भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में आई अमेरिकी रिपोर्ट पर दिया ये जवाब

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिकंन

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भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता पर आई अमेरिकी रिपोर्ट को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को 'पक्षपातपूर्ण' बताया है.

दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने हाल ही में साल 2023 के लिए अपनी रिपोर्ट जारी की थी.

रिपोर्ट के बताया गया है कि साल 2023 के दौरान भारत में हेट स्पीच, धार्मिक रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के घरों और पूजास्थलों को ध्वस्त करने के मामले बढ़े हैं.

रिपोर्ट में भारत के धर्मांतरण विरोधी क़ानून को लेकर भी चिंता जताई गई है.

इस रिपोर्ट में दुनिया के क़रीब 200 देशों में धार्मिक स्थिति का आकलन किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आज की तारीख़ में करोड़ों लोग धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान नहीं कर रहे हैं.

भारत ने क्या कहा?

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर

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भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस रिपोर्ट को खारिज़ कर दिया है.

उन्होंने कहा, “पहले की तरह यह रिपोर्ट पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है. इसमें भारत के सामाजिक ताने-बाने की समझ का अभाव है और यह साफ तौर पर वोट बैंक को देखते हुए तैयार की है. इसलिए हम इसे खारिज करते हैं.”

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जायसवाल ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट में बयानों को गलत तरीके और तथ्यों को अपनी सुविधा के हिसाब से इस्तेमाल किया गया है और इन बातों का सोर्स निष्पक्ष नहीं है. साथ ही मुद्दे को एकतरफा बना रहा है.

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में भारतीय संविधान और कानूनों पर भी सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट में पहले से तैयार नैरेटिव को कुछ चुनिंदा मामलों के जरिए और मजबूत करने की कोशिश की गई है.

जायसवाल ने कहा कि यह रिपोर्ट भारतीय अदालत द्वारा दिए गए कुछ कानूनों फैसलों को भी चुनौती देते हुए दिखाई देती है.

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में उन नियमों को भी टारगेट किया गया है जो भारत में पैसे के दुरुपयोग की निगरानी करते हैं. जबकि इसे लेकर अमेरिका के पास और भी कड़े कानून और नियम हैं, लेकिन वह खुद के लिए ऐसे सुझाव नहीं देगा जो हमें दिए जा रहे हैं.

जायसवाल ने कहा कि मानवाधिकार और विविधता के प्रति सम्मान भारत और अमेरिका के बीच बातचीत का एक अहम विषय रहा है, जो आगे भी रहेगा.

उन्होंने कहा कि साल 2023 में भारत ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका में हेट क्राइम, भारतीय नागरिकों और अन्य अल्पसंख्यकों पर नस्लीय हमलों, पूजा स्थलों पर तोड़फोड़ और कानून प्रवर्तन अधिकारियों की हिंसा और दुर्व्यवहार के साथ-साथ विदेशी धरती पर उग्रवाद और आतंकवाद से जुड़े कई मामले उठाए हैं.

जायसवाल ने कहा कि इस तरह की बातचीत दूसरे देशों की राजनीति में विदेशी हस्तक्षेप का लाइसेंस नहीं बननी चाहिए.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट में बीजेपी पर आरोप

नरेंद्र मोदी

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अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर सालाना रिपोर्ट जारी करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि दुनिया भर में लोग इसकी रक्षा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में साल 2023 में भी धार्मिक स्वतंत्रता की स्थितियां लगातार ख़राब रही हैं.

इसमें कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने भेदभावपूर्ण राष्ट्रवादी नीतियों को बढ़ावा देने का काम किया, जिसने समाज में घृणा को बढ़ाने का काम किया है.

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रिपोर्ट कहती है कि मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, दलितों, यहूदियों और आदिवासियों के ख़िलाफ हो रही सांप्रदायिक हिंसा से निपटने में बीजेपी नाकाम रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में यूएपीए, एफसीआरए, सीएए, धर्मांतरण विरोधी और गोहत्या को लेकर जो क़ानून हैं, उनके चलते धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनकी वकालत करने वालों लोगों को निशाना बनाया गया है.

मीडिया को लेकर क्या कहा?

मीडिया

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रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन भी न्यूज़ आउटलेट या एनजीओ ने धार्मिक अल्पसंख्यकों को लेकर बात की है, उन पर एफसीआरए के तहत सख्त निगरानी रखी गई है.

इसमें सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च नाम की एक एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस को फ़रवरी, 2023 में रद्द करने का ज़िक्र किया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ ये एनजीओ सामाजिक, धार्मिक और जातीय स्तर पर हो रहे भेदभाव पर रिपोर्ट करने का काम करते हैं, लेकिन गृह मंत्रालय ने इसका एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया.

इसमें कहा गया है, ‘इसी तरह अधिकारियों ने न्यूजक्लिक के पत्रकारों के घर और दफ्तरों पर छापेमारी की. इसमें तीस्ता सीतलवाड़ भी शामिल हैं, जिन्होंने साल 2002 में हुए गुजरात दंगों के समय मुस्लिम विरोधी हिंसा पर रिपोर्टिंग की थी.’

'ईसाइयों पर बढ़े हमले'

ईसाइयों पर बढ़े हमले

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रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2023 में भारत में ग़ैर सरकारी संगठनों ने ईसाइयों के ख़िलाफ हिंसा की 687 घटनाओं का ज़िक्र किया, जिसमें लोगों को धर्मांतरण क़ानून के तहत हिरासत में रखा हुआ है.

