जेफ़ बेज़ोस की अमेज़न कभी घाटे में चल रही थी, फिर कैसे बनी दुनिया की सबसे बड़ी ईकॉमर्स कंपनी

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- Author, फ्रांसिस ऑगस्टिन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
साल 2000 में 'बीबीसी न्यूज़नाइट' के एक ख़ास इंटरव्यू में अमेज़न के को-फाउंडर और पूर्व सीईओ जेफ़ बेज़ोस ने बताया था, "अमेज़न कभी भारी घाटे में चल रही थी."
लेकिन उसके लगभग 25 साल बाद अमेज़न दुनिया की चंद उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल है, जिनकी वैल्युएशन दो ट्रिलियन डॉलर से भी ज़्यादा है.
8 जून, 2000 को बीबीसी के प्रजेंटर जेरेमी वाइन 'बीबीसी न्यूज़नाइट' की डेस्क पर, एक दम से लड़खड़ाते हुए ईकॉमर्स बाज़ार पर एक रिपोर्ट कर रहे थे.
उनकी टेबल पर उस रात मेहमान के तौर पर 36 साल के जेफ़ बेज़ोस मौजूद थे. उस वक़्त बेज़ोस अमेज़न डॉट कॉम के सीईओ थे.
बीबीसी के प्रमुख करेंट अफ़ेयर्स प्रोग्राम पर उस इंटरव्यू के वक़्त तक अमेज़न अपने इतिहास में एक अहम पड़ाव पर पहुंच चुका था. उस वक्त लगभग आधा साल बीतने तक डॉटकॉम बूम का एक आर्थिक बुलबुला तैयार हो चुका था जो अपने फ़टने की कग़ार पर पहुंचने लगा था.

अमेज़न के शेयरों में आ चुकी थी भारी गिरावट

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यहां तक कि अमेज़न सहित दर्जनों ऑनलाइन कंपनियां और व्यवसाय इसी डॉटकॉम के इर्द-गिर्द चक्कर काट रहे थे और इसके असर को भी महसूस करने लगे थे.
जेरेमी वाइन की रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 1999 में अमेज़न ने 1.6 बिलियन डॉलर की बिक्री की थी, लेकिन इसी साल कंपनी को 720 मिलियन डॉलर का शुद्ध नुकसान भी उठाना पड़ा था.
कंपनी के शेयरों की कीमतें भी ऊपर-नीचे हो रही थी. दिसंबर 1999 में कंपनी के शेयरों की कीमत 113 डॉलर प्रति शेयर थी, जो कि जून 2000 में 52 डॉलर प्रति शेयर तक नीचे जा चुकी थी.
कंपनी की शुरुआती और भारी सफलता के बावजूद, अमेज़न को 2000 के दशक की शुरुआत में डॉटकॉम बूम के चलते भारी नुक़सान का झटका लगा था.
वाइन ने अपना इंटरव्यू शुरू करते हुए कहा, "लोग कहते थे कि अमेजन अद्भुत है. लेकिन अब वे कहते हैं कि क्या यह हैरानी वाली बात नहीं है कि अमेज़न इतना घाटे में जा रहा है?"

जेफ़ बेज़ोस ने बेफ़िक्री से जवाब देते हुए कहा, "ठीक है, भले ही हम अभी एक नुक़सान उठाने वाली कंपनी के तौर पर जाने जाते हैं. लेकिन हम अपनी रणनीतियों को लेकर सचेत हैं और ये निवेश करने वाले वाले फ़ैसले का वक़्त है."
उस इंटरव्यू के 24 साल बाद और अमेज़न की शुरुआत के 30 साल बाद, जेरेमी वाइन को अभी भी अपने इंटरव्यू के कुछ ख़ास हिस्से याद हैं.
बेज़ोस के बारे में याद करते हुए वाइन ने इन हिस्ट्री को बताया, "मेरे पास कुछ बेहद ही कठिन सवाल थे. लेकिन बेज़ोस ने बस उनको टाल दिया. इंटरव्यू के दौरान कभी भी वे घबराए नहीं."
वाइन आगे कहते हैं, "मुझे याद है कि मैंने सोचा कि यह आदमी काफी खुशमिजाज है. उसके कदमों में बस एक स्प्रिंग थी, और मैं, पीछे मुड़कर देखता हूं, मुझे हमेशा लगता था कि वह उस समय पहले से ही जानता था कि वह पृथ्वी पर सबसे अमीर आदमी बनने जा रहा है."
अमेज़न की परिकथा

