी जिहाद और दूसरे इराकी समूह शामिल हैं और इस गठजोड़ को ईरान का समर्थन मिला हुआ है.

हिज़्बुल्लाह और इसराइली अधिकारी कई बार कह चुके हैं कि वह युद्ध के लिए तैयार हैं लेकिन पहले वह किसी भी पूर्ण युद्ध से बचने को प्राथमिकता देंगे.

इस दौरान इसराइल ने धमकी दी थी कि हिज़्बुल्लाह से युद्ध की स्थिति में वह लेबनान को ‘पाषाण काल’ में वापस भेज देगा.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार है हिज़्बुल्लाह और इसराइल के बीच झड़पों के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों से लगभग 90 हज़ार लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है. इन लोगों में अक्सर का संबंध लेबनान से है.

इन झड़पों में लगभग एक सौ आम लोग और इसराइली हमलों में हिज़्बुल्लाह के 366 लड़ाके मारे जा चुके हैं.

इसराइली अधिकारियों के अनुसार हिज़्बुल्लाह के हमलों के कारण उनके देश में लगभग 60 हज़ार लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा जबकि 33 लोग मारे गए हैं.

बीबीसी ने सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों का विश्लेषण किया है जिससे यह पता चलता है कि दक्षिणी लेबनान में 3200 से अधिक इमारतें पूरी तरह या आंशिक तौर पर तबाह हो गई हैं.

दूसरी ओर इसराइली मीडिया का कहना है कि देश के उत्तरी भाग में एक हज़ार से अधिक इमारतों को नुक़सान पहुंचा है.

इसराइल का सबसे मुश्किल प्रतिद्वंद्वी

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ब्रिटेन में रह रहे सैन्य मामलों के विशेषज्ञ जस्टिन क्रंप कहते हैं कि हिज़्बुल्लाह शायद “इस समय इसराइल के लिए सबसे मुश्किल प्रतिद्वंद्वी है.”

जस्टिन क्रंप वर्षों तक ब्रिटेन की सेना के साथ रहे हैं और बाद में उन्होंने ‘सबलाइन’ नाम की कंसलटिंग कंपनी बनाई थी. वह कहते हैं, “हिज़्बुल्लाह के पास अब भी वह सब मौजूद है जो उसके पास 2006 में था, बस अब उसके पास उन हथियारों की संख्या अधिक हो गई है.”

अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के अनुसार हिज़्बुल्लाह के पास अभी डेढ़ लाख गोले और मिसाइल मौजूद हैं जबकि उसके लड़ाकों की संख्या 45 हज़ार है.

अतीत में हिज़्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरुल्लाह ने दावा किया था कि उनके पास एक लाख से अधिक लड़ाके मौजूद हैं.

जुलाई 2006 में इसराइल से युद्ध के दौरान हिज़्बुल्लाह ने बड़े पैमाने पर कटयूशा, ग्रेड रॉकेट्स और एंटी टैंक मिसाइल का इस्तेमाल किया था. इस दौरान हिज़्बुल्लाह के लड़ाके रूसी कॉर्नेट गाइडेड मिसाइल भी इस्तेमाल करते हुए नज़र आए थे.

सैन्य मामलों के विशेषज्ञ जस्टिन क्रंप कहते हैं कि इसराइल को वायु सेना में बढ़त मिली हुई है लेकिन हिज़्बुल्लाह को अपनी पेचीदा अवस्थिति से लाभ मिलता है जो बहुत दुर्गम क्षेत्र है.

उनके अनुसार, “हिज़्बुल्लाह ने अपनी गाड़ियों और मिसाइल लॉन्च साइट्स को छिपाने की क्षमता में इज़ाफ़ा किया है और इसीलिए केवल इसराइली वायु सेना के हमले हिज़्बुल्लाह के इसराइल पर मिसाइल हमलों को रोकने के लिए काफ़ी नहीं होंगे.”

हिज़्बुल्लाह के पास मौजूद मिसाइल और हथियार

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हिज़्बुल्लाह कभी भी यह नहीं बताता कि उसके पास कितने और कौन से मिसाइल मौजूद हैं. यह सब उस स्थिति में मालूम होता है जब लड़ाके उन मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं.

पिछले वर्षों में सामने आने वाली कई इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के अनुसार हिज़्बुल्लाह के पास हथियारों का सबसे बड़ा स्रोत ईरान है जो कि इस संगठन को इराक और सीरिया के ज़रिए हथियार पहुंचाता है.

उन हथियारों में अलमास 3 एंटी टैंक मिसाइल भी शामिल है जो एक आधुनिक ईरानी हथियार है.

हिज़्बुल्लाह ने हाल ही में इसराइल के ख़िलाफ़ बर्किन और जिहाद मुग़निया मिसाइल का इस्तेमाल किया था. इस मिसाइल का नाम हिज़्बुल्लाह ने अपने एक नेता के नाम पर रखा है जो सन 2015 में सीरिया में मारे गए थे.

कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी से बतौर प्रोफ़ेसर जुड़ी एमल साद कहती हैं, “हम जो अभी देख रहे हैं वह हिज़्बुल्लाह का वह रूप है जो 2006 की तुलना में अब अधिक आधुनिक है.”

एमल साद ने लेबनानी संगठन पर एक किताब भी लिखी थी जिसका नाम है ‘हिज़्बुल्लाह: पॉलिटिक्स ऐंड रिलीजन’.

वह लिखती हैं, “हिज़्बुल्लाह अब केवल इस खेल में एक हाइब्रिड खिलाड़ी नहीं रहा बल्कि इसमें पारंपरिक सेना और अपारंपरिक संगठनों की साझा विशेषताएं मिलती हैं.”

हिज़्बुल्लाह के पास रूसी मिसाइल भी हैं

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हिज़्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरुल्लाह कई बार कह चुके हैं कि उनके संगठन के पास ऐसी मिसाइल मौजूद हैं जिनमें इसराइल के केंद्रीय क्षेत्र तक पहुंचने की क्षमता मौजूद है.

हिज़्बुल्लाह से नज़दीक माने जाने वाले लेबनानी टीवी चैनल मीयादीन से जुड़े पत्रकार व विश्लेषक अली जज़ीनी कहते हैं कि हसन नसरुल्लाह के बयानों से इशारा मिलता है कि उनके संगठन के पास शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल मौजूद हैं जो 300 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं.

उनका कहना है कि लेबनान और इसराइल के बीच दूरी कम है और इससे हिज़्बुल्लाह को फ़ायदा होगा क्योंकि इससे इसराइली सेना को मिसाइल से हमले से निपटने के लिए समय भी कम मिलेगा.

अली जज़ीनी के अनुसार यह ईरानी ज़ुल्ज़िल और फ़तह 110 मिसाइल हो सकते हैं.

हिज़्बुल्लाह के पास इन मिसाइलों की मौजूदगी का एक सबूत वह तस्वीरें हैं जो इंटरनेट पर चल रही हैं.

सैन्य मामलों के विशेषज्ञ जस्टिन क्रंप कहते हैं कि शायद हिज़्बुल्लाह ने यह मिसाइल सीरिया से ली होगी. ईरान अक्सर रूसी हथियारों और मिसाइल की कॉपी बनाता है और हो सकता है यह हथियार हिज़्बुल्लाह के पास किसी ईरानी सप्लायर के ज़रिए ही पहुंची हो.

युद्ध में ड्रोन्स का इस्तेमाल

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मिसाइलों के अलावा इस बार संभावित युद्ध में बड़ा बदलाव यह होगा कि हिज़्बुल्लाह ड्रोन्स पर अपनी निर्भरता बढ़ाएगा. उन ड्रोन्स में मिसाइल भी लगाई जा सकती हैं.

जस्टिन क्रंप कहते हैं, “हिज़्बुल्लाह उन ड्रोन्स को बेहतर और नए अंदाज़ में इस्तेमाल कर रहा है.”

वह कहते हैं कि सन 2006 से हिज़्बुल्लाह के पास एक पृथक ड्रोन यूनिट मौजूद है और वह सब सैनिक शैली के ड्रोन थे.

“लेकिन अब वह अधिकतर कमर्शियल ड्रोन पर निर्भर करते हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे दूसरे सशस्त्र संगठन करते हैं क्योंकि युद्धों में अब ड्रोन केंद्रीय भूमिका में आते जा रहे हैं.”

लेकिन इस बारे में पत्रकार अली जज़ीनी कहते हैं कि कमर्शियल ड्रोन्स को आसानी से जाम किया जा सकता है या निष्क्रिय किया जा सकता है. वह समझते हैं कि हिज़्बुल्लाह के पास सैनिक शैली के ड्रोन्स भी हैं जिनके बारे में वह दावा करते हैं कि उनकी मदद से वह उत्तरी इसराइल में मौजूद सैनिक संयंत्रों की जासूसी करते हैं.

हाल ही में इसराइली मीडिया में हिज़्बुल्लाह के एक ड्रोन के बारे में जानकारी दी गई थी जो कि ईरानी शहीद 101 प्रकार का ड्रोन था और उड़ान भरते हुए उसकी बिल्कुल आवाज़ नहीं निकलती थी.

इसी कारण इस ड्रोन को रडार की मदद से पकड़ना भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि यह अधिक ऊंचाई पर नहीं उड़ता.

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हिज़्बुल्लाह के नज़दीकी सूत्रों के अनुसार उन ड्रोन्स का इस्तेमाल अतीत में यमनी और इराकी संगठन भी कर चुके हैं.

अली जज़ीनी समझते हैं कि पिछले साल अक्टूबर के हिज़्बुल्लाह और आज के हिज़्बुल्लाह में बड़ा अंतर है.

“सिग्नल्स इंटेलिजेंस, जैमिंग और संचार के हिसाब से इसराइल के पास सबसे अधिक आधुनिक टेक्नोलॉजी है. लगभग 20 किलोमीटर के फ़ासले से इसराइल के अंदर एक ड्रोन भेजना और संवेदनशील संयंत्रों की तस्वीर लेने से यह पता चलता है कि हिज़्बुल्लाह ने कुछ सबक़ सीखे हैं और इसराइली टेक्नोलॉजी की आधुनिकता से निपटने का रास्ता निकाला है.”

