पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसा ग़ज़ा, बीमारियों की ज़द में आ रहे हैं बच्चे

डिहाइड्रेशन और कुपोषण से पीड़ित यूनिस जुमा
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    • Author, जॉन डॉनिसन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

आठ महीने से जारी युद्ध के कारण नौ साल के युनिस जुमा की तबीयत इतनी ख़राब हो चुकी है कि अब उनके शरीर में चमड़ी और हड्डियां ही दिखती हैं.

दक्षिणी ग़ज़ा के खान यूनिस में स्थित एक अस्पताल के बिस्तर पर बेहोशी की हालत में पड़े युनिस जुमा की तरफ़ देखे नहीं बनता.

उनके हाथ और पैर माचिस की तीली जैसे हो गए हैं, उनके घुटने बाहर की तरफ आ रहे हैं, उनके सीने से चमड़ी इस कदर चिपक गई है कि उनका सीना अजीब तरह से नज़र आता है.

यूनिस जुमा की मां ग़निमा जुमा कहती हैं, ''मेरे बेटे की तबीयत पहले बेहतर थी, वो सामान्य था.''

''लेकिन जबसे उसे कुपोषण और डिहाइड्रेशन हुआ है, वो ऐसा हो चुका है जैसा आप देख रहे हैं.''

ग़निमा कहती हैं, ''यहां बोतल वाला पानी नहीं मिलता है. बच्चे बहुत दूर तक चलकर जाते - जब उन्हें पानी मिलता भी है तो वो हम तक पहुंचने से पहले ही दूषित हो चुका होता है.''

युनिस जुमा की मां ग़निमा जुमा
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नासेर अस्पताल के कॉरिडोर में पांच साल की तला इब्राहिम अल-जलत भी लेटी हुईं हैं.

वो उठने कोशिश तो कर रही हैं लेकिन हिल नहीं पा रहीं, उनकी आंखें घूमकर अंदर की तरफ़ धंस चुकी हैं.

तला भी कुपोषण और डिहाइड्रेशन का शिकार हो चुकी हैं.

तला के पिता इब्राहिम मुहम्मद अल-जलत अस्पताल में उनके बेड के पास उनका हाथ थामे बैठे हैं, तला की कलाई में लगी हुई ड्रिप हिले-डुले नहीं इसलिए उनके पिता स्थिर होकर बैठे हैं.

वो जानते हैं कि करीब 40 डिग्री तापमान में झुलसाने वाली गर्मी, और साफ़ पानी की कमी के कारण ही उनकी बेटी मौत के मुहाने पर आ गई है.

इब्राहिम कहते हैं कि, ''स्थिति खराब होती जा रही है.''

''हमारे टेंट में इतनी गर्मी है कि हम सोच भी नहीं सकते, और जो पानी हम पी रहे हैं वो दूषित है, क्योंकि इसी से बूढ़े और बच्चे दोनों बीमार पड़ रहे हैं.''

अपनी बीमार बेटी के साथ अस्पताल में मौजूद इब्राहिम मुहम्मद अल जलत
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घरों के तबाह हो जाने के बाद ग़ज़ा के हज़ारों लोग विस्थापन का शिकार हो चुके हैं, कैंपों में रहने को मजबूर हैं और तपती गर्मी से बचने के लिए भी कोई इंतज़ाम भी नहीं है.

चाहे साफ़ हो या गंदा, रोज़ पानी मिलना भी एक संघर्ष का काम है. पानी के वितरण केंद्र के बाहर भी लंबी लाइनें नज़र आती है.

सीवेज़ सिस्टम के बर्बाद हो जाने के बाद अब ग़ज़ा में मौजूद पानी आसानी से गंदा हो जाता है.

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नासेर अस्पताल के बच्चा विभाग के प्रमुख डॉ. अहमद अल-फ़ारी ने कहा, ''ये कोई राज़ की बात नहीं है कि आंतों में होने वाले इंफ़ेक्शन का सबसे प्रमुख कारण दूषित पानी है जो ये बच्चे पी रहे हैं.''

वो कहते हैं, ''आंतों में इंफ़ेक्शन के बाद जो पहली परेशानियां होती हैं उनमें उल्टी आना और दस्त है जिससे डिहाइड्रेशन हो जाता है.''

''दूसरी परेशानियों में हेपेटाइटिस सी या ए हैं, जो आंतों में होने वाले इंफ़ेक्शन से कतई भी कम नहीं हैं.''

डॉ. अहमद अल-फ़ारी
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मानवीय मामलों के समन्वय के लिए बने संयुक्त राष्ट्र के ऑफ़िस के मुताबिक 67% ग़ज़ा का पानी और सैनिटेशन सिस्टम, ज्यादातर वक्त खराब ही था, जो अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है.

खान यूनिस म्यूनिसिपैलिटी में बतौर वॉटर इंजीनियर काम कर रहे सलाम शरब का कहना है, ''पानी और सीवेज के नेटवर्क को फिर से स्थापित करने के लिए हमें बड़े स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की ज़रूरत है.''

''खान यूनिस में हमने 170 से 200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन खो दी है, जो पांकी की टंकियों और कुएं समेत पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है''

ग़ज़ा में टूटी हुई पाइपलाइन का हिस्सा
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इसराइली सेना का कहना है कि वो हर रोज़ ग़ज़ा पट्टी में केरेम शैलोम क्रॉसिंग से मानवीय सहायता से लदे हुए 200 ट्रक गुज़रने देते हैं.

दिक्कत ये है कि वहां पहुंचने के बाद जो एजेंसियां काम कर रही हैं वो उसे बांट नहीं रहीं.

वहीं एजेंसियों की दलील है कि लगातार हो रहे संर्घष के कारण खासतौर से दक्षिणी ग़ज़ा में रफ़ा के आसपास के इलाकों में काम करना मुश्किल है.

वो ये भी कहते हैं कि जितनी मदद आ रही है वो समुद्र में एक बूंद के बराबर है जबकि ज़रूरत बहुत ज़्यादा की है.

पानी और खाने के लिए बढ़ती ग़ज़ा के लोगों की निराशा लूटपाट के ख़तरों को भी बढ़ाती है. ऐसी भी रिपोर्ट्स हैं कि सहायता ले जा रहे ट्रकों को बंदूकों से लैस लोगों ने लूट लिया इसमें आम लोग भी शामिल थे.

पानी भरने के लिए लगी लोगों की लंबी लाइन
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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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वहीं इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के वकील ने ये आरोप लगाए हैं कि इसराइल ग़ज़ा के लोगों की भूख को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. साथ ही इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री योआव गैलंट की गिरफ़्तारी की मांग भी उठाई.

इंटरनेशनल कोर्ट में उठी इस मांग पर इसराइल बुरी तरह से भड़क उठा है.

इसराइल का कहना है कि सहायता पहुंचाने वाली एजेंसियों की तरफ से लगाए गए ग़ज़ा में भुखमरी फैलाए जाने के आरोप बेबुनियाद हैं और ये भी कहा कि वो हमास ही था जिसने युद्ध की शुरुआत की थी और फ़लस्तीनियों पर मुसीबत और लाचारी लेकर आया.

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि जुलाई महीने में ग़ज़ा के 10 लाख से ज्यादा लोग भुखमरी का शिकार हुए थे.

इसराइली मंत्री ग़ज़ा में किसी भी मानवीय संकट के होने से इंकार करते रहे हैं.

लेकिन नासेर अस्तपताल के कॉरिडोर में अपने कुपोषित बेटे को गोद में लेकर खड़ीं ग़निमा जुमा को ऐसा नहीं लगता है.

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