हिज़बुल्लाह और इसराइल के बीच क्या छिड़ेगी सीधी जंग

अक्तूबर में ग़ज़ा जंग शुरू होने के बाद ये सीमापार सबसे भयानक हमला है

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    • Author, मार्क लॉवेन
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, यरूशलम

इसराइल की सीमा से 50 किलोमीटर दूर लेबनान में हैफ़ा विश्वविद्यालय में लोग कुछ भी जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं.

शनिवार को इसराइल के क़ब्ज़े वाले गोलना हाइट्स में एक फ़ुटबॉल के मैदान में रॉकेट गिरने के बाद 12 बच्चों और किशोरों की मौत हुई. इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की कि 30 मंज़िला इमारत की पांचवीं मंज़िल से ऊपर मौजूद सभी स्टाफ़ अब घर से काम करेगा.

अब ये डर तेज़ी से बढ़ रहा है कि वे लेबनान के चरमपंथी समूह हिज़बुल्लाह के साथ इसराइल की जंग के बीच में है.

विश्वविद्यालय के स्टाफ़ की एक सदस्य इश्तर परपरा ने कहा, “2006 में हिज़बुल्लाह के साथ आख़िरी जंग में उनके हथियार हैफ़ा तक पहुंचे थे.”

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उन्होंने कहा, “यह बहुत ख़तरनाक लम्हा है. अभिभावक किंडरगार्टन्स की निगरानी के लिए पुलिस और गार्ड्स की मदद कर रहे हैं. मैं भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बच रही हूं. हम जंग नहीं चाहते हैं लेकिन हिज़बुल्लाह इसराइल और यहूदी लोगों को ख़त्म करना चाहता है, तो क्या हम ख़ुद को बचाए बिना उन्हें ये करने दें?”

आठ अक्तूबर के बाद से इसराइल और लेबनान के बीच सीमापार गोलीबारी तेज़ी से बढ़ी है. हमास के इसराइल पर हमले के एक दिन बाद से हिज़बुल्लाह ने इसराइल की ओर रॉकेट और गोले दागे हैं. दोनों ही समूह इसराइली राष्ट्र को तबाह करने का मक़सद रखते हैं.

हिज़बुल्लाह लगातार उत्तरी इसराइल और गोलान हाइट्स पर हमले करता है. इसराइल ने सीरिया से 1967 में इस इलाक़े को छीन लिया था और 1981 से उस पर उसका क़ब्ज़ा है. शनिवार को रॉकेट हमले के बाद इसराइल ने दक्षिणी लेबनान और उसके आगे के इलाक़ों पर हवाई हमले किए थे और मिसाइलें दाग़ी थीं.

अक्तूबर के बाद से लेबनान में 450 लोगों की मौत हुई है जिसमें 100 आम लोग हैं. वहीं इसराइल का कहना है कि उसके 23 नागरिकों और 17 जवानों की मौत हुई है.

अब तक हुईं झड़पें अपेक्षाकृत नियंत्रित रही हैं, जिससे पता चलता है कि दोनों पक्ष आमने-सामने टकराव से बचना चाहते थे.

'सिर देकर चुकानी होगी' क़ीमत

गोलान हाइट्स पर हुए हमले में 12 बच्चों और किशोरों की मौत हुई

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लेकिन अब सवाल ये है कि शनिवार की त्रासदी के बात इसराइल कहां तक जाता है. अक्तूबर में छिड़ी जंग के बाद शनिवार को इसराइली सरहद के पार हुआ ये सबसे बड़ा हमला था.

छोटे सफेद ताबूत में ले जाए जा रहे मृतकों को सड़कों के किनारे हाथों में फूल लिए खड़े हज़ारों लोगों ने आख़िरी बार अलविदा कहा. हिज़बुल्लाह ने कहा है कि जिस रॉकेट से इनकी मौत हुई है वो उसने नहीं चलाया है. लेकिन इसराइल का कहना है कि हिज़बुल्लाह का दावा झूठा है.

रॉकेट हमले के बाद लेबनान के चरमपंथियों ने अपने कई ठिकाने खाली कर दिए थे. उन्हें अंदेशा था कि इसराइल कार्रवाई कर सकता है.

इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपने अमेरिका दौरे से वक्त से पहले लौट आए हैं. और इसराइल पहुँच कर उन्होंने कैबिनेट की मीटिंग की अध्यक्षता की है.

बिन्यामिन नेतन्याहू ने वादा किया है कि हिज़बुल्लाह को इस हमले की ऐसी क़ीमत चुकानी पड़ेगी जो अब तक उसने कभी नहीं चुकाई है.

देश के विदेश मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा है कि हिज़बुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह को इसकी क़ीमत अपना 'सिर देकर चुकानी होगी.'

धुर दक्षिणपंथी वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोतरिच ने चेतावनी दी है कि इसराइल हिज़बुल्लाह के विरुद्ध युद्ध की कगार पर है.

जोखिम भरा लम्हा

नेतन्याहू

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इमेज कैप्शन, नेतन्याहू के आलोचक कह रहे हैं कि वे ग़ज़ा की जंग को और लंबा खींचना चाहते हैं

लेकिन इसराइल जानता है कि हिज़बुल्लाह के साथ किसी भी जंग की क़ीमत दोनों पक्षों को चुकानी होगी.

हिज़बुल्लाह पूरे मध्य पूर्व में सबसे ताक़तवर हथियारबंद समूह है. उनके पास 150,000 रॉकेट और मिसाइलें हैं. ये क्षेत्र में ईरान का सबसे अहम प्रॉक्सी है. अगर इसराइल ने इस गुट पर हमला किया तो ईरान में इसमें शामिल हो सकता है.

ईरान ने इसराइल को सीधी चेतावनी दी है कि लेबनान में किसी भी इसराइली एडवेंचर के अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं.

इसराइली अभी भी ग़ज़ा में व्यस्त है इसलिए एक और मिलिट्री फ़्रंट खोलना इसराइल के हित में नहीं लगता है

दूसरी और लेबनान से सटी इसराइली सीमा पर रहने वाले 60,000 लोग बीते कुछ महीनों में विस्थापित हो चुके हैं.

इनमें से अधिकतर की मांग है कि इसराइल उनके विस्थापन के कारण का समाधान निकाले. यानी इसराइल हिज़बुल्लाह के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे.

इसराइल में घटती अपनी लोकप्रियता से जूझते नेतन्याहू, अपने सियासी अस्तित्व को बचाने के लिए जो कर सकते हैं वो कर रहे हैं.

नेतन्याहू के आलोचक कह रहे हैं कि वे ग़ज़ा की जंग को और लंबा खींचना चाहते हैं. इसके लिए वो हमास के सामने युद्धबंदी के बेहद कड़ी मांगें रख रहे हैं. उन्हें मालूम है कि जैसे ही जंग थमेगी इसराइल में चुनाव करवाने पड़ेंगे और उसके बाद शायद उनका सियासी करियर ख़त्म हो जाए.

उन्हें डर है कि धुर-दक्षिणपंथी मंत्रियों के कारण नेतन्याहू काफ़ी दबाव में हैं और उनकी देश पर उनकी पकड़ भी कमज़ोर पड़ रही है. इस वजह से शायद वे अब लेबनान की सरहद पर एक और मोर्चा खोल दें ताकि घरेलू सियासत में अपना हित साधने की कोशिश की जा सके.

ये एक जोखिम भरा लम्हा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों पक्षों से संयम बरतने की गुज़ारिश की जा रही है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या गोलान हाइट्स का रॉकेट एक बार इस क्षेत्र की आग को भड़का देगा?

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