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जेफ़ बेज़ोस ने 5 जुलाई, 1994 को वाशिंगटन के बेलेव्यू में एक गैरेज में अपनी कंपनी को शुरू किया और एक साल बाद ही एक साइट भी लॉन्च कर दी.
वर्ल्ड वाइड वेब इस वक़्त तक अपने शुरुआती दौर में था. इसे उस वक़्त वेब 1.0 के तौर पर जाना जाता था.
उस समय केवल कुछ कंपनियों ने ही वेब-आधारित बिजनेस की क्षमता से रूबरू थीं.
अमेज़न की शुरुआत एक ऑनलाइन बुक सेलर के तौर पर हुई. कंपनी ने उस वक़्त ख़ुद को दुनिया के सबसे बड़े ई-बुक कलेक्शन के तौर पर प्रचारित किया.
यह ई-बुक कंपनी के नाम 'अमेज़न' नदी जितना ही विशाल था.
कंपनी ने किताबों पर दोगुना फोकस किया ताकि वह तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स बाजार में एक बड़ी कंपनी के तौर पर सामने आ सके.
अमेज़न डॉटकॉम बूम की लहर पर सवार था, जो 1990 के दशक के आख़िरी दौर में अमेरिका के टेक्नोलॉजी क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा था.
यह वृद्धि कई सारे बाज़ारों में हो रहे निवेश के चलते आई थी. इसी वृद्धि ने इंटरनेट आधारित कंपनियों की एक नई पीढ़ी को भी जन्म दिया था.
जब अमेज़न बना दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन बिक्री प्लेटफ़ॉर्म

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साइट के लॉन्च होने के चार साल बाद, अमेज़न दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन बिक्री प्लेटफ़ॉर्म बन गया.
अमेज़न ने अपने प्लेटफॉर्म पर इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने और डिवाइस जैसे दूसरे सामानों को भी बेचना शुरू कर दिया.
साल 2000 के आख़िर तक अमेज़न के पास लगभग एक करोड़ 70 लाख से भी ज़्यादा ग्राहक थे.
अब तक अमेज़न की मार्केट वैल्यू भी इसके आईपीओ से 50 गुना तक बढ़ चुकी थी.
जेफ़ बेज़ोस को टाइम मैगज़ीन ने 1999 का 'पर्सन ऑफ़ द ईयर' भी नामित किया था.
टाइम मैगज़ीन ने बेज़ोस को 'किंग ऑफ साइबरकॉमर्स' कहा था.
हालांकि उसके बाद के सालों में कंपनी को अपने टैक्स और कर्मचारियों के प्रति व्यवहार के चलते आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा.
इसके अलावा साल 2000 में अमेज़न की चौंका देने वाली सफलता के बावजूद कई लोग ऐसे थे जो अभी भी कंपनी को शक की निगाहों से ही देख रहे थे.
साल 2000 में न्यूज़नाइट पर अपने इंटरव्यू के दौरान बेज़ोस ने उन चुटकुलों का भी जिक्र किया जो आलोचक उनकी कंपनी को लेकर सुनाते थे.
अलोचन अमेज़न को लेकर कहते थे कि, अमेज़न डॉट कॉन और अमेज़न डॉट बॉम्ब.
अमेज़न के घाटे पर मज़ाक बनाने के लिए आलोचक इसे अमेज़न डॉट ऑर्ग कहकर भी चिढ़ाते थे.
इससे उनका मतलब था कि कंपनी फ़ायदा नहीं कमा पा रही है.
जेरेमी वाइन ने जब इंटरव्यू के दौरान कहा, "जब आपके पास 20 मिलियन ग्राहक हों तो पैसा गंवाना कोई बड़ी बात नहीं है."
तब उनकी इस टिप्पणी पर बेज़ोस भी ठहाके लगाकर हंस पड़े थे.
वाइन की इस टिप्पणी का मज़ाकिया लहज़े में ही जवाब देते हुए बेज़ोस ने कहा, "ठीक है, हमारे पास वह कौशल है."
हालांकि इसके बाद थोड़ा संयमित होते हुए बेज़ोस ने कहा, "लेकिन यहां असल में जो चल रहा है वह यह है कि हम निवेश कर रहे हैं."
पहले से ही कंपनी के विस्तार के बारे में सोच रहे थे जेफ़ बेज़ोस

