महुआ मोइत्रा और निशिकांत दुबे में बार-बार क्यों होती है तकरार?

निशिकांत दुबे

इमेज स्रोत, ANI

    • Author, दीपक मंडल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और महुआ मोइत्रा एक बार फिर आमने-सामने हैं.

झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पैसे और गिफ़्ट लेकर संसद में सवाल पूछती हैं.

दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को चिट्ठी लिख कर महुआ मोइत्रा को सदन से निलंबित करने और उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की है.

उन्होंने लिखा है कि मोहुआ मोइत्रा ने बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से ‘कैश’ और ‘गिफ़्ट’ लेकर संसद में सवाल पूछे हैं.

दुबे के इन आरोपों के बाद महुआ मित्रा ने उन पर तंज़ करते हुए पलटवार किया है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है,''मैं गलत तरीके से हासिल पैसे और गिफ़्ट का इस्तेमाल कॉलेज/यूनिवर्सिटी खरीदने के लिए कर रही हूं, जहां से 'डिग्री दुबे' आखिरकार असली डिग्री खरीद सकते हैं. पहले लोकसभा स्पीकर गलत शपथपत्र दाखिल करने वाले की जांच पूरी करें और फिर मेरे ख़िलाफ़ जांच कमेटी बिठाएं.''

लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी में दुबे ने महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना करने का आरोप लगाया है. और आईपीसी की धारा 120-ए के तहत आपराधिक मुकदमा चलाने और उन्हें सदन से निलंबित करने की मांग की है.

महुआ मोइत्रा

क्या हैं निशिकांत दुबे के आरोप?

निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखी चिट्ठी में वकील जय अनंत देदरई की रिसर्च का हवाला दिया है.

उन्होंने इस रिसर्च का हवाला देते हुए लिखा है कि महुआ मोइत्रा ने दिग्गज कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से ‘कैश’ और ‘गिफ़्ट’ लेकर संसद में सवाल पूछे हैं.

इसमें कहा गया है कि महुआ मोइत्रा ने हाल में 61 सवालों की सूची लिस्ट कराई थी. लेकिन इनमें से 50 सवाल सिर्फ दर्शन हीरानंदानी के बिजनेस हितों के संरक्षण और उन्हें बढ़ावा देने से जुड़े थे. ये सवाल अदानी ग्रुप को लेकर पूछे गए थे.

हीरानंदानी ग्रुप अदानी ग्रुप का प्रतिस्पर्द्धी है. इसने कई बिजनेस सौदों में अदानी ग्रुप की प्रतिस्पर्द्धा में बोली लगाई है.

कौन हैं दर्शन हीरानंदानी?

निशिकांत दुबे

हीरानंदानी ग्रुप ने निशिकांत दुबे के आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि वो कारोबार पर ध्यान देते हैं. उनका राजनीति के कारोबार से कोई लेना-देना नहीं है.

हीरानंदानी ग्रुप ने कहा है कि उसने हमेशा देशहित में सरकार के साथ मिल कर काम किया है और आगे भी ऐसा करता रहेगा.

निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा पर जिन उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी के लिए सवाल पूछने के आरोप लगाए हैं वो रियल एस्टेट सेक्टर की जानी-मानी हीरानंदानी ग्रुप के सीईओ हैं.

हीरानंदानी ग्रुप की स्थापना उनके पिता निरंजन हीरानंदानी और चाचा सुरेंद्र हीरानंदानी ने की थी.

ये ग्रुप देश भर में कई रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. ये ग्रुप आईटी पार्क, कॉमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट विकसित कर रहा है.

पहले भी हो चुकी है दुबे और मोइत्रा में तकरार

दर्शन हीरानंदानी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, हीरानंदानी ग्रुप के सीईओ दर्शन हीरानंदानी
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

इस साल मानहानि के एक मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म किए जाने के सवाल पर निशिकांत दुबे और महुआ मोइत्रा के बीच काफी तीखा टकराव देखने को मिला था.