हिज़्बुल्लाह के ड्रोन प्रोग्राम की क्षमता का पता इसराइली हर्मिस 450 या हर्मिस 900 ड्रोन को मार गिराने और इस घोषणा से चलता है कि हिज़्बुल्लाह ने इसराइली जहाज़ों को लेबनानी वायु सीमा से बाहर जाने पर मजबूर कर दिया है. इन सब बातों को सुनकर कुछ लोग कहते हैं कि इस लेबनानी सैन्य संगठन ने इसराइल को रोकने के लिए वायु सैनिक रणनीति बना ली है.

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि हिज़्बुल्लाह की वायु सैनिक क्षमता को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है.

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अली जज़ीनी इस मामले को स्पष्ट करते हुए कहते हैं, “वायुसेना की लड़ाई का मामला कुछ पेचीदा है क्योंकि यहां मामला किसी एक जहाज़ को नष्ट करने का नहीं है बल्कि यह सिलसिला जारी रहना चाहिए. मेरा मतलब यह है कि क्या आपके पास यह क्षमता मौजूद है कि आप लगातार 10 दिनों तक लड़ाकू विमानों को मार गिरा सकें?”

वह हिज़्बुल्लाह की वायु सैनिक क्षमताओं पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं, “अगर मक़सद यह है कि इसराइली विमान की संख्या को कम करना है और अगर ऐसा हो जाता है तो फिर आप अपने एक मक़सद में कामयाब हो जाते हैं.”

इस लेबनानी पत्रकार के अनुसार, “लेकिन सच्चाई यह है कि अभी हिज़्बुल्लाह इस क्षमता से बहुत दूर है जिसकी उसे इसराइली विमानों को लेबनानी वायु सीमा में घुसने से रोकने के लिए ज़रूरत है.”

जस्टिस क्रंप भी इस मामले पर अली जज़ीनी से सहमति जताते हुए नज़र आते हैं. उनका कहना है कि हिज़्बुल्लाह शायद उन इसराइली विमानों को रोकने में कामयाब हो जाए जो अधिक ऊंचाई पर उड़ान नहीं भरते लेकिन इसराइली विमान ऊंची उड़ान भी भर सकते हैं.

उनके अनुसार हिज़्बुल्लाह इसराइली विमानों के लिए लेबनानी वायु सीमा पूरी तरह बंद नहीं कर सकता.

जस्टिन क्रंप का मानना है कि शायद हिज़्बुल्लाह के पास वह हथियार भी मौजूद हों जो यमन में हूती इस्तेमाल कर रहे हैं और वह सभी हथियार जो हमास और हूतियों के पास मौजूद हैं वही हथियार हिज़्बुल्लाह को भी मिले होंगे.

“यह सभी संगठन सभी अनुभवों, टेक्नोलॉजी और हथियार आपस में साझा करते हैं लेकिन हिज़्बुल्लाह उन सभी गिरोहों में सबसे अधिक आधुनिकता और अनुभव रखता है.”

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एमल साद कहती है कि युद्ध के बारे में कोई भी भविष्यवाणी करने के लिए यह देखना ज़रूरी है कि यह युद्ध किन परिस्थितियों में लड़ा जा रहा है.

वह कहती हैं कि अब यहां यूनिटी ऑफ़ एरेनाज़ (कई संगठनों का एक दुश्मन के ख़िलाफ़ लड़ना) और एक ही ‘एक्सिस आफ रेज़िस्टेंस’ की छतरी तले सभी संगठनों का इसराइल के ख़िलाफ़ लड़ना कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें हमें ध्यान में रखना ज़रूरी है.

उनके अनुसार अतीत में ‘यूनिटी ऑफ़ एरेनाज़’ जैसी कोई चीज़ नहीं हुआ करती थी लेकिन अब वह एक गठजोड़ की स्थिति में लड़ रहे हैं और इस गठजोड़ के बढ़ने की भी संभावना है.

‘एक्सिस का रेज़िस्टेंस’ में हमास, इस्लामी जिहाद, यमनी हूती, हिज़्बुल्लाह और कई इराकी समूह शामिल हैं.

यहां यह बात साफ नहीं है कि यह सभी समूह हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ होने वाले युद्ध में प्रतिरोध करेंगे या नहीं लेकिन हमें यह ज़रूर मालूम है कि ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसराइल को चेतावनी दी थी कि उसे “लेबनान में किसी भी नई कार्रवाई की स्थिति में अप्रत्याशित परिणाम का सामना करना पड़ेगा.”

जुलाई 2000 के युद्ध और दक्षिणी इसरायल पर 7 अक्टूबर को होने वाले हमलों के बीच जो समय बीता है उसमें लेबनान और इसरायल के बीच सीमा पर सभी तनाव के बावजूद शांति रही है.

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दोनों पक्ष आने वाले समय की तैयारी नहीं कर रहे थे और शायद वह समय अब जल्दी आने वाला है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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