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डॉटकॉम और ईकॉमर्स क्षेत्र में अस्थिरता की उथल-पुथल के बीच,बेज़ोस पहले से ही कंपनी के विस्तार के बारे में सोच रहे थे.
साल 1999 में ही अमेज़न ने दुनिया भर में क़रीब चार मिलियन वर्ग फीट तक की जगह खरीदने के लिए निवेश किया.
इसमें लंदन के ठीक बाहर यूके में कंपनी के सबसे बड़े दो मिलियन वर्ग फीट के डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर का निवेश भी शामिल था.
बेज़ोस के मुताबिक़, "जितना संभव हो सके कम लागत पर ज़्यादा से ज़्यादा सामानों को चुनने और खरीदने का विकल्प पेश करने की रणनीति से भी कंपनी को नुकसान हुआ."
बेजोस का कहना था, "साल 2000 में कंपनी का फ़ोकस अमेज़न की लगातार बढ़ती ग्राहक मांग को पूरा करना था."

लेकिन आने वाले वक़्त में बाज़ार पर अपनी पकड़ मज़बूत करने के इरादे से बेज़ोस ने बड़ी चालाकी से कंपनी के घाटे को भी अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल किया.
लेकिन अमेज़न को डॉटकॉम क्रैश से भी काफ़ी नुकसान हुआ. हालांकि कस्टमर फ़र्स्ट जैसी रणनीति से अमेज़न को सबसे ख़राब दौर से भी बचने में सहायता मिली.
जेरेमी वाइन ने 2024 में उस इंटरव्यू के बारे में बताते हुए कहा, "मुझे बस इतना याद है, जैसे ही बेज़ोस स्टूडियो से बाहर निकले मैंने उन्हें जाते हुए देखा और सोचा कि उस आदमी के लिए आगे क्या है?"
"बेज़ोस ने अभी-अभी अपनी कंपनी को सबसे बुरे दौर से बचा लिया था. डॉटकॉम बुलबुला बहुत बुरा था, और यह 2007 के पूरे बैंकिंग क्रैश से पहले का बुरा दौर था. यहां तक उस वक्त बहुतों ने तो अपनी पतलून तक खो दी थी."
अमेज़न ने किया अपनी स्थिति को और भी मज़बूत