निशिकांत दुबे ने संसद में राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म करने की मांग जोर-शोर से उठाई थी.

राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में दो साल की सज़ा सुनाई गई थी. उसके बाद उनकी संसद सदस्यता भी समाप्त कर दी गई.

इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म करने का एलान करते हुए नोेटिफिकेशन जारी किया था. कांग्रेस पार्टी ने इस पर सवाल उठाए थे.

इस पर महुआ मोइत्रा ने लोकसभा सचिवालय पर सवाल उठाए थे.

महुआ मोइत्रा ने इस मामले में निशिकांत दुबे पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया था, "शपथपत्र में झूठ बोलना और झूठे दस्तावेज़ पेश करना एक अपराध है, इंतज़ार रहेगा कि इसपर कितनी ज़ल्दी कार्रवाई होती है, या फिर अलग-अलग लोगों के लिए इसका अलग-अलग पैमाना है.''

महुआ मोइत्रा का कहना था कि निशिकांत दुबे ने उम्र और अपनी डिग्रियों के बारे में झूठी जानकारी दी है.

उन्होंने निशिकांत दुबे के हलफनामे का ज़िक्र करते हुए एक्स पर लिखा था,''दस्तावेज़ों के मुताबिक निशिकांत दुबे ने 10 साल की उम्र में मैट्रिक पास कर ली थी. वो जीनियस हैं और हम सब ग़रीब नगरवधुएं, उनके इस कमाल को केवल देख ही सकते हैं."

 निशिकांत दुबे

इमेज स्रोत, NISHIKANT DUBEY

महुआ मोइत्रा ने मांग की थी कि निशिकांत दुबे ने प्रताप यूनिवर्सिटी से सांसद रहते हुए कैसे पीएचडी की इसकी जाँच होनी चाहिए. इसके लिए यूनिवर्सिटी के रजिस्टर और पार्लियामेंट के रजिस्टर में उनकी हाज़िरी की जाँच होनी चाहिए.

जबकि निशिकांत दुबे का कहना था कि इस मामले पर हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग तक का फ़ैसला उनके पक्ष में आ चुका है.

निशिकांत दुबे का कहना था कि उनके वोटर कार्ड में जो उम्र दर्ज है, चुनावी हलफ़नामे में उसी उम्र का ज़िक्र करना होता है.

महुआ मोइत्रा ने अपने ट्वीट में जिस नगरवधू शब्द का ज़िक्र किया था, उसका इस्तेमाल निशिकांत ने मार्च 2023 के एक ट्वीट में किया था.निशिकांत दुबे के इस ट्वीट पर काफ़ी विवाद भी हुआ था.

दरअसल दोनों की रंजिश पुरानी रही है. 28 जुलाई 2021 को आईटी मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थायी समिति की एक बैठक में निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि महुआ मोइत्रा ने उनको 'बिहारी गुंडा' कहा था.

दुबे ने बीजेपी उम्मीदवारों को लेकर भी दिया था विवादित बयान

महुआ मोइत्रा

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, महुआ मोइत्रा

निशिकांत दुबे ने 2019 में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में विवादित बयान देकर सनसनी फैला दी थी.

उस समय एक चुनावी रैली में उन्होंने भाषण देते हुए कहा था कि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार चाहे चोर या डकैत हो उन्हें ही चुनें.

झारखंड में अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा था,''जिसे भी भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार बना दे, विकलांग हो, चोर हो,डकैत हो, बदमाश हो, हमें उसका समर्थन करना चाहिए. हमें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व, अमित शाह, पीएम मोदी जी, रघुबर दास पर भरोसा करना चाहिए कि वे जो भी चुनाव करेंगे सही करेंगे.''

सोनिया और राहुल पर तंज

इस साल अगस्त महीने में संसद में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान निशिकांत कांत दुबे ने राहुल गांधी पर तंज करते हुए कहा था,''आप कभी सावरकर हो भी नहीं सकते जिंदगी में... 28 साल उस आदमी ने जेल में गुजारे हैं. कभी सावरकर नहीं हो सकते.

