दानिश अली ने कहा- बीजेपी ने की है मेरी 'ज़बानी लिंचिंग'

- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय जनता पार्टी के सांसद रमेश बिधूड़ी की संसद में आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश के अमरोहा से बीएसपी सांसद कुंवर दानिश अली चर्चा में हैं.
रमेश बिधूड़ी ने संसद में चर्चा के दौरान दानिश अली का नाम लिए बिना उन पर अमर्यादित टिप्पणियाँ की थीं.
उन्होंने सदन के बाहर दानिश अली को देख लेने की धमकी भी दी थी.
इन टिप्पणियों के बाद मीडिया के सामने आए कुंवर दानिश अली भावुक हो गए थे.
वहीं बीजेपी की तरफ़ से पलटवार करते हुए सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि दानिश अली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अभद्र टिप्पणी की थी जिसके जवाब में बिधूड़ी ने ऐसी प्रतिक्रिया दी.
इस मामले में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खेद जताया था, तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने रमेश बिधूड़ी की आपत्तिजनक भाषा को रिकॉर्ड से हटा दिया था.
दानिश अली ने भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर रमेश बिधूड़ी पर कार्रवाई की मांग की है.
बीबीसी ने इस पूरे विवाद पर दानिश अली से बात की.

राहुल गांधी दानिश अली से क्या बोले?

इमेज स्रोत, X/RAHUL GANDHI
दानिश अली का कहना है कि भाजपा ने उनकी वर्बल लिंचिंग की है और उनके साथ जो व्यवहार हुआ है, वो बताता है कि देश में इस समय मुसलमानों की हालत कैसी है.
इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शनिवार को अचानक दानिश अली से मिलने पहुँचे थे. राहुल गांधी ने उन्हें गले लगाते हुए तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं.
दानिश अली बताते हैं कि राहुल गांधी ने ‘उन्हें भरोसा दिया है कि वो उनके साथ हैं.’
हालाँकि बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने इस पूरे घटनाक्रम पर सिर्फ़ एक ट्वीट के अलावा और कुछ नहीं कहा है.
क्या मायावती ने उन्हें फ़ोन किया या कोई बात की?
इस सवाल पर दानिश अली कहते हैं, “वो एक ट्वीट कर चुकी हैं और ये पर्याप्त है. उन्होंने देश को बता दिया है कि इस मुद्दे पर वो क्या सोचती हैं.”
दानिश अली अपने आप को बसपा का समर्पित सिपाही बताते हैं और कांग्रेस के साथ बढ़ती क़रीबी के सवाल पर कहते हैं, “मुझसे मिलने सिर्फ़ राहुल गांधी ही नहीं आए हैं बल्कि अन्य दलों के भी नेता आए हैं. मैं बसपा का समर्पित सिपाही हूँ.”
दानिश कहते हैं, “देश भर से लोगों के मैसेज मेरे पास आए हैं, लोग मिलने आ रहे हैं, कई राजनीतिक दलों के लोग मिलने आए हैं. पूरे देश को इस घटना का दुख है.”

मीडिया के सामने भावुक हुए दानिश अली
जब ये वाकया हुआ, तब मीडिया के सामने दानिश अली भावुक नज़र आए थे.
भावुक होने के सवाल पर वो कहते हैं, “जो उस दिन हुआ वो सिर्फ़ दानिश अली, या दानिश अली के समाज के ख़िलाफ़ ही नहीं बल्कि वो इस देश के लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हुआ. हमारे संविधान के निर्माताओं ने कभी ये सोचा नहीं होगा कि सदन के भीतर ऐसा हो सकता है. ये वर्बल लिंचिंग से कम नहीं है.”
इस घटनाक्रम को भारत के हालात से जोड़ते हुए वो कहते हैं, “मेरे समुदाय के लोगों के साथ, इस देश के वंचित समाज के लोगों के साथ रोज़ ये चौराहे पर हो रहा है. अमृतकाल में लोकतंत्र के मंदिर में भी ये हो गया. जो उस दिन हुआ किसी भी तरह से वर्बल लिंचिंग से कम नहीं है, मुझसे कहा गया कि बाहर निकलो हम तुम्हें देखेंगे.”
“संसद देश का प्रतिनिधित्व करती है, यहाँ देश की समस्याओं पर चर्चा होती है. देश की क्या सोच है, ये संसद में झलकता है. भाजपा एक समुदाय के बारे में क्या सोचती है, उसके प्रतिनिधि ने संसद के पटल पर ये बता दिया है. देश के गली मोहल्लों में रोज़ ये देखने को मिलता है, अब संसद में ये हो रहा है.”
रमेश बिधूड़ी से अपने संबंधों के सवाल पर दानिश अली कहते हैं, “जिस तरह दूसरे सांसदों से व्यवहार रहता है, वैसा ही रमेश बिधूड़ी के साथ है. मेरी किसी मुद्दे पर उनसे कभी कोई राजनीतिक बात नहीं हुई. मैं एक सांसद की गरिमा को अपनी ज़ुबान से नहीं गिराना चाहता, मैं ये नहीं कहना चाहता कि वो इस लायक नहीं है कि मैं उनके साथ कोई राजनीतिक चर्चा करूं.”
दानिश अली मानते हैं कि उन पर की गई टिप्पणियों से बहुत से लोगों के मन में ग़ुस्सा भी होगा.
वो कहते हैं, “जिन लोगों के मन में ग़ुस्सा है मैंने उनसे शांत रहने की अपील की है. मैंने लोगों से कहा है कि लोकतांत्रिक तरीक़े से फासीवादियों का मुक़ाबला करना है.”

निशिकांत दुबे के आरोप पर दानिश अली ने क्या कहा?

इस पर स्पष्टीकरण देते हुए दानिश अली कहते हैं कि ये आरोप बेबुनियाद हैं और बीजेपी इस विवाद को नया मोड़ देने की कोशिश कर रही है.
दानिश अली दावा करते हैं, “जब रमेश बिधूड़ी जी भाषण दे रहे थे, तब उन्होंने प्रधानमंत्री का संदर्भ लेते हुए कहा कि मोदी की मौत…. इस तरीक़े से होगी, उन्होंने एक जानवर का नाम लिया, मैंने इसका विरोध किया. जब रमेश बिधूड़ी ये कह रहे थे तब बीजेपी के वरिष्ठ सांसद, जिनमें मोदी जी पूर्व कैबिनेट सहयोगी भी शामिल हैं, हँस रहे थे. मुझे ये टिप्पणी ख़राब लगी और मैंने इसका विरोध किया.”
दानिश अली ने कहा, “इस तरह के शब्द देश के प्रधानमंत्री के बारे में बोले गए थे, मैंने विरोध किया कि इन्हें हटाया जाना चाहिए. जब मैंने विरोध किया, बीजेपी के लोग हँस रहे थे.”
दानिश अली मानते हैं कि इस घटनाक्रम का समाज पर भी असर पड़ सकता है.
वो कहते हैं, “ये घटनाक्रम बताता है कि देश में मुसलमानों की हालत क्या है. बीजेपी का समर्थन करने वाले बहुत से लोग भी इसका विरोध कर रहे हैं. बीजेपी सबका साथ, सबका विकास का मुखौटा पहने हुई है. इस घटनाक्रम से ये मुखौटा उतर गया है.”
ये विवाद कैसे ख़त्म हो सकता है, इस सवाल पर वो कहते हैं, “रमेश बिधूड़ी के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाए. ये टिप्पणी लोकतंत्र पर हमला है. सदन में विपक्ष के नेता को टिप्पणी के बाद निलंबित कर दिया गया था. बिधूड़ी पर ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?”
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