इस्माइल हनिया इसराइल से जंग के बावजूद खुलकर क्यों घूमते थे

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- Author, रुश्दी अबुअलूफ़ और मैट मर्फ़ी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
हमास के शीर्ष अधिकारियों ने बीबीसी को बताया है कि अपने राजनीतिक नेता इस्माइल हनिया की हत्या से फलस्तीनी हथियारबंद समूह को झटका लगा है.
हमास का कहना है कि 62 वर्षीय हनिया बुधवार सुबह ईरान में हुए इसराइली हमले में मारे गए.
हनिया को पूरे हमास समूह का नेता माना जाता था. वो 1980 के दशक से ही इसके एक प्रमुख सदस्य रहे थे.
अपना पॉलिटिकल ब्यूरो क़तर में होने से हनिया के नेतृत्व में हमास, क्षेत्र की तमाम सरकारों तक अपनी पहुंच रखता था.
ईरान और पूरे मध्य-पूर्व में हमास के प्रॉक्सी गुटों के साथ तालमेल का ज़िम्मा भी हनिया का ही था.
इसराइली सुरक्षाबल कई महीनों से उनकी तलाश में थे. बीबीसी को पता चला है कि हनिया की हिफ़ाज़त करने वाले दस्ते ने उनके प्रस्तावित लेबनान दौरे का सुरक्षा वजहों से विरोध भी किया था.

इस्माइल हनिया की भूमिका
हमास के मिलिट्री ऑपरेशन में हनिया की अधिक भूमिका नहीं होती थी.
यही वजह है कि वो अपने अन्य साथियों की तुलना में ज्यादा खुलकर घूमते थे. बीते साल अक्तूबर में इसराइल में हमास के हमले के बाद हनिया के तीन दौरे हो चुके थे.
हनिया कतर में रहते थे और सीज़फायर को लेकर हो रही बातचीतों में उनकी अहम भूमिका रहती थी.
हनिया के उत्तराधिकारी के बारे में, उनकी मौत से काफ़ी पहले से ही सवाल उठ रहे थे.
हमास का संविधान अपने किसी भी पॉलिटिकल ब्यूरो चीफ़ को दो कार्यकाल से अधिक पद पर रहने की इजाज़त नहीं देता है. इस हिसाब से नए उम्मीदवार को साल 2025 में चुना जाना था.
लेकिन हनिया की मौत की वजह से हमास के भीतर प्रतिस्पर्धी धड़ों में अंदरुनी लड़ाई तेज़ हो सकती है.
अरब जगत के राजनयिकों की नज़र में हनिया, हमास के अन्य शीर्ष नेताओं की तुलना में अधिक व्यावहारिक व्यक्ति थे. यही वजह है कि हमास के मोहम्मद दीफ़ और अन्य नेता के उग्र रुख़ के विपरीत हनिया अपने समूह का क्षेत्रीय सरकारों के साथ राजनीतिक तालमेल बिठाने में सफल रहे थे.
इसराइल ने इसी महीने ये दावा किया था कि उसने मोहम्मद दीफ़ को ग़ज़ा में हवाई हमलों का निशाना बनाया है. लेकिन उनकी मौत की पुष्टि नहीं हुई है.
हमास के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया, “हमास एक विचार है, हमास एक विचारधारा है. उसके नेता की मौत से हमास में कोई बदलाव नहीं होगा, हमास हथियार नहीं डालेगा या और कोई समझौता नहीं करेगा.”
इससे संकेत मिलता है कि कुछ नेता हमास के भीतर तनाव होने की बात को ख़ारिज़ करने की कोशिश कर रहे हैं.
लेकिन सच तो ये है कि हनिया का उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया लंबी और उथल-पुथल भरी हो सकती है.

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आगे की राह
अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के निदेशक बिल बर्न्स ने हाल ही में कहा था कि हमास के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच तनाव उभरा है.
ये नेता समूह के नेतृत्व से ये कहते रहे हैं कि बातचीत में अधिक लचीलापन दिखाना चाहिए और बंधकों के बदले संघर्ष विराम के समझौते को मान लेना चाहिए.
लेकिन हनिया की मौत से उपजे आक्रोश और जनवरी में उनके सहायक सालेह अल-अरौरी की हत्या की वजह से कट्टर धड़ा मुखर हो सकता है.
साल 2023 में हमास के एक अधिकारी ने याह्या सिनवार और अल-अरौरी को हनिया के संभावित उत्तराधिकारी माना था.
बुधवार को हमास के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि आने वाले दिनों में तीन संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने आ सकते हैं.
इनमें सबसे ज्यादा संभावित उम्मीदवार याह्या सिनवार हैं, जो ग़ज़ा पट्टी में हमास के प्रमुख हैं.
माना जाता है कि बीते साल सात अक्तूबर को इसराइल में जो हमला किया गया था, उसकी योजना याह्या सिनवार ने ही बनाई थी.
उस हमले में इसराइल के 1200 लोग मारे गए थे, जिसके बाद इसराइली बलों ने ग़ज़ा में अपना ऑपरेशन शुरू किया था.
इसराइल के साथ मौजूदा संघर्ष की दिशा-दिशा तय करने में याह्या सिनवार की अहम भूमिका होगी.
माना जाता है कि वे ग़ज़ा में हमास के किसी भूमिगत ठिकाने में छिपे हुए हैं.

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इस्माइल हनिया के बारे में जानिए
इस्माइल हनिया हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो के प्रमुख थे. वे फ़लस्तीनी प्राधिकरण की दसवीं सरकार के प्रधानमंत्री थे.
हनिया का उपनाम अबू-अल-अब्द है. उनका जन्म फलस्तीनी शरणार्थी शिविर में हुआ था.
इसराइल ने हनिया को 1989 में तीन साल के लिए क़ैद कर लिया था. इसके बाद उन्हें हमास के कई नेताओं के साथ मार्ज-अल-ज़ुहुर निर्वासित कर दिया गया था. यह इसराइल और लेबनान के बीच एक नो-मेंस लैंड हैं. वहां वे एक साल तक रहे थे.
निर्वासन पूरा होने के बाद हनिया ग़ज़ा लौट आए. उन्हें 1997 में हमास आंदोलन के आध्यात्मिक नेता शेख़ अहमद यासीन के कार्यालय का प्रमुख नियुक्त किया गया. इससे उनकी हैसियत बढ़ गई.
हमास ने 16 फ़रवरी 2006 में हनिया को फ़लस्तीनी प्राधिकरण का प्रधानमंत्री नामित किया था.
उन्हें उसी साल 20 फ़रवरी को नियुक्त भी कर दिया गया था. लेकिन एक साल बाद ही फ़लस्तीनी नेशनल अथॉरिटी के प्रमुख महमूद अब्बास ने उन्हें उनके पद से बर्खास्त कर दिया.
ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इज़-अल-दीन अल-क़ासम ब्रिगेड ने ग़ज़ा पट्टी पर कब्जा कर लिया था. उसने अब्बास के फतह आंदोलन के प्रतिनिधियों को निकाल दिया था. एक हफ्ते तक चली लड़ाई में कई लोग मारे गए थे.
हनिया ने अपनी बर्खास्तगी को असंवैधानिक बताते हुए ख़ारिज कर दिया था.
उनका कहना था कि उनकी सरकार अपने कर्तव्यों को जारी रखेगी और फ़लस्तीनी लोगों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को नहीं छोड़ेगी.
हनिया को छह मई 2017 को हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो का प्रमुख चुना गया था. अमेरिका के विदेश विभाग ने 2018 में हनिया को आतंकवादी घोषित किया था.