इन घटनाओं के कुछ उदाहरण भी रिपोर्ट में दिए गए हैं. इसमें कहा गया है कि जनवरी महीने में छत्तीसगढ़ के अंदर एक हिंदू भीड़ ने ईसाइयों पर हमला किया और चर्च में तोड़फोड़ की, इसके अलावा भीड़ ने लोगों को हिंदू धर्म में कन्वर्ट करने की कोशिश की.

इतना ही नहीं अपना धर्म न त्यागने वाले क़रीब 30 लोगों के साथ मारपीट की गई और इसी महीने में दो ईसाइयों को अनुसूचित जाति और आदिवासी का जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में हिरासत में लिया गया और उन्हें ज़मानत नहीं दी गई.

मणिपुर हिंसा

मणिपुर

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धार्मिक स्वतंत्रता वाली इस रिपोर्ट में मणिपुर हिंसा का भी ज़िक्र है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2023 में मणिपुर राज्य में हिंसा हुई, जिसके चलते 500 से ज़्यादा चर्चों को तबाह कर दिया गया और 70 हज़ार लोगों को विस्थापित होना पड़ा.

रिपोर्ट के मुताबिक़ इस हिंसा के लिए देश के गृह मंत्री अमित शाह को बड़े पैमाने पर आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसमें यूएन के विशेषज्ञ भी शामिल थे. उनका कहना था कि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई.

इसके अलावा मणिपुर में जारी हिंसा के चलते देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट अगस्त के महीने में हिंसा की जांच के लिए आगे आया और उसने कहा कि राज्य में पुलिस स्थिति पर अपना नियंत्रण खो चुकी है.

कश्मीर का ज़िक्र

कश्मीर

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साल 2019 में केंद्र की बीजेपी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया था, जो राज्य को कुछ विशेष अधिकार देता था. साथ ही केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की सरकार ने कश्मीरी पत्रकारों, धार्मिक नेताओं और मानवाधिकारों की वकालत करने वालों को हिरासत में लेना जारी रखा है. 

रिपोर्ट में इरफ़ान मेहराज की गिरफ़्तारी का भी ज़िक्र है. रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्हें मार्च महीने में हाशिए पर खड़े लोगों पर रिपोर्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

गाय के नाम पर हत्या

मोनू मानेसर

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रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2023 में मुसलमानों और उनके धार्मिक स्थलों के ख़िलाफ़ हिंसा लगातार जारी रही है.

‘पुलिस की मौजूदगी में कई मस्जिदों को तोड़ा गया. गाय के नाम पर कथित बचावकर्ताओं ने पुलिस की मौजदूगी में मुस्लिमों को निशाना बनाया.’

रिपोर्ट के मुताबिक़ हरियाणा के मुस्लिम बहुल नूंह राज्य में हिंदुओं की शोभायात्रा के बाद जुलाई महीने में हिंसा भड़की, जिसमें हिस्सा लेना वाले तलवारें लहराते हुए मुस्लिम विरोधी नारेबाज़ी कर रहे थे.

‘इसी दौरान मस्जिद को आग के हवाले कर दिया गया, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हुई, जिसमें मोहम्मद हाफिज़ नाम के एक इमाम भी शामिल थे.’

रिपोर्ट में इस हिंसा के लिए कथित गौरक्षक मोनू मानेसर को ज़िम्मेदार बताया गया है. उन पर जनवरी महीने में कथित तौर पर गाय की तस्करी कर रहे दो मुस्लिम युवकों को मारने का आरोप है.

इसमें कहा गया है कि मोनू मानेसर को बीजेपी से समर्थन मिला है, जो सार्वजनिक तौर पर लोगों से शोभायात्रा में शामिल होने की अपील करते हैं.

रिपोर्ट में उस घटना का भी ज़िक्र है, जहां एक रेलवे गार्ड ने चलती ट्रेन में मुस्लिम लोगों की हत्या कर दी थी. इसके मुताबिक अभियुक्त ने पीड़ितों के नाम और धर्म पूछे और उसके बाद तीन लोगों की हत्या की.

निज्जर की हत्या पर क्या कहा

निज्जर

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रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेश में रह रहे अलग-अलग धार्मिक समुदाय के लोगों को भारतीय अधिकारियों के निशाना बनाने के मामलों में भी तेज़ी आई है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ सितंबर महीने में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सिख एक्टिविस्ट हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय अधिकारियों के शामिल होने का आरोप लगाया था.

इसके बाद नवंबर महीने में अमेरिका में गुरपतवंत सिंह पन्नू को मारने की भी कोशिश की गई.

इससे पहले 2021 में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाले देशों के लिए 'कंट्रीज़ ऑफ़ पर्टीकुलर कंसर्न' यानी सीपीसी की सूची जारी की थी.

धार्मिक आज़ादी का आकलन करने वाले एक अमेरिकी पैनल 'यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ़्रीडम' के इस लिस्ट में भारत का नाम शामिल करने का सुझाव दिया था लेकिन इसके बावजूद बाइडन प्रशासन ने भारत का नाम सूची में शामिल नहीं किया था.

इस सूची में पाकिस्तान, चीन, तालिबान, ईरान, रूस, सऊदी अरब, एरिट्रिया, ताज़िकिस्तान, तुर्केमेनिस्तान और बर्मा सहित 10 देशों को शामिल किया गया था.

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