ईरान ने बताया, हमास के नेता इस्माइल हनिया को तेहरान में कैसे मारा गया

इस्माइल हनिया

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इमेज कैप्शन, हमास ने बुधवार को बताया कि उनके शीर्ष नेता इस्माइल हनिया ईरान में मारे गए हैं
    • Author, फ़रज़ाद सैफ़ी कारान
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

इसी सप्ताह बुधवार को जिस वक्त हमास की राजनीतिक शाखा के प्रमुख इस्माइल हनिया ईरान में थे, एक हमले में उनकी मौत हो गई. उनकी मौत कैसे हुई और हमला कहां से किया गया था, अब इस पर ईरान ने ब्योरा दिया है.

शुक्रवार को हनिया को क़तर में दफनाया गया. लेकिन ईरान की राजधानी तेहरान में उनकी मौत कैसे हुई ये अब तक रहस्य बना हुआ है.

हमास ने बताया कि बुधवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान में एक हमले में इस्माइल हनिया मौत हो गई थी. वह ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान पहुंचे थे.

ईरान की एलीट रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने शनिवार को एक बयान जारी कर हनिया की मौत पर अधिक जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें निशाना बनाने के लिए कम दूरी से मार करने वाली मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था.

इस हमले में हनिया के साथ उनके बॉडीगार्ड की भी मौत हो गई थी.

हनिया की मौत के बाद ईरान ने इसकी निंदा की थी और कहा था कि इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा.

इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि इस घटना के बाद हमास और इसराइल के बीच चल रही जंग की आंच मध्यपूर्व तक फैल सकती है. ऐसे में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस समेत कई यूरोपीय मुल्कों और संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा.

हालांकि अब तक किसी ने हनिया की मौत की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

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ईरान ने क्या नई जानकारी दी?

इस्माइल हनिया की मौत

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इमेज कैप्शन, फ़ार्स समाचार एजेंसी ने जारी की ये तस्वीर
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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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ईरान की सरकारी फ़ार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कहना है कि जांच में पता चला है कि जिस जगह पर इस्माइल हनिया रह रहे थे, वहां से थोड़ी दूरी से छोटी दूरी की मिसाइल या प्रोजेक्टाइल दाग़ी गई थी, जिसमें सात किलो का असलाह लगा हुआ था.

बयान में दावा किया गया है कि "इस अभियान की योजना और इसका कार्यान्वयन इसराइली सरकार ने किया था जिसे अमेरिकी सरकार का समर्थन मिला हुआ है."

अब तक इस बारे में इसराइल ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. वहीं अमेरिका ने कहा है कि इस हमले से उसका कोई लेना-देना नहीं है.

हनिया तेहरान में कहां रुके थे, इस बारे में न तो आधिकारिक जानकारी सामने आई थी और न ही उनकी मौत के बारे में कोई अधिक विवरण सामने आया.

इतना ही नहीं, क्राइम सीन यानी घटनास्थल की कोई तस्वीर और वीडियो तक जारी नहीं किया गया. यहां तक ​​कि हनिया और उनके बॉडीगार्ड की भी कोई फोटो जारी नहीं की गई.

हनिया और उनके बॉडीगार्ड की इस तरह से मौत की ख़बर पूरे इलाके़ के लिए बड़ी खबर है, क्योंकि मौजूदा हालात में इसके बाद मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध का ख़तरा और भी बढ़ गया है.

इस घटना के बाद हमास और इसराइल के बीच युद्धविराम को लेकर चल रही बातचीत की संभावनाओं पर भी अब सवाल खड़े हो गए हैं.

ईरान से लेकर हमास, लेबनान के हिज़्बुल्लाह और इराक़, सीरिया और यमन में मौजूद ताकतों ने इसका बदला लेने की बात की है.

ये भी महत्वपूर्ण है कि हनिया पर हमले से एक दिन पहले इसराइली सेना ने कहा था कि उसने बेरुत में हिजबुल्लाह के वरिष्ठ कमांडरों में से एक फौद शुक्र को मार दिया है.