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जेरेमी वाइन के इंटरव्यू के 24 सालों बाद, अमेज़न ने ईकॉमर्स और क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र में अपनी स्थिति और प्रभुत्व को मजबूत किया है.
न्यूज़नाइट इंटरव्यू के कई महीनों बाद, अमेज़न ने अपना मार्केटप्लेस लॉन्च किया था. इस सुविधा ने थर्ड पार्टी बिजनेस को अमेज़न पर अपने सामान बेचने की मंजूरी दी.
साल 2005 में, कंपनी ने अपने नियमित ग्राहकों के लिए अमेज़न प्राइम लॉन्च किया और 2024 में कंपनी 1 करोड़ 80 लाख उपयोगकर्ताओं के आंकड़े को पार करने जा रही है.
अपनी प्राइम सदस्यता के लिए 1 करोड़ 80 लाख उपयोगकर्ताओं को पार करने के लिए तैयार है.
अमेज़न ने 2023 में शुद्ध बिक्री राजस्व के तौर पर 574 बिलियन डॉलर कमाए हैं. इसके अलावा कंपनी ई-कॉमर्स से हटकर दूसरे बिजनेस में भी हाथ आजमा रही है.
इसमें एक फ़िल्म और टेलीविजन स्टूडियो, एक स्ट्रीमिंग सर्विस, फुल-सर्विस किराना स्टोर और एआई सहायक तकनीक भी शामिल है.
इसके साथ ही कंपनी ने ट्विच इंटरएक्टिव, होल फूड्स और ऑडिबल सहित कई कंपनियों का अधिग्रहण और निगमन भी किया है.
वाइन बेज़ोस के बारे में याद करते हुए कहते हैं, "इंटरव्यू के बाद मैंने सोचा बस इसीलिए मैं उद्यमी नहीं हूं. क्योंकि जब तक मैं किताबों का व्यवसाय शुरू करता, तब तक मैं सोचता, अच्छा, मैं यहां काफी अच्छा कर रहा हूं. हम इस पर रिटायर हो सकते हैं, मुझे बस इतना ही करना है."
वाइन आगे कहते हैं, "मैं हैरान था कि बेज़ोस ने कितनी जल्दी अमेज़न को 2.0 और 3.0 और 4.0 में बदल दिया, इस हद तक कि अब मैं अपनी किराने की चीज़ें इसी से खरीद रहा हूं. वे एक अद्भुत व्यवसायी हैं और यह विश्वसनीय बात यह है कि अमेज़न की हमारे जीवन में कितनी पहुंच है."
कोविड महामारी के दौरान बेज़ोस बने थे दुनिया के सबसे अमीर आदमी

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कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में बेज़ोस ने खुद बड़ी बढ़त हासिल की, और दुनिया के सबसे अमीर आदमी भी बन गए.
हालांकि फिलहाल अमीरों की लिस्ट में पहले पायदान पर बेज़ोस, टेस्ला के एलन मस्क और लुई वितानो के बर्नॉड अर्नाल्ट आते-जाते रहते हैं.
लेकिन अमेज़न को अभी भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
साल 2022 में अमेज़न पहली ऐसी सार्वजनिक कंपनी बनी जिसे एक ट्रिलियन डॉलर का नुक़सान सहना पड़ा.
सैलरी और बुरे वर्क कल्चर के चलते यूके के कोवेंट्री स्थिर अमेज़न के गोदाम में हड़ताल भी हो चुकी है.
वहीं, कंपनी को अमेरिका में यूनियन के ख़िलाफ़ भी संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है.
बेज़ोस ने 2021 में अमेज़न के सीईओ के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और कंपनी को अमेज़न वेब सर्विस के पूर्व सीईओ एंडी जेसी को सौंप दिया था.
तब से ही बेज़ोस ने अपना पूरा ध्यान 'पैशन प्रोजक्ट' पर लगा दिया है.
इसमें बेज़ोस का एयरोस्पेस उद्यम, ब्लू ओरिजिन और द वाशिंगटन पोस्ट शामिल है, जिसे उन्होंने 2013 में खरीदा था.
बेज़ोस ने चैरिटेबल प्रोजेक्ट पर ध्यान देने के अपने इरादे का एलान भी किया है. इसके अलावा बेज़ोस जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसे मुद्दों से लड़ने के लिए अपनी संपत्ति दान करने की योजना बना रहे हैं.
हालांकि बेज़ोस के परोपकारी कामों की भी आलोचना हो रही है. कुछ लोगों ने बेज़ोस को पाखंडी करार दिया है.
उनका इशारा अमेज़न के कथित ख़राब वर्क कल्चर और टैक्स प्रथाओं की तरफ है.
हालांकि कुछ लोग अमेज़न और बेज़ोस के बारे में क्या सोचते हैं, इस बात को नज़रअंदाज़ करना भी मुश्किल है.
लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि अमेज़न ने हमारे आर्थिक अस्तित्व के ज़्यादातर पहलुओं पर अपनी मौजूदगी दर्ज़ करा दी है.


