इसके बाद उन्होंने कहा कि ये जो ‘इंडिया’ बना है न, यहां कुछ सांसद ही फुल फॉर्म बता पाएंगे. लेकिन ये 'इंडिया-इंडिया' की बात कर रहे हैं.

दुबे ने उस दौरान वहां मौजूद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी तंज कसा था. उन्होंने कहा था,'' अविश्वास प्रस्ताव किसलिए आया? यहां सोनिया जी बैठी हुई हैं. सोनिया जी का मैं बड़ा सम्मान करता हूं. सर, उनकी पार्टी की और उनकी दो मन:स्थिति है. क्या-क्या करना चाहिए भारतीय नारी को, उसका पूरा पालन कर रही हैं. उन्हें दो काम करना है. बेटे को सेट करना है और दामाद को भेंट करना.''

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे पर भी निशाना

निशिकांत दुबे

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, निशिकांत दुबे संसद में बहस करते हुए

2022 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान निशिकांत दुबे ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर निशाना साधा था. दुबे ने कहा था उनके नाना कांग्रेसी थे और लगभग पांच साल तक जेल में भी रहे.

दुबे ने कहा था,"खड़गे साहब की पार्टी सबको कुत्ता ही समझती है. मेरे नाना लगभग 5 साल तक जेल में रहे, वो कांग्रेस में थे. जिसे कुछ पता ही नहीं है, वो ऐसी बातें बोलते हैं. कांग्रेस ने आज तक सबको कुत्ता ही समझा है."

उन्होंने उस दौरान खड़गे पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा था,''आजादी की लड़ाई में कांग्रेस के कई नेताओं ने अपनी जान दी, लेकिन भाजपा वालों के घर से आजादी की लड़ाई में एक कुत्ता भी नहीं मरा.''

दानिश अली के मामले में भी लिखी थी लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी

हाल में बीएसपी सांसद दानिश अली के ख़िलाफ़ बीजेपी सांसद रमेश विधूड़ी के अपमानजनक बयानों से जुड़े विवाद पर अपनी टिप्पणी की थी.

दुबे ने कहा था कि पहले दानिश अली ने अपशब्दों का इस्तेमाल किया था. उनका कहना था दानिश अली ने ''नीच को नीच नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे.'' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था.

निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिख कर चर्चा के दौरान विभिन्न सदस्यों के बयानों बयानों की जांच करने के लिए एक जांच समिति बनाने की मांग की थी.

क्या था 2005 का पैसे लेकर सवाल पूछने का मामला ?

मल्लिकार्जुन खड़गे

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, मल्लिकार्जुन खड़गे

ये पहली बार नहीं है जब किसी सांसद पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने का आरोप लगाया गया है. 2005 में भी ऐसे आरोप लगे थे लेकिन तब ये आरोप किसी सांसद ने अपने साथी सांसद पर नहीं लगाए थे.

दरअसल 2005 में न्यूज वेबसाइट कोबरा पोस्ट और एक निजी न्यूज़ चैनल ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर संसद में पैसे लेकर सवाल करने का भंडाफोड़ किया था.

12 दिसंबर 2005 को स्टिंग का प्रसारण किया गया था. इसमें दिखाया कि 11 सांसद संसद में सवाल करने का वादा कर पैसे ले रहे हैं. इन 11 सांसदों में छह बीजेपी के थे. तीन बहुजन समाज पार्टी के एक-एक राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के थे.

लोकसभा ने सवाल करने के लिए पैसे ले रहे अपने दस सांसदों को बर्खास्त कर दिया था. इन सांसदों में एक सांसद राज्यसभा के थे. उन्हें भी बर्खास्त किया गया.

जिस समय ये मामला सामने आया उस समय सभी पार्टियों ने सांसदों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी. लेकिन जब कार्रवाई हुई तो बीजेपी ने वोटिंग का ये कह कर बहिष्कार किया था को ये ‘कंगारू कोर्ट’ का फैसला है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)