ईरान ने हनिया और उनके बॉडीगार्ड की मौत की ख़बर तत्काल जारी की लेकिन इस घटना को लेकर सटीक और स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया और इस कारण इसे लेकर भ्रम पैदा हो गया.

'हर तरफ घना धुआं था'

ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई और नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान हनिया को अंतिम विदाई देते हुए

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इमेज कैप्शन, ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई और नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान हनिया को अंतिम विदाई देते हुए

तेहरान स्थित हमास के प्रतिनिधि ख़ालिद क़ादूमी उसी इमारत में रहते थे जहां इस्माइल हनिया को निशाना बनाया गया था.

ईरान की आईआरएनए समाचार एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने इस्माइल हनिया की मौत के संबंध में "द न्यूयॉर्क टाइम्स" की उस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उनकी मौत बम विस्फोट से हुई थी.

ऐसी ही एक रिपोर्ट तस्नीम समाचार एजेंसी ने भी दी है. एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि ताज़ा जांच के अनुसार उनकी मौत एक मिसाइल से की गई, जिसे एक ड्रोन पर या किसी और कैरियर पर लगाया गया था.

ये मिसाइल इमारत के भीतर आकर गिरी जिससे धमाका हुआ.

एक अगस्त को न्यूयॉर्क टाइम्स ने सात सूत्रों का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट में लिखा था कि इस्माइल हनिया की मौत सादाबाद परिसर में उनके स्थायी आवास में दो महीने पहले लगाए गए बम से हुई, जिसे छिपा कर ईरान लाया गया था.

इस रिपोर्ट पर आईआरजीसी की करीबी मानी जाने वाली फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है. एजेंसी ने सादाबाद में एक नष्ट हुए आवास की तस्वीर छापी और लिखा कि हनिया एक इमारत की चौथी मंजिल पर हवाई हमले में मारे गए थे.

इस रिपोर्ट में भी हवाई हमले के बारे में विवरण या इस इमारत में रहने की सटीक जगह का ज़िक्र नहीं किया गया था.

आईआरएनए के मुताबिक, द न्यू अरब से बात करते हुए ख़ालिद क़ादूमी ने बताया कि 31 जुलाई को स्थानीय समयानुसार दोपहर 1:37 बजे इमारत एक विस्फोट से थर्रा गई थी.

उन्होंने कहा, "मैं तुरंत अपने कमरे से बाहर आया और देखा कि हर तरफ घना धुआं था. इमारत इतनी ज़ोर से हिल रही थी कि मुझे लगा जैसे भूकंप आया हो, लेकिन ऐसा नहीं था."

उन्होंने अख़बार को बताया, "जब मैं और मेरी टीम चौथी मंजिल पर हनिया के कमरे तक पहुंचे तो हमने देखा कि कमरे की दीवारें और छत ढह गई थी और हनिया मर चुके थे."

उन्होंने कहा, "कमरे की हालत से साफ़ था कि हमला किसी हवाई प्रोजेक्टाइल या मिसाइल से किया गया था.

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कहाँ से शुरू हुई कहानी

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इमेज कैप्शन, इस्माइल हनिया की ईरान के सुप्रीम लीडर के साथ ये तस्वीर 30 जुलाई को हुई मुलाक़ात की है

बीते कुछ सालों में इस्माइल हनिया ने कई बार अलग-अलग काम के सिलसिले में ईरान की यात्रा की थी और शायद इसीलिए ईरान उनके लिए एक सुरक्षित देश था.

दो महीने पहले वो ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए ईरान गए थे.

बुधवार को तेहरान में मौत से पहले उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला ख़ामेनेई और नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से मुलाक़ात भी की थी.

बुधवार, 31 जुलाई को स्थानीय समयानुसार लगभग 2:00 बजे, सोशल मीडिया एक्स पर कम से कम तीन गुमनाम अकाउंट्स में ये दावा किया गया कि तेहरान के उत्तर और पश्चिम में उन्होंने एक ज़ोरदार विस्फोट की आवाज़ सुनी है.

इस ख़बरों के तुरंत बाद आईआरजीसी ने एक बयान जारी कर हनिया और उनके बॉडीगार्ड की मौत की पुष्टि की. फ़लस्तीनी संगठन हमास ने भी उनकी मौत की पुष्टि की.

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने शुरुआती बयान में केवल इतना बताया था कि "तेहरान में हमास के राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख इस्माइल हनिया के आवास पर हमला किया गया, जिसमें उनकी और उनके बॉडीगार्ड की मौत हो गई."

शनिवार को आईआरजीसी ने एक और बयान जारी कर कहा कि हमला कम दूरी के प्रोजेक्टाइल से किया गया था और इसमें सात किलोग्राम असलाह इस्तेमाल किया गया था. हालांकि आईआरजीसी ने ये नहीं बताया कि इमारत में इस्माइल हनिया कहां रहते थे, हमले में किसे निशाना बनाया गया था और हमले के वक्त वो कहां थे.

आईआरजीसी ने कहा था कि घटना की जांच जारी है और इस बारे में और जानकारी बाद में दी जाएगी. हालांकि बाद में जारी किए बयानों में भी घटनास्थल की कोई तस्वीर या वीडियो जारी नहीं किया गया.

आईआरजीसी चैनल

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इमेज कैप्शन, आईआरजीसी के टेलीग्राम चैनल चैनल पर उस जगह के बारे में छपे एक वीडियो का स्क्रीनशॉट जहां इस्माइल हनिया के मारे जाने का दावा किया गया है

आईआरजीसी के क़रीब माने जाने वाले कुछ स्थानीय मीडिया और चैनलों ने शुरू में कहा था कि हनिया को हवाई हमले में निशाना बनाया गया था और तेहरान के उत्तर में पूर्व सैनिकों के आवासों में से एक में रह रहे थे.

लेकिन इस बीच जाने-माने इसराइली पत्रकार और विश्लेषक अमित सेगल ने हनिया की मौत की ख़बर के तुरंत बाद अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा कि उन पर दोपहर 2:00 बजे रॉकेट हमला हुआ था.

इस मामले में तथ्य ये है कि हमास के राजनीतिक शाखा के प्रमुख की मौत के तरीके के बारे में कोई निश्चित और स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई, जिसके कारण सोशल मीडिया और मीडिया पर अटकलें लगाई जाने लगीं.

स्थानीय ईरानी समाचार एजेंसी मीज़ान ने बेरूत सैटेलाइट टीवी अल-मायादीन के हवाले से कहा कि हनिया की मौत ईरान के अंदर से नहीं, बल्कि सीमा के बाहर से किए गए मिसाइल हमले का नतीजा थी.

31 जुलाई की दोपहर को हमास के एक वरिष्ठ सदस्य खलील अल-हिया ने तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनके पास जो जानकारी है उसके मुताबिक हनिया को मिसाइल से निशाना बनाया गया था.

उन्होंने कहा कि मिसाइल उस कमरे पर गिरी जहां हनिया मौजूद थे, जिससे कमरे की खिड़कियां टूट गईं और दीवार ढह गई. लेकिन इस वरिष्ठ अधिकारी ने उस जगह का जिक्र नहीं किया जहां हनिया रह रहे थे.

इसके बाद आईआरजीसी के हवाले से कई चैनलों पर रिपोर्ट छपी जिसमें कहा गया कि हनिया तेहरान के उत्तर में से एक जगह पर रह रहे थे.

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इसके तुरंत बाद, आईआरजीसी के टेलीग्राम चैनलों पर खु़फ़िया एजेंसियों के हवाले से एक रिपोर्ट दिखाई दी, जिसमें दावा किया गया कि हनिया को तेहरान के उत्तर में पूरी गोपनीयता के साथ रखा जा रहा था.

ये कहा गया कि यहां तक ​​कि इमारत के चौकीदार और स्थानीय पुलिस को भी उनकी पहचान के बारे में कुछ नहीं पता था. उन्हें केवल इतना पता था कि वो एक विदेशी सैलानी थे.

सेना प्रमुखों के अलावा केवल राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख हाजी मिर्ज़ई को पूर्व सैनिकों के यहां रहने वाले व्यक्ति की पहचान के बारे में जानकारी दी गई थी, ताकि ज़रूरी सुरक्षा व्यवस्था की जा सके.

हालांकि कुछ ही घंटों बाद इस रिपोर्ट को सुरक्षा एजेंसियों ने खारिज कर दिया.

ईरान में कहां रह रहे थे हनिया?

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इमेज कैप्शन, लाल रंग से चिन्हित क्षेत्र में इमारत के क्षतिग्रस्त हिस्से का मलबा देखा जा सकता है

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस्माइल हनिया ईरान के उत्तर में सादाबाद में बासिज अल-ज़हरा कैंप में एक इमारत में रह रहे थे.

31 जुलाई को एक इमारत की तस्वीर जारी की गई जो आंशिक रूप से नष्ट हो गई थी, तस्वीर में क्षतिग्रस्त हिस्सों को काले रंग की जाली से ढंक दिया गया था.

बीबीसी की जांच के मुताबिक, यह इमारत सादाबाद परिसर के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में है.

तस्वीर में इमारत के नीचे गिरे हुए मलबे को देखा जा सकता है. वहीं इस तस्वीर में तीसरी मंजिल की खिड़कियां और इमारत के दाहिनी ओर की दो खिड़कियां स्पष्ट रूप से टूटी हुई दिखती हैं. बीबीसी स्वतंत्र रूप से इस स्थान की पुष्टि नहीं कर सकता.

इस घटना के एक दिन बाद न सिर्फ आईआरजीसी के एक क़रीबी टेलीग्राम चैनल ने इस जगह को हनिया के रहने और उनकी मौत की जगह बताया, बल्कि कुछ इसराइली टेलीग्राम चैनल ने भी इसी जगह को मौत की जगह बताया.

कुछ चैनलों ने तो यहां तक ​​दावा किया कि जिस जगह हनिया की मौत हुई वो जगह उस जगह से महज़ 750 मीटर दूर थी, जहां नए ईरानी राष्ट्रपति के शपथग्रहण समारोह के बाद भोज का आयोजन किया गया था.

गुरुवार, एक अगस्त को आईआरजीसी के आधिकारिक चैनल ने एक वीडियो जारी किया और हनिया की मौत की जगह 'सादाबाद पैलेस के पास' बताया, लेकिन अधिक विवरण नहीं दिया गया.

मैक्सार टेक्नोलॉजी की मदद से देखी गई तस्वीर

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इमेज कैप्शन, मैक्सार टेक्नोलॉजी की मदद से देखी गई सैटेलाइट तस्वीर

मैक्सार टेक्नोलॉजी कंपनी की मदद से बीबीसी ने 25 जुलाई और 1 अगस्त, 2024 को सादाबाद परिसर में बनीं इमारतों की सैटलाइट तस्वीरें देखी हैं.

इनमें 25 जुलाई (हनिया की मौत से पांच दिन पहले) को ली गई तस्वीरों में इमारत में नुक़सान होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे.

एक अगस्त की सैटेलाइट तस्वीरों में भी इमारत को हुए किसी तरह के नुक़सान के कोई संकेत साफ़ नहीं दिखते, हालांकि इमारत की छत के एक हिस्से पर एक काला धब्बा ज़रूर देखा जा सकता है, जो क्षतिग्रस्त हिस्से से मेल खाता है.

तस्वीर से पता चलता है कि इमारत का एक हिस्सा संभवतः पर्दे से ढका हुआ है और तस्वीर के ऊपरी हिस्से में दीवार गिरने से हुई क्षति को देखा जा सकता है. हालांकि फिर भी निश्चित रूप से ये नहीं कहा जा सकता कि इमारत को हमले से ही नुक़सान पहुंचा होगा